चित्तौड़गढ़ जिले के आकोला स्थित पुलिस थाना परिसर में ताजिया (मोहर्रम) और आगामी त्योहारों के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस शांति समिति की बैठक में दोनों धर्मों के समुदाय के लोग, साथ ही सीएलजी सदस्य भी शामिल हुए। बैठक के दौरान थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह और शांति व्यवस्था कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर मोहर्रम के लिए गाँव के मुख्य मार्गों का अवलोकन और निरीक्षण किया। आगामी दिनों में आने वाले विभिन्न समुदायों के धार्मिक त्योहारों को शांतिपूर्ण और सांप्रदायिक सौहार्द के वातावरण में आयोजित करने पर जोर दिया गया। सभी उपस्थित सदस्यों के साथ त्योहारों के आयोजन, सामाजिक कार्यक्रमों और जुलूसों को परंपरागत रूट से ही निकालने के संबंध में चर्चा हुई। साथ ही, व्यक्ति विशेष या समुदाय विशेष को आहत करने वाले उत्तेजनात्मक नारे न लगाने के संबंध में भी अवगत कराया गया। ताजिया (मोहर्रम) के जुलूस के आयोजकों द्वारा बताए गए रूट का पुलिस प्रशासन ने निरीक्षण कर कानून व्यवस्था की दृष्टि से आवश्यक दिशानिर्देश दिए। इस अवसर पर श्याम लाल नाई, जगदीश चंद्र छीपा, अशोक एस पोखरना, उदय लाल छीपा, राजेश चपलोत, इंतियाज रंगरेज, सलीम पठान, आजाद मंसुरी, फारुख मंसुरी, निसार रंगरेज, पिंटू मंसुरी सहित दोनों समुदायों के लोग, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।
चित्तौड़गढ़ जिले के आकोला स्थित पुलिस थाना परिसर में ताजिया (मोहर्रम) और आगामी त्योहारों के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस शांति समिति की बैठक में दोनों धर्मों के समुदाय के लोग, साथ ही सीएलजी सदस्य भी शामिल हुए। बैठक के दौरान थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह और शांति व्यवस्था कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर मोहर्रम के लिए गाँव के मुख्य मार्गों का अवलोकन और निरीक्षण किया। आगामी दिनों में आने वाले विभिन्न समुदायों के धार्मिक त्योहारों को शांतिपूर्ण और सांप्रदायिक सौहार्द के वातावरण में आयोजित करने पर जोर दिया गया। सभी उपस्थित सदस्यों के साथ त्योहारों के आयोजन, सामाजिक कार्यक्रमों और जुलूसों को परंपरागत रूट से ही निकालने के संबंध में चर्चा हुई। साथ ही, व्यक्ति विशेष या समुदाय विशेष को आहत करने वाले उत्तेजनात्मक नारे न लगाने के संबंध में भी अवगत कराया गया। ताजिया (मोहर्रम) के जुलूस के आयोजकों द्वारा बताए गए रूट का पुलिस प्रशासन ने निरीक्षण कर कानून व्यवस्था की दृष्टि से आवश्यक दिशानिर्देश दिए। इस अवसर पर श्याम लाल नाई, जगदीश चंद्र छीपा, अशोक एस पोखरना, उदय लाल छीपा, राजेश चपलोत, इंतियाज रंगरेज, सलीम पठान, आजाद मंसुरी, फारुख मंसुरी, निसार रंगरेज, पिंटू मंसुरी सहित दोनों समुदायों के लोग, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।
- इंडिया ए और श्रीलंका के बीच हुए मैच के दौरान वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए धमाल मचा दिया। इस मुकाबले में उनका दमदार खेल देखने को मिला।1
- चित्तौड़गढ़ की मंगलवाड़ थाना पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में बड़ी सफलता हासिल की है। एक कार्रवाई में पुलिस ने 19 ग्राम अवैध MDMA पाउडर के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार कर एक मोटरसाइकिल जब्त की, वहीं दूसरी कार्रवाई में वाहनों की संरचना में अवैध परिवर्तन और अनाधिकृत लेखन पाए जाने पर 9 मोटरसाइकिलों को जब्त किया गया। यह जानकारी जिला पुलिस अधीक्षक चित्तौड़गढ़ धर्मेंद्र सिंह ने दी, जिन्होंने बताया कि यह कार्रवाई एएसपी मुकुल शर्मा आरपीएस के निर्देशन और डीएसपी बड़ीसादड़ी के सुपरविजन में की गई। पहली कार्रवाई 22 जून को हुई, जब मंगलवाड़ पुलिस ने चित्तौड़गढ़-उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर छापरी गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल आती दिखी, जिसके चालक ने पुलिस को देखकर भागने का प्रयास किया। पुलिस ने उसे रोककर नियमानुसार तलाशी