आज के संदेश में 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे' और 'हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे' मंत्र के जाप के साथ सभी भक्तों को शुभकामनाएं दी गई हैं। श्रीकृष्ण की वाणी में कहा गया है कि जीवन में हर चीज़ को पकड़कर रखना ज़रूरी नहीं; कुछ चीज़ों को छोड़ देना भी आगे बढ़ने का एक सुंदर तरीका है। हर इच्छा का पूरा होना या हर संबंध का हमेशा साथ रहना आवश्यक नहीं, लेकिन हर अनुभव कुछ न कुछ ज़रूर सिखाता है। जो छोड़ना सीख जाता है, वही मन की स्वतंत्रता और शांति प्राप्त करता है। संदेश में जोर दिया गया है कि जो चला गया, उससे मन को न बांधें, बल्कि जो आज है, उसे प्रेम से अपनाएं। इसी क्रम में, एक दृष्टांत के माध्यम से बताया गया है कि कैसे एक छोटा अंकुश विशाल हाथी को वश में कर लेता है, वैसे ही परमात्मा का 'राम' नाम का पवित्र मंत्र बड़े से बड़े संकट और मन के विकारों को शांत करता है। 'सत्य और सुंदर राम' की राह पर चलने का अर्थ विपरीत परिस्थितियों में भी विनम्रता और धैर्य का त्याग न करना है। जीवन के दुखों को लेकर कहा गया है कि दुख का आना स्वाभाविक है, लेकिन उससे जुड़कर दुखी होना या न होना व्यक्ति पर निर्भर करता है। धनुष से निकला तीर, बंदूक से निकली गोली और जुबान से निकली बोली कभी लौटती नहीं, बल्कि विध्वंस करती है। जीने के लिए अपनों की नहीं, बल्कि अपनेपन की ज़रूरत होती है। शब्दों का वजन बोलने वाले के भाव पर आधारित होता है, जहां एक शब्द मंत्र बन जाता है तो वही कोई शब्द गाली। वाणी ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचय कराती है। प्रशंसक और शुभचिंतक में अंतर यह है कि प्रशंसक अच्छी परिस्थितियों में दिखते हैं, जबकि शुभचिंतक जीवन की हर परिस्थिति में साथ होते हैं। एक लीला प्रसंग में बरसाने के पास स्थित मोर-कुटी का वर्णन किया गया है, जहाँ राधाजी ठाकुरजी से रूठकर एक मोर से लाड कर रही थीं। जब ठाकुरजी उन्हें मनाने पहुँचे, तो उन्होंने मोर से ईर्ष्यावश राधाजी को मनाने का प्रयास किया। किशोरी जी ने शर्त रखी कि उनकी नाराजगी तभी दूर होगी जब ठाकुरजी उस मोर को नृत्य प्रतियोगिता में हरा देंगे। प्रभु सहर्ष तैयार हो गए और नाचने लगे, लेकिन राधाजी को लगा कि यदि बाँकेबिहारी जीत गए तो बरसाने के मोर किसी को मुँह नहीं दिखा पाएंगे। अपनी कृपा-दृष्टि से उन्होंने मोर को ऐसा नचाया कि उसने ठाकुरजी को थकाकर हरा दिया। इस कथा के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि जिस पर राधे जू की कृपा हो, वह प्रभु को भी हरा सकता है, और जिसने राधारानी के प्यार को जीत लिया, उसने कृष्णजी को भी जीत लिया, क्योंकि ठाकुरजी किशोरी जी के चरणों के सेवक हैं। यह भी बताया गया है कि जिह्वा से राधा नाम का उच्चारण उनकी कृपा से ही होता है, और सिर्फ 'रा' कहने से बाँकेबिहारी के कान खड़े हो जाते हैं, और पूरा 'राधा' कहने पर वे भक्त के साथ चलने के लिए स्वयं खड़े हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, चने की दाल के पाँच फायदे भी बताए गए हैं। यह शरीर में आयरन की कमी पूरी कर हीमोग्लोबिन बढ़ाती है और अमीनो एसिड से कोशिकाओं को मजबूत करती है। यह डायबिटीज नियंत्रण में सहायक है, ग्लूकोज के अवशोषण में मदद करती है, और इसका बेसन त्वचा पर लगाने से सौंदर्य बढ़ता है। चने की दाल कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देती है और पीलिया में भी फायदेमंद है। फाइबर से भरपूर यह दाल कोलेस्ट्रॉल कम कर वजन घटाने में मदद करती है और पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी है। अंत में, यह जिंक, कैल्शियम, प्रोटीन, फोलेट से भरपूर होकर ज़रूरी ऊर्जा प्रदान करती है और पेट की समस्याओं के लिए भी फायदेमंद है।
