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यह पोस्ट भारत की आत्म-छवि और उसकी वैश्विक स्थिति के बीच एक कथित विसंगति को उजागर करते हुए एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसमें कहा गया है कि जहाँ भारत में लोग स्वयं को 'ऊंची जाति' का मानते हैं, वहीं अन्य देशों में इस सामाजिक वर्गीकरण को कोई महत्व नहीं दिया जाता और वहाँ केवल वित्तीय मूल्य ही मायने रखता है। यह पोस्ट आगे इस बात पर जोर देती है कि भारत केवल नाम का विश्वगुरु है, क्योंकि देश के बाहर उसकी छवि 'काफी खराब' है, इसके बावजूद कि देश के भीतर जातिगत पहचान पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
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यह पोस्ट भारत की आत्म-छवि और उसकी वैश्विक स्थिति के बीच एक कथित विसंगति को उजागर करते हुए एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसमें कहा गया है कि जहाँ भारत में लोग स्वयं को 'ऊंची जाति' का मानते हैं, वहीं अन्य देशों में इस सामाजिक वर्गीकरण को कोई महत्व नहीं दिया जाता और वहाँ केवल वित्तीय मूल्य ही मायने रखता है। यह पोस्ट आगे इस बात पर जोर देती है कि भारत केवल नाम का विश्वगुरु है, क्योंकि देश के बाहर उसकी छवि 'काफी खराब' है, इसके बावजूद कि देश के भीतर जातिगत पहचान पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
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- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नीमच में एक प्रेस वार्ता के दौरान सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले से लेकर जावद जनपद में फैले भ्रष्टाचार तक के विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। इस दौरान पटवारी ने दृढ़ता से कहा कि मध्य प्रदेश में अगली सरकार जनता और किसानों की ही बनेगी।1
- नीमच जिले के मनासा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक प्रॉपर्टी कारोबारी ने कॉलोनी में निवेश के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। मनासा निवासी प्रॉपर्टी कारोबारी मोइउद्दीन मंसुरी बुधवार को अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों के साथ नीमच एसपी कार्यालय पहुँचे और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर डॉ. अनवर मेवाती तथा बबलू शेख के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मंसुरी के अनुसार, शालीमार कॉलोनी में हिस्सेदारी दिलाने के झांसे में आकर उनसे 41 लाख 40 हजार रुपये का निवेश कराया गया। इस भारी-भरकम राशि की व्यवस्था के लिए पीड़ित ने अपने पिता से पैसे लिए, अपने दो प्लॉट बेचे और यहाँ तक कि अपना मकान भी बेच दिया। बाद में उन्हें पता चला कि कॉलोनी के सौदे और हिस्सेदारी से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ उनसे छिपाई गई थीं। जब उन्होंने अपनी निवेश राशि और मुनाफे का हिसाब माँगा, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। इस आर्थिक और मानसिक तनाव के चलते मोइउद्दीन मंसुरी ने 16 फरवरी 2026 को जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास भी किया था, हालाँकि समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। उन्होंने बताया कि इस घटना से जुड़े वीडियो और सुसाइड नोट भी मौजूद हैं। मंसुरी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, और उन्हें जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। अब पीड़ित ने पुलिस प्रशासन को पाँच दिन का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे परिवार सहित एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे। फिलहाल, पुलिस प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है, और सभी आरोपों की गहन जाँच के बाद ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1
- मंदसौर जिला जेल के जेलर पी.के. सिंह के सेवानिवृत्त होने पर एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर संयुक्त बेरोजगार सेना के प्रदेश अध्यक्ष वकील बंजारा ने उनका स्वागत और सम्मान किया। पी.के. सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जेल केवल सजा देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र है। वकील बंजारा ने उनके कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि पी.के. सिंह ने जेल को एक आदर्श सुधार गृह के रूप में विकसित किया। समारोह में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और नागरिकों ने पी.के. सिंह को स्वस्थ और सफल सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएं दीं।1
- नीमच स्थित मंगलम होटल में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान, जीतू पटवारी ने संगठन की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन को बूथ स्तर से मजबूत करना होगा और इसके लिए कार्यकर्ताओं को जनता के बीच सक्रिय रहने का मंत्र दिया।1
- मंदसौर में कांग्रेस विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में चल रहे शिवना शुद्धिकरण मिशन ने आज अपने 127 दिन पूरे कर लिए हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर पूर्व सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुईं। यह जानकारी साधना न्यूज़ के हैदर खान बागवान द्वारा दी गई है।1
- मंदसौर जिले में उस समय हड़कम्प मच गया जब लोकायुक्त की टीम ने सामान्य वन मंडल में कार्रवाई करते हुए एक बाबू को ₹3000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। यह मामला तब सामने आया जब एक वन रक्षक ने 43 दिन की बीमारी अवकाश के लिए आवेदन किया था। लेखा शाखा के बाजू से जुड़े बाबू ने इस छुट्टी के बदले में वन रक्षक से ₹3000 की माँग की। इसके बाद वन रक्षक ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद लोकायुक्त की टीम ने समय पर आकर बाबू को ₹3000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचारी के गढ़ में लोकायुक्त द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण कार्रवाई बताई जा रही है।1
- पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भगवान के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। इसमें आग्रह किया गया है कि व्यक्ति को भगवान में विश्वास रखना चाहिए, लेकिन अंधविश्वास से पूरी तरह बचना चाहिए। लोगों को विशेष रूप से उन व्यक्तियों से दूर रहने की सलाह दी गई है जो धर्म को एक व्यवसाय का रूप दे रहे हैं।1
- नीमच जिले के जनजाति बहुल गाँव खातीखेड़ा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं और अधिकारियों को मौके पर ही उनके समाधान के निर्देश दिए। कलेक्टर सहित सभी जिला अधिकारी लगभग दो घंटे का बस सफर तय करके इस गाँव पहुँचे थे। शिविर में ग्रामीणों द्वारा पेयजल, सड़क, बिजली और शिक्षा से संबंधित मुख्य मुद्दे उठाए गए। इन समस्याओं पर कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि अगले डेढ़ माह के भीतर हर घर में नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए, तथा तीन दिन के अंदर सड़क मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाए। इसके अतिरिक्त, खातीखेड़ा मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में अपग्रेड करने का प्रस्ताव भेजने, विद्युत लाइनों का सर्वेक्षण करने और वन तथा राजस्व से जुड़े लंबित विवादों का निपटारा करने के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।1
- नीमच जिले के रामपुरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मजिरिया से एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। गांव के मुख्य चौराहे पर, वार्ड क्रमांक 10 के कांची मोहल्ला जाने वाले मार्ग के सामने स्थित पंचायत का सरकारी कुआँ पूरी तरह जर्जर अवस्था में है। जानकारी के अनुसार, इस कुएँ की मुंडेर क्षतिग्रस्त हो चुकी है और कुएँ का स्तर सड़क के बराबर होने के कारण यह खुला पड़ा हुआ है। ऐसे में यहाँ से गुजरने वाले बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं के लिए लगातार बड़ा खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले भी दो बकरी के बच्चे इसी कुएँ में गिर चुके हैं, जिन्हें ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया था। बावजूद इसके, अब भी कुएँ की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द ही इस कुएँ की मरम्मत कर सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस संभावित खतरे को टालने के लिए कब तक जरूरी कदम उठाए जाते हैं।1