ली, जिसमें आरोपी रामचंद्र पिता नारायणलाल गाडरी निवासी भगीमों का खेड़ा, थाना भीण्डर, जिला उदयपुर, और शंभूलाल पिता गंगाराम गुर्जर निवासी नेगड़िया, थाना मंगलवाड़, जिला चित्तौड़गढ़ के कब्जे से 19 ग्राम अवैध मिथाइलीनडाइऑक्सी मेथाम्फेटामाइन (MDMA) बरामद हुई। अवैध मादक पदार्थ के परिवहन में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी जब्त कर दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। दूसरी कार्रवाई में, यातायात एवं सड़क सुरक्षा अभियान के तहत वाहनों की जांच की गई। इस दौरान जिन वाहनों की संरचना में अवैध परिवर्तन, अनाधिकृत शब्द, चिन्ह या लेखन पाए गए, ऐसी 09 मोटरसाइकिलों को धारा 38 पुलिस एक्ट के तहत जब्त कर लिया गया।1
- फादर्स डे के अवसर पर चित्तौड़गढ़ में पूर्व नायब तहसीलदार बंशीलाल सोनी को सम्मानित किया गया। इसी के साथ, गोविंद सोनी को उनके श्रवण कुमार सुपुत्र होने के लिए विशेष 'श्रवण कुमार सुपुत्र सम्मान' से नवाजा गया।1
- समाज को यौन अपराधों से जुड़ी अपनी सोच पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक आम धारणा है कि यौन अपराधों का पीड़ित केवल महिला ही हो सकती है। हालांकि, सच्चाई यह है कि पुरुष भी यौन हिंसा, शोषण और दुष्कर्म का शिकार हो सकते हैं, और यह ज़रूरी है कि समाज इस मानसिकता को बदले, क्योंकि 'पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं' (#MenCanBeVictimsToo)। पीड़ित की पीड़ा का कोई लिंग नहीं होता; पुरुष भी उतना ही दर्द, अपमान और मानसिक आघात महसूस करते हैं जितना कोई महिला। सबसे दुखद पहलू यह है कि पुरुष पीड़ितों का अक्सर मज़ाक उड़ाया जाता है, उनकी आपबीती पर विश्वास नहीं किया जाता, या उन्हें चुप करा दिया जाता है। इस भेदभावपूर्ण और रूढ़िवादी मानसिकता को बदलने की सख्त ज़रूरत है। अतः, यदि किसी युवक के साथ यौन अपराध होता है, तो उसे भी उतनी ही गंभीरता से लेना अनिवार्य है। न्याय का आधार पीड़ित का लिंग नहीं, बल्कि उसके साथ किया गया अपराध होना चाहिए। अपराध हमेशा अपराध ही रहता है, चाहे पीड़ित महिला हो या पुरुष, और सभी के लिए न्याय सुनिश्चित होना चाहिए, क्योंकि 'पीड़ित का कोई लिंग नहीं होता' और हर किसी के लिए न्याय मिलना चाहिए (#JusticeForAll)।1
- चित्तौड़गढ़ में स्थित सांवलियाजी मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं में भारी रोष है। दर्शनार्थियों को मंदिर तक पहुँचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मंदिर का रास्ता बंद है। लोगों का कहना है कि इस स्थिति के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं, जिससे वे बेहद नाराज़ और परेशान हैं।1
- सुखपुरा में नालियों के पानी के कारण स्थानीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।1
- NEET परीक्षा के दौरान योगी की पुलिस ने एक सराहनीय कार्य किया है। जानकारी के अनुसार, एक छात्रा गलती से किसी और परीक्षा केंद्र पर पहुँच गई थी। इस स्थिति में, पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे अपनी कार में बिठाकर सही परीक्षा केंद्र तक पहुँचाया। इतना ही नहीं, छात्रा को देरी होने के बावजूद परीक्षा में बैठने दिया गया और उसने अपना एग्जाम सफलतापूर्वक दिया।1
- कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले थाने के भीतर यदि एक युवक भी सुरक्षित नहीं है, तो यह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। ऐसी घटनाओं के आरोप सामने आने से स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि थाने में आने वाली महिलाओं की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी। जब न्याय और सुरक्षा प्रदान करने वाली संस्थाओं पर ही सवाल उठने लगते हैं, तो जनता का उन पर से भरोसा कमजोर होने लगता है। इसी के मद्देनजर, इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच की तत्काल आवश्यकता है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। जनता को यह विश्वास दिलाना अनिवार्य है कि थाना न्याय और सुरक्षा का केंद्र है, न कि भय और असुरक्षा का।1