Lucknow: यूपी में जमीन रजिस्ट्री के नियम सख्त, अब असली मालिक ही बेच सकेगा संपत्ति, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति की फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व और खतौनी से जुड़े दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी. कैबिनेट की मंजूरी के बाद रजिस्ट्रेशन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा. UP Cabinet Land Selling Rules: उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति की खरीद-बिक्री को पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार ने सख्त कदम उठाया है. अब कोई भी व्यक्ति बिना स्वामित्व साबित किए किसी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं करा सकेगा. फर्जीवाड़ा, विवादित जमीनों की बिक्री और सरकारी संपत्ति की अवैध रजिस्ट्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से स्टांप एवं पंजीयन विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई है. फर्जी रजिस्ट्री पर लगेगी रोक, स्वामित्व जांच होगी अनिवार्य राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब जमीन या किसी भी अचल संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी. इसके तहत संपत्ति बेचने वाले व्यक्ति को खतौनी और मालिकाना हक से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे. यदि प्रस्तुत दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि संपत्ति बेचने वाला व्यक्ति ही वास्तविक स्वामी है, तो रजिस्ट्री नहीं की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जी रजिस्ट्री, भूमाफियाओं की गतिविधियों और विवादित जमीनों के सौदों पर प्रभावी रोक लगेगी. लंबे समय से प्रदेश में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां असली मालिक की जानकारी के बिना ही संपत्ति की खरीद-फरोख्त कर दी जाती थी. सरकारी और प्रतिबंधित संपत्तियों की बिक्री पर भी सख्ती स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि कई मामलों में यह देखा गया है कि संपत्ति का वास्तविक स्वामी कोई और होता है, जबकि रजिस्ट्री किसी अन्य व्यक्ति के नाम से कर दी जाती है. इतना ही नहीं, कई बार प्रतिबंधित संपत्तियां, कुर्क की गई जमीनें, या फिर केंद्र और राज्य सरकार की संपत्तियां भी अवैध तरीके से बेचकर उनका पंजीकरण करा लिया जाता है. इससे न केवल बड़े स्तर पर धोखाधड़ी होती है बल्कि बाद में विवाद और मुकदमेबाजी भी बढ़ जाती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी संपत्तियों की पहचान पहले ही कर ली जाएगी और उनका पंजीकरण रोका जा सकेगा. सीमित अधिकारों के कारण हो जाती थी संदिग्ध रजिस्ट्री वर्तमान में रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत उप-निबंधक को किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इन्कार करने का अधिकार बहुत सीमित है. धारा 35 के अंतर्गत उन्हें केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही रजिस्ट्री रोकने का अधिकार प्राप्त है. इसी कारण कई बार ऐसे मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है, जिनमें स्वामित्व को लेकर संदेह होता है. इसके चलते बाद में जमीन को लेकर विवाद, मुकदमे और कानूनी जटिलताएं पैदा होती हैं. सरकार का मानना है कि कानून में संशोधन के बाद पंजीकरण अधिकारियों को स्पष्ट अधिकार मिलेंगे, जिससे वे संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों की रजिस्ट्री रोक सकेंगे. रजिस्ट्रेशन एक्ट में जोड़ी जाएंगी नई धाराएं सरकार ने इन समस्याओं को देखते हुए रजिस्ट्रेशन अधिनियम और उससे संबंधित नियमावली में संशोधन का फैसला लिया है. प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी. धारा 22 और धारा 35 के बाद अब धारा 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ी जाएंगी. इन नई धाराओं का उद्देश्य अचल संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है. सरकार का कहना है कि इससे भूमाफियाओं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति बेचने वाले लोगों पर कड़ी लगाम लगेगी. नई धाराओं से मजबूत होगी जांच प्रक्रिया प्रस्तावित व्यवस्था के तहत धारा 22-ए के अंतर्गत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर सीधे रोक लगाई जा सकेगी. वहीं धारा 22-बी के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं. इसके अलावा धारा 35-ए के तहत यदि संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं होंगे, तो पंजीकरण अधिकारी उस दस्तावेज को पंजीकृत करने से इन्कार कर सकेगा. राज्य सरकार इन आवश्यक दस्तावेजों की सूची राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से तय करेगी. जमीन विवाद और मुकदमेबाजी में आ सकती है कमी सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों में काफी कमी आएगी. प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आते हैं जहां एक ही जमीन को कई लोगों को बेच दिया जाता है या फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री करा ली जाती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व की पुष्टि पहले ही हो जाएगी. इससे खरीदारों को भी सुरक्षा मिलेगी और उन्हें भविष्य में कानूनी विवादों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
