*हटा का भदभदा वाटरफॉल बना ‘खतरे का पिकनिक स्पॉट’, जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों में* *पिछले हादसे से नहीं लिया सबक, भदभदा में फिर जान जोखिम में डाल रहे लोग* दमोह जिले के हटा क्षेत्र स्थित भदभदा वाटरफॉल एक बार फिर गर्मी के मौसम में लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। हर दिन यहां बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, परिवार और आसपास के ग्रामीण नहाने, पिकनिक मनाने और मौज-मस्ती करने पहुंच रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? गौरतलब है कि पिछले वर्ष मई 2024 में इसी भदभदा वाटरफॉल में एक युवक की डूबने से मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया था और तत्काल धारा-144 लागू करते हुए लोगों के आने-जाने और नहाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। पुलिस बल, चौकीदारों की तैनाती की गई थी और पंचमनगर डैम से छोड़ा जाने वाला पानी भी बंद कराया गया था। प्रशासन ने तब सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन अब वही भदभदा वाटरफॉल फिर से भीड़ से भरने लगा है और हैरानी की बात यह है कि मौके पर न तो कोई सुरक्षा गार्ड दिखाई देता है, न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग और न ही किसी प्रकार की निगरानी व्यवस्था। लोग गहरे पानी में उतरकर सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं, युवक ऊंचाई से छलांग लगा रहे हैं और कई लोग बिना किसी डर के तेज बहाव वाले हिस्सों तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल हादसे के बाद सक्रिय होता है। जब तक किसी की जान नहीं जाती, तब तक कोई नियम लागू नहीं किया जाता। पिछले साल हुई घटना के बाद कुछ दिनों तक सख्ती जरूर दिखाई गई, लेकिन समय बीतते ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब फिर वही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। भदभदा वाटरफॉल सुनार नदी पर स्थित है और गर्मी के दिनों में पंचमनगर डैम से पानी छोड़े जाने के कारण यहां पानी बना रहता है। इसी वजह से दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। छुट्टी वाले दिनों में तो यहां मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है। लेकिन जितनी तेजी से लोगों की संख्या बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से खतरा भी बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो यहां स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है। वाटरफॉल के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाए जा सकते हैं, खतरनाक क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की जा सकती है, पुलिस या होमगार्ड की ड्यूटी लगाई जा सकती है और लाइफ जैकेट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का यह भी आरोप है कि सोशल मीडिया पर भदभदा वाटरफॉल के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके कारण यहां आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई युवक जोखिम उठाकर रील और वीडियो बनाने में लगे रहते हैं। प्रशासन को इस बढ़ती भीड़ का अंदाजा होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। क्षेत्र के सामाजिक लोगों का कहना है कि प्रशासन को हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए। समय रहते यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर गर्मी की छुट्टियों में बच्चों और युवाओं की भीड़ बढ़ने से खतरा और ज्यादा हो जाता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत भदभदा वाटरफॉल क्षेत्र का निरीक्षण करे और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करे। जरूरत पड़ने पर सीमित प्रवेश, निगरानी कैमरे और अस्थायी पुलिस चौकी जैसी व्यवस्था भी की जानी चाहिए ताकि लोगों की जान सुरक्षित रह सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार पहले से तैयारी करता है या फिर किसी नई दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई देखने को मिलेगी। फिलहाल भदभदा वाटरफॉल पर उमड़ती भीड़ और लापरवाही भरे हालात लोगों की चिंता बढ़ा रहे
