बस्ती जिले के विकास खंड कुदरहा की ग्राम पंचायत बानपुर में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रधान प्रतिनिधि रानू यादव, समाज सेवक जिलाजीत चौहान और ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर एक-एक पौधा लगाया। इस अभियान को केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में पेश किया गया, जिससे पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि वर्षों में तैयार होने वाले पेड़ कुछ ही मिनटों में काट दिए जाते हैं। एक पेड़ को बड़ा होने में लगभग 20 वर्ष का समय लग सकता है, जबकि उसे काटने में केवल 20 मिनट लगते हैं। ऐसे में सिर्फ नए पौधे लगाकर तस्वीरें खिंचवाने और सोशल मीडिया पर स्टेटस साझा करने से पर्यावरण की रक्षा नहीं हो सकती, बल्कि पुराने पेड़ों का संरक्षण करना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वनों की सुरक्षा के लिए अवैध कटान पर सख्ती से रोक लगाने, कानून का निष्पक्ष पालन करने और हर स्तर पर जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है, क्योंकि एक वृक्ष 10 पुत्रों के समान होता है।
बस्ती जिले के विकास खंड कुदरहा की ग्राम पंचायत बानपुर में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रधान प्रतिनिधि रानू यादव, समाज सेवक जिलाजीत चौहान और ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर एक-एक पौधा लगाया। इस अभियान को केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में पेश किया गया, जिससे पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि वर्षों में तैयार होने वाले पेड़ कुछ
ही मिनटों में काट दिए जाते हैं। एक पेड़ को बड़ा होने में लगभग 20 वर्ष का समय लग सकता है, जबकि उसे काटने में केवल 20 मिनट लगते हैं। ऐसे में सिर्फ नए पौधे लगाकर तस्वीरें खिंचवाने और सोशल मीडिया पर स्टेटस साझा करने से पर्यावरण की रक्षा नहीं हो सकती, बल्कि पुराने पेड़ों का संरक्षण करना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वनों की सुरक्षा के लिए अवैध कटान पर सख्ती से रोक लगाने, कानून का निष्पक्ष पालन करने और हर स्तर पर जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है, क्योंकि एक वृक्ष 10 पुत्रों के समान होता है।
- अम्बेडकर नगर में 11 जुलाई की शाम को हुई तेज बारिश के कारण दिन भर बिजली की लाइन नहीं आई। बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप रहने की वजह से क्षेत्र की आम जनता को भारी समस्या का सामना करना पड़ा।1
- संतकबीरनगर में वर्षों से जर्जर पड़ी विधियानी-खलीलाबाद सड़क के निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। रविवार को क्षेत्रीय नागरिकों ने सड़क पर ही बैठकर उग्र प्रदर्शन किया और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को जगाने के लिए सड़क पर ही बुद्धि-शुद्धि यज्ञ का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह महत्वपूर्ण सड़क खलीलाबाद-धनघटा मार्ग को सीधे रेलवे स्टेशन और राष्ट्रीय राजमार्ग-28 (NH-28) से जोड़ती है। इस व्यस्त मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चों सहित हजारों लोग आवागमन करते हैं, लेकिन लंबे समय से उपेक्षा के कारण यह सड़क पूरी तरह जर्जर होकर गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बारिश के मौसम में इस सड़क पर चलना बेहद जोखिम भरा हो जाता है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं और कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को इस बदहाली से अवगत कराया गया, लेकिन उनकी मांग को पूरी तरह अनसुना कर दिया गया। आंदोलनकारियों ने यज्ञ के माध्यम से ईश्वर से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो जाता, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सौरभ सिंह, विवेक वर्मा, गोरखनाथ मिश्रा, अंबर चतुर्वेदी, शुभम राय, गौरव मोदनवाल, सुयश रवान, रतनदीप सिंह भारतीय, राज गोविंद गुप्ता, मृत्युंजय राय, सुनील श्रीवास्तव, पंकज यादव, गोलू यादव, अरविंद चौधरी, गणेश यादव सहित भारी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।1
- संत कबीर नगर जिले की गजौली ग्राम पंचायत में पीठियां चौराहे के पास पिपरा से बेलहर ब्लॉक को जाने वाली सड़क पर आवागमन करने वाले लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग के छत्ती ग्रथ चौराहे पर आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। पीठिया निवासी और ई-रिक्शा चालक रघुनाथ गौड़ (पुत्र परशुराम गौड़) ने इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों और चालकों को होने वाली इस विकट समस्या को उजागर किया है।3
