जुलाना कस्बे के तहसील कार्यालय परिसर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। भाकियू के जिला प्रधान नरेंद्र ढांडा की अध्यक्षता में बड़ी संख्या में किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। जिला प्रधान नरेंद्र ढांडा ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों और आम जनता के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से जुलाना तहसील को उपमंडल का दर्जा मिलने के बावजूद आवश्यक सुविधाओं की अनुपलब्धता और तहसील कार्यालय में कर्मचारियों की असंतोषजनक कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की, जिससे लोगों को अपने कार्य करवाने में परेशानी हो रही है। ढांडा ने केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की जा रही प्रस्तावित ट्रेड डील का भी कड़ा विरोध किया, जिसे उन्होंने किसान विरोधी बताते हुए देश के किसानों के लिए नुकसानदायक करार दिया। भाकियू ने मांग की कि सरकार इस डील को तुरंत वापस ले और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। धरने के दौरान किसान नेताओं ने किसान नेता रवि आजाद से जुड़े मामले को भी उठाया, जिसमें नार्को टेस्ट और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से पूरे मामले की जांच की मांग की गई, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। धरने के बाद भाकियू प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन एसडीएम होशियार सिंह को सौंपा। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होगा। इस अवसर पर कुलवंत लाठर, सुमित लाठर, नरेंद्र लाठर, कप्तान सिंह और बिजेंद्र मलिक सहित कई किसान नेता मौजूद थे।
जुलाना कस्बे के तहसील कार्यालय परिसर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। भाकियू के जिला प्रधान नरेंद्र ढांडा की अध्यक्षता में बड़ी संख्या में किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। जिला प्रधान नरेंद्र ढांडा ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों और आम जनता के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से जुलाना तहसील को उपमंडल का दर्जा मिलने के बावजूद आवश्यक सुविधाओं की अनुपलब्धता और तहसील कार्यालय में कर्मचारियों की असंतोषजनक कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की, जिससे लोगों को अपने कार्य करवाने में परेशानी हो रही है। ढांडा ने केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की जा रही प्रस्तावित ट्रेड डील का भी कड़ा विरोध किया, जिसे उन्होंने किसान विरोधी बताते हुए देश के किसानों के लिए नुकसानदायक करार दिया। भाकियू ने मांग की कि सरकार इस डील को तुरंत वापस ले और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। धरने के दौरान किसान नेताओं ने किसान नेता रवि आजाद से जुड़े मामले को भी उठाया, जिसमें नार्को टेस्ट और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से पूरे मामले की जांच की मांग की गई, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। धरने के बाद भाकियू प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन एसडीएम होशियार सिंह को सौंपा। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होगा। इस अवसर पर कुलवंत लाठर, सुमित लाठर, नरेंद्र लाठर, कप्तान सिंह और बिजेंद्र मलिक सहित कई किसान नेता मौजूद थे।
- भिवानी में एक व्यापारी को ₹5 करोड़ की रंगदारी के लिए जान से मारने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। धमकाने वाले ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि "5 करोड़ तैयार रखो वरना अंजाम भुगतो!" इस गंभीर मामले की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल अलर्ट हो गई है और पूरी सक्रियता के साथ जांच में जुट गई है।1
