"क्या विभागीय तनाव ने ली एक पुलिस अफसर की जान? जांच रिपोर्ट में मौत की वजह तो मिली, पर 'वजह' का आधार गायब!" अजीत मिश्रा (खोजी) खाकी की खामोश मौत या सिस्टम का 'सुसाइडल' दबाव? दरोगा अजय गौड़ केस में 'डूबने' की थ्योरी ने सुलझाई गुत्थी, पर सुलगते सवालों के जवाब कौन देगा? ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) "हत्या नहीं, सरयू में डूबने से हुई दरोगा अजय गौड़ की मौत, डीआईजी ने किया खुलासा।" "क्लीन चिट या लीपापोती? मोबाइल अपराधी के पास और दरोगा की लाश नदी में... ये कैसी गुत्थी?" "क्या विभागीय तनाव ने ली एक पुलिस अफसर की जान? जांच रिपोर्ट में मौत की वजह तो मिली, पर 'वजह' का आधार गायब!" 🚨 दरोगा अजय गौड़ मौत मामले में हत्या की बात खारिज, डूबने की पुष्टि। 🚨 एम्स गोरखपुर की रिपोर्ट ने बदला केस का रुख, चोट के निशान नहीं। 🚨 खोजी सवाल: बाइक चोर के पास कैसे पहुँचा मृतक दरोगा का मोबाइल? जांच जारी। बस्ती। जिले के परशुरामपुर थाने में तैनात जांबाज उपनिरीक्षक (S.I.) अजय गौड़ की मौत का मामला फाइलों में भले ही 'हादसा' करार देकर बंद होने की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन जनमानस और पुलिस गलियारों में उठ रहे सवालों का शोर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बस्ती परिक्षेत्र के डीआईजी ने इसे हत्या नहीं, बल्कि सरयू में डूबने से हुई मौत बताकर अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है, परंतु पुलिसिया कार्यप्रणाली और अफसरशाही के दबाव पर सवालिया निशान अब और गहरे हो गए हैं। जांच रिपोर्ट: हत्या नहीं, पर हादसा भी गले नहीं उतर रहा बीते 5 फरवरी को अमहट घाट पर लावारिस खड़ी मोटरसाइकिल और फिर 8 फरवरी को सरयू की लहरों से बरामद हुआ दरोगा का शव—ये तस्वीरें आज भी बस्ती पुलिस के माथे पर पसीना ला देती हैं। पुलिस का दावा है कि एम्स गोरखपुर की मेडिकल टीम, फॉरेंसिक साक्ष्य और तकनीकी जांच में शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं। डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक, विशेषज्ञ राय और साक्ष्यों के आधार पर यह मौत दुर्घटनावश डूबने से हुई है। मोबाइल 'चोर' के पास, लाश 'नदी' में: अधूरा सच? हैरानी की बात यह है कि जांच के दौरान एक बाइक चोर के पास से मृतक दरोगा के मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस का कहना है कि उस चोर का मौत से सीधा संबंध नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि एक पुलिस अफसर का फोन आखिर एक अपराधी के पास कैसे पहुँचा? क्या यह महज इत्तेफाक था या फिर मौत से पहले और मौत के बाद के घटनाक्रम में कोई ऐसी कड़ी है जिसे 'सिस्टम' उजागर नहीं करना चाहता? सवाल: आखिर क्यों और किसके दबाव में डूबी 'खाकी'? पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट भले ही इसे 'डूबना' बता दे, लेकिन एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी, जो कानून व्यवस्था का रक्षक था, वो अचानक नदी के पास क्या कर रहा था? सवाल नंबर 1: क्या अजय गौड़ पर विभाग के किसी बड़े सिंडिकेट या काम का इतना मानसिक दबाव था कि उन्हें मौत आसान लगी? सवाल नंबर 2: अगर यह हादसा था, तो घाट के पास उस वक्त मौजूद सुरक्षा और गश्त की क्या स्थिति थी? सवाल नंबर 3: परिजनों द्वारा लगातार हत्या की आशंका जताना और पुलिस का उसे सिरे से खारिज कर देना, क्या जांच को जल्दबाजी में समेटने की कोशिश है? न्याय की आस में सवाल बेकरार बस्ती पुलिस ने 'हत्या' की थ्योरी को तो खारिज कर दिया, लेकिन 'आत्महत्या' की संभावनाओं और उसके पीछे के असली चेहरों पर चुप्पी साध ली है। अगर यह खुदकुशी थी, तो वो कौन से हालात थे जिन्होंने एक वर्दीधारी को सरयू की गोद में सोने पर मजबूर कर दिया? जब तक इन 'क्यों' और 'कैसे' का जवाब नहीं मिलता, तब तक अजय गौड़ की आत्मा और उनका परिवार न्याय की अधूरी चौखट पर खड़ा रहेगा।
