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राजस्थान प्रतापगढ़ से आप संग्रहने होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

12 hrs ago
user_Parmeshvar redash
Parmeshvar redash
Photographer प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
12 hrs ago

राजस्थान प्रतापगढ़ से आप संग्रहने होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

More news from Chittorgarh and nearby areas
  • आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की पद्धति है। आयुष हॉस्पिटल चितौड़गढ़ में हम प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक सुविधाओं के साथ आपके स्वास्थ्य की संपूर्ण देखभाल के लिए समर्पित हैं। यहाँ अनुभवी वैद्यों द्वारा प्रत्येक रोगी की व्यक्तिगत प्रकृति (प्रकृति परीक्षण) के अनुसार उपचार योजना बनाई जाती है ताकि रोग को जड़ से समाप्त किया जा सके। 🔹 पंचकर्म थेरेपी (वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य आदि) 🔹 कमर, गर्दन और घुटनों का दर्द 🔹 सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, सायटिका 🔹 माइग्रेन, सिरदर्द, अनिद्रा 🔹 त्वचा रोग (एक्जिमा, सोरायसिस आदि) 🔹 थायरॉइड एवं हार्मोनल समस्याएं 🔹 महिलाओं की शारीरिक समस्याएं ✨ विशेष सुविधाएं: ✔ NABH Certified Ayurved Hospital ✔ Mediclaim Policy / Health Insurance के अंतर्गत उपचार की सुविधा ✔ अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सकों की टीम ✔ सुरक्षित एवं प्रभावी पंचकर्म उपचार आइए, आयुर्वेद के साथ स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम बढ़ाएं। 📍 आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) 📞 94618 08623 | 83020 83835 🌿 आयुष हॉस्पिटल चितौड़गढ़ प्रकृति के साथ स्वास्थ्य की ओर…
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    आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की पद्धति है।
आयुष हॉस्पिटल चितौड़गढ़ में हम प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक सुविधाओं के साथ आपके स्वास्थ्य की संपूर्ण देखभाल के लिए समर्पित हैं।
यहाँ अनुभवी वैद्यों द्वारा प्रत्येक रोगी की व्यक्तिगत प्रकृति (प्रकृति परीक्षण) के अनुसार उपचार योजना बनाई जाती है ताकि रोग को जड़ से समाप्त किया जा सके।
🔹 पंचकर्म थेरेपी (वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य आदि)
🔹 कमर, गर्दन और घुटनों का दर्द
🔹 सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, सायटिका
🔹 माइग्रेन, सिरदर्द, अनिद्रा
🔹 त्वचा रोग (एक्जिमा, सोरायसिस आदि)
🔹 थायरॉइड एवं हार्मोनल समस्याएं
🔹 महिलाओं की शारीरिक समस्याएं
✨ विशेष सुविधाएं:
✔ NABH Certified Ayurved Hospital
✔ Mediclaim Policy / Health Insurance के अंतर्गत उपचार की सुविधा
✔ अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सकों की टीम
✔ सुरक्षित एवं प्रभावी पंचकर्म उपचार
आइए, आयुर्वेद के साथ स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम बढ़ाएं।
📍 आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
📞 94618 08623 | 83020 83835
🌿 आयुष हॉस्पिटल चितौड़गढ़
प्रकृति के साथ स्वास्थ्य की ओर…
    user_Dr CP Patel 8302083835 आयुष हॉस्पिटल
    Dr CP Patel 8302083835 आयुष हॉस्पिटल
    Doctor Nimbahera, Chittorgarh•
    1 hr ago
  • वागड़ केसरी व वागड़ गौरव आचार्य 108 चंद्रगुप्त गुरुदेव का मंगल विहार वागोल जैन तीर्थ एवं अन्देश्वर तीर्थ की ओर श्रद्धा और भावनाओं के बीच प्रारंभ हुआ। विदाई के दौरान भक्तों की आंखों में आंसू छलक उठे और वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया। दिगंबर बीस पंथी जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव के सानिध्य में मूलनायक आदिनाथ भगवान का प्रातः बेला में विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक हुआ। सायंकाल गुरुदेव का विहार वागोल जैन तीर्थ के लिए हुआ, जहां समाजजनों ने नंगे पांव चलकर सहभागिता की तथा मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान की आरती व गुरुभक्ति का आयोजन किया। महामंत्री हंसमुख लाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव का अगला विहार अन्देश्वर तीर्थ की ओर रहेगा तथा 10 मार्च को भिलूड़ा में उनका मंगल प्रवेश होगा, जहां पूज्य गुरु गुप्तुनंदी गुरुदेव से गुरु-शिष्य मिलन होगा। गुरुदेव ने संदेश दिया कि संयम, करुणा और क्षमा ही सच्चा धर्म है।
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    वागड़ केसरी व वागड़ गौरव आचार्य 108 चंद्रगुप्त गुरुदेव का मंगल विहार वागोल जैन तीर्थ एवं अन्देश्वर तीर्थ की ओर श्रद्धा और भावनाओं के बीच प्रारंभ हुआ। विदाई के दौरान भक्तों की आंखों में आंसू छलक उठे और वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया।
दिगंबर बीस पंथी जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव के सानिध्य में मूलनायक आदिनाथ भगवान का प्रातः बेला में विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक हुआ। सायंकाल गुरुदेव का विहार वागोल जैन तीर्थ के लिए हुआ, जहां समाजजनों ने नंगे पांव चलकर सहभागिता की तथा मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान की आरती व गुरुभक्ति का आयोजन किया।
महामंत्री हंसमुख लाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव का अगला विहार अन्देश्वर तीर्थ की ओर रहेगा तथा 10 मार्च को भिलूड़ा में उनका मंगल प्रवेश होगा, जहां पूज्य गुरु गुप्तुनंदी गुरुदेव से गुरु-शिष्य मिलन होगा। गुरुदेव ने संदेश दिया कि संयम, करुणा और क्षमा ही सच्चा धर्म है।
    user_धर्मेंद्र उपाध्याय
    धर्मेंद्र उपाध्याय
