सांसद की अध्यक्षता में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित जिले को टीबी मुक्त बनाने का ले सकल्पः-सांसद डॉ. राजेश मिश्र सांसद की अध्यक्षता में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित जिले को टीबी मुक्त बनाने का ले सकल्पः-सांसद डॉ. राजेश मिश्र सिंगरौली टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक सीधी सिंगरौली सांसद डॉ. राजेश मिश्र के अध्यक्षता एवं कलेक्टर गौरव बैनल के उपस्थिति में कलेक्टेªट सभागार में आयोजित हुई। बैठक के प्रारंभ में जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत किए जा रहे कार्यक्रमो की जानकारी लेने के पश्चात सांसद ने कहा कि जिले को टीबी मुक्त बनाना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होने कहा कि यह केवल टीबी रोग की समय पर पहचान एवं उपाचार के माध्यम से संभव हो सकता है।सांसद डॉ. मिश्र ने निर्देश दिए कि टीबी मुक्त अभियान कि समीक्षा बैठक दो माह एक बार आयोजित की जायें। टीबी के ईलाज के दौरान रोगियो को योजना के तहत उपलब्ध कराये जाने वाले लाभ समय पर दिया जायें। तथा ईलाज में मिलने वाली राशि का पूर्ण भुगतान किया जायें। साथ ही योजना के लाभ के संबंध में जागरूकता अभियान भी चलाया जायें। उन्होने निर्देश दिए कि इस अभियान का संकल्प से समधान अभियान के दौरान लगने वाले शिविर एवं अन्य शिविरो के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार भी कराया जायें। बैठक में सांसद डॉ. मिश्र ने निर्देश दिए कि आकांक्षी ब्लाक देवसर एवं जिले के दूरांचल क्षेत्रो के संवेदनशील वर्ग जिनमें डायबटीज एवं एचआईव्ही के मरीज, 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बुजुर्गो के साथ साथ शराब एवं सिगरेट का सेवन करने वाले व्यक्तियो की आवश्यक रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट किया जायें। उन्होने निर्देश दिए कि उपचार के दौरान एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता के माध्मय से मरीजो की नियमित रूप से मानीटरिंग की जाये तथा यह सुनिश्चित किया जाये मरीजो के उपचार के दौरान निर्धारित किए गए दवाओ के खुराक का नियमित रूप से सेवन किया जायें,ताकि बिमारी को जड़ से खत्म किया जा सके। उन्होने निर्देश दिए निःक्षय आईडी के माध्यम से प्राईवेट क्लीनिक एवं चिकित्सालयो के माध्यम से भी टीबी के मरीजो को चिन्हांकन कर उनका उपचार किया जाये इस संबंध में इन संस्थानो से मासिक स्क्रीनिंग की रिपोर्ट भी ली जायें। बैठक के दौरान इस आशय के निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर पोर्टबेल एक्सरे मशीन एवं टेक्निशियन की व्यवस्था कराने हेतु प्रस्ताव तैयार किया जायें। बैठक के अंत सांसद द्वारा टीबी के मरीजो को फूड बास्केट का वितरण किया गया। बैठक के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पराज सिंह, सिविल सर्जन डॉ. कल्पना रवि, डॉ. अनिल सिंह बघेल, डीपीएम सुधाशु मिश्रा, जिला क्षय अधिकारी डॉ. विशेष सिंह, टीकाकरण अधिकारी डॉ. पंकज सिंह, डॉ. गंगा बैस उपस्थित रहे।
सांसद की अध्यक्षता में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित जिले को टीबी मुक्त बनाने का ले सकल्पः-सांसद डॉ. राजेश मिश्र सांसद की अध्यक्षता में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित जिले को टीबी मुक्त बनाने का ले सकल्पः-सांसद डॉ. राजेश मिश्र सिंगरौली टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक सीधी सिंगरौली सांसद डॉ. राजेश मिश्र के अध्यक्षता एवं कलेक्टर गौरव बैनल के उपस्थिति में कलेक्टेªट सभागार में आयोजित हुई। बैठक के प्रारंभ में जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत किए जा रहे कार्यक्रमो की जानकारी लेने के पश्चात सांसद ने कहा कि जिले को टीबी मुक्त बनाना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होने कहा कि यह केवल
टीबी रोग की समय पर पहचान एवं उपाचार के माध्यम से संभव हो सकता है।सांसद डॉ. मिश्र ने निर्देश दिए कि टीबी मुक्त अभियान कि समीक्षा बैठक दो माह एक बार आयोजित की जायें। टीबी के ईलाज के दौरान रोगियो को योजना के तहत उपलब्ध कराये जाने वाले लाभ समय पर दिया जायें। तथा ईलाज में मिलने वाली राशि का पूर्ण भुगतान किया जायें। साथ ही योजना के लाभ के संबंध में जागरूकता अभियान भी चलाया जायें। उन्होने निर्देश दिए कि इस अभियान का संकल्प से समधान अभियान के दौरान लगने वाले शिविर एवं अन्य शिविरो के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार भी कराया जायें। बैठक में सांसद डॉ. मिश्र