"क्या विभागीय तनाव ने ली एक पुलिस अफसर की जान? जांच रिपोर्ट में मौत की वजह तो मिली, पर 'वजह' का आधार गायब!" अजीत मिश्रा (खोजी) खाकी की खामोश मौत या सिस्टम का 'सुसाइडल' दबाव? दरोगा अजय गौड़ केस में 'डूबने' की थ्योरी ने सुलझाई गुत्थी, पर सुलगते सवालों के जवाब कौन देगा? ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) "हत्या नहीं, सरयू में डूबने से हुई दरोगा अजय गौड़ की मौत, डीआईजी ने किया खुलासा।" "क्लीन चिट या लीपापोती? मोबाइल अपराधी के पास और दरोगा की लाश नदी में... ये कैसी गुत्थी?" "क्या विभागीय तनाव ने ली एक पुलिस अफसर की जान? जांच रिपोर्ट में मौत की वजह तो मिली, पर 'वजह' का आधार गायब!" 🚨 दरोगा अजय गौड़ मौत मामले में हत्या की बात खारिज, डूबने की पुष्टि। 🚨 एम्स गोरखपुर की रिपोर्ट ने बदला केस का रुख, चोट के निशान नहीं। 🚨 खोजी सवाल: बाइक चोर के पास कैसे पहुँचा मृतक दरोगा का मोबाइल? जांच जारी। बस्ती। जिले के परशुरामपुर थाने में तैनात जांबाज उपनिरीक्षक (S.I.) अजय गौड़ की मौत का मामला फाइलों में भले ही 'हादसा' करार देकर बंद होने की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन जनमानस और पुलिस गलियारों में उठ रहे सवालों का शोर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बस्ती परिक्षेत्र के डीआईजी ने इसे हत्या नहीं, बल्कि सरयू में डूबने से हुई मौत बताकर अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है, परंतु पुलिसिया कार्यप्रणाली और अफसरशाही के दबाव पर सवालिया निशान अब और गहरे हो गए हैं। जांच रिपोर्ट: हत्या नहीं, पर हादसा भी गले नहीं उतर रहा बीते 5 फरवरी को अमहट घाट पर लावारिस खड़ी मोटरसाइकिल और फिर 8 फरवरी को सरयू की लहरों से बरामद हुआ दरोगा का शव—ये तस्वीरें आज भी बस्ती पुलिस के माथे पर पसीना ला देती हैं। पुलिस का दावा है कि एम्स गोरखपुर की मेडिकल टीम, फॉरेंसिक साक्ष्य और तकनीकी जांच में शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं। डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक, विशेषज्ञ राय और साक्ष्यों के आधार पर यह मौत दुर्घटनावश डूबने से हुई है। मोबाइल 'चोर' के पास, लाश 'नदी' में: अधूरा सच? हैरानी की बात यह है कि जांच के दौरान एक बाइक चोर के पास से मृतक दरोगा के मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस का कहना है कि उस चोर का मौत से सीधा संबंध नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि एक पुलिस अफसर का फोन आखिर एक अपराधी के पास कैसे पहुँचा? क्या यह महज इत्तेफाक था या फिर मौत से पहले और मौत के बाद के घटनाक्रम में कोई ऐसी कड़ी है जिसे 'सिस्टम' उजागर नहीं करना चाहता? सवाल: आखिर क्यों और किसके दबाव में डूबी 'खाकी'? पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट भले ही इसे 'डूबना' बता दे, लेकिन एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी, जो