खेत तालाब से बदली किसान दयाराम सौर की जिंदगी – आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई कहानी पलेरा (टीकमगढ़, मध्यप्रदेश): ग्राम चरी के किसान दयाराम सौर के पास लगभग 3.5 एकड़ कृषि भूमि है। पहले उनके खेत में पानी की भारी समस्या थी और बरसात के समय नाले के कारण मिट्टी का कटाव होता था, जिससे फसलें नष्ट हो जाती थीं और परिवार आर्थिक संकट में रहता था। दयाराम ने वाटरशेड समिति की बैठक में अपनी समस्या रखी। समिति ने एफआईपी (FIP) के तहत डीपीआर सर्वे के बाद उनके खेत में खेत तालाब निर्माण का निर्णय लिया। 20×20×3 मीटर का तालाब बनने से बरसात का पानी सुरक्षित संग्रहित होने लगा। तालाब बनने के बाद दयाराम ने मछली पालन शुरू किया और पहली बार में लगभग *80,000 रुपये* की आय प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने 3 एकड़ में गेहूं और सरसों की खेती की और तालाब के पानी से सिंचाई की, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ा। खेत तालाब ने न केवल सिंचाई का साधन दिया, बल्कि आजीविका का मजबूत माध्यम भी बना। मेड़बंदी, तालाब निर्माण और वृक्षारोपण से भूमि की उर्वरता बढ़ी। पहले परिवार को दिल्ली पलायन करना पड़ता था, अब वे गांव में रहकर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं। दयाराम ने 1 एकड़ में फल उद्यान भी लगाया है। उनके बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं और पूरा परिवार आत्मनिर्भर बन रहा है। दयाराम सौर ने नाबार्ड एवं वाटरशेड परियोजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने उनके परिवार को नई दिशा दी और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। 🚜💧🌾 खेत तालाब से बदली किसान दयाराम सौर की जिंदगी – आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई कहानी पलेरा (टीकमगढ़, मध्यप्रदेश): ग्राम चरी के किसान दयाराम सौर के पास लगभग 3.5 एकड़ कृषि भूमि है। पहले उनके खेत में पानी की भारी समस्या थी और बरसात के समय नाले के कारण मिट्टी का कटाव होता था, जिससे फसलें नष्ट हो जाती थीं और परिवार आर्थिक संकट में रहता था। दयाराम ने वाटरशेड समिति की बैठक में अपनी समस्या रखी। समिति ने एफआईपी (FIP) के तहत डीपीआर सर्वे के बाद उनके खेत में खेत तालाब निर्माण का निर्णय लिया। 20×20×3 मीटर का तालाब बनने से बरसात का पानी सुरक्षित संग्रहित होने लगा। तालाब बनने के बाद दयाराम ने मछली पालन शुरू किया और पहली बार में लगभग *80,000 रुपये* की आय प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने 3 एकड़ में गेहूं और सरसों की खेती की और तालाब के पानी से सिंचाई की, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ा। खेत तालाब ने न केवल सिंचाई का साधन दिया, बल्कि आजीविका का मजबूत माध्यम भी बना। मेड़बंदी, तालाब निर्माण और वृक्षारोपण से भूमि की उर्वरता बढ़ी। पहले परिवार को दिल्ली पलायन करना पड़ता था, अब वे गांव में रहकर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं। दयाराम ने 1 एकड़ में फल उद्यान भी लगाया है। उनके बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं और पूरा परिवार आत्मनिर्भर बन रहा है। दयाराम सौर ने नाबार्ड एवं वाटरशेड परियोजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने उनके परिवार को नई दिशा दी और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। 🚜💧🌾
खेत तालाब से बदली किसान दयाराम सौर की जिंदगी – आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई कहानी पलेरा (टीकमगढ़, मध्यप्रदेश): ग्राम चरी के किसान दयाराम सौर के पास लगभग 3.5 एकड़ कृषि भूमि है। पहले उनके खेत में पानी की भारी समस्या थी और बरसात के समय नाले के कारण मिट्टी का कटाव होता था, जिससे फसलें नष्ट हो जाती थीं और परिवार आर्थिक संकट में रहता था। दयाराम ने वाटरशेड समिति की बैठक में अपनी समस्या रखी। समिति ने एफआईपी (FIP) के तहत डीपीआर सर्वे के बाद उनके खेत में खेत तालाब निर्माण का निर्णय लिया। 20×20×3 मीटर का तालाब बनने से बरसात का पानी सुरक्षित संग्रहित होने लगा। तालाब बनने के बाद दयाराम ने मछली पालन शुरू किया और पहली बार में लगभग *80,000 रुपये* की आय प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने 3 एकड़ में गेहूं और सरसों की खेती की और तालाब के पानी से सिंचाई की, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ा। खेत तालाब ने न केवल सिंचाई का साधन दिया, बल्कि आजीविका का मजबूत माध्यम भी बना। मेड़बंदी, तालाब निर्माण और वृक्षारोपण से भूमि की उर्वरता बढ़ी। पहले परिवार को दिल्ली पलायन करना पड़ता था, अब वे गांव में रहकर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं। दयाराम ने 1 एकड़ में फल उद्यान भी लगाया है। उनके बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं और पूरा परिवार आत्मनिर्भर बन रहा है। दयाराम सौर ने नाबार्ड एवं वाटरशेड परियोजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने उनके परिवार को नई दिशा दी और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। 