    पत्रकार बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • मनासा। नगर सहित ग्रामीण अंचल में होली महोत्सव के अंतर्गत धुलेंडी का पर्व बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। वही देवरी खवासा में युवा मित्र मंडल के युवाओं ने एकत्रित होकर एक-दूसरे को रंग एवं गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। डीजे और ढोल की थाप पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया तथा पूरे उत्सव को आनंदमय बना दिया। विभिन्न रंगों की बौछार के बीच पूरा माहौल होली के रंग में रंगा नजर आया।युवा मित्र मंडल के सदस्यों ने शांति और सौहार्द बनाए रखते हुए पर्व मनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने आपसी एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की। पूरे गांव में हर्षोल्लास का वातावरण रहा और सभी ने मिलकर प्रेम, सद्भाव और उल्लास के साथ होली का पर्व मनाया।
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    मनासा। नगर सहित ग्रामीण अंचल में होली महोत्सव के अंतर्गत धुलेंडी का पर्व बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। वही देवरी खवासा में युवा मित्र मंडल के युवाओं ने एकत्रित होकर एक-दूसरे को रंग एवं गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। डीजे और ढोल की थाप पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया तथा पूरे उत्सव को आनंदमय बना दिया। विभिन्न रंगों की बौछार के बीच पूरा माहौल होली के रंग में रंगा नजर आया।युवा मित्र मंडल के सदस्यों ने शांति और सौहार्द बनाए रखते हुए पर्व मनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने आपसी एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की। पूरे गांव में हर्षोल्लास का वातावरण रहा और सभी ने मिलकर प्रेम, सद्भाव और उल्लास के साथ होली का पर्व मनाया।
    user_Rakeshsharma Rakeshsharma
    Rakeshsharma Rakeshsharma
    मनासा, नीमच, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं. शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है. मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया. मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.
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    रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के  साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं.
शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल
जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है.
मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. 
विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन
चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया.
मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.
    user_VAGAD news24
    VAGAD news24
    Farmer आसपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • Post by Rajendra Tabiyar
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    Post by Rajendra Tabiyar
    user_Rajendra Tabiyar
    Rajendra Tabiyar
    Actor गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    45 min ago
  • Post by Bapulal Ahari
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    Post by Bapulal Ahari
    user_Bapulal Ahari
    Bapulal Ahari
    Electrician गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • और आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि योजनाएं कागज़ों में ज्यादा और धरातल पर कम दिखाई दे रही हैं। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुष विभाग द्वारा 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक भटारक यश कीर्ति जैन बोर्डिंग, एमजी रोड, प्रतापगढ़ में निःशुल्क 10 दिवसीय आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग अर्श-भगंदर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर आयोजित किया जाना था। शिविर का समय प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक निर्धारित किया गया था। लेकिन 2 मार्च 2026 को जब कमल मीणा, बीएसपी कार्यकर्ता एवं पत्रकार टीम शिविर स्थल पर पहुंचे तो शिविर पूर्ण रूप से बंद मिला। आरोप है कि निर्धारित तिथि 3 मार्च से पूर्व ही शिविर समाप्त कर दिया गया, जिससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। कमल मीणा ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में कई योजनाएं केवल कागज़ों में संचालित होती दिखाई देती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर उनका प्रभाव नगण्य है। उन्होंने इसे ट्राइबल क्षेत्र के साथ अन्याय बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है कि: शिविर निर्धारित अवधि से पहले क्यों बंद किया गया? क्या मरीजों को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी? क्या संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी? मामले ने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है। इसी के साथ आप देख रहे हो ज़ी टीवी राजस्थान प्रतापगढ़ से स्टेट रिपोर्टर परमेश्वर रेदास की रिपोर्ट
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    और आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि योजनाएं कागज़ों में ज्यादा और धरातल पर कम दिखाई दे रही हैं।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुष विभाग द्वारा 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक भटारक यश कीर्ति जैन बोर्डिंग, एमजी रोड, प्रतापगढ़ में निःशुल्क 10 दिवसीय आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग अर्श-भगंदर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर आयोजित किया जाना था। शिविर का समय प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक निर्धारित किया गया था।
लेकिन 2 मार्च 2026 को जब कमल मीणा, बीएसपी कार्यकर्ता एवं पत्रकार टीम शिविर स्थल पर पहुंचे तो शिविर पूर्ण रूप से बंद मिला। आरोप है कि निर्धारित तिथि 3 मार्च से पूर्व ही शिविर समाप्त कर दिया गया, जिससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा।
कमल मीणा ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में कई योजनाएं केवल कागज़ों में संचालित होती दिखाई देती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर उनका प्रभाव नगण्य है। उन्होंने इसे ट्राइबल क्षेत्र के साथ अन्याय बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है कि:
शिविर निर्धारित अवधि से पहले क्यों बंद किया गया?