आज के संदेश में 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे' और 'हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे' मंत्र के जाप के साथ सभी भक्तों को शुभकामनाएं दी गई हैं। श्रीकृष्ण की वाणी में कहा गया है कि जीवन में हर चीज़ को पकड़कर रखना ज़रूरी नहीं; कुछ चीज़ों को छोड़ देना भी आगे बढ़ने का एक सुंदर तरीका है। हर इच्छा का पूरा होना या हर संबंध का हमेशा साथ रहना आवश्यक नहीं, लेकिन हर अनुभव कुछ न कुछ ज़रूर सिखाता है। जो छोड़ना सीख जाता है, वही मन की स्वतंत्रता और शांति प्राप्त करता है। संदेश में जोर दिया गया है कि जो चला गया, उससे मन को न बांधें, बल्कि जो आज है, उसे प्रेम से अपनाएं। इसी क्रम में, एक दृष्टांत के माध्यम से बताया गया है कि कैसे एक छोटा अंकुश विशाल हाथी को वश में कर लेता है, वैसे ही परमात्मा का 'राम' नाम का पवित्र मंत्र बड़े से बड़े संकट और मन के विकारों को शांत करता है। 'सत्य और सुंदर राम' की राह पर चलने का अर्थ विपरीत परिस्थितियों में भी विनम्रता और धैर्य का त्याग न करना है। जीवन के दुखों को लेकर कहा गया है कि दुख का आना स्वाभाविक है, लेकिन उससे जुड़कर दुखी होना या न होना व्यक्ति पर निर्भर करता है। धनुष से निकला तीर, बंदूक से निकली गोली और जुबान से निकली बोली कभी लौटती नहीं, बल्कि विध्वंस करती है। जीने के लिए अपनों की नहीं, बल्कि अपनेपन की ज़रूरत होती है। शब्दों का वजन बोलने वाले के भाव पर आधारित होता है, जहां एक शब्द मंत्र बन जाता है तो वही कोई शब्द गाली। वाणी ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचय कराती है। प्रशंसक और शुभचिंतक में अंतर यह है कि प्रशंसक अच्छी परिस्थितियों में दिखते हैं, जबकि शुभचिंतक जीवन की हर परिस्थिति में साथ होते हैं। एक लीला प्रसंग में बरसाने के पास स्थित मोर-कुटी का वर्णन किया गया है, जहाँ राधाजी ठाकुरजी से रूठकर एक मोर से लाड कर रही थीं। जब ठाकुरजी उन्हें मनाने पहुँचे, तो उन्होंने मोर से ईर्ष्यावश राधाजी को मनाने का प्रयास किया। किशोरी जी ने शर्त रखी कि उनकी नाराजगी तभी दूर होगी जब ठाकुरजी उस मोर को नृत्य प्रतियोगिता में हरा देंगे। प्रभु सहर्ष तैयार हो गए और नाचने लगे, लेकिन राधाजी को लगा कि यदि बाँकेबिहारी जीत गए तो बरसाने के मोर किसी को मुँह नहीं दिखा पाएंगे। अपनी कृपा-दृष्टि से उन्होंने मोर को ऐसा नचाया कि उसने ठाकुरजी को थकाकर हरा दिया। इस कथा के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि जिस पर राधे जू की कृपा हो, वह प्रभु को भी हरा सकता है, और जिसने राधारानी के प्यार को जीत लिया, उसने कृष्णजी को भी जीत लिया, क्योंकि ठाकुरजी किशोरी जी के चरणों के सेवक हैं। यह भी बताया गया है कि जिह्वा से राधा नाम का उच्चारण उनकी कृपा से ही होता है, और सिर्फ 'रा' कहने से बाँकेबिहारी के कान खड़े हो जाते हैं, और पूरा 'राधा' कहने पर वे भक्त के साथ चलने के लिए स्वयं खड़े हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, चने की दाल के पाँच फायदे भी बताए गए हैं। यह शरीर में आयरन की कमी पूरी कर हीमोग्लोबिन बढ़ाती है और अमीनो एसिड से कोशिकाओं को मजबूत करती है। यह डायबिटीज नियंत्रण में सहायक है, ग्लूकोज के अवशोषण में मदद करती है, और इसका बेसन त्वचा पर लगाने से सौंदर्य बढ़ता है। चने की दाल कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देती है और पीलिया में भी फायदेमंद है। फाइबर से भरपूर यह दाल कोलेस्ट्रॉल कम कर वजन घटाने में मदद करती है और पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी है। अंत में, यह जिंक, कैल्शियम, प्रोटीन, फोलेट से भरपूर होकर ज़रूरी ऊर्जा प्रदान करती है और पेट की समस्याओं के लिए भी फायदेमंद है।
- भरतपुर में हुई हनुमान बेनीवाल की रैली के नजारे पर तंज कसते हुए एक सवाल उठाया गया है। पोस्ट में यह सवाल किया गया है कि '16 दूनी 8' की बातें किससे सुनी हैं, जो रैली से जुड़े किसी बयान या दावे पर कटाक्ष जैसा प्रतीत होता है।1
- मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भाजपा के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक ओमप्रकाश सकलेचा बांगरेड गाँव में एक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुँचे थे। इस दौरान, ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित सड़क निर्माण का मुद्दा उठाते हुए विधायक से अपना वादा पूरा करने की माँग की। बताया जा रहा है कि सड़क को लेकर सवाल पूछे जाने पर विधायक ने कथित तौर पर कहा, "वोट देना है तो दो..."। इस कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें चुनाव के दौरान सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। विधायक के इस बयान को विपक्ष ने जनता का अपमान बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, विधायक के समर्थक दावा कर रहे हैं कि उनके बयान को उसके संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सड़क निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है, जिससे प्रदेश में सियासी घमासान छिड़ गया है।1
