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भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा सख्त, एसएसबी और एपीएफ के बीच समन्वय बैठक संपन्न ​बसही (खीरी) भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (APF) के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। ​49वीं वाहिनी एसएसबी के कमांडेंट शेर सिंह चौधरी के निर्देशानुसार, यह बैठक बी कंपनी बसही के कंपनी कमांडर रामकुमार यादव के नेतृत्व में सीमा स्तंभ संख्या 769/21 (पुराना पिलर संख्या 200) के समीप संपन्न हुई। सीमा पर होने वाले अपराधों को रोकने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच आपसी सहयोग और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर बल दिया गया। संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए सीमा पार आवाजाही करने वाले व्यक्तियों के पहचान पत्रों की कड़ाई से जांच करने का निर्णय लिया गया। मादक पदार्थों और मानव तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता बढ़ाने और समय-समय पर ऐसी बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी। ​बैठक में नेपाल (APF) की ओर से प्रभारी विजय प्रताप सिंह, सहायक उप निरीक्षक दीपेन्द्र बुद्ध सहित हिमालय राणा, बलराम चौधरी व अन्य जवान मौजूद रहे। वहीं, भारत (SSB) की ओर से निरीक्षक रामकुमार यादव, रामाशीष कुमार मेहता, राजेश पिंटू, हरीश, हेमराज गुर्जर, हिमांशु और सुनील कुमार ने प्रतिभाग किया। सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक-दूसरे का सहयोग करने की प्रतिबद्धता दोहराई

1 hr ago
user_Aman kumar gupta
Aman kumar gupta
पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago
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भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा सख्त, एसएसबी और एपीएफ के बीच समन्वय बैठक संपन्न ​बसही (खीरी) भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (APF) के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। ​49वीं वाहिनी एसएसबी के कमांडेंट शेर सिंह चौधरी के निर्देशानुसार, यह बैठक बी कंपनी बसही के कंपनी कमांडर रामकुमार यादव के नेतृत्व में सीमा स्तंभ संख्या 769/21 (पुराना पिलर संख्या 200) के समीप संपन्न हुई। सीमा पर होने वाले अपराधों को रोकने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच आपसी सहयोग और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर बल दिया गया। संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए सीमा पार

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आवाजाही करने वाले व्यक्तियों के पहचान पत्रों की कड़ाई से जांच करने का निर्णय लिया गया। मादक पदार्थों और मानव तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता बढ़ाने और समय-समय पर ऐसी बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी। ​बैठक में नेपाल (APF) की ओर से प्रभारी विजय प्रताप सिंह, सहायक उप निरीक्षक दीपेन्द्र बुद्ध सहित हिमालय राणा, बलराम चौधरी व अन्य जवान मौजूद रहे। वहीं, भारत (SSB) की ओर से निरीक्षक रामकुमार यादव, रामाशीष कुमार मेहता, राजेश पिंटू, हरीश, हेमराज गुर्जर, हिमांशु और सुनील कुमार ने प्रतिभाग किया। सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक-दूसरे का सहयोग करने की प्रतिबद्धता दोहराई

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  • Post by Firdosh journalist
    1
    Post by Firdosh journalist
    user_Firdosh journalist
    Firdosh journalist
    पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    30 min ago
