उत्तर प्रदेश सरकार के ग्राम पंचायतों से संबंधित आदेश को पंचायती राज व्यवस्था और 73वें संविधान संशोधन की मूल भावना पर सीधा हमला बताया गया है। अपनी जनता पार्टी (एजेपी) का आरोप है कि इस आदेश के तहत जनता द्वारा चुने गए प्रधानों को अब जिलाधिकारी (DM), DPRO और नौकरशाही के अधीन 'प्रशासक' बनाकर गांव के लोकतंत्र को सरकारी फाइलों और कलेक्ट्रेट के नियंत्रण में कैद करने की साजिश रची जा रही है। एजेपी इस आदेश का कड़ा विरोध करती है, जिसे लोकतंत्र का विस्तार नहीं, बल्कि उसका गला घोंटना मानती है। एजेपी के प्रदेश सचिव राम ध्यान कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि 73वें संविधान संशोधन का उद्देश्य पंचायतों को स्वायत्त बनाना था ताकि चुने हुए प्रतिनिधि गांव के विकास और निर्णयों में स्वतंत्र भूमिका निभा सकें। हालांकि, सरकार का आदेश इस भावना को कमजोर कर रहा है, क्योंकि उसमें साफ लिखा है कि 'प्रशासक' कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेगा। किसी भी विशेष परिस्थिति में निर्णय लेने के लिए प्रस्ताव DPRO के माध्यम से जिलाधिकारी के पास जाएगा और DM की स्वीकृति के बाद ही निर्णय हो सकेगा। इससे चुने हुए प्रधान की हैसियत एक सरकारी प्रशासक तक सीमित हो जाएगी, जो ADO/DPRO जैसी प्रशासनिक व्यवस्था के नीचे काम करेगा, न कि एक स्वतंत्र जनप्रतिनिधि के रूप में। एजेपी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए कि जब प्रधान जनता द्वारा चुना गया है, तो उसे DM की अनुमति का मोहताज क्यों बनाया जा रहा है और पंचायतों को कलेक्ट्रेट की शाखा क्यों बनाया जा रहा है। पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि भाजपा सरकार पंचायत चुनाव से डर रही है और इसीलिए पंचायतों को नौकरशाही के नियंत्रण में डाल रही है, जिसे 'DM राज' बताया गया है। अपनी जनता पार्टी ने मांग की है कि पंचायत चुनाव की तारीख तत्काल घोषित की जाए, प्रधानों को DM/DPRO के अधीन प्रशासक बनाने की व्यवस्था तुरंत वापस ली जाए, और 73वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता बहाल की जाए। पार्टी ने जोर दिया कि गांव की सरकार गांव की जनता के हाथों में रहनी चाहिए, न कि कलेक्ट्रेट और नौकरशाही के नियंत्रण में, और ADO/DM राज की हर कोशिश बंद होनी चाहिए। एजेपी ने चेतावनी दी है कि पंचायत लोकतंत्र को खत्म करने और चुने हुए प्रधानों को नौकरशाही के अधीन करने की हर साजिश का सड़क से लेकर न्यायालय तक कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रधान जनता का प्रतिनिधि है, सरकार का बाबू नहीं, और गांव का फैसला गांव करेगा, DM कार्यालय नहीं।
उत्तर प्रदेश सरकार के ग्राम पंचायतों से संबंधित आदेश को पंचायती राज व्यवस्था और 73वें संविधान संशोधन की मूल भावना पर सीधा हमला बताया गया है। अपनी जनता पार्टी (एजेपी) का आरोप है कि इस आदेश के तहत जनता द्वारा चुने गए प्रधानों को अब जिलाधिकारी (DM), DPRO और नौकरशाही के अधीन 'प्रशासक' बनाकर गांव के लोकतंत्र को सरकारी फाइलों और कलेक्ट्रेट के नियंत्रण में कैद करने की साजिश रची जा रही है। एजेपी इस आदेश का कड़ा विरोध करती है, जिसे लोकतंत्र का विस्तार नहीं, बल्कि उसका गला घोंटना मानती है। एजेपी के प्रदेश सचिव राम ध्यान कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि 73वें संविधान संशोधन का उद्देश्य पंचायतों को स्वायत्त बनाना था ताकि चुने हुए प्रतिनिधि गांव के विकास और निर्णयों में स्वतंत्र भूमिका निभा सकें। हालांकि, सरकार का आदेश इस भावना को कमजोर कर रहा है, क्योंकि उसमें साफ लिखा है कि 'प्रशासक' कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेगा। किसी भी विशेष परिस्थिति में निर्णय लेने के लिए प्रस्ताव DPRO के माध्यम से जिलाधिकारी के पास जाएगा और DM की स्वीकृति के बाद ही निर्णय हो सकेगा। इससे चुने हुए प्रधान की हैसियत एक सरकारी प्रशासक तक सीमित हो जाएगी, जो ADO/DPRO जैसी प्रशासनिक व्यवस्था के नीचे काम करेगा, न कि एक स्वतंत्र जनप्रतिनिधि के रूप में। एजेपी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए कि जब प्रधान जनता द्वारा चुना गया है, तो उसे DM की अनुमति का मोहताज क्यों बनाया जा रहा है और पंचायतों को कलेक्ट्रेट की शाखा क्यों बनाया जा रहा है। पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि भाजपा सरकार पंचायत चुनाव से डर रही है और इसीलिए पंचायतों को नौकरशाही के नियंत्रण में डाल रही है, जिसे 'DM राज' बताया गया है। अपनी जनता पार्टी ने मांग की है कि पंचायत चुनाव की तारीख तत्काल घोषित की जाए, प्रधानों को DM/DPRO के अधीन प्रशासक बनाने की व्यवस्था तुरंत वापस ली जाए, और 73वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता बहाल की जाए। पार्टी ने जोर दिया कि गांव की सरकार गांव की जनता के हाथों में रहनी चाहिए, न कि कलेक्ट्रेट और नौकरशाही के नियंत्रण में, और ADO/DM राज की हर कोशिश बंद होनी चाहिए। एजेपी ने चेतावनी दी है कि पंचायत लोकतंत्र को खत्म करने और चुने हुए प्रधानों को नौकरशाही के अधीन करने की हर साजिश का सड़क से लेकर न्यायालय तक कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रधान जनता का प्रतिनिधि है, सरकार का बाबू नहीं, और गांव का फैसला गांव करेगा, DM कार्यालय नहीं।