- राजस्थान की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके रविंद्र सिंह भाटी एक बार फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे एक वीडियो में, उन्हें बिना किसी बड़े काफिले या सुरक्षा तामझाम के अपनी गाड़ी खुद चलाते हुए देखा गया। इसी दौरान, ट्रैफिक के बीच एक राहगीर की आवाज़ सुनाई दी, जिसने कहा, 'अबकी बार आप एमपी फिक्स हो।' यह टिप्पणी रविंद्र सिंह भाटी के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे और समर्थन की झलक के रूप में सामने आई है। समर्थकों का मानना है कि रविंद्र सिंह भाटी का यह सादगी भरा अंदाज़ और आम लोगों से सीधा जुड़ाव ही उनकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमुख कारण है। इस वीडियो को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी ज़ोरदार चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, यह भले ही एक राहगीर की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया थी, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे व्यापक रूप से जनता के मूड और भाटी के प्रति बढ़ते समर्थन के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।1
- जयपुर में एक आवासीय सोसायटी में 22 वर्षीय युवती के साथ छेड़छाड़ और मारपीट का मामला सामने आया है, जिसमें पड़ोस में रहने वाले एक युवक पर आरोप है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार रात को युवती अपनी सोसायटी के ग्राउंड फ्लोर पर टहल रही थी, तभी ब्लॉक-9 और ब्लॉक-10 के बीच एक सुनसान जगह पर उसी सोसायटी के एक युवक ने उसे रोक लिया। आरोप है कि युवक ने युवती को पकड़कर उसके साथ छेड़छाड़ की और जबरदस्ती करने का प्रयास किया। जब युवती ने विरोध किया और शोर मचाया, तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। युवती के चीखने-चिल्लाने पर आरोपी उसे जान से मारने की धमकी देकर मौके से भाग गया। घटना के बाद, घायल युवती ने सोसायटी के अन्य लोगों को अपनी आपबीती सुनाई और परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद उसे प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसके उपरांत, युवती अपनी मां के साथ पुलिस थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- अजमेर के एक NEET परीक्षा केंद्र पर बुर्का पहनकर परीक्षा देने पहुंची एक महिला अभ्यर्थी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ब्यावर से आई इस अभ्यर्थी से परीक्षा केंद्र पर मौजूद एक महिला शिक्षिका ने सुरक्षा और परीक्षा नियमों का हवाला देते हुए पहचान सत्यापन के लिए बुर्का हटाने को कहा। हालांकि, बताया जा रहा है कि महिला अभ्यर्थी ने बुर्का हटाने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद केंद्र पर स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। इस इनकार के बाद परीक्षा नियमों और पहचान सत्यापन को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा होती रही। 'जस्ट जयपुर लाइव 24×7' की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा केंद्र के नियम क्या हैं, पहचान सत्यापन को लेकर प्रशासन क्या कहता है, और इस पूरे मामले में आगे क्या हुआ, इसका विस्तृत विवरण अभी उपलब्ध नहीं है। दर्शकों से इस खास रिपोर्ट और आगे की जानकारी के लिए 'जस्ट जयपुर लाइव 24×7' के साथ जुड़े रहने को कहा गया है।1
- राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान उप मुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी जी को 'मुख्यमंत्री' कहकर संबोधित किया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोग मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को उनकी जुबान फिसलने के लिए ट्रोल कर रहे हैं। इस संबंध में, हनुमान बेनीवाल द्वारा दिए गए एक पुराने भाषण का हवाला देकर भी मुख्यमंत्री को निशाना बनाया जा रहा है।1
- एक सवाल उठाया गया है कि क्या Leader of Opposition (LoP) को यह शोभा देता है। इस पर कांग्रेस सदस्यों से विशेष ध्यान देने और यह बताने का आग्रह किया गया है कि LoP की पिछली जेब में क्या रखा हुआ था।1
- हनुमान बेनीवाल लगभग 1500 से ज़्यादा गाड़ियों के एक बड़े काफिले के साथ भरतपुर पहुँच रहे हैं। उनकी इस यात्रा को 'भरतपुर चलो' जैसे संदेशों के साथ प्रचारित किया जा रहा है, जो समर्थकों में उत्साह का संचार कर रहा है।1