चिड़ियों की प्यास बुझाने उठीं मातृशक्ति, ‘खुशियों की दीवार’ बना करुणा का जीवंत उदाहरण।। चरखी दादरी तेज होती गर्मी और सूखते जल स्रोतों के बीच जब नन्हे परिंदे आसमान में भटकते हैं, तब उनकी प्यास और बेबसी हर संवेदनशील दिल को झकझोर देती है। इन्हीं भावनाओं को संबल देते हुए ‘खुशियों की दीवार’ संचालक संजय रामफ़ल के द्वारा मार्च से सितंबर तक बेजुबान परिंदों के जीवन संरक्षण के लिए अभियान चलाया जा रहा है इसी कड़ी के तहत रविदास नगर में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला सहायता समूह की प्रधान सुनीता बंगाली की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं नेऔर बच्चों ने न केवल भाग लिया, बल्कि मानवता और करुणा का अद्भुत उदाहरण भी पेश किया। महिलाओं और बच्चों ने अपने हाथों से परिंदों के लिए परिंडे लगाए और यह संकल्प लिया कि वे रोजाना इन नन्हे जीवों के लिए पानी और दाना उपलब्ध कराएंगी। कार्यक्रम के दौरान माहौल भावुक हो उठा, जब यह चर्चा हुई कि भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते ये पक्षी हमारी छोटी-सी पहल से जीवन पा सकते हैं। महिलाओं ने कहा कि अब उनकी छतें सिर्फ घर का हिस्सा नहीं रहेंगी, बल्कि परिंदों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बनेंगी। सुनीता बंगाली ने अपने संबोधन में कहा, “गर्मी में प्यास से तड़पते पक्षियों को पानी देना सबसे बड़ा पुण्य है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल का ये पुण्य का कार्य सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली भावना है, जो हमें इंसानियत का असली अर्थ सिखाती है।” उन्होंने हर परिवार से अपील की कि वे कम से कम एक परिंडा जरूर लगाएं। सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने भावुक शब्दों में कहा कि पक्षी हमारे जीवन की मधुरता हैं। उनकी चहचहाहट हमारे दिन की शुरुआत को खुशियों से भर देती है। लेकिन आज शहरीकरण, पेड़ों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण ने इनकी दुनिया को संकट में डाल दिया है। “अगर आज हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां इनकी आवाज़ को सिर्फ कहानियों में ही सुन पाएंगी,” उन्होंने कहा। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को परिंडे और दाना-पानी की सामग्री वितरित की गई, ताकि यह सेवा निरंतर जारी रह सके। महिलाओं के चेहरों पर संतोष और अपनापन साफ झलक रहा था—मानो उन्होंने किसी अपने की प्यास बुझाने का सुकून पाया हो। इस अवसर पर रूप कला कृष्णा, सुनीता, भतेरी, भरपाई, अमित धनिया, सुनीता देवी, रजनी, सुनीता कुमारी, सत्यवीर सिंह बंगाली, पूनम देवी, धीरज कुमार, काकू, गौरव कुमार, नयन, प्रशिक्षित, अक्स, अंश, प्रणव, गुंजन, तपस्या व मायरा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन: रविदास नगर में नन्हे परिंदों की प्यास बुझाने के लिए परिंडे लगातीं महिलाएं—मानवता और करुणा का जीवंत दृश्य।
चिड़ियों की प्यास बुझाने उठीं मातृशक्ति, ‘खुशियों की दीवार’ बना करुणा का जीवंत उदाहरण।। चरखी दादरी तेज होती गर्मी और सूखते जल स्रोतों के बीच जब नन्हे परिंदे आसमान में भटकते हैं, तब उनकी प्यास और बेबसी हर संवेदनशील दिल को झकझोर देती है। इन्हीं भावनाओं को संबल देते हुए ‘खुशियों की दीवार’ संचालक संजय रामफ़ल के द्वारा मार्च से सितंबर तक बेजुबान परिंदों के जीवन संरक्षण के लिए अभियान चलाया जा रहा है इसी कड़ी के तहत रविदास नगर में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला सहायता समूह की प्रधान सुनीता बंगाली की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं नेऔर बच्चों ने न केवल भाग लिया, बल्कि मानवता और करुणा का अद्भुत उदाहरण भी पेश किया। महिलाओं और बच्चों ने अपने हाथों से परिंदों के लिए परिंडे लगाए और यह संकल्प लिया कि वे रोजाना इन नन्हे जीवों के लिए पानी और