- गाजीपुर जनपद के जमानिया थाना पुलिस ने अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 29 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर गंगा पुल तिराहा से हुई। गिरफ्तार किए गए अभियुक्त का नाम इमरान शाह है, जो जहांगीर का पुत्र और मुहल्ला बुद्धीपुर कोट, कस्बा जमानिया, थाना जमानिया का निवासी है। उसकी उम्र लगभग 30 वर्ष बताई गई है। इमरान शाह मुकदमा अपराध संख्या 165/2026, धारा 85 एवं 103(1) भारतीय न्याय संहिता के तहत लंबे समय से वांछित था। गिरफ्तारी के बाद, उसके विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है, और पुलिस टीम द्वारा आगे की जांच तथा पूछताछ जारी है।1
- सिंगर चंदन बलमुआ ऑफिशियल के अनुसार, बाबा साहेब, भीमराव और अंबेडकर जी एक ही शख्सियत का उल्लेख करते हैं।1
- मऊ क्रांति न्यूज के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है, जिससे अपराधियों में खौफ का माहौल बन गया है। इस खबर को पत्रकार अब्दुल रहमान इदरीसी ने प्रस्तुत किया है, जिनका उल्लेख प्रचार मंत्री, उत्तर प्रदेश के रूप में भी किया गया है। मऊ क्रांति न्यूज खुद को जनता की आवाज़ का सफर और सच के साथ खड़ा होने वाला मंच बताता है, जहाँ हर खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है। पत्रकार अब्दुल रहमान इदरीसी ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनकी कलम वही सच लिखती है जो जनता की आवाज़ है, और यही उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माफिया चाहे कितना भी मजबूत हो जाए, सच्ची पत्रकारिता की हमेशा जीत होती है। यह मंच अपने दर्शकों को मऊ क्रांति न्यूज के साथ बने रहने का आह्वान करता है, जहाँ वे सच की आवाज़ को जनता के विश्वास के साथ प्रस्तुत करने का दावा करते हैं।1
- चंदौली जिले के धानापुर गुरैनी में किसानों का कटान को लेकर जारी धरना प्रदर्शन आज चौथे दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन को भाकपा माले के नेताओं का समर्थन प्राप्त हुआ है, जिसमें श्रवण कुशवाहा भी शामिल हैं।1
- चंदौली में गंगा नदी के लगातार हो रहे कटान से प्रभावित किसानों का धरना-प्रदर्शन जारी है। किसान कटान रोकने की मांग को लेकर प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने की गुहार लगा रहे हैं। धरने की सूचना मिलने पर बंधी डिवीजन के अधिकारी मौके पर पहुँचे, जिनमें एक्सईएन सुरेश आजाद, एई अतुल गुप्ता और जेई अजय यादव शामिल थे। अधिकारियों ने किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुना और गंगा कटान से हो रहे नुकसान का जायजा लिया। किसानों ने अधिकारियों को बताया कि गंगा के कटाव से उनकी कृषि भूमि लगातार नदी में समाहित हो रही है, जिससे उनकी आजीविका पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कटान रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी उपाय किए जाने की मांग की। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को उच्चाधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा और कटान रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।1
- गंगा नदी के कटाव को रोकने की मांग को लेकर किसान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में, किसानों के धरना स्थल पर बँधी डिवीजन के अधिकारी पहुँचे। इन अधिकारियों में एक्सीयन सुरेश आजाद, ए इ अतुलगुप्ता और जेई अजय यादव शामिल थे, जिन्होंने धरना स्थल पर किसानों से मुलाकात की।2
- मऊ के जिलाधिकारी (डीएम) ने एक अपील की है, जिसे लोगों से विशेष रूप से आग्रह किया गया है कि वे एक बार ज़रूर देखें और सुनें।1
- शादियाबाद थाना क्षेत्र के प्रधान मोड़ पर स्थित महादेव हीरो एजेंसी के गोदाम में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई, जिससे भारी क्षति होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। इस घटना में गोदाम में खड़ी कई गाड़ियां जलकर राख हो गईं। एजेंसी के मालिक आंचल मिश्रा ने बताया कि गोदाम में बहुत सारी गाड़ियां मौजूद थीं। वे रोज की तरह गोदाम बंद करके अपने घर सादात चले गए थे, जो शादियाबाद से 8 किलोमीटर दूर है। देर रात उनके मैनेजर ने उन्हें गोदाम से धुआं निकलने की सूचना दी, जिसके बाद वे तुरंत मौके पर पहुंचे और देखा कि गोदाम के अंदर से भारी मात्रा में धुआं निकल रहा था। मिश्रा ने तत्काल 112 पर इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची 112 की टीम ने थाना प्रभारी पवन उपाध्याय शादियाबाद और फायर ब्रिगेड को घटना से अवगत कराया। शादियाबाद के एसएचओ पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आग बुझाने के प्रयास शुरू किए गए। काफी मशक्कत के बाद देर रात्रि आग पर काबू पाया जा सका।4