Lucknow: यूपी में जमीन रजिस्ट्री के नियम सख्त, अब असली मालिक ही बेच सकेगा संपत्ति, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति की फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व और खतौनी से जुड़े दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी. कैबिनेट की मंजूरी के बाद रजिस्ट्रेशन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा. UP Cabinet Land Selling Rules: उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति की खरीद-बिक्री को पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार ने सख्त कदम उठाया है. अब कोई भी व्यक्ति बिना स्वामित्व साबित किए किसी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं करा सकेगा. फर्जीवाड़ा, विवादित जमीनों की बिक्री और सरकारी संपत्ति की अवैध रजिस्ट्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से स्टांप एवं पंजीयन विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई है. फर्जी रजिस्ट्री पर लगेगी रोक, स्वामित्व जांच होगी अनिवार्य राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब जमीन या किसी भी अचल संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी. इसके तहत संपत्ति बेचने वाले व्यक्ति को खतौनी और मालिकाना हक से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे. यदि प्रस्तुत दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि संपत्ति बेचने वाला व्यक्ति ही वास्तविक स्वामी है, तो रजिस्ट्री नहीं की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जी रजिस्ट्री, भूमाफियाओं की गतिविधियों और विवादित जमीनों के सौदों पर प्रभावी रोक लगेगी. लंबे समय से प्रदेश में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां असली मालिक की जानकारी के बिना ही संपत्ति की खरीद-फरोख्त कर दी जाती थी. सरकारी और प्रतिबंधित संपत्तियों की बिक्री पर भी सख्ती स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि कई मामलों में यह देखा गया है कि संपत्ति का वास्तविक स्वामी कोई और होता है, जबकि रजिस्ट्री किसी अन्य व्यक्ति के नाम से कर दी जाती है. इतना ही नहीं, कई बार प्रतिबंधित संपत्तियां, कुर्क की गई जमीनें, या फिर केंद्र और राज्य सरकार की संपत्तियां भी अवैध तरीके से बेचकर उनका पंजीकरण करा लिया जाता है. इससे न केवल बड़े स्तर पर धोखाधड़ी होती है बल्कि बाद में विवाद और मुकदमेबाजी भी बढ़ जाती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी संपत्तियों की पहचान पहले ही कर ली जाएगी और उनका पंजीकरण रोका जा सकेगा. सीमित अधिकारों के कारण हो जाती थी संदिग्ध रजिस्ट्री वर्तमान में रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत उप-निबंधक को किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इन्कार करने का अधिकार बहुत सीमित है. धारा 35 के अंतर्गत उन्हें केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही रजिस्ट्री रोकने का अधिकार प्राप्त है. इसी कारण कई बार ऐसे मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है, जिनमें स्वामित्व को लेकर संदेह होता है. इसके चलते बाद में जमीन को लेकर विवाद, मुकदमे और कानूनी जटिलताएं पैदा होती हैं. सरकार का मानना है कि कानून में संशोधन के बाद पंजीकरण अधिकारियों को स्पष्ट अधिकार मिलेंगे, जिससे वे संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों की रजिस्ट्री रोक सकेंगे. रजिस्ट्रेशन एक्ट में जोड़ी जाएंगी नई धाराएं सरकार ने इन समस्याओं को देखते हुए रजिस्ट्रेशन अधिनियम और उससे संबंधित नियमावली में संशोधन का फैसला लिया है. प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी. धारा 22 और धारा 35 के बाद अब धारा 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ी जाएंगी. इन नई धाराओं का उद्देश्य अचल संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है. सरकार का कहना है कि इससे भूमाफियाओं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति बेचने वाले लोगों पर कड़ी लगाम लगेगी. नई