सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सोमनाथ मंदिर आध्यात्मिक विरासत एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक *प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक चेतना को मिली नई ऊर्जा* • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री ने समृद्ध विरासत को संजोकर आगामी पीढ़ी तक पहुंचाने का किया आह्वान • गुजरात के सोमनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव से जिला वीसी के माध्यम से जुड़ा, सुना प्रधानमंत्री का सम्बोधन खैरथल-तिजारा, 11 मई। भगवान सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को जिले के श्री शीतलदास जी महाराज आश्रम रैणागिरी मुंडावर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरी आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान सोमनाथ मंदिर में आयोजित माननीय प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यक्रम का प्रसारण और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला मुख्यालय पर प्रसारित किया गया। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे। प्रधानमंत्री का मंदिर मार्ग पर शंख और डमरू वादन के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की एवं देश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। सोमनाथ अमृत महोत्सव के अवसर पर आकाश में गौरव और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबेटिक टीम ने सोमनाथ मंदिर के ऊपर अपने फ्लाईपास्ट से केसरिया और तिरंगे की आभा बिखेरी। प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ अमृत-महोत्सव, अतीत का उत्सव ही नहीं, बल्कि अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। उन्होंने कहा कि आज भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें हमारी इस सांस्कृतिक निरंतरता की भी बहुत बड़ी भूमिका है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र सोमनाथ मंदिर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में यह आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। साथ ही, हर जिले में इस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उनका मानना था कि यह मंदिर भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक है। वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा इस मंदिर की समारोहपूर्वक प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई। ‘विकास भी, विरासत भी’ की संकल्पना धरातल पर हो रही साकार मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में ‘विकास भी, विरासत भी’ की संकल्पना को धरातल पर साकार किया जा रहा है। देशभर में धार्मिक स्थानों के विकास कर सनातन संस्कृति के उत्थान का कार्य किए जा रहे हैं। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारधाम पुनर्विकास, महाकाल लोक तथा धार्मिक स्थलों में विकास कार्यों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं तथा उन्होंने सोमनाथ मंदिर के विकास एवं संरक्षण के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने इस अवसर पर अगले 1 हजार दिनों के लिए विशेष पूजा की घोषणा भी की है। आध्यात्मिक उत्थान एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक निर्णय उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो साल में राज्य सरकार ने प्रदेश में आध्यात्मिक उत्थान एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। पुष्कर, खाटूश्यामजी, नाथद्वारा, केशोरायपाटन, डीग और चित्तौड़गढ़ जैसे धार्मिक एवं हेरिटेज शहरों में हेरिटेज वॉक-वे निर्माण, किराडू के मंदिर समूह का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के कार्य, पुष्कर, खाटूश्याम जी, देशनोक, डिग्गी में मुख्य प्रवेश मार्ग को माॅडल के रूप में विकास सहित धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत हजारों वरिष्ठजनों को हवाई एवं एसी ट्रेन के माध्यम से तीर्थ यात्रा का लाभ दिया जा रहा है। हमारी संस्कृति का स्वभाव - झुकते नहीं, टूटते नहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का भव्य निर्माण हमें याद दिलाता है कि सृजन की शक्ति विनाश से कहीं अधिक प्रबल होती है। हमारी संस्कृति का स्वभाव है कि हम झुकते नहीं, टूटते नहीं, बल्कि हर चुनौती के बाद और अधिक मजबूती से खड़े होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता, ईमानदारी, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सम्मान और राष्ट्रसेवा हमारी समृद्ध विरासत का हिस्सा हैं।
सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सोमनाथ मंदिर आध्यात्मिक विरासत एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक *प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक चेतना को मिली नई ऊर्जा* • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री ने समृद्ध विरासत को संजोकर आगामी पीढ़ी तक पहुंचाने का किया आह्वान • गुजरात के सोमनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव से जिला वीसी के माध्यम से जुड़ा, सुना प्रधानमंत्री का सम्बोधन खैरथल-तिजारा, 11 मई। भगवान सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को जिले के श्री शीतलदास जी महाराज आश्रम रैणागिरी मुंडावर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरी आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान सोमनाथ मंदिर में आयोजित माननीय प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यक्रम का प्रसारण और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला मुख्यालय पर प्रसारित किया गया। