वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने वन परिक्षेत्र कुदरगढ़ की पहल पर सूरजपुर वन मंडल के अंतर्गत टेमरी में बाघ संरक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण में संयुक्त वनमण्डलाधिकारी, परिक्षेत्र के अधिकारी, कर्मचारी और बाघ ट्रेकर्स उपस्थित रहे, जहाँ उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाघ निगरानी, सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कैमरा ट्रैप, डिजिटल गश्त और सटीक डेटा संकलन के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों और मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग सिखाया गया। इसके साथ ही, ग्रामीणों में बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विशेष जोर दिया गया। टेमरी में इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य कारण कोरिया और सूरजपुर सीमा पर बाघों की अधिक आवाजाही है, जिससे सभी स्टाफ बाघ के पगमार्क और स्क्रैच मार्क जैसी महत्वपूर्ण निशानियों को पहचानना सीख सकें। इस अवसर पर संयुक्त वनमण्डलाधिकारी ओड़गी मनोज कुमार शाह, वन परिक्षेत्र अधिकारी कुदरगढ़ विकास गुप्ता, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट गौरव निलहानि, परिक्षेत्र सहायक सोहन राम, सुदामा सिंह, श्रद्धा देवी पैकरा सहित समस्त संबंधित परिसर रक्षक और दोनों रेंज के बाघ ट्रेकर्स मौजूद रहे।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने वन परिक्षेत्र कुदरगढ़ की पहल पर सूरजपुर वन मंडल के अंतर्गत टेमरी में बाघ संरक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण में संयुक्त वनमण्डलाधिकारी, परिक्षेत्र के अधिकारी, कर्मचारी और बाघ ट्रेकर्स उपस्थित रहे, जहाँ उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाघ निगरानी, सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित
विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कैमरा ट्रैप, डिजिटल गश्त और सटीक डेटा संकलन के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों और मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग सिखाया गया। इसके साथ ही, ग्रामीणों में बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विशेष जोर दिया गया। टेमरी में इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य कारण कोरिया और सूरजपुर सीमा पर
बाघों की अधिक आवाजाही है, जिससे सभी स्टाफ बाघ के पगमार्क और स्क्रैच मार्क जैसी महत्वपूर्ण निशानियों को पहचानना सीख सकें। इस अवसर पर संयुक्त वनमण्डलाधिकारी ओड़गी मनोज कुमार शाह, वन परिक्षेत्र अधिकारी कुदरगढ़ विकास गुप्ता, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट गौरव निलहानि, परिक्षेत्र सहायक सोहन राम, सुदामा सिंह, श्रद्धा देवी पैकरा सहित समस्त संबंधित परिसर रक्षक और दोनों रेंज के बाघ ट्रेकर्स मौजूद रहे।
- अंबिकापुर के कला केंद्र मैदान में लगने वाले मीना बाज़ार को लेकर सोशल मीडिया पर दो कथित ऑडियो वायरल हो रहे हैं। एक कथित ऑडियो में अनुराग मिश्रा नामक व्यक्ति को महापौर मंजूषा भगत से यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वह “अध्यक्ष जी के घर भी कुछ लेकर गया था, उन्होंने फेंक दिया और कहा 3 लाख से कम नहीं चाहिए।” वहीं, दूसरे कथित ऑडियो को भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया की आवाज़ बताया जा रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर “कितना देंगे?” पूछते और अंत में “कल दे दीजिएगा” कहते सुनाई देते हैं। हालाँकि, इन ऑडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है और इसे एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच का विषय बताया गया है। इन कथित ऑडियो के वायरल होने के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पूरा शहर और यहाँ तक कि विपक्ष भी इस मामले पर खामोश है। सवाल यह है कि यदि जाँच में ये ऑडियो सही पाए जाते हैं, तो क्या भाजपा को संबंधित लोगों पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए? वायरल हो रहे इन ऑडियो को सुनकर यह सवाल उठता है कि क्या सत्ता सही हाथों में है, क्योंकि यह स्थिति दर्शाती है कि भ्रष्टाचार ने किस तरह अपनी जड़ें जमा ली हैं।1
- सरगुजा जिले के लखनपुर इलाके में रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ पुरानी रंजिश और गुस्से में अंधे एक सगे भाई ने अपने ही भाई को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। 'अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज (ACCG NEWS)' के अनुसार, यह मामला समाज में बढ़ते क्रोध और गिरते संस्कारों पर सोचने पर मजबूर करता है। यह नृशंस वारदात 20 जून की दोपहर, लखनपुर थाने के अंतर्गत ग्राम अलगा बेन्दोपानी (बेलदगी) में घटी। 32 वर्षीय पांडे कोरवा का अपने ही सगे भाई, 25 वर्षीय श्रवण कोरवा, और एक नाबालिग (विधि से संघर्षरत बालक) के साथ पुरानी रंजिश और आपसी विवाद को लेकर भयंकर झगड़ा हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि श्रवण कोरवा ने पांडे कोरवा की नाक दाँतों से काट ली और फिर नाबालिग के साथ मिलकर ईंट-पत्थरों से उसके सिर और कान के पास इतने गंभीर वार किए कि पांडे कोरवा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही, सरगुजा के डीआईजी एवं एसएसपी श्री राजेश अग्रवाल के सख्त निर्देश पर लखनपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। थाना प्रभारी उपनिरीक्षक संपत पोटाई के नेतृत्व में पुलिस और FSL की टीम ने मौके का मुआयना किया और घटना स्थल से खून से सने ईंट के टुकड़े व पत्थर बरामद किए। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर हत्या के आरोपी भाई श्रवण कोरवा और नाबालिग को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने खून से सने कपड़े भी ज़ब्त कर लिए। बालिग आरोपी को न्यायालय और नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है। ACCG NEWS और चीफ एडिटर शुभम पाठक ने इस घटना को सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के माथे पर एक कलंक बताया है, और समाज में बढ़ते क्रोध तथा गिरते संस्कारों पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में लखनपुर पुलिस (एसआई संपत पोटाई, प्रधान आरक्षक सतीश कुमार सिंह और पूरी टीम) की त्वरित एवं मुस्तैद कार्रवाई की सराहना की गई है, लेकिन साथ ही यह भी अपील की गई है कि आपसी विवादों को खून-खराबे की बजाय बातचीत और समझदारी से सुलझाने की पहल होनी चाहिए।1
- सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते दो छोटे भाइयों ने मिलकर अपने बड़े भाई पांडे कोरवा की ईंट-पत्थर से ताबड़तोड़ प्रहार कर हत्या कर दी। यह घटना 20 जून की दोपहर को उनके घर में हुई थी, जिसके बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। लखनपुर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर रविवार को दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है, जिसमें एक आरोपी नाबालिग है। मृतक पांडे कोरवा (32 वर्ष), पिता रामधन कोरवा, ग्राम अलगा के बेंदोपानी निवासी था। उसके 25 वर्षीय छोटे भाई सरवन कोरवा और एक नाबालिग भाई उससे पुरानी रंजिश रखते थे। 20 जून की दोपहर उनके बीच फिर किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद बढ़ने पर सरवन कोरवा और नाबालिग भाई ने पांडे कोरवा को पहले पीटा, फिर ईंट-पत्थर से उसके सिर और कनपटी पर लगातार हमला किया, जिससे गंभीर चोट लगने के कारण वह लहूलुहान होकर मौके पर ही दम तोड़ गया। हत्या के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए, जिसकी सूचना परिजनों ने लखनपुर पुलिस को दी। हत्या की सूचना मिलने पर लखनपुर पुलिस और एफएसएल की टीम घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद, पुलिस ने मुखबिर की जानकारी पर दोनों आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों भाइयों ने अपने बड़े भाई से पुरानी रंजिश के कारण हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 103 (1) और 3 (5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की है। सरवन कोरवा को जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी लखनपुर एसआई संपत पोटाई, प्रधान आरक्षक सतीश कुमार सिंह, पीतांबर सिंह, आरक्षक सुरेश गुप्ता, रामकुमार यादव, आशीष चौहान और सोहन राजवाड़े शामिल थे।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेशवासियों को एक संदेश दिया है। उन्होंने योग दिवस के इस खास मौके पर राज्य के निवासियों को संबोधित करते हुए यह संदेश जारी किया।1
- कोरिया कलेक्टर ने एक स्कूल का दौरा कर बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान, उन्होंने वहां के शिक्षकों को भी फटकार लगाई। कलेक्टर ने कड़े शब्दों में कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।3
- अनूपपुर जिले के निगवानी के मुख्य बाजार में लंबे समय से एक खतरनाक गड्ढा लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। हाल ही में एक छोटी बच्ची इस गड्ढे में गिर गई, हालांकि गनीमत रही कि एक बड़ा हादसा टल गया। पीड़ित बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत ग्राम पंचायत के सरपंच से की तो उन्होंने गंभीरता दिखाने के बजाय "जो करना हो कर लो" जैसा असंवेदनशील जवाब दिया। यदि यह आरोप सही है, तो यह जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाजार क्षेत्र में रोजाना सैकड़ों लोग और बच्चे आते-जाते हैं, ऐसे में प्रशासन और पंचायत से तत्काल इस गड्ढे की मरम्मत कर आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ऐसी लापरवाही पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए।1
- योग दिवस के अवसर पर बलरामपुर में एक जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित कई अधिकारियों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया।1
- भारत भूषण तिवारी का एक लाइव एनकाउंटर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप से कई गोलियां चलती दिख रही हैं। वीडियो के माध्यम से दर्शाया गया है कि कैसे एक अकेले इंसान पर कई गोलियां चलाई गईं और उसे "फील्डिंग लगाकर" घेरा गया। वायरल वीडियो के साथ यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को यह ज्ञात हो जाए कि उसे पागलखाने भेजकर सच में पागल करने की साजिश रची जा रही है, तो उसके पास केवल एक ही विकल्प बचता है। ऐसे में, उस व्यक्ति ने सचमुच पागल बनने की बजाय एक क्रांतिकारी बनकर सीने में गोली लेना बेहतर समझा। इस घटना के संदर्भ में, लोगों से अपनी राय मांगी गई है कि क्या यह कदम सही था।1