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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद में मोतिगरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दियारा बाजार में कथित तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा क्लीनिक चलाने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि डीके यादव और सचिन यादव बिना किसी वैध चिकित्सीय अनुमति के क्लीनिक चला रहे हैं और लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। इस मामले में ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और सीएचसी मोतिगरपुर से कई बार शिकायत की है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में कभी भी कोई गंभीर घटना घटित हो सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

19 hrs ago
user_क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
Court reporter Sadar, Lucknow•
19 hrs ago

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद में मोतिगरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दियारा बाजार में कथित तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा क्लीनिक चलाने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि डीके यादव और सचिन यादव बिना किसी वैध चिकित्सीय अनुमति के क्लीनिक चला रहे हैं और लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। इस मामले में ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और सीएचसी मोतिगरपुर से कई बार शिकायत की है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में कभी भी कोई गंभीर घटना घटित हो सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

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  • छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और बदसलूकी के विरोध में नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद संसद भवन परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। भारी बारिश होने के बावजूद वे पूरी रात संसद परिसर में धरने पर डटे रहे। चंद्रशेखर आजाद के इस कदम को विपक्ष का भी साथ मिला है। एआईएमआईएम (AIMIM) के अध्यक्ष असादुद्दीन ओवैसी ने संसद परिसर पहुंचकर चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की और उनके इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। वहीं, इस घटनाक्रम पर डिंपल ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह बेहद निर्मम सरकार है, जो बच्चों के आंसुओं से भी नहीं पिघली।
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    छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और बदसलूकी के विरोध में नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद संसद भवन परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। भारी बारिश होने के बावजूद वे पूरी रात संसद परिसर में धरने पर डटे रहे।