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे। प्रधानमंत्री का मंदिर मार्ग पर शंख और डमरू वादन के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की एवं देश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। सोमनाथ अमृत महोत्सव के अवसर पर आकाश में गौरव और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबेटिक टीम ने सोमनाथ मंदिर के ऊपर अपने फ्लाईपास्ट से केसरिया और तिरंगे की आभा बिखेरी। प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ अमृत-महोत्सव, अतीत का उत्सव ही नहीं, बल्कि अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। उन्होंने कहा कि आज भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें हमारी इस सांस्कृतिक निरंतरता की भी बहुत बड़ी भूमिका है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र सोमनाथ मंदिर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में यह आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। साथ ही, हर जिले में इस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उनका मानना था कि यह मंदिर भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक है। वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा इस मंदिर की समारोहपूर्वक प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई। ‘विकास भी, विरासत भी’ की संकल्पना धरातल पर हो रही साकार मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में ‘विकास भी, विरासत भी’ की संकल्पना को धरातल पर साकार किया जा रहा है। देशभर में धार्मिक स्थानों के विकास कर सनातन संस्कृति के उत्थान का कार्य किए जा रहे हैं। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारधाम पुनर्विकास, महाकाल लोक तथा धार्मिक स्थलों में विकास कार्यों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं तथा उन्होंने सोमनाथ मंदिर के विकास एवं संरक्षण के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने इस अवसर पर अगले 1 हजार दिनों के लिए विशेष पूजा की घोषणा भी की है। आध्यात्मिक उत्थान एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक निर्णय उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो साल में राज्य सरकार ने प्रदेश में आध्यात्मिक उत्थान एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। पुष्कर, खाटूश्यामजी, नाथद्वारा, केशोरायपाटन, डीग और चित्तौड़गढ़ जैसे धार्मिक एवं हेरिटेज शहरों में हेरिटेज वॉक-वे निर्माण, किराडू के मंदिर समूह का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के कार्य, पुष्कर, खाटूश्याम जी, देशनोक, डिग्गी में मुख्य प्रवेश मार्ग को माॅडल के रूप में विकास सहित धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत हजारों वरिष्ठजनों को हवाई एवं एसी ट्रेन के माध्यम से तीर्थ यात्रा का लाभ दिया जा रहा है। हमारी संस्कृति का स्वभाव - झुकते नहीं, टूटते नहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का भव्य निर्माण हमें याद दिलाता है कि सृजन की शक्ति विनाश से कहीं अधिक प्रबल होती है। हमारी संस्कृति का स्वभाव है कि हम झुकते नहीं, टूटते नहीं, बल्कि हर चुनौती के बाद और अधिक मजबूती से खड़े होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता, ईमानदारी, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सम्मान और राष्ट्रसेवा हमारी समृद्ध विरासत का हिस्सा हैं।
- अलवर अस्पताल में कुत्तों का आतंक जिला कलेक्टर अर्तिका शुक्ला ने किया औचत निरीक्षण निरीक्षण के दौरान परिजनों ने अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों को लेकर की थी शिकायत अस्पताल के वार्डों में घूम रहे थे आवारा कुत्ते जिला कलेक्टर के निरीक्षण के बाद को पकड़ने का कार्य किया गया1
- मुंडावर क्षेत्र में अवैध मिट्टी दोहन का मामला सामने आया खैरथल मुंडावर क्षेत्र में अवैध मिट्टी दोहन का मामला सामने आया खैरथल-तिजारा जिले के मुंडावर उपखंड क्षेत्र के रायपुर काली पहाड़ी टेंडका मार्ग पर अवैध रूप से मिट्टी दोहन किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार एलएनटी मशीनों और भारी वाहनों की मदद से लगातार मिट्टी का खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना अनुमति बड़े स्तर पर मिट्टी उठाई जा रही है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भी हानि पहुंच रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कर अवैध मिट्टी दोहन पर रोक लगाने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि लगातार हो रहे अवैध खनन से आसपास की जमीन कमजोर हो रही है और भविष्य में हादसे की आशंका भी बनी हुई है।1
- पेयजल की समस्याओं को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा रोड क्या जाम1
- Alwar mein ladiyan Bagh ka haal ek mahine se yah Nala gandgi se bhara hua hai aur iski marmmat bhi nahin ho rahi1
- मजदूर की मेहनत से ही देश की तरक्की होती है। अपनी ताकत पहचानो, एकजुट रहो और अपने हक के लिए हमेशा आवाज उठाओ। मेहनत करने वाला कभी कमजोर नहीं होता, वही समाज की असली ताकत है। मजदूरों के मेहनत पसीने से बड़ी-बड़ी कंपनियां चलती है1
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- अलवर के ओडेला मानकी इलाके में चल रहे अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। वे पहाड़ों में हो रही खुदाई को रोकने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए सफिया जुबेर खान और नसरू प्रधान धरने पर बैठे हैं।1
- अलवर के किशनगढ़ बास क्षेत्र में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। इससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से काफी राहत मिली।1