*हटा का भदभदा वाटरफॉल बना ‘खतरे का पिकनिक स्पॉट’, जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों में* *पिछले हादसे से नहीं लिया सबक, भदभदा में फिर जान जोखिम में डाल रहे लोग* दमोह जिले के हटा क्षेत्र स्थित भदभदा वाटरफॉल एक बार फिर गर्मी के मौसम में लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। हर दिन यहां बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, परिवार और आसपास के ग्रामीण नहाने, पिकनिक मनाने और मौज-मस्ती करने पहुंच रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? गौरतलब है कि पिछले वर्ष मई 2024 में इसी भदभदा वाटरफॉल में एक युवक की डूबने से मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया था और तत्काल धारा-144 लागू करते हुए लोगों के आने-जाने और नहाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। पुलिस बल, चौकीदारों की तैनाती की गई थी और पंचमनगर डैम से छोड़ा जाने वाला पानी भी बंद कराया गया था। प्रशासन ने तब सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन अब वही भदभदा वाटरफॉल फिर से भीड़ से भरने लगा है और हैरानी की बात यह है कि मौके पर न तो कोई सुरक्षा गार्ड दिखाई देता है, न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग और न ही किसी प्रकार की निगरानी व्यवस्था। लोग गहरे पानी में उतरकर सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं, युवक ऊंचाई से छलांग लगा रहे हैं और कई लोग बिना किसी डर के तेज बहाव वाले हिस्सों तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल हादसे के बाद सक्रिय होता है। जब तक किसी की जान नहीं जाती, तब तक कोई नियम लागू नहीं किया जाता। पिछले साल हुई घटना के बाद कुछ दिनों तक सख्ती जरूर दिखाई गई, लेकिन समय बीतते ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब फिर वही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। भदभदा वाटरफॉल सुनार नदी पर स्थित है और गर्मी के दिनों में पंचमनगर डैम से पानी छोड़े जाने के कारण यहां पानी बना रहता है। इसी वजह से दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। छुट्टी वाले दिनों में तो यहां मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है। लेकिन जितनी तेजी से लोगों की संख्या बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से खतरा भी बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो यहां स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है। वाटरफॉल के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाए जा सकते हैं, खतरनाक क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की जा सकती है, पुलिस या होमगार्ड की ड्यूटी लगाई जा सकती है और लाइफ जैकेट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का यह भी आरोप है कि सोशल मीडिया पर भदभदा वाटरफॉल के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके कारण यहां आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई युवक जोखिम उठाकर रील और वीडियो बनाने में लगे रहते हैं। प्रशासन को इस बढ़ती भीड़ का अंदाजा होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। क्षेत्र के सामाजिक लोगों का कहना है कि प्रशासन को हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए। समय रहते यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर गर्मी की छुट्टियों में बच्चों और युवाओं की भीड़ बढ़ने से खतरा और ज्यादा हो जाता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत भदभदा वाटरफॉल क्षेत्र का निरीक्षण करे और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करे। जरूरत पड़ने पर सीमित प्रवेश, निगरानी कैमरे और अस्थायी पुलिस चौकी जैसी व्यवस्था भी की जानी चाहिए ताकि लोगों की जान सुरक्षित रह सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार पहले से तैयारी करता है या फिर किसी नई दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई देखने को मिलेगी। फिलहाल भदभदा वाटरफॉल पर उमड़ती भीड़ और लापरवाही भरे हालात लोगों की चिंता बढ़ा रहे
- विधुत वितरण केंद्र हर्रई तेजगढ़ अंतर्गत आने वाले ग्राम बीजाडोगरी 100 एचपी के ट्रांसफार्मर कि केवल 10 पोल की केवल खराब जमीन से झूलतीं चलती हुई केवल मवेशी या कोई इंसान आ सकता है चपेट में1
- जिले के प्रभारी मंत्री श्री परमार 14 मई को आयेंगे दमोह,विभागीय योजनाओं की करेंगे समीक्षा जिले के प्रभारी मंत्री श्री परमार 14 मई को आयेंगे दमोह,विभागीय योजनाओं की करेंगे समीक्षा दमोह.प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा व जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार की अध्यक्षता में 14 मई 2026 को अपरान्ह 3 बजे कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई है. कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने निर्देशित किया है.1
- यह वायरल संदेश माँ दुर्गा की भक्ति में पूरी तरह डूब जाने का आह्वान करता है। दावा है कि सच्ची श्रद्धा से जीवन के सभी दुख-दर्द मिट जाते हैं। 'जय माता दी' के साथ यह आध्यात्मिक प्रेरणा सोशल मीडिया पर खूब साझा की जा रही है।1
- दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में पंचायत सचिव जुगराज सिंह लोधी को सागर लोकायुक्त ने ₹6000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। यह रिश्वत पीएम आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के बदले मांगी गई थी, जिसे लेने के बाद सचिव ने चौकीदार को दे दिया।1
- पीएम आवास की किस्त के नाम पर रिश्वतखोरी का भंडाफोड़: दमोह में पंचायत सचिव 6 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक की तेजगढ़ ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सागर लोकायुक्त की टीम ने सोमवार दोपहर पंचायत सचिव जुगराज सिंह लोधी को 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई पंचायत भवन में की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार तेजगढ़ निवासी महेंद्र कोष्ठी की पत्नी के नाम पीएम आवास योजना के तहत 1 लाख 20 हजार रुपए स्वीकृत हुए थे। आरोप है कि दूसरी किस्त जारी करने के बदले पंचायत सचिव जुगराज सिंह लोधी ने 15 हजार रुपए की मांग की थी। पीड़ित का कहना है कि रकम नहीं देने पर उसकी किस्त रोक दी गई थी। मामले में सरपंच प्रतिनिधि पर भी रुपए मांगने के आरोप लगाए गए हैं। महेंद्र कोष्ठी ने बताया कि उसने पहले 4 हजार रुपए दे दिए थे, लेकिन लगातार हो रही मांग से परेशान होकर 16 अप्रैल को सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। सोमवार को महेंद्र पंचायत भवन पहुंचा और सचिव को 6 हजार रुपए दिए। सचिव ने तुरंत रकम चौकीदार गुड्डा रैकवार को थमा दी। इसी दौरान पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने दोनों को पकड़ लिया। केमिकल लगे नोटों की पुष्टि के लिए जब दोनों के हाथ धुलाए गए तो लाल रंग निकल आया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम दोनों आरोपियों को अपने साथ ले गई और आगे की कार्रवाई शुरू की गई। लोकायुक्त निरीक्षक मंजू किरण तिर्की ने बताया कि पंचायत सचिव जुगराज सिंह लोधी और चौकीदार गुड्डा रैकवार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। गौरतलब है कि जिले में पिछले एक सप्ताह के भीतर लोकायुक्त की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 5 मई को जबलपुर नाका स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास शिक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों को नौकरी बहाली और जांच खत्म कराने के नाम पर 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था। लगातार हो रही कार्रवाइयों के बावजूद सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। यही वजह है कि अब आम लोग भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ सीधे लोकायुक्त का सहारा ले रहे हैं। तेजगढ़ की इस कार्रवाई के बाद जिले के कई विभागों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।1
- दमोह कलेक्टर नारायण प्रताप यादव ने जिले में पदस्थ सभी अधिकारियों को दिया मोटिवेशन संदेश। जमीन पर उतरें अधिकारी नहीं तो अस्तित्व हो जाएगा खत्म।1
- दमोह कलेक्टर परिसर में हमला करने वाले मनुवादि पत्रकारों को जूता मारो सालों को........महेंद्र लोधी के फांसी लगाने के बाद 11 फरवरी2026 को बड़ी संख्या में लोगों ने कलेक्टर परिसर में आंदोलन किया था फिर आंदोलनकारियों पर St SC ACT में FIR की गई थी #ओबीसी_महासभा ने आंदोलन की चेतावनी दी थी कि 28 फरवरी को आंदोलन करेंगे जिसके दवाब में SIT बनाई गई थी 15 दिन का समय दिया गया था लेकिन 48 दिन को गए अभी तक जांच नहीं आई Collector Office Damoh महोदय जी जो भी जांच हो उसको सार्वजनिक किया जाए। और उन दोषियों पर कार्यवाही की जाए जो कुछ पत्रकार और उपद्रवी बनकर आंदोलन को विफल करने का षड्यंत्र रचे थे जिसके वीडियो फोटो हे सबूत हे रिकॉर्डिंग हे सच तो आयेगा सामने, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम इस केस का पूरे देश में प्रचार करेंगे कि कैसे फर्जी ST SC ACT लगवाकर OBC समाज के क्रांतिकारियों पर लगाकर पिछड़ा वर्ग को ST SC ACT के खिलाफ खड़ा किया जा रहा हे,यह केस मावूली नहीं हे ये हम जानते हे कि प्रशासन और नेताओं ने कितनी बड़ी भूल की हे अब अति हो रही हे ओबीसी महासभा को मजबूर किया जा रहा हे Damoh Police महोदय जी बहुत लंबा समय हो गया अब जांच रिपोर्ट प्रदर्शित की जाए 15 दिन की जगह 60 दिन हो गए। इससे प्रशासन का लचक रवैया प्रदर्शित होता हे 28 फरवरी को जो आंदोलन होने जा रहा था उससे 10 गुना बड़ा आंदोलन होगा और 2दिन बाद हम इसकी date तय कर देगे उम्मीद हे कि दो दिन में रिपोर्ट प्रदर्शित कर दी जाएगी जय संविधान जय भारत जोहार इंकलाब जिंदाबाद1
- खुले में पड़ा है किसानों का गेहूं, परिवहन ठप तो भुगतान भी बंद… दमोह कलेक्टर का दमोह जिले के समस्त अधिकारियों मोटिवेशन संदेश।1