चंद्रशेखर आजाद के इस कदम को विपक्ष का भी साथ मिला है। एआईएमआईएम (AIMIM) के अध्यक्ष असादुद्दीन ओवैसी ने संसद परिसर पहुंचकर चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की और उनके इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। वहीं, इस घटनाक्रम पर डिंपल ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह बेहद निर्मम सरकार है, जो बच्चों के आंसुओं से भी नहीं पिघली।
    user_आशीष कुमार मिश्रा
    आशीष कुमार मिश्रा
    Local News Reporter Sadar, Lucknow•
    30 min ago
  • दिल्ली में संसद के बाहर सांसद संजय सिंह जी का प्रदर्शन देखने को मिला, जहाँ युवाओं के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ उनका गुस्सा फूट पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि देश की संसद सांसदों की है, भाजपा की नहीं। युवाओं पर हुई बर्बरता के खिलाफ संसद में सांसद संजय सिंह जी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है।
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    दिल्ली में संसद के बाहर सांसद संजय सिंह जी का प्रदर्शन देखने को मिला, जहाँ युवाओं के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ उनका गुस्सा फूट पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि देश की संसद सांसदों की है, भाजपा की नहीं। युवाओं पर हुई बर्बरता के खिलाफ संसद में सांसद संजय सिंह जी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है।
    user_Journalist Rais Samachar News India
    Journalist Rais Samachar News India
    लखनऊ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • लखनऊ में मंगलवार को हुई बारिश ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था और प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। थोड़ी सी बारिश के बाद सड़कों पर भीषण जलभराव हो गया और सीवर सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ। इस बदहाली का सबसे बुरा असर गोमती नगर के उजारियाओ क्षेत्र में देखने को मिला, जहां सड़कों पर पानी भरने के साथ-साथ कई घरों के भीतर तक पानी घुस गया। राजधानी के अधिकांश हिस्सों में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिससे आम जनता और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर सरकारी विभाग और स्थानीय पार्षद जिम्मेदार हैं। नाले और सीवर की मरम्मत व निर्माण के नाम पर घोटाले पर घोटाला किया जा रहा है और सरकारी पैसे का जमकर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे आम आदमी को बार-बार तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं। हालात को देखकर अब यह तीखा सवाल उठ रहा है कि क्या ये सीवर सिर्फ दिखावे के लिए आर्टिफिशियल तौर पर लगाए गए हैं और क्या नाले महज दिखावे के लिए बने हुए हैं? स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार पार्षद और नगर निगम से शिकायतें कीं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हैरान करने वाली बात यह है कि राजधानी की जनता ऐसे विभागों और पार्षदों के भरोसे बैठी हुई है, जो सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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    लखनऊ में मंगलवार को हुई बारिश ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था और प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। थोड़ी सी बारिश के बाद सड़कों पर भीषण जलभराव हो गया और सीवर सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ। इस बदहाली का सबसे बुरा असर गोमती नगर के उजारियाओ क्षेत्र में देखने को मिला, जहां सड़कों पर पानी भरने के साथ-साथ कई घरों के भीतर तक पानी घुस गया। राजधानी के अधिकांश हिस्सों में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिससे आम जनता और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इस दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर सरकारी विभाग और स्थानीय पार्षद जिम्मेदार हैं। नाले और सीवर की मरम्मत व निर्माण के नाम पर घोटाले पर घोटाला किया जा रहा है और सरकारी पैसे का जमकर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे आम आदमी को बार-बार तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं। हालात को देखकर अब यह तीखा सवाल उठ रहा है कि क्या ये सीवर सिर्फ दिखावे के लिए आर्टिफिशियल तौर पर लगाए गए हैं और क्या नाले महज दिखावे के लिए बने हुए हैं?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार पार्षद और नगर निगम से शिकायतें कीं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हैरान करने वाली बात यह है कि राजधानी की जनता ऐसे विभागों और पार्षदों के भरोसे बैठी हुई है, जो सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
    user_Journalist Himanshu Garg
    Journalist Himanshu Garg
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में फर्जी पुलिस वाले आए हैं। इन लोगों के पास न तो कोई नेमप्लेट है और न ही कोई बैच नंबर है। इनके चेहरों को देखकर ये कहीं से भी पुलिस वाले नहीं लग रहे हैं। इस गंभीर मामले में इन फर्जी पुलिस वालों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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    दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में फर्जी पुलिस वाले आए हैं। इन लोगों के पास न तो कोई नेमप्लेट है और न ही कोई बैच नंबर है। इनके चेहरों को देखकर ये कहीं से भी पुलिस वाले नहीं लग रहे हैं। इस गंभीर मामले में इन फर्जी पुलिस वालों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
    user_Journalist Sonu Pal
    Journalist Sonu Pal
    Media company सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वर्ल्ड ब्रेन डे के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने लोगों से अपनी ब्रेन हेल्थ के प्रति अधिक जागरूक रहने की अपील की है। अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर चेतावनी दी है कि बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय से अनियंत्रित बीमारियां और इलाज में देरी होने के कारण न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब कम उम्र के लोगों को भी तेजी से प्रभावित कर रही हैं। पिछले पांच वर्षों में इन बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ती उम्र इसके मुख्य जिम्मेदार कारक हैं। इसके अलावा, कोविड के बाद के समय में नसों से जुड़ी बीमारियों और कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में न्यूरोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। अब 30 और 40 वर्ष की आयु के मरीज भी बड़ी संख्या में स्ट्रोक और नसों की समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह भी बताई कि स्वस्थ लाइफस्टाइल, नियमित हेल्थ चेकअप और जोखिम वाले कारणों का समय पर इलाज करके लगभग 70 से 80 प्रतिशत स्ट्रोक के मामलों को रोका जा सकता है। उत्तर प्रदेश की स्थिति पर बात करते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि बेहतर नतीजों में सबसे बड़ी रुकावट समय पर इलाज की व्यवस्था न हो पाना है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों जैसे शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आना, बोलने में परेशानी होना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या तेज सिरदर्द को नहीं पहचान पाते और महत्वपूर्ण समय सीमा निकल जाने के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। डॉक्टरों ने लोगों को 'एफएएसटी' (FAST) सिद्धांत यानी चेहरा टेढ़ा होना (Face), हाथ में कमजोरी आना (Arm), बोलने में दिक्कत होना (Speech) और समय रहते अस्पताल पहुंचना (Time) के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग है या जिनके परिवार में स्ट्रोक का इतिहास रहा है, उन्हें नियमित न्यूरोलॉजिकल स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी गई है।
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    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वर्ल्ड ब्रेन डे के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने लोगों से अपनी ब्रेन हेल्थ के प्रति अधिक जागरूक रहने की अपील की है। अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर चेतावनी दी है कि बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय से अनियंत्रित बीमारियां और इलाज में देरी होने के कारण न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब कम उम्र के लोगों को भी तेजी से प्रभावित कर रही हैं। पिछले पांच वर्षों में इन बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ती उम्र इसके मुख्य जिम्मेदार कारक हैं। इसके अलावा, कोविड के बाद के समय में नसों से जुड़ी बीमारियों और कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में न्यूरोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। अब 30 और 40 वर्ष की आयु के मरीज भी बड़ी संख्या में स्ट्रोक और नसों की समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह भी बताई कि स्वस्थ लाइफस्टाइल, नियमित हेल्थ चेकअप और जोखिम वाले कारणों का समय पर इलाज करके लगभग 70 से 80 प्रतिशत स्ट्रोक के मामलों को रोका जा सकता है।