  • पलिया कलां खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए गेंडा परिवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । जिनकी वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और इसी वजह से पर्यटक बंगाल टाइगर के साथ-साथ खुले में विचरण करते एक सींग वाले गैंडे के दीदार भी कर रहे हैं । बताया जा रहा है बीते 15 अप्रैल को मुंबई से सफारी के लिए आए फोटोग्राफरों के एक दल के सामने उस वक्त रोमांचक पल आया,जब मादा गेंडा 'विजय श्री' अपने शावक के साथ मुख्य मार्ग को पार कर रही थी। इस दौरान दल के साथ मौजूद गाइड राजू और पर्यटकों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है मादा गेंडा और उसका बच्चा बेहद शांत भाव से जंगल की सड़क पार करते नजर आ रहे हैं। बता दें दुधवा के जंगलों में गेंडा संरक्षण क्षेत्र में गेंडों की साइटिंग काफी बढ़ गई है, जिससे यहां आने वाले पर्यटक उत्साहित हैं। पार्क प्रशासन का कहना है कि दुधवा में गेंडा पुनर्वास परियोजना के सफल होने से अब इनके कुनबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अनुकूल वातावरण और सुरक्षा के चलते गेंडा परिवार अक्सर खुले मैदानों और रास्तों के करीब देखे जा रहे हैं, जो पर्यटन के लिहाज से बेहद सुखद संकेत है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा गेंडा और शावक की इस तरह की बेखौफ आवाजाही जंगल के बेहतर स्वास्थ्य और वन्यजीवों की सुरक्षा को दर्शाती है। मुंबई से आए फोटोग्राफरों ने इस अनुभव को यादगार बताते हुए कहा कि दुधवा जैसा प्राकृतिक परिवेश गेंडों के लिए स्वर्ग जैसा है।
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    पलिया कलां खीरी।  दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए गेंडा परिवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । जिनकी वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और इसी वजह से पर्यटक बंगाल टाइगर के साथ-साथ खुले में विचरण करते एक सींग वाले गैंडे के दीदार भी कर रहे हैं ।
बताया जा रहा है बीते 15 अप्रैल को मुंबई से सफारी के लिए आए फोटोग्राफरों के एक दल के सामने उस वक्त रोमांचक पल आया,जब मादा गेंडा 'विजय श्री' अपने शावक के साथ मुख्य मार्ग को पार कर रही थी। इस दौरान दल के साथ मौजूद गाइड राजू और पर्यटकों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है मादा गेंडा और उसका बच्चा बेहद शांत भाव से जंगल की सड़क पार करते नजर आ रहे हैं। बता दें दुधवा के जंगलों में गेंडा संरक्षण क्षेत्र में गेंडों की साइटिंग काफी बढ़ गई है, जिससे यहां आने वाले पर्यटक उत्साहित हैं। पार्क प्रशासन का कहना है कि दुधवा में गेंडा पुनर्वास परियोजना के सफल होने से अब इनके कुनबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अनुकूल वातावरण और सुरक्षा के चलते गेंडा परिवार अक्सर खुले मैदानों और रास्तों के करीब देखे जा रहे हैं, जो पर्यटन के लिहाज से बेहद सुखद संकेत है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा गेंडा और शावक की इस तरह की बेखौफ आवाजाही जंगल के बेहतर स्वास्थ्य और वन्यजीवों की सुरक्षा को दर्शाती है। मुंबई से आए फोटोग्राफरों ने इस अनुभव को यादगार बताते हुए कहा कि दुधवा जैसा प्राकृतिक परिवेश गेंडों के लिए स्वर्ग जैसा है।
    user_FH.NEWS
    FH.NEWS
    Classified ads newspaper publisher पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    49 min ago
  • संपूर्णानगर ​खीरी उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब कलम के सिपाहियों को खुलेआम निशाना बनाया जा रहा है। लखीमपुर खीरी जिले के संपूर्णानगर थाना क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार गोविंद गोयल पर बीती रात हथियारबंद दबंगों ने जानलेवा हमला कर दिया। वर्तमान में पत्रकार जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ​बताया जा रहा है कि पत्रकार गोविंद गोयल ने हमले से कुछ घंटे पहले ही पुलिस को अपनी जान के खतरे की आशंका जताते हुए अवगत कराया था। इसके बावजूद, पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। देर रात दबंगों ने उन पर घातक हथियारों से हमला किया, जिसके बाद वे लहूलुहान अवस्था में पाए गए। ​स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार का आरोप है कि संपूर्णानगर पुलिस इस मामले को रफा-दफा करने के लिए परिवार पर दबाव बना रही है। विशेष रूप से हल्का दरोगा अमरपाल की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि: ​तस्करों, भू-माफियाओं और मादक पदार्थों के धंधेबाजों को पुलिस का खुला संरक्षण प्राप्त है। ​पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे लिखवाना और उन पर हमले करवाना पुलिस की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। ​समय रहते कार्रवाई न करना ही पत्रकार की इस हालत का मुख्य कारण है। ​एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' नीति