ने निर्देश दिए कि आकांक्षी ब्लाक देवसर एवं जिले के दूरांचल क्षेत्रो के संवेदनशील वर्ग जिनमें डायबटीज एवं एचआईव्ही के मरीज, 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बुजुर्गो के साथ साथ शराब एवं सिगरेट का सेवन करने वाले व्यक्तियो की आवश्यक रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट किया जायें। उन्होने निर्देश दिए कि उपचार के दौरान एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता के माध्मय से मरीजो की नियमित रूप से मानीटरिंग की जाये तथा यह सुनिश्चित किया जाये मरीजो के उपचार के दौरान निर्धारित किए गए दवाओ के खुराक का नियमित रूप से सेवन किया जायें,ताकि बिमारी को जड़ से खत्म किया जा सके। उन्होने निर्देश दिए निःक्षय आईडी के माध्यम से प्राईवेट क्लीनिक
एवं चिकित्सालयो के माध्यम से भी टीबी के मरीजो को चिन्हांकन कर उनका उपचार किया जाये इस संबंध में इन संस्थानो से मासिक स्क्रीनिंग की रिपोर्ट भी ली जायें। बैठक के दौरान इस आशय के निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर पोर्टबेल एक्सरे मशीन एवं टेक्निशियन की व्यवस्था कराने हेतु प्रस्ताव तैयार किया जायें। बैठक के अंत सांसद द्वारा टीबी के मरीजो को फूड बास्केट का वितरण किया गया। बैठक के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पराज सिंह, सिविल सर्जन डॉ. कल्पना रवि, डॉ. अनिल सिंह बघेल, डीपीएम सुधाशु मिश्रा, जिला क्षय अधिकारी डॉ. विशेष सिंह, टीकाकरण अधिकारी डॉ. पंकज सिंह, डॉ. गंगा बैस उपस्थित रहे।
- मोरवा में कोयला खनन से बढ़ता प्रदूषण, प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कोयला खदानों से उड़ने वाली धूल और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण मोरवा क्षेत्र के लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विस्थापन से पूर्व ही यहां के नागरिक सांस संबंधी रोग, आंखों में जलन, त्वचा संक्रमण और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लगातार बढ़ते PM2.5 और PM10 कणों के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के संक्रमण और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों बढ़ी हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी के वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव अभ्युदय सिंह (डैनी) ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोयला खनन क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग तो किया जा रहा है, लेकिन निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि खदान क्षेत्रों में एटोमाइज्ड वॉटर मिस्ट या फॉग कैनन का उपयोग सही तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाए। फॉग कैनन को 45 डिग्री के कोण पर स्थापित कर उच्च दबाव के साथ बारीक पानी की बूंदों का छिड़काव किया जाना चाहिए, ताकि धूल के महीन कणों को प्रभावी ढंग से जमीन पर बैठाया जा सके। इसके अलावा खदान और ट्रांसपोर्ट मार्गों पर एंटी-स्मॉग गन की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कच्ची सड़कों और कोयला भंडारण स्थलों पर पर्यावरण अनुकूल रासायनिक धूल अवरोधकों का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिससे धूल उड़ने से रोकी जा सके। खदान क्षेत्रों के आसपास घनी हरित पट्टी विकसित कर प्राकृतिक फिल्टर तैयार करने की आवश्यकता है, जो हवा की गति को कम कर धूल कणों को रोकने में सहायक हो सकती है। अभ्युदय सिंह ने प्रशासन से मांग की कि प्रदूषण के स्तर की नियमित मॉनिटरिंग कर पारदर्शी तरीके से AQI रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर लोगों की जांच और उपचार की व्यवस्था की जाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और खनन कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को गंभीरता से लागू कर क्षेत्र को प्रदूषण से राहत दिलाएं।2
- 02 ब्रेकिंग न्यूज़ | सिंगरौली, मध्य प्रदेश* *नगर निगम के* *राजस्वअधिकारी का कथित रिश्वत वीडियो वायरल।* *सोशल मीडिया पर सामने* *आए वीडियो से मचा हड़कंप प्रशासनिक अमले में बढ़ी हलचल, जांच की मांग तेज पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल।*1