- संतकबीरनगर के विकासखंड बघौली के ग्राम बरईपार में 'वृक्षारोपण महायज्ञ-2026' के तहत "एक पेड़ माँ के नाम" थीम पर एक ऐतिहासिक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान का शुभारंभ रविवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती चारु चौधरी ने पवित्र हरिशंकरी (पीपल, पाकड़ और बरगद) का पौधा लगाकर किया। इस विशेष अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती नीतू सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव, मेहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, जिलाधिकारी आलोक कुमार तथा मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती चारु चौधरी ने कहा कि वृक्ष लगाना सेवा है और उसकी रक्षा करना साधना है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए हर नागरिक से अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेशभर में एक दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने के संकल्प के तहत संतकबीरनगर जिले में विभिन्न विभागों के सहयोग से 29.78 लाख पौधों का रोपण किया गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह ने रोपे गए पौधों की सुरक्षा को माँ द्वारा बच्चों की देखभाल की तरह एक आवश्यक दायित्व बताया, वहीं मेहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने स्वच्छ वातावरण के लिए वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की बात कही। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने भी जनपदवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और दूसरों को इस अभियान से जोड़ने की अपील की। इस दौरान उपस्थित महिलाओं और नागरिकों को आम एवं सहजन सहित कई प्रजातियों के पौधे उपहार स्वरूप वितरित किए गए। इस महायज्ञ के अंतर्गत जिले की सभी तहसीलों, विकासखंडों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी संस्थानों में भी व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रभात द्विवेदी, एसडीएम खलीलाबाद हृदय राम तिवारी, जिला पंचायत सदस्य ई. हनुमान कनौजिया, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, बीडीओ बघौली अर्जित प्रकाश और सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।1
- संत कबीर नगर जनपद के सेमरियावा ब्लॉक अंतर्गत खलीलाबाद तहसील की ग्राम पंचायत बिगरामीर में पानी निकासी का कोई जरिया न होने से गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। यहाँ स्थित गड़ाही नंबर 229 से पानी बाहर निकालने का निकास न होने के कारण पानी किसानों के खेतों में जमा हो रहा है। जल निकासी की व्यवस्था के अभाव में किसानों के खेत पूरी तरह से तालाब में तब्दील हो चुके हैं।1
- बस्ती के कप्तानगंज रेंज के अंतर्गत कचौलिया और रैकवार मार्ग पर वन विभाग की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। बीती 11 जुलाई की रात को आई तेज आंधी-पानी के कारण कचौलिया फार्म के समीप एक विशालकाय पेड़ गिर गया, जो आज भी आधी सड़क को घेरे हुए है। 12 जुलाई का दिन ढलने को आ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी है, जिससे यह मार्ग राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। इस व्यस्त मार्ग से हर पल लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सड़क पर गिरी पेड़ की टहनियां और झाड़ियां अंधेरे में दिखाई नहीं देतीं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को इस संबंध में सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे विभाग के अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी या हादसे का इंतजार कर रहे हैं। वन विभाग की इस उदासीनता से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में मांग की है कि युद्धस्तर पर कार्रवाई करते हुए अविलंब इस पेड़ को सड़क से हटाकर यातायात को सुचारू किया जाए। इसके साथ ही, इतने घंटों तक सड़क को बाधित छोड़ने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब जागता है या फिर जनता को खुद अपनी जान जोखिम में डालकर कोई कदम उठाना पड़ेगा।1
- गाजियाबाद के एक स्पा सेंटर में हुई छापेमारी और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने कानून और समानता के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस स्पा सेंटर से पुलिस ने कथित तौर पर 'सेक्स रैकेट' चलाने के आरोप में 23 लड़कियों और 5 लड़कों को हिरासत में लिया था। लेकिन असली खेल थाने के भीतर देखने को मिला, जहां पुलिस ने इस मामले में बेहद ही पक्षपातपूर्ण और दोहरा रवैया अपनाया। हिरासत में लिए जाने के बाद, पुलिस ने लड़कियों को सिर्फ पूछताछ करके और चेतावनी देकर घर भेज दिया, जबकि हिरासत में लिए गए लड़कों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका चालान काट दिया गया। इस सिलेक्टिव कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए अजीत मिश्रा (खोजी) ने पूछा है कि अगर कानून सबके लिए समान है, तो यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? क्या अपराध की परिभाषा जेंडर यानी लिंग के आधार पर बदल जाती है? अगर यह वास्तव में एक रैकेट था, तो इसमें शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह लड़का हो या लड़की—बराबर का गुनहगार क्यों नहीं है? पुलिस की इस कार्रवाई को 'पितृसत्तात्मक' सोच का चश्मा बताते हुए यह सवाल उठाया गया है कि क्या लड़कियां हमेशा सिर्फ 'विक्टिम' ही होती हैं? महिलाओं के प्रति इस तरह का नरम रुख अपनाकर पुलिस असल में उन महिलाओं के साथ न्याय नहीं कर रही है जो शायद अपनी मर्जी से इस काम में थीं, बल्कि वह कानूनी प्रक्रिया का मजाक उड़ा रही है। कानून का काम निष्पक्ष होना है, न कि किसी की दया पर फैसला सुनाना। इस तरह का दोहरा रवैया न्याय व्यवस्था से भरोसा कम करता है और साबित करता है कि समानता सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। न्याय का तराजू संतुलित होना चाहिए, जो किसी के जेंडर या प्रभाव के बोझ से न झुके।1