की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर खीरी जिले में "कलमकार" खून से नहा रहा है। उत्तर प्रदेश डीजीपी के आदेशों को ठेंगे पर रखकर स्थानीय पुलिस अपनी मनमानी कर रही है। जिले की एसपी ख्याति गर्ग की इस मामले पर चुप्पी ने भी स्थानीय पत्रकारों में भारी रोष पैदा कर दिया है। ​"क्या कानून के रखवाले ही भारत-नेपाल सीमा के थानों में बैठकर अपराधियों और तस्करों के साथ मिलकर नियम-कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं?" — यह सवाल आज संपूर्णानगर का हर जागरूक नागरिक पूछ रहा है। ​गोविंद गोयल पर हुए इस कायराना हमले के बाद स्थानीय पत्रकारों में जबरदस्त गुस्सा है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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    संपूर्णानगर ​खीरी उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब कलम के सिपाहियों को खुलेआम निशाना बनाया जा रहा है। लखीमपुर खीरी जिले के संपूर्णानगर थाना क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार गोविंद गोयल पर बीती रात हथियारबंद दबंगों ने जानलेवा हमला कर दिया। वर्तमान में पत्रकार जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
​बताया जा रहा है कि पत्रकार गोविंद गोयल ने हमले से कुछ घंटे पहले ही पुलिस को अपनी जान के खतरे की आशंका जताते हुए अवगत कराया था। इसके बावजूद, पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। देर रात दबंगों ने उन पर घातक हथियारों से हमला किया, जिसके बाद वे लहूलुहान अवस्था में पाए गए।
​स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार का आरोप है कि संपूर्णानगर पुलिस इस मामले को रफा-दफा करने के लिए परिवार पर दबाव बना रही है। विशेष रूप से हल्का दरोगा अमरपाल की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि:
​तस्करों, भू-माफियाओं और मादक पदार्थों के धंधेबाजों को पुलिस का खुला संरक्षण प्राप्त है।
​पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे लिखवाना और उन पर हमले करवाना पुलिस की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।
​समय रहते कार्रवाई न करना ही पत्रकार की इस हालत का मुख्य कारण है।
​एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' नीति की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर खीरी जिले में "कलमकार" खून से नहा रहा है। उत्तर प्रदेश डीजीपी के आदेशों को ठेंगे पर रखकर स्थानीय पुलिस अपनी मनमानी कर रही है। जिले की एसपी ख्याति गर्ग की इस मामले पर चुप्पी ने भी स्थानीय पत्रकारों में भारी रोष पैदा कर दिया है।
​"क्या कानून के रखवाले ही भारत-नेपाल सीमा के थानों में बैठकर अपराधियों और तस्करों के साथ मिलकर नियम-कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं?" — यह सवाल आज संपूर्णानगर का हर जागरूक नागरिक पूछ रहा है। ​गोविंद गोयल पर हुए इस कायराना हमले के बाद स्थानीय पत्रकारों में जबरदस्त गुस्सा है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
    user_Aman kumar gupta
    Aman kumar gupta
    पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हाँ हमारे यहाँ सम्पूर्णा नगर में भारत गैस एजेंसी कोई भी कर्मचारी नहीं है
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    हाँ हमारे यहाँ सम्पूर्णा नगर में भारत गैस एजेंसी कोई भी कर्मचारी नहीं है
    user_Rajdeep Prajapati
    Rajdeep Prajapati
    Street Painter पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • सूरज वही है, चाँद वही है, आसमान भी वैसा ही है… पर इंसानियत कहीं खो गई है। आज दिल बहुत भारी है। पत्रकार आनंद गोस्वामी कल रात (16 अप्रैल) की रात करीब 12:30 बजे ग्राम पंचायत ढाका में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। एक साल की मासूम गाय की बछड़ी—जिसे अभी दुनिया देखनी भी ठीक से नसीब नहीं हुई—कई कुत्तों के बीच फँसी हुई थी। वे उसे नोच रहे थे, काट रहे थे… उसकी दर्द भरी चीखें रात की खामोशी को चीर रही थीं। तभी हमारे पड़ोसी अनुराग राठौर जी ने उसकी आवाज सुनी। अगर वो कुछ मिनट और देर कर देते, तो शायद आज वो बछड़ी जिंदा नहीं होती। उन्होंने उसे कुत्तों से बचाया… और वो सहमी हुई, कांपती हुई हमारे घर के पास आ गई। जब हमने उसे देखा… तो