अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), जो देशभर में 14 लाख से अधिक शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) प्रकरण से संबंधित समीक्षा याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय पर गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त की है। महासंघ के राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हरिशंकर शर्मा ने बताया कि इस निर्णय से देश भर के लाखों शिक्षकों में व्यापक असंतोष और गंभीर मानसिक तनाव पैदा हुआ है, जो वर्षों से समर्पण और निष्ठा के साथ विद्यालयों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय लागू सरकारी नियमों और अधिसूचनाओं के तहत सक्षम प्राधिकरणों द्वारा विधिवत प्रक्रिया अपनाकर की गई थीं। इनमें से अनेक शिक्षकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और ग्रामीण, शहरी तथा वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षित करने में समर्पित किए हैं। ABRSM ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण बिंदु प्रस्तुत किए हैं, जिनमें बताया गया है कि वर्तमान कानूनी स्थिति के कारण लाखों शिक्षकों को, वर्षों की सेवा के बावजूद, अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ सकता है। उनकी सेवा स्थितियों को लेकर उत्पन्न हुई अचानक अनिश्चितता विद्यालयों के संचालन और समग्र शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। महासंघ ने इस विषय को मानवीय और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है, जिस पर सरकार के त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता है। ABRSM ने यह भी ध्यान दिलाया कि पूर्व में भी इस प्रकार की परिस्थितियों में व्यापक जनहित और संस्थागत स्थिरता बनाए रखने के लिए विधायी उपायों के माध्यम से कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान किया गया है। उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, महासंघ ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि आगामी संसद के मानसून सत्र में उपयुक्त अध्यादेश अथवा विधायी संशोधन लाकर प्रभावित शिक्षकों को तत्काल राहत प्रदान करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ। ABRSM का मानना है कि ऐसा कदम शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में निरंतरता एवं स्थिरता सुनिश्चित करेगा। महासंघ को पूर्ण विश्वास है कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं एवं चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए इस विषय में सहानुभूतिपूर्वक एवं निर्णायक कदम उठाएगी, क्योंकि शिक्षकों ने सदैव राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वे न्याय तथा सेवा सुरक्षा के अधिकारी हैं। इसके साथ ही, ABRSM ने सम्मानपूर्वक यह भी कहा है कि यदि लाखों पीड़ित शिक्षकों को समय रहते राहत प्रदान नहीं की गई, तो वे अपने अधिकारों और आजीविका की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य हो सकते हैं।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), जो देशभर में 14 लाख से अधिक शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) प्रकरण से संबंधित समीक्षा याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय पर गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त की है। महासंघ के राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हरिशंकर शर्मा ने बताया कि इस निर्णय से देश भर के लाखों शिक्षकों में व्यापक असंतोष और गंभीर मानसिक तनाव पैदा हुआ है, जो वर्षों से समर्पण और निष्ठा के साथ विद्यालयों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय लागू सरकारी नियमों और अधिसूचनाओं के तहत सक्षम प्राधिकरणों द्वारा विधिवत प्रक्रिया अपनाकर की गई थीं। इनमें से अनेक शिक्षकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और ग्रामीण, शहरी तथा वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षित करने में समर्पित किए हैं। ABRSM ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण बिंदु प्रस्तुत किए हैं, जिनमें बताया गया है कि वर्तमान कानूनी स्थिति के कारण लाखों शिक्षकों को, वर्षों की सेवा के बावजूद, अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ सकता है। उनकी सेवा स्थितियों को लेकर उत्पन्न हुई अचानक अनिश्चितता विद्यालयों के संचालन और समग्र शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। महासंघ ने इस विषय को मानवीय और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है, जिस पर सरकार के त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता है। ABRSM ने यह भी ध्यान दिलाया कि पूर्व में भी इस प्रकार की परिस्थितियों में व्यापक जनहित और संस्थागत स्थिरता बनाए रखने के लिए विधायी उपायों के माध्यम से कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान किया गया है। उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, महासंघ ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि आगामी संसद के मानसून सत्र में उपयुक्त अध्यादेश अथवा विधायी संशोधन लाकर प्रभावित शिक्षकों को तत्काल राहत प्रदान करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ। ABRSM का मानना है कि ऐसा कदम शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में निरंतरता एवं स्थिरता सुनिश्चित करेगा। महासंघ को पूर्ण विश्वास है कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं एवं चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए इस विषय में सहानुभूतिपूर्वक एवं निर्णायक कदम उठाएगी, क्योंकि शिक्षकों ने सदैव राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वे न्याय तथा सेवा सुरक्षा के अधिकारी हैं। इसके साथ ही, ABRSM ने सम्मानपूर्वक यह भी कहा है कि यदि लाखों पीड़ित शिक्षकों को समय रहते राहत प्रदान नहीं की गई, तो वे अपने अधिकारों और आजीविका की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य हो सकते हैं।