🚜💧🌾 खेत तालाब से बदली किसान दयाराम सौर की जिंदगी – आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई कहानी पलेरा (टीकमगढ़, मध्यप्रदेश): ग्राम चरी के किसान दयाराम सौर के पास लगभग 3.5 एकड़ कृषि भूमि है। पहले उनके खेत में पानी की भारी समस्या थी और बरसात के समय नाले के कारण मिट्टी का कटाव होता था, जिससे फसलें नष्ट हो जाती थीं और परिवार आर्थिक संकट में रहता था। दयाराम ने वाटरशेड समिति की बैठक में अपनी समस्या रखी। समिति ने एफआईपी (FIP) के तहत डीपीआर सर्वे के बाद उनके खेत में खेत तालाब निर्माण का निर्णय लिया। 20×20×3 मीटर का तालाब बनने से बरसात का पानी सुरक्षित संग्रहित होने लगा। तालाब बनने के बाद दयाराम ने मछली पालन शुरू किया और पहली बार में लगभग *80,000 रुपये* की आय प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने 3 एकड़ में गेहूं और सरसों की खेती की और तालाब के पानी से सिंचाई की, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ा। खेत तालाब ने न केवल सिंचाई का साधन दिया, बल्कि आजीविका का मजबूत माध्यम भी बना। मेड़बंदी, तालाब निर्माण और वृक्षारोपण से भूमि की उर्वरता बढ़ी। पहले परिवार को दिल्ली पलायन करना पड़ता था, अब वे गांव में रहकर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं। दयाराम ने 1 एकड़ में फल उद्यान भी लगाया है। उनके बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं और पूरा परिवार आत्मनिर्भर बन रहा है। दयाराम सौर ने नाबार्ड एवं वाटरशेड परियोजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने उनके परिवार को नई दिशा दी और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। 🚜💧🌾
- *विद्युत विभाग पलेरा ने की कार्रवाई, जप्त की मोटरसाइकिलें* पलेरा में विद्युत विभाग ने कार्रवाई करते हुए पटपरा से 1, लहर बुजुर्ग से 3, और रामनगर बुजुर्ग से 4 मोटरसाइकिल जप्त की। सहायक अभियंता ने बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपना बिल जमा करें ¹।4
- Post by राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़1
- कृपया करके धीरे चल सतर्क रहें धूम पान नशा आदि ना करें गाड़ी चलाते समय1
- Post by गणेश यादव1
- उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और इसमें शासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति या समूह को मंदिर पर निजी अधिकार जताने का हक नहीं है। यह सार्वजनिक आस्था से जुड़ा स्थल है, इसलिए इसका संचालन नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत ही होना चाहिए।1
- *जिला स्तरीय जनसुनवाई में 145 आवेदनों पर हुई सुनवाई* *दिव्यांगों को सुनवाई अलग से की गई* --- मंगलवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया की अध्यक्षता में जिला स्तरीय जनसुनवाई सम्पन्न हुई। जनसुनवाई डिप्टी कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला पं.सीईओ आयशा अंसारी, संयुक्त कलेक्टर अंजली द्विवेदी, संयुक्त कलेक्टर अखिल राठौर, एसडीएम प्रशांत अग्रवाल सहित विभागीय जिलाधिकारी उपस्थित रहे। जनसुनवाई में प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण कराने के निर्देश दिए। साथ ही जनसुनवाई में प्राप्त 145 शिकायती आवेदनों का परीक्षण करते हुए संबंधित विभाग को आवेदन निराकरण करने के लिए निर्देशित किया एवं समस्याओं को सुना। जनसुनवाई में शिक्षा, राजस्व, पुलिस, नगरीय निकाय, ग्रामीण विकास, विद्युत मंडल, स्वास्थ्य, खाद्य, आदिम जाति, श्रम, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न शिकायती आवेदन प्राप्त हुए। साथ ही जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का प्रमुखता के साथ निराकरण करें। जनसुनवाई में दिव्यांग की सुनवाई अलग से की गई।3
- बड़ागांव में टीकमगढ़ सागर हाईवे पर तेज रफ्तार आयशर ट्रक नरोसा नाले में गिरा,ट्रक ड्राइवर ने कूद कर बचाई अपनी जान1
- हाल ही में रिलीज हुए अपने गाने के कारण रैपर-सिंगर बादशाह एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। हरियाणा राज्य महिला आयोग (एचएससीडब्ल्यू) ने उनके हरियाणवी गाने 'टटिहरी' के कथित आपत्तिजनक लिरिक्स को लेकर उन्हें औपचारिक रूप से तलब किया है। इस हफ्ते के शुरू में रिलीज हुए इस गाने के कंटेंट को लेकर आलोचना हो रही है, क्योंकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह अभद्र है और सांस्कृतिक मानदंडों और मर्यादा का उल्लंघन करती है। आयोग ने गाने के लिरिक्स, खासकर महिलाओं और नाबालिगों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताते हुए मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गाने से संबंधित शिकायतों का संज्ञान लिया और समकालीन म्यूजिक की विषयवस्तु को लेकर बढ़ती जन चिंता को उजागर किया। एचएससीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने पुष्टि की कि कई शिकायतें मिलने के बाद पैनल ने कार्यवाही शुरू कर दी है और कहा है कि ऐसे बोल विशेष रूप से युवा लिसनर्स पर निगेटिव प्रभाव डाल सकते हैं। #Badshah #TateereeSong #HaryanviMusic #WomenCommission #MusicControversy1