क्या मरीजों को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी?
क्या संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी?
मामले ने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।
इसी के साथ आप देख रहे हो ज़ी टीवी राजस्थान प्रतापगढ़ से स्टेट रिपोर्टर परमेश्वर रेदास की रिपोर्ट
    user_Parmeshvar redash
    Parmeshvar redash
    Photographer प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • होली की खुशियां बदली मातम में काम के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत, खीमला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में कार्यरत बिहारी श्रमिक की मौत रामपुरा। समीप गांव खीमला में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट एलएनटी प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत एक व्यक्ति की बीमारी के चलते मौत हो गई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार युवक का मंगलवार की सुबह से व्रत था एवं उसके शरीर में घबराहट एवं दर्द की शिकायत हो रही थी जिससे देर शाम प्राथमिक उपचार के बाद सिविल हॉस्पिटल रामपुरा भिजवाया गया जहां रास्ते में युवक ने अपना दम तोड़ दिया रामपुरा सिविल अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर अभिषेक चौहान ने मरीज का परीक्षण कर युवक को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया वहीं पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर मामले में जांच प्रारंभ कर दी है प्राप्त जानकारी के अनुसार युवक रूपेश पिता रामदेव प्रसाद बेगूसराय बिहार के पास किसी गांव का रहने वाला था एवं एलएनटी प्राइवेट लिमिटेड में प्रवासी मजदूर के तौर पर काम कर रहा था जहां युवक की हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई वहीं जब परिवार को यह खबर मिली तो परिवार में मातम छा गया युवक का पोस्टमार्टम कल सुबह सिविल हॉस्पिटल रामपुरा में किया जाएगा एवं शव कंपनी के अधिकारियों को सुपुर्द किया जाएगा।
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    होली की खुशियां बदली मातम में
काम के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत, खीमला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में कार्यरत बिहारी श्रमिक की मौत
रामपुरा। समीप गांव खीमला में  हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट एलएनटी प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत एक व्यक्ति की बीमारी के चलते मौत हो गई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार युवक का मंगलवार की सुबह से व्रत था एवं उसके शरीर में घबराहट एवं दर्द की शिकायत हो रही थी जिससे देर शाम प्राथमिक उपचार के बाद सिविल हॉस्पिटल रामपुरा भिजवाया गया जहां रास्ते में युवक ने अपना दम तोड़ दिया रामपुरा सिविल अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर अभिषेक चौहान ने मरीज का परीक्षण कर युवक को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया वहीं पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर मामले में जांच प्रारंभ कर दी है प्राप्त जानकारी के अनुसार युवक रूपेश पिता रामदेव प्रसाद बेगूसराय बिहार के पास किसी गांव का रहने वाला था एवं एलएनटी प्राइवेट लिमिटेड में प्रवासी मजदूर के तौर पर काम कर रहा था जहां युवक की हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई वहीं जब परिवार को यह खबर मिली तो परिवार में मातम छा गया युवक का पोस्टमार्टम कल सुबह सिविल हॉस्पिटल रामपुरा में किया जाएगा एवं शव कंपनी के अधिकारियों को सुपुर्द किया जाएगा।
    user_Rakeshsharma Rakeshsharma
    Rakeshsharma Rakeshsharma
    मनासा, नीमच, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • Post by VAGAD news24
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    Post by VAGAD news24
    user_VAGAD news24
    VAGAD news24
    Farmer आसपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    12 hrs ago
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