दिल कांप उठा। उसका मासूम चेहरा लहूलुहान था, मुँह बुरी तरह से जख्मी… आंखों में डर और दर्द साफ दिख रहा था। हम उसे अपने घर के बरामदे में ले आए। अब सबसे पहले उसका इलाज कराया जाएगा—क्योंकि इंसान होने का मतलब सिर्फ बोलना नहीं, बल्कि दया करना भी है। लेकिन एक सवाल अंदर से झकझोर रहा है— आखिर कौन है वो निर्दयी, जिसने इस नन्हीं जान को यूँ मरने के लिए छोड़ दिया? क्या एक साल की इस मासूम बछड़ी का कोई कसूर था? “दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। तुलसी दया न छोड़िए, जब लग घट में प्राण॥” “परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई। जीव दया बिनु धर्म न होई, यह कह गए संतों की वाणी॥” आज जरूरत है कि हम सब अपनी इंसानियत को फिर से जगा लें। क्योंकि अगर हम आज भी नहीं जागे… तो कल शायद हम इंसान कहलाने के लायक भी नहीं रहेंगे। 🙏 निवेदन है—इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि लोगों की आँखें खुलें… और कोई भी मासूम जान इस तरह तड़पने के लिए मजबूर न हो।
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    सूरज वही है, चाँद वही है, आसमान भी वैसा ही है…
पर इंसानियत कहीं खो गई है। आज दिल बहुत भारी है।
पत्रकार आनंद गोस्वामी
कल रात (16 अप्रैल) की रात करीब 12:30 बजे ग्राम पंचायत ढाका में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। एक साल की मासूम गाय की बछड़ी—जिसे अभी दुनिया देखनी भी ठीक से नसीब नहीं हुई—कई कुत्तों के बीच फँसी हुई थी। वे उसे नोच रहे थे, काट रहे थे… उसकी दर्द भरी चीखें रात की खामोशी को चीर रही थीं।
तभी हमारे पड़ोसी अनुराग राठौर जी ने उसकी आवाज सुनी। अगर वो कुछ मिनट और देर कर देते, तो शायद आज वो बछड़ी जिंदा नहीं होती। उन्होंने उसे कुत्तों से बचाया… और वो सहमी हुई, कांपती हुई हमारे घर के पास आ गई।
जब हमने उसे देखा… तो दिल कांप उठा। उसका मासूम चेहरा लहूलुहान था, मुँह बुरी तरह से जख्मी… आंखों में डर और दर्द साफ दिख रहा था। हम उसे अपने घर के बरामदे में ले आए। अब सबसे पहले उसका इलाज कराया जाएगा—क्योंकि इंसान होने का मतलब सिर्फ बोलना नहीं, बल्कि दया करना भी है।
लेकिन एक सवाल अंदर से झकझोर रहा है—
आखिर कौन है वो निर्दयी, जिसने इस नन्हीं जान को यूँ मरने के लिए छोड़ दिया?
क्या एक साल की इस मासूम बछड़ी का कोई कसूर था?
“दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छोड़िए, जब लग घट में प्राण॥”
“परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई।
जीव दया बिनु धर्म न होई, यह कह गए संतों की वाणी॥”
आज जरूरत है कि हम सब अपनी इंसानियत को फिर से जगा लें।
क्योंकि अगर हम आज भी नहीं जागे… तो कल शायद हम इंसान कहलाने के लायक भी नहीं रहेंगे।
🙏 निवेदन है—इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि लोगों की आँखें खुलें… और कोई भी मासूम जान इस तरह तड़पने के लिए मजबूर न हो।
    user_Anand Kumar
    Anand Kumar
    Local News Reporter पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • Post by Sanjay Kumar
    1
    Post by Sanjay Kumar
    user_Sanjay Kumar
    Sanjay Kumar
    पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • लखनऊ: डीसीपी पूर्वी डॉक्टर दीक्षा शर्मा का बयान। विकास नगर में भीषण अग्निकांड में दो बच्चों की हुई मौत देर रात दोनों बच्चों के मिले शव 2 साल के मासूम बच्चों की हुई मौत परिजनों ने पुलिस के सामने की शिनाख्त बच्चों के शवों को भेजा गया पीएम के लिए।
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    लखनऊ: डीसीपी पूर्वी डॉक्टर दीक्षा शर्मा का बयान। विकास नगर में भीषण अग्निकांड में दो बच्चों की हुई मौत देर रात दोनों बच्चों के मिले शव
2 साल के मासूम बच्चों की हुई मौत परिजनों ने पुलिस के सामने की शिनाख्त बच्चों के शवों को भेजा गया पीएम के लिए।
    user_उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
    उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
    निघासन, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Sanjay Kumar
    1
    Post by Sanjay Kumar
    user_Sanjay Kumar
    Sanjay Kumar
    पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
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