- सोनभद्र, 19 फरवरी 2026: जनपद सोनभद्र के शक्तिनगर थाना क्षेत्र से 16 फरवरी 2026 को लापता हुई नाबालिग युवती का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है। युवती की तलाश में जुटी पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं, जिससे परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिजनों के अनुसार, युवती 16 फरवरी को घर से निकली थी, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद जब उसका कोई पता नहीं चला तो मामले की सूचना शक्तिनगर थाना पुलिस को दी गई। परिजनों का आरोप है कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लापता युवती के परिजनों ने बताया कि युवती के पास एक मोबाइल फोन था, जो कथित तौर पर क्षेत्र के एक युवक द्वारा दिया गया था। आरोप है कि वह युवक लगातार युवती से फोन पर बात करता था। परिजन इस पूरे मामले में उस युवक की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की जाए तो अहम सुराग मिल सकता है। घटना के बाद से परिवार में मातम जैसा माहौल है। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से जल्द से जल्द बेटी को सकुशल बरामद करने की गुहार लगा रहे हैं। इस संबंध में पुलिस का कहना है कि मामला गंभीर है और हर पहलू से जांच की जा रही है। मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग सहित संभावित स्थानों पर टीम भेजी गई है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही युवती का पता लगा लिया जाएगा।1
- जनपद सोनभद्र के विभिन्न कॉलेजों व स्कूलों में यूपी बोर्ड की परीक्षा आज से शुरू परीक्षा को नकल विहीन करने के लिए प्रशासन प्रयासरत1
- Post by Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief1
- सोनभद्र में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा है। माध्यमिक भारतीय रसोईया वेलफेयर एसोसिएशन उ०प्र० ने वर्ष 2004 से लंबित न्यूनतम मानदेय के अंतर बकाया, स्थायीकरण और रसोइयों के कल्याण से जुड़ी मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की है। एसोसिएशन ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइये प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत बहुत कम मानदेय पर कार्य कर रहे हैं, जिससे उनका जीविकोपार्जन कठिन हो रहा है। संगठन का कहना है कि इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। ज्ञापन में प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें रसोइयों से 11 माह के बजाय पूरे 12 माह कार्य लिए जाने और तदनुसार मानदेय देने की बात शामिल है। इसके अतिरिक्त, रसोइयों का नवीनीकरण स्वतः करने, प्रस्तावित प्रतिबंधों को समाप्त करने, मातृत्व अवकाश, मेडिकल सुविधा और 14 आकस्मिक अवकाश प्रदान करने की भी मांग की गई है। मृतक रसोइयों के स्थान पर उनके परिवार के सदस्य को नियुक्ति तथा न्याय पंचायत स्तर पर स्थानांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।1
- सिंगरौली। जियावन थाना क्षेत्र अंतर्गत एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म की गंभीर घटना सामने आई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।1
- जनपद सोनभद्र में आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और पहचान चोरी का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि कई व्यक्तियों के नाम और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बिना उनकी जानकारी के ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिए गए। सूत्रों के मुताबिक, मामला तब प्रकाश में आया जब कुछ लोगों को अपने नाम से जारी लाइसेंस की जानकारी परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर चेक करने के दौरान मिली। चौंकाने वाली बात यह रही कि संबंधित व्यक्तियों ने कभी लाइसेंस के लिए आवेदन ही नहीं किया था। इसके बावजूद उनके आधार व अन्य पहचान पत्रों का उपयोग कर लाइसेंस जारी कर दिए गए। बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल दलालों और विभागीय मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। आरोप है कि लर्निंग लाइसेंस और स्थायी लाइसेंस की प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर बायोमेट्रिक सत्यापन और फोटो मिलान जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं में गंभीर लापरवाही बरती गई। कई मामलों में परीक्षा दिए बिना ही लाइसेंस जारी कर दिए जाने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। संबंधित अभिलेखों की जांच की जा रही है और संदिग्ध लाइसेंसों की सूची तैयार की जा रही है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति के नाम पर फर्जी लाइसेंस जारी हुआ है तो वह तत्काल विभाग से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराए। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को चिन्हित किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने न केवल विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनता की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है।1