कानून व्यवस्था का रक्षक था, वो अचानक नदी के पास क्या कर रहा था? सवाल नंबर 1: क्या अजय गौड़ पर विभाग के किसी बड़े सिंडिकेट या काम का इतना मानसिक दबाव था कि उन्हें मौत आसान लगी? सवाल नंबर 2: अगर यह हादसा था, तो घाट के पास उस वक्त मौजूद सुरक्षा और गश्त की क्या स्थिति थी? सवाल नंबर 3: परिजनों द्वारा लगातार हत्या की आशंका जताना और पुलिस का उसे सिरे से खारिज कर देना, क्या जांच को जल्दबाजी में समेटने की कोशिश है? न्याय की आस में सवाल बेकरार बस्ती पुलिस ने 'हत्या' की थ्योरी को तो खारिज कर दिया, लेकिन 'आत्महत्या' की संभावनाओं और उसके पीछे के असली चेहरों पर चुप्पी साध ली है। अगर यह खुदकुशी थी, तो वो कौन से हालात थे जिन्होंने एक वर्दीधारी को सरयू की गोद में सोने पर मजबूर कर दिया? जब तक इन 'क्यों' और 'कैसे' का जवाब नहीं मिलता, तब तक अजय गौड़ की आत्मा और उनका परिवार न्याय की अधूरी चौखट पर खड़ा रहेगा।
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के लालगंज में वन माफिया बेखौफ होकर सरेआम हरे पेड़ काट रहे हैं, जिससे 'ग्रीन यूपी' मिशन पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यह सब पुलिस और नेताओं के संरक्षण में हो रहा है, जिससे स्थानीय प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है। आक्रोशित ग्रामीण जिलाधिकारी से दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।2
- बस्ती जिले के प्रतापगढ़ कला में अशोक इंटर कॉलेज से मुख्य मार्ग तक जाने वाली सड़क बेहद खराब हालत में है। स्थानीय लोग इस जर्जर सड़क से काफी परेशान हैं और जल्द से जल्द इसकी मरम्मत की मांग कर रहे हैं।1
- डीएम की अध्यक्षता में भारत की जनगणना 2027 के क्रम में जनपद में स्वगणना के प्रगति की समीक्षा बैठक हुई आयोजित। संत कबीर नगर ।जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में भारत की जनगणना 2027 के क्रम में जनपद की जनगणना की प्रक्रिया में स्वगणना अवधि के दौरान स्वगणना (Self enumeration) के प्रगति की समीक्षा बैठक समस्त विभागाध्यक्षों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व)/जिला जनगणना अधिकारी जयप्रकाश व मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी उपस्थित रहे। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा जनपद के समस्त विभागध्यक्षों/अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा स्वगणना किए जाने की प्रगति की जानकारी प्राप्त करते हुए निर्देशित किया गया कि प्रत्येक दशा में कल दिनांक 12 मई को शाम तक अपनी स्वगणना पूर्ण करते हुए एसई आईडी प्राप्त कर लें। अपर जिलाधिकारी (वित्त व राजस्व)/जिला जनगणना अधिकारी जयप्रकाश ने कहा कि प्रदेश स्तर पर स्वगणना की प्रक्रिया में प्रगति की रैंकिंग देखी जा रही है, इसलिए यथाशीघ्र आज ही जनपद के समस्त अधिकारीगण स्वयं अपनी स्वगणना पूर्ण करते हुए अपने अधीनस्थ समस्त कर्मचारियों की स्वगणना करवाकर SEID सहित अपनी व्याख्या उपलब्ध करा दें जिससे दिनांक 13 मई से प्रगड़कों को क्षेत्र/गांवों में पुष्टि एवं अग्रिम कार्यवाही हेतु भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक जितने लोग स्वगणना अवधि (दिनाँक 07.05.2026 से दिनॉक 21.05.2026 तक) पोर्टल https://se.census.gov.in पर स्वगणना की प्रक्रिया पूर्ण कर लेंगे, आगामी प्रक्रिया में उतनी ही आसानी