दाना उपलब्ध कराएंगी। कार्यक्रम के दौरान माहौल भावुक हो उठा, जब यह चर्चा हुई कि भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते ये पक्षी हमारी छोटी-सी पहल से जीवन पा सकते हैं। महिलाओं ने कहा कि अब उनकी छतें सिर्फ घर का हिस्सा नहीं रहेंगी, बल्कि परिंदों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बनेंगी। सुनीता बंगाली ने अपने संबोधन में कहा, “गर्मी में प्यास से तड़पते पक्षियों को पानी देना सबसे बड़ा पुण्य है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल का ये पुण्य का कार्य सिर्फ
एक अभियान नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली भावना है, जो हमें इंसानियत का असली अर्थ सिखाती है।” उन्होंने हर परिवार से अपील की कि वे कम से कम एक परिंडा जरूर लगाएं। सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने भावुक शब्दों में कहा कि पक्षी हमारे जीवन की मधुरता हैं। उनकी चहचहाहट हमारे दिन की शुरुआत को खुशियों से भर देती है। लेकिन आज शहरीकरण, पेड़ों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण ने इनकी दुनिया को संकट में डाल दिया है। “अगर आज हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां इनकी आवाज़ को सिर्फ कहानियों में ही सुन पाएंगी,” उन्होंने कहा। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को परिंडे और दाना-पानी की सामग्री वितरित की गई, ताकि यह सेवा निरंतर जारी रह सके। महिलाओं के चेहरों पर संतोष और अपनापन साफ झलक रहा था—मानो उन्होंने किसी अपने की प्यास बुझाने का सुकून पाया हो। इस अवसर पर रूप कला कृष्णा, सुनीता, भतेरी, भरपाई, अमित धनिया, सुनीता देवी, रजनी, सुनीता कुमारी, सत्यवीर सिंह बंगाली, पूनम देवी, धीरज कुमार, काकू, गौरव कुमार, नयन, प्रशिक्षित, अक्स, अंश, प्रणव, गुंजन, तपस्या व मायरा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। फोटो कैप्शन: रविदास नगर में नन्हे परिंदों की प्यास बुझाने के लिए परिंडे लगातीं महिलाएं—मानवता और करुणा का जीवंत दृश्य।
- चरखी दादरी:- क्षेत्र में हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। गांव कान्हड़ा, कादमा, बडराई, नौरंगाबास जाटान, माई कलां, रामबास, कारी , दगडौली, धनासरी, निमड़-बडेसरा, चांदवास सहित आसपास के दर्जनों गांवों में ओलों की मार से गेहूं, सरसों व टमाटर की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। तेज हवा और बारिश के साथ गिरे बड़े-बड़े ओलों ने कुछ ही मिनटों में खेतों का मंजर बदल दिया। गेहूं की खड़ी फसल पूरी तरह जमीन पर बिछ गई, सरसों की फलियां टूटकर बिखर गईं, जबकि टमाटर की फसल लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई। किसानों का कहना है कि इस बार उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से तुरंत गिरदावरी करवाने की मांग की है ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके। साथ ही शीघ्र व उचित मुआवजा देने, फसल बीमा क्लेम तुरंत जारी करने और विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की मांग भी उठाई गई है। किसान पवन फौजी कान्हड़ा, बिरेंद्र बडराई, अजीत कादमा, नौरंगाबास जाटान सरपंच राजा, नवीन रामबास, चरण सिंह, सुमित, नीरज कान्हड़ा, राकेश चहल बडेसरा सुनील बीडीसी चांदवास ने बताया कि गेहूं, सरसों के साथ टमाटर की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन जल्द गिरदावरी कर मुआवजा दे। किसानों के अनुसार कान्हड़ा, कादमा और नौरंगाबास जाटान, बडराई क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की है, ताकि प्रभावित किसानों को आर्थिक संकट से उबारा जा सके।4
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- #ऐसा जन्मदिन नहीं मनाया होगा किसी ने #आईटीआई कादमा के प्रिंसिपल सोमबीर बडराइ हुए 50 के1
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