धाराओं से मजबूत होगी जांच प्रक्रिया प्रस्तावित व्यवस्था के तहत धारा 22-ए के अंतर्गत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर सीधे रोक लगाई जा सकेगी. वहीं धारा 22-बी के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं. इसके अलावा धारा 35-ए के तहत यदि संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं होंगे, तो पंजीकरण अधिकारी उस दस्तावेज को पंजीकृत करने से इन्कार कर सकेगा. राज्य सरकार इन आवश्यक दस्तावेजों की सूची राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से तय करेगी. जमीन विवाद और मुकदमेबाजी में आ सकती है कमी सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों में काफी कमी आएगी. प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आते हैं जहां एक ही जमीन को कई लोगों को बेच दिया जाता है या फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री करा ली जाती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व की पुष्टि पहले ही हो जाएगी. इससे खरीदारों को भी सुरक्षा मिलेगी और उन्हें भविष्य में कानूनी विवादों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
- कमरे में खौफनाक मंजर: गला रेतकर तीन की मौत, खून से लथपथ मिले शव से दहला फतेहपुर फतेहपुर। सदर कोतवाली क्षेत्र के चौफेरवा मोहल्ले में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। घर के अंदर बंद कमरे में तीन लोगों के गला कटे शव मिलने से सनसनी फैल गई। कमरे के भीतर खून से लथपथ पड़े शवों को देखकर लोगों की रूह कांप गई, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मिली जानकारी के अनुसार चौफेरवा निवासी सुनील उर्फ गुड्डू श्रीवास्तव (55), उनकी भाभी सुशीला (55) और भतीजा अमर (28) घर के अंदर मौजूद थे। बताया जा रहा है कि घर का मुख्य गेट अंदर से बंद था। जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला और फोन कॉल का भी कोई जवाब नहीं मिला तो परिजनों को शक हुआ। बताया जाता है कि घर में गैस सिलेंडर खत्म होने पर परिवार के मुखिया सुशील कुमार श्रीवास्तव सिलेंडर लेने के लिए अपनी बेटी के घर गए थे। इस दौरान बेटी ने मां और भाई को फोन किया लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया और मां का फोन भी स्विच ऑफ मिला। आशंका होने पर पिता और बेटी घर पहुंचे तो मुख्य दरवाजा बंद मिला। कई बार खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसी के घर से कूदकर अंदर पहुंचे, जहां बंद कमरे में तीनों खून से लथपथ पड़े मिले। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर तीनों को बाहर निकाला। सुनील में सांस चलने की आशंका पर उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम को कमरे के अंदर ब्लेड का बॉक्स और सल्फास की पुड़िया बरामद हुई है। तीनों के गले कटे हुए थे और दो लोगों के हाथों में भी धारदार हथियार से कटने के निशान पाए गए हैं। घटना को लेकर एडिशनल एसपी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला घरेलू विवाद का प्रतीत होता है। आशंका जताई जा रही है कि आपसी विवाद में तीनों ने एक-दूसरे पर ब्लेड से हमला किया और अंत में बचे व्यक्ति ने सल्फास खाकर खुद को घायल कर लिया, जिससे उसकी भी मौत हो गई। हालांकि घटना की असली वजह का खुलासा फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।3
- फ़तेहपुर सदर क्षेत्र में तेहरे हत्या कांड से फैली सनसनी से मचा कोहराम,2की मौके पर हुई मौत 1को जिला अस्पताल में किया डॉ0 ने म्रत शव मर्चरी भेजा गया,डॉ0 की माने तो गले गम्भीर धार दार हथियार से वार किया गया है,और हाथ मे भी धार दार हथियार से काट गया है,मामला सदर कोतवाली के चौफेरवा का ।1
- *ब्रेकिंग फतेहपुर* *योगी सरकार में बनाए गए नियम जब अधिकारी ही तोड़ेंगे आम जनता क्या करेगी* *डिप्टी सीएमओ पीके सिंह ने पर्सनल गाड़ी में नीली बत्ती को किया चार दिवारी में कैद* *जिला अस्पताल के पूर्व सीएमएस रहे पीके सिंह की गाड़ी का वीडियो हुआ वायरल* *पर्सनल गाड़ी में नीली बत्ती लगाकर घर में खड़ी करने का वीडियो हुआ वायरल* *इस संबंध में जब पीके सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके भाई भाजपा में है इसलिए लगाई है नीली बत्ती और फोन उठाना किया बंद* *लोगों का कहना है कि सत्ता और पावर की हनक में डिप्टी सीएमओ पीके सिंह दिखाते है रिवाब* *जो जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार नहीं संभाल पाए वह क्या संभालेंगे प्राइवेट हॉस्पिटलों की कमान* *नियमानुसार जो खुद गलत है वह क्या सुधरेंगे प्राइवेट हॉस्पिटलों के कमान* *जब इस संबंध में सीएमओ को कॉल किया गया उन्होंने कर लिया फोन स्विच ऑफ* *जब अधिकारी ही तोड़ेंगे नियम तो आम जनता से क्या रखेंगे उम्मीद और गलत करने वालों के खिलाफ फिर क्या करेंगे ही कार्रवाई* *वायरल वीडियो जिला अस्पताल के इमरजेंसी के पास का बताया जा रहा है*1