होगी। उन्होंने कहा कि स्वगणना से संबंधित उक्त पोर्टल से संबंधित बारकोड समस्त गांवों/ग्राम पंचायतों में चश्पा कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने भारत की जनगणना-2027 के अन्तर्गत दिनाँक 07.05.2026 से दिनॉक 21.05.2026 तक स्वगणना के दौरान समस्त जनपदवासियों से अपील किया है कि प्रत्येक व्यक्ति (https://se.census.gov.in) पोर्टल पर जाकर स्वगणना की प्रक्रिया सुगमता पूर्वक कर सकते हैं। पोर्टल पर स्वगणना की प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरान्त SEID सुरक्षित रखे। दिनॉक 22.05.2026 से 20.06.2026 के मध्य जब प्रगणक उनके बीच पहुंचे तो उन्हे यह SEID उपलब्ध कराये जिससे संबंधित व्यक्ति/परिवार की जनगणना पूर्ण हो सके। इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, वरिष्ठ कोषाधिकारी त्रिभुवन लाल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी चंद्रशेखर यादव, उप कृषि निदेशक डॉ राकेश कुमार सिंह, उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक हरिश्चंद्र नाथ, जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार, जिला कृषि अधिकारी सर्वेश कुमार यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी सत्येंद्र सिंह, तहसीलदार मेहदावल अल्पिका वर्मा, तहसीलदार धनघटा राम जी सहित संबंधित अधिकारी आदि उपस्थित रहे।4
- सुल्तानपुर: सगे बुआ के लड़के ने भाई पर चलाई गोली, पुलिस ने मौके से पिस्टल समेत किया गिरफ्तार *"आज दिनांक 11 मई, थाना अखंड नगर जनपद सुल्तानपुर में श्रवण निषाद पुत्र सभाजीत निवासी ग्राम डोमा थाना अखंड नगर को उसकी बुआ के लड़के प्रवीण निषाद द्वारा गोली मारकर घायल कर दिया गया है।वह खतरे से बाहर है, हायर सेंटर के लिए रेफर हुआ है। पब्लिक के सहयोग से पुलिस द्वारा अभियुक्त प्रवीण को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया है और घटना में प्रयुक्त पिस्तौल भी बरामद कर ली गई है।"* *उक्त के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी कादीपुर श्री विनय कुमार द्वारा बाइट...*1
- संतकबीरनगर के खलीलाबाद में पुलिस ने गैंगस्टर इसरार अहमद की अवैध संपत्ति पर बड़ी कार्रवाई की है। आपराधिक कमाई से खरीदी गई ₹7.60 लाख की स्विफ्ट कार को गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त कर लिया गया। पुलिस प्रशासन ने जिले में संगठित अपराध और अवैध कमाई करने वालों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है।1
- पूज्य राजन जी महाराज की श्रीराम कथा पहली बार संतकबीरनगर के मुखलिसपुर गायघाट में 16 से 24 फरवरी तक आयोजित होगी। इस दिव्य आयोजन की सूचना मिलते ही जनपद के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई है। कथा स्थल पर हजारों भक्तों के लिए बैठने, प्रसाद और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।1
- संत कबीर नगर के खलीलाबाद में एक खास कार्यक्रम की घोषणा की गई है। शहर के लोग इस आयोजन की विस्तृत जानकारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश में बैंक ऑफ इंडिया ने नीलामी के नाम पर एक खरीदार से ₹25 लाख ले लिए, लेकिन 18 महीने बाद भी संपत्ति का कब्ज़ा नहीं दिया। खरीदार अब भारी ब्याज पर लिए कर्ज तले दबा है, जबकि बैंक प्रशासन पर टालमटोल का आरोप लगा रहा है। इस मामले ने बैंकिंग प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।1