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किशनगंज के रमजान पुल स्थित चूड़ी पट्टी में एम एम हैदर नर्सिंग होम में "यूनिटी फॉर ह्यूमैनिटी सोशल ट्रस्ट किशनगंज" द्वारा एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्घाटन किशनगंज के माननीय सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद और किशनगंज के विधायक कमरुल होदा ने किया। इस दौरान लोगों ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया, जिसमें कुल 42 यूनिट्स रक्त का दान किया गया।

1 hr ago
user_Md Abu Farhan
Md Abu Farhan
Kishanganj, Bihar•
1 hr ago
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किशनगंज के रमजान पुल स्थित चूड़ी पट्टी में एम एम हैदर नर्सिंग होम में "यूनिटी फॉर ह्यूमैनिटी सोशल ट्रस्ट किशनगंज" द्वारा एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्घाटन किशनगंज के माननीय सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद और किशनगंज के विधायक कमरुल होदा ने किया। इस दौरान लोगों ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया, जिसमें कुल 42 यूनिट्स रक्त का दान किया गया।

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  • अररिया जिले के जोकी विधायक मुरशिद आलम ने टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत गमहरिया में स्थित एक महिला मदरसा का दौरा किया।
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    अररिया जिले के जोकी विधायक मुरशिद आलम ने टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत गमहरिया में स्थित एक महिला मदरसा का दौरा किया।
    user_Poin bihar
    Poin bihar
    News Anchor Kishanganj, Bihar•
    1 hr ago
  • Post by SonuMandal
    3
    Post by SonuMandal
    user_SonuMandal
    SonuMandal
    जोकीहाट, अररिया, बिहार•
    14 hrs ago
  • वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है। यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
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    वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है।

यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
    user_Zafar Rabbani
    Zafar Rabbani
    पोठिया, किशनगंज, बिहार•
    23 hrs ago
  • RealNewsRN द्वारा प्रकाशित खबर का प्रभाव मात्र 48 घंटों के भीतर देखने को मिला है। इस खबर के बाद फुलवरिया ब्रिज का एप्रोच मार्ग पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया, जिससे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है।
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    RealNewsRN द्वारा प्रकाशित खबर का प्रभाव मात्र 48 घंटों के भीतर देखने को मिला है। इस खबर के बाद फुलवरिया ब्रिज का एप्रोच मार्ग पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया, जिससे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है।
    user_Manzar AlamRN
    Manzar AlamRN
    तेरहागछ, किशनगंज, बिहार•
    2 hrs ago
  • किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या-9 स्थित मुस्लिम टोला गांव दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क की हालत बेहद खराब है, जो बरसात के मौसम में पूरी तरह जलमग्न हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन ठप पड़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष समस्या उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिसके चलते गांव एक टापू में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, मुस्लिम टोला गांव पूर्वी एवं दक्षिणी दिशा में गोरिया नदी तथा पश्चिमी दिशा में रेतुआ नदी से घिरा हुआ है, जिसके कारण बरसात में यह चारों ओर से पानी से घिर जाता है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी और कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिससे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को अत्यधिक परेशानी होती है। पिछले साल, सड़क की बदहाल स्थिति और जलजमाव के कारण गांव के निवासी हकमो उद्दीन को समय पर वाहन नहीं मिल सका। ग्रामीणों ने चारपाई के सहारे करीब डेढ़ किलोमीटर पानी और कीचड़ भरे रास्ते से उन्हें मुख्य सड़क तक पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने गांव में सड़क और पुल की आवश्यकता को और भी गंभीर रूप से उजागर कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़क और आवागमन की समस्या गांव के सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, जिससे लोग शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए इस गांव में आने से कतराते हैं, और कई परिवारों को बच्चों के विवाह संबंध स्थापित करने में कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों, जिनमें बादल आलम, इस्लामुद्दीन, नईम अख्तर, राहिल आलम, असलम आलम, हकीमुद्दीन, शिवकुमार मंडल, शंकर मंडल, अनवर आलम, नईम आलम, दिलशाद आलम, अबू नसर, अरशद आलम, नासिर आलम, शाहनवाज आलम, साहिल आलम, तबरेज आलम, फिरोज आलम, मुख्तार आलम, राशिद आलम और मजेबुल आलम शामिल हैं, ने कई बार सांसद, विधायक और जिला प्रशासन को आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन उनकी मांगों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से तत्काल पक्की सड़क और गोरिया नदी पर आरसीसी पुल के निर्माण की मांग की है। उनका मानना है कि सड़क और पुल बनने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के नए अवसर भी खुलेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्हें उम्मीद है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनकी वर्षों पुरानी पीड़ा को समझते हुए जल्द ही ठोस कदम उठाएंगे, ताकि मुस्लिम टोला के लोग भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
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    किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या-9 स्थित मुस्लिम टोला गांव दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क की हालत बेहद खराब है, जो बरसात के मौसम में पूरी तरह जलमग्न हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन ठप पड़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष समस्या उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिसके चलते गांव एक टापू में तब्दील हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, मुस्लिम टोला गांव पूर्वी एवं दक्षिणी दिशा में गोरिया नदी तथा पश्चिमी दिशा में रेतुआ नदी से घिरा हुआ है, जिसके कारण बरसात में यह चारों ओर से पानी से घिर जाता है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी और कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिससे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को अत्यधिक परेशानी होती है। पिछले साल, सड़क की बदहाल स्थिति और जलजमाव के कारण गांव के निवासी हकमो उद्दीन को समय पर वाहन नहीं मिल सका। ग्रामीणों ने चारपाई के सहारे करीब डेढ़ किलोमीटर पानी और कीचड़ भरे रास्ते से उन्हें मुख्य सड़क तक पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने गांव में सड़क और पुल की आवश्यकता को और भी गंभीर रूप से उजागर कर दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़क और आवागमन की समस्या गांव के सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, जिससे लोग शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए इस गांव में आने से कतराते हैं, और कई परिवारों को बच्चों के विवाह संबंध स्थापित करने में कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों, जिनमें बादल आलम, इस्लामुद्दीन, नईम अख्तर, राहिल आलम, असलम आलम, हकीमुद्दीन, शिवकुमार मंडल, शंकर मंडल, अनवर आलम, नईम आलम, दिलशाद आलम, अबू नसर, अरशद आलम, नासिर आलम, शाहनवाज आलम, साहिल आलम, तबरेज आलम, फिरोज आलम, मुख्तार आलम, राशिद आलम और मजेबुल आलम शामिल हैं, ने कई बार सांसद, विधायक और जिला प्रशासन को आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन उनकी मांगों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से तत्काल पक्की सड़क और गोरिया नदी पर आरसीसी पुल के निर्माण की मांग की है। उनका मानना है कि सड़क और पुल बनने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के नए अवसर भी खुलेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्हें उम्मीद है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनकी वर्षों पुरानी पीड़ा को समझते हुए जल्द ही ठोस कदम उठाएंगे, ताकि मुस्लिम टोला के लोग भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
    user_Vijay Kumar  press repoter
    Vijay Kumar press repoter
    तेरहागछ, किशनगंज, बिहार•
    3 hrs ago
  • एक व्यक्ति ने स्वयं को अंतिम अवतार घोषित किया है, जिसे कल्कि अवतार बताया जा रहा है। यह घोषणा गंगकालीदेवीजी मंदिर संसारी से संबंधित है, और दुर्गादेवीजी के संदर्भ में पंचायत शंकरपुर के वार्ड नंबर (2) का भी उल्लेख है। इस दावे में संतोष कल्कि शिव बाबा सुंदरनाथ धाम सरकार का भी जिक्र है।
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    एक व्यक्ति ने स्वयं को अंतिम अवतार घोषित किया है, जिसे कल्कि अवतार बताया जा रहा है। यह घोषणा गंगकालीदेवीजी मंदिर संसारी से संबंधित है, और दुर्गादेवीजी के संदर्भ में पंचायत शंकरपुर के वार्ड नंबर (2) का भी उल्लेख है। इस दावे में संतोष कल्कि शिव बाबा सुंदरनाथ धाम सरकार का भी जिक्र है।
    user_Santosh kalki shiv baba 🏴‍☠️
    Santosh kalki shiv baba 🏴‍☠️
    Tour Guide कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    3 hrs ago
  • यह जानकारी सामने आई है कि एक नदी सिंधु नदी से जुड़ी हुई है, और यह तथ्य जानने पर लोगों को बहुत खुशी मिलेगी। इस नदी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने से सभी को प्रसन्नता का अनुभव होगा, क्योंकि इसका सीधा संबंध सिंधु नदी से बताया गया है।
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    यह जानकारी सामने आई है कि एक नदी सिंधु नदी से जुड़ी हुई है, और यह तथ्य जानने पर लोगों को बहुत खुशी मिलेगी। इस नदी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने से सभी को प्रसन्नता का अनुभव होगा, क्योंकि इसका सीधा संबंध सिंधु नदी से बताया गया है।
    user_Amit kumar
    Amit kumar
    Singer कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    4 hrs ago
  • पूर्णिया जिले के एक प्रखंड में आयोजित प्रखंड सह जन कल्याण शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे DDC ने शिविर में मौजूद आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सरकारी योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी ली और उन्हें निर्देश दिए कि लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं और आवेदनों के साथ पहुंचे थे, जिनकी समस्याओं के समाधान हेतु DDC ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जनता की समस्याओं का समाधान समय पर होना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
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    पूर्णिया जिले के एक प्रखंड में आयोजित प्रखंड सह जन कल्याण शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे DDC ने शिविर में मौजूद आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सरकारी योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी ली और उन्हें निर्देश दिए कि लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए।

इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं और आवेदनों के साथ पहुंचे थे, जिनकी समस्याओं के समाधान हेतु DDC ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जनता की समस्याओं का समाधान समय पर होना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
    user_Simanchal News
    Simanchal News
    Jalalgarh, Purnia•
    5 hrs ago
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