उत्तर प्रदेश की स्थिति पर बात करते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि बेहतर नतीजों में सबसे बड़ी रुकावट समय पर इलाज की व्यवस्था न हो पाना है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों जैसे शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आना, बोलने में परेशानी होना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या तेज सिरदर्द को नहीं पहचान पाते और महत्वपूर्ण समय सीमा निकल जाने के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। डॉक्टरों ने लोगों को 'एफएएसटी' (FAST) सिद्धांत यानी चेहरा टेढ़ा होना (Face), हाथ में कमजोरी आना (Arm), बोलने में दिक्कत होना (Speech) और समय रहते अस्पताल पहुंचना (Time) के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग है या जिनके परिवार में स्ट्रोक का इतिहास रहा है, उन्हें नियमित न्यूरोलॉजिकल स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी गई है।
    user_Journalist Himanshu Garg
    Journalist Himanshu Garg
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि भारत की न्यायपालिका वैश्विक स्तर पर कई देशों से काफी आगे है। उन्होंने देश की न्याय प्रणाली की पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जनता के अधिकारों की सुरक्षा को इसकी सबसे बड़ी ताकत के रूप में रेखांकित किया है। मुख्य न्यायाधीश के इस बड़े दावे के बाद से देशभर में न्याय व्यवस्था को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं और लोग इसे भारत की बढ़ती न्यायिक ताकत के रूप में देख रहे हैं।
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    भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि भारत की न्यायपालिका वैश्विक स्तर पर कई देशों से काफी आगे है। उन्होंने देश की न्याय प्रणाली की पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जनता के अधिकारों की सुरक्षा को इसकी सबसे बड़ी ताकत के रूप में रेखांकित किया है। मुख्य न्यायाधीश के इस बड़े दावे के बाद से देशभर में न्याय व्यवस्था को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं और लोग इसे भारत की बढ़ती न्यायिक ताकत के रूप में देख रहे हैं।
    user_UPNEWS 9
    UPNEWS 9
    सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के बरेली के भोजीपुरा क्षेत्र में पुलिस ने गौकशी की तैयारी कर रहे दो आरोपियों को एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, घेराबंदी के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसमें एक सिपाही घायल हो गया। इसके बाद पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी है। पुलिस ने घटनास्थल से रस्सियों से बंधे हुए एक जीवित बैल को सुरक्षित छुड़ाया है। इसके साथ ही मौके से अवैध तमंचे, कारतूस और गौकशी में इस्तेमाल होने वाले औजार भी बरामद किए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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    उत्तर प्रदेश के बरेली के भोजीपुरा क्षेत्र में पुलिस ने गौकशी की तैयारी कर रहे दो आरोपियों को एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, घेराबंदी के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसमें एक सिपाही घायल हो गया। इसके बाद पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी है।

पुलिस ने घटनास्थल से रस्सियों से बंधे हुए एक जीवित बैल को सुरक्षित छुड़ाया है। इसके साथ ही मौके से अवैध तमंचे, कारतूस और गौकशी में इस्तेमाल होने वाले औजार भी बरामद किए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
    user_ᴛʜᴇ ʟᴜᴄᴋɴᴏᴡ ᴄʀɪᴍᴇ
    ᴛʜᴇ ʟᴜᴄᴋɴᴏᴡ ᴄʀɪᴍᴇ
    Court reporter लखनऊ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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