- हरियाणा के भिवानी में 65 वर्षों से रह रहे छह गरीब परिवारों को कथित रूप से उजाड़ने की कार्रवाई के विरोध में जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को दिनोद गेट क्षेत्र में हजारों लोगों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया, प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन का पुतला फूंककर अपना तीव्र विरोध दर्ज कराया। परिवारों के समर्थन में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक, किसान, कर्मचारी, व्यापारिक एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से बसे गरीब परिवारों को बेदखल करने का यह प्रयास अन्यायपूर्ण है, जिससे आम लोगों में भारी रोष है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल छह परिवारों की नहीं, बल्कि गरीब और कमजोर वर्गों के अधिकारों की लड़ाई है। संघर्ष समिति ने प्रशासन से मांग की कि इन परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जाए और उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय न होने दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिला और प्रशासन ने अपनी कार्रवाई वापस नहीं ली, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को पूरे शहर में बड़े स्तर पर छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।1
- चार धाम यात्रा पर जाने वाले सभी भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की गई है। इस चेतावनी के अनुसार, साल 2026 की यात्रा के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।1
- सोनीपत से मिली जानकारी के अनुसार, नहाने के ठीक बाद एयर कंडीशनर (AC) वाले कमरे में जाने से कुछ लोगों को असहजता का अनुभव हो सकता है। यह स्थिति विशेष रूप से तब अधिक problematic हो सकती है जब बाल और शरीर पूरी तरह से गीले हों। ठंडी और शुष्क एसी हवा के कारण व्यक्ति की नाक और गले की प्राकृतिक नमी प्रभावित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप, कुछ लोगों को सर्दी-जुकाम, सिर भारी महसूस होना या साइनस संबंधी समस्याओं में वृद्धि जैसी शिकायतें हो सकती हैं।1
- hiralalsuryvanshi ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️🪔 🪔🪔🪔 hiralalsuryvanshi 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷👺🐒🐒💐💐🌷👺🐒🐒🐒💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐1
- हरियाणा एक्स-सर्विसेज लीग (HESL) के आगामी चुनावों से पहले जारी नई वोटर लिस्ट पर गहरा विवाद छिड़ गया है, जिसने हजारों पूर्व सैनिकों के मतदान अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस नई सूची के कारण कुल सक्रिय मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे एक बड़े 'वोट घोटाले' और 'चुनाव से पहले बड़े खेल' की आशंका जताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले HESL चुनावों में कुल 7192 वोटर थे, लेकिन नई सक्रिय वोटर लिस्ट में यह संख्या घटकर केवल 3522 रह गई है। इसमें से 2348 मतदाताओं को 'पैसिव' और 1322 को 'एक्सपायर्ड' घोषित कर दिया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि कुल 3670 वोटर सक्रिय मतदान सूची से बाहर हो गए हैं। इस बदलाव का असर चुनावी गणित पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है, जैसे भिवानी में जहां पहले लगभग 8 डेलीगेट चुने जाने की संभावना थी, वहीं अब नई सूची के तहत सिर्फ 3 डेलीगेट ही चुने जाने की बात कही जा रही है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। पूर्व सैनिक समाज इस बड़े उलटफेर पर कई गंभीर सवाल उठा रहा है। वे जानना चाहते हैं कि क्या 'पैसिव वोटर' का प्रावधान HESL के संविधान में मौजूद है और क्या हजारों पूर्व सैनिकों के मतदान अधिकार इससे प्रभावित हुए हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया है या फिर चुनावी समीकरणों को बदलने की सोची-समझी रणनीति। समुदाय यह भी तुलना कर रहा है कि पिछली कार्यकारिणी बेहतर थी या नई प्रशासनिक व्यवस्था। FOJI NEWS24 के माध्यम से यह जानकारी सामने आने के बाद, पूरा पूर्व सैनिक समाज अब जानना चाहता है कि आगामी चुनाव में कौन-कौन मैदान में उतरेगा और अंततः HESL की कमान किसके हाथ में जाएगी। इस पूरे मामले पर 'पूर्व सैनिकों के अधिकार' और 'सैनिक सम्मान' के लिए सवाल उठ रहे हैं, और फैसला अब पूर्व सैनिकों के हाथ में है कि वे इस 'मतदाता सूची विवाद' पर अपनी क्या राय रखते हैं। इस खबर को FOJI NEWS24 के मुख्य संपादक महेश चौहान ने उठाया है।1
- दर्शकों को हरियाणा की आज की 50 प्रमुख खबरें देखने के लिए आमंत्रित किया गया है, और उनसे आगे भी जुड़े रहने का आग्रह किया गया है।1
- हरियाणा के चैनत गाँव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच भारी बवाल हो गया। कई जिलों से भारी पुलिस बल गाँव में 'टी' उखाड़ने के लिए पहुँचा था, जिसके बाद ग्रामीण और पुलिस आमने-सामने आ गए। इस तनावपूर्ण टकराव के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।1