- भरतपुर जिले के रूपवास क्षेत्र में धौलपुर मार्ग स्थित घाटौली गाँव में एक टाइगर की हलचल देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। इस घटना के बाद से गाँव में भय का वातावरण बना हुआ है।1
- राजस्थान के डीग जिले के ग्राम दीदावली में सड़क किनारे लगा एक बिजली का खंभा राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है, जिससे ग्रामीणों में गहरा डर और चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह खंभा सड़क के बेहद करीब होने के कारण किसी भी समय गंभीर हादसा हो सकता है और वाहन चालकों के इससे टकराने की प्रबल संभावना बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया है कि इस खतरनाक खंभे को हटाने के लिए उन्होंने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है, जिसके कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। वर्तमान में 84 कोस ब्रज परिक्रमा चल रही है, जिससे इस मार्ग पर श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। ऐसे में सड़क किनारे स्थित यह खंभा परिक्रमार्थियों और आमजन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग और प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए खंभे को तुरंत सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि किसी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।3
- तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध तुंगनाथ धाम में बढ़ती भीड़, गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति को लेकर धाम के पुजारी ने एक बड़ा बयान जारी किया है।1
- मथुरा में "गोचरों का नेपथ्य" नामक काव्य महासंकलन का भव्य विमोचन वरिष्ठ कवि साहित्यकार डॉ. राजेन्द्र मिलन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुरुग्राम के प्रसिद्ध उद्योगपति श्री बी. एस. बघेल थे, जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल यादराम बघेल ने स्वागताध्यक्ष की भूमिका निभाई। यह महासंकलन भारत के 11 प्रदेशों के 163 हिंदी कवियों की कविताओं का संग्रह है। इस काव्य महासंकलन का प्रकाशन पलवल स्थित कल्पवक्ष पब्लिशिंग हाउस के एमडी श्री ओम प्रकाश बघेल द्वारा किया गया है। गाजियाबाद के श्री प्रेम कुमार पाल ने इसके संयोजन का कार्यभार संभाला, वहीं डॉ. जे. पी. बघेल मुंबई, शिव कुमार दीपक हाथरस, रविपाल खामोश वडोदरा और मथुरा के श्री रुपेश धनगर ने संयुक्त रूप से इसका संपादन किया है। विमोचन समारोह के अवसर पर पुण्यश्लोक महारानी अहिल्यादेवी होल्कर की 301वीं जयंती भी मनाई गई। कार्यक्रम के पश्चात एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न प्रदेशों से आए 60 से अधिक कवियों और कवयित्रियों ने अपनी काव्य रचनाओं का पाठ किया। इस साहित्यिक आयोजन में दिल्ली के श्री नत्थी सिंह बघेल और डॉ. हरि सिंह पाल, कासगंज के डॉ. राम प्रकाश पथिक, शिकोहाबाद के श्री पहुंचीलाल धनगर 'विषधर', कच्छ गुजरात की डॉ. संगीता पाल, मुंबई की डॉ. सुशीला पाल, फिरोजाबाद की सुश्री सरोज सौदामिनी, शिवपुरी (म.प्र.) की सुश्री मनु वैशाली, नागपुर (महाराष्ट्र) के डॉ. प्रभाकर लोंढे और शहडोल (छत्तीसगढ़) के जोहन पाल भार्गव सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।4
- भागवत कथा, रामकथा, भजन संध्या, सुंदरकांड और रामायण जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान व्यापार न चलाने का निर्देश दिया गया है।1
- मथुरा की पावन धरती पर 1 जून से 8 जून 2026 तक एक भव्य श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस मंगलमय कार्यक्रम में श्रद्धालु सात दिनों तक श्रीहरि की अमृतमयी कथा का रसपान कर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम अनुभव करेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ 1 जून को सायं 3 बजे एक शानदार कलश यात्रा के साथ होगा। कथा के दौरान भीष्म चरित्र, कुंती चरित्र, ध्रुव चरित्र, वामन अवतार, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, बाल लीलाएं, गोवर्धन पूजा, दिव्य रासलीला, रुक्मिणी विवाह और कृष्ण-सुदामा चरित्र जैसे प्रेरणादायक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। कथा के साथ ही पत्रकार एवं मीडिया सम्मान, मात-पितृ सम्मान, वरिष्ठ जन सम्मान और नारी शक्ति सम्मान समारोह भी आयोजित किए जाएंगे। इस भव्य धार्मिक आयोजन का समापन 8 जून को पूर्णाहुति हवन और एक विशाल भंडारे के साथ होगा। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की है, क्योंकि नारी शक्ति उड़ान एनजीओ के तत्वावधान में यह श्रीमद्भागवत कथा 1 जून से गूंजेगी और भक्ति व संस्कारों का महाकुंभ साबित होगी।1
- पुण्य और धार्मिक आयोजनों के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले अधिक मास में शनिवार को पूर्णिमा के दिन लाखों भक्तों ने गिरिराज परिक्रमा की। इस दौरान अत्यधिक भीड़ और भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के कारण मंदिर दानघाटी पर भयंकर जाम की स्थिति बन गई। दूर-दूर से आए भक्तों ने गिरिराज जी को दूध और प्रसाद चढ़ाकर अपनी परिक्रमा पूरी की। भक्ति का यह सैलाब अधिक मास के 15 दिन पूरे कर चुका है और यह सिलसिला 15 जून तक जारी रहेगा। पुरुषोत्तम मास में उमड़े इस जनसैलाब के दौरान ब्रज चौरासी परिक्रमा में भी बुजुर्ग, बच्चे, महिला और पुरुष सभी भक्ति में लीन दिखाई दिए। पूरी गिरिराज तलहटी गिरिराज जी के जयकारों से गूँजती रही, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।1
- बयाना उपखंड के पिदावली गांव में शनिवार सुबह एक जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच हुए झगड़े में एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के घर में सोते समय हमला कर दिया। इस मारपीट में गोविन्द सिंह (70), फूलसिंह (54), राजेश (23), पूरनसिंह (50) और नवल देई (50) घायल हो गए, जिनमें एक महिला भी शामिल है। सभी पांचों घायलों को बयाना उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। पीड़ित पक्ष के गोविन्द सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।1