- Post by Sandeep tvnews1
- Post by डॉक्टर साहिल1
- *विद्यालय में गूंजा नशा मुक्ति का संकल्प, बच्चों ने लिया नशे से दूर रहने की शपथ* बकेवर, फतेहपुर। जनपद में बढ़ते नशे के दुष्प्रभावों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विकासखंड देवमई क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जोगापुर में धूम्रपान निषेध दिवस के अवसर पर नशा मुक्ति अभियान चलाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नशे के खिलाफ शपथ दिलाई गई और उन्हें जीवनभर नशे से दूर रहने का संकल्प कराया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पूनम अवस्थी ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि नशा समाज के लिए घातक जहर है, जो न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को बर्बाद करता है बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। इस दौरान बच्चों ने हाथ उठाकर सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे कभी भी तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, शराब जैसे नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करेंगे और दूसरों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। विद्यालय परिसर में “नशा छोड़ो, जीवन संवारो” और “स्वस्थ समाज का आधार – नशामुक्त परिवार” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा। कार्यक्रम में सहायक अध्यापिका कल्पना, शालिनी देवी, शिक्षामित्र सतीश कुमार वर्मा के साथ ही ग्राम प्रधान अनुज कुमार भी मौजूद रहे। सभी ने बच्चों के इस संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि यदि नई पीढ़ी नशे के खिलाफ जागरूक होगी तो समाज को नशा मुक्त बनाने की राह आसान होगी। विद्यालय में आयोजित इस अभियान ने बच्चों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी नशे के खिलाफ जागरूक होने का सशक्त संदेश दिया।1
- *कानपुर देहात ब्रेकिंग* दुल्हन की विदाई के बाद दूल्हे के साथ मारपीट, दुल्हन के जेवरात लूटे दिनदहाड़े दबंगों ने दूल्हे की गाड़ी रुकवाकर की मारपीट पहले ड्राइवर को पीटा,फिर दूल्हे को बनाया निशाना मारपीट के दौरान दुल्हन के जेवरात लूटकर फरार हुए बदमाश औरैया से आई थी बारात,विदाई के बाद घर लौट रहे थे दूल्हा-दुल्हन घटना के बाद दूल्हा-दुल्हन पहुंचे थाने,लगाई न्याय की गुहार घटना से फैलीसनसनी,पुलिस मामले की जांच में जुटी रसूलाबाद कोतवाली क्षेत्र के भवनपुर भट्टा के पास की घटना कानपुर देहात की एक सनसनीखेज वारदात ने मानो 90 के दशक की फिल्मों की कहानी को हकीकत बना दिया है। फर्क बस इतना है कि ये कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि आज के अमृतकाल की सच्ची घटना है। जानकारी के मुताबिक शादी समारोह के बाद बारात वापस लौट रही थी। दूल्हा और दुल्हन एक-दूसरे का हाथ थामे अपने नए जीवन के सपने संजोते हुए घर की ओर जा रहे थे। तभी रास्ते में कुछ लुटेरों ने फिल्मी अंदाज में दूल्हे की कार को बीच सड़क पर रोक लिया। #KanpurDehat #kanpur #sdmkanpur #spkanpur #YogiAdityanath #BrajeshPathak1
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक बार फिर बच्चा चोर समझकर ग्रामीणों ने एक महिला का हाथ दुप्पटा से बांधकर पिटाई किया।स्थानीय लोगों के सूचना पर पहुची पुलिस ने भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर महिला को ई रिक्शा में बैठाकर ले गई।यह मामले मंगलवार की देर रात 9 बजे के आस पास का है। जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के भिटौरा रोड बिसौली गांव के पास एक महिला जिसकी उम्र करीब 30 साल के आस पास जीन्स शूट पहने हुए घूम रही थी।जिसको गांव के लोगों ने संदिग्ध देखते हुए बच्चा चोर की आशंका पर पकड़कर हाथ बांधकर बैठा लिया और पिटाई करने के साथ नाम पता पूछने लगे।इस बीच किसी व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दे दिया।मौके पर पहुची पुलिस ने महिला को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर ई रिक्शा में बैठाकर साथ ले गई।पूछताछ में महिला कौशाम्बी जिले के सिराथू और पिता का नाम अनूप बता रही थी। जब महिला से उसका नाम पूछा गया तो कुछ बता नही रही थी।गांव के रहने वाले राम बरन,कमल ने बताया कि महिला संदिग्ध रूप से घूम रही थी।जब हम लोग निकले तो कुछ लोगों ने महिला को घेर रखा था और बच्चा चोर बता रहे थे। इस मामले में कोतवाली प्रभारी ने बताया कि महिला का मानसिक हालत ठीक नही है महिला को भीड़ से छुड़ाकर उसके गांव घर का पता लगाया जा रहा है।1