पेट्रोल-डीज़ल व रसोई गैस की किल्लत से नागरिक परेशान सरकार के आदेश-निर्देश कागज़ों तक सीमित, ज़मीनी स्तर पर नहीं दिख रही कार्रवाई पेट्रोल-डीज़ल व रसोई गैस की किल्लत से नागरिक परेशान सरकार के आदेश-निर्देश कागज़ों तक सीमित, ज़मीनी स्तर पर नहीं दिख रही कार्रवाई जनक्रांति कार्यालय संवाददाता की विशेष रिपोर्ट ताजपुर थाना चौक स्थित पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल लेने की आपाधापी का दृश्य घंटो से इंतजार करते वाहन लाइन में लगी हुई है पेट्रोल लेने वास्ते मची होड़ समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 31 मार्च, 2026)। बिहार राज्य के विभिन्न जिला क्षेत्र में इन दिनों पेट्रोल, डीज़ल एवं रसोई गैस की लगातार हो रही किल्लत से आम नागरिकों की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं। स्थिति यह है कि लोगों को आवश्यक ईंधन के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, फिर भी पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल-डीज़ल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं रसोई गैस की आपूर्ति बाधित होने से घरेलू महिलाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें : स्थानीय पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है। वाहन चालकों का कहना है कि ईंधन की कमी के कारण उनका दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। एक वाहन चालक ने बताया कि "सुबह से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अभी तक पेट्रोल नहीं मिला। कई बार आधे टैंक तक ही ईंधन दिया जा रहा है। इससे लंबी दूरी तय करना मुश्किल हो गया है।" वहीं दूसरी तरफ रसोई गैस की कमी से बनी घरेलू संकट : रसोई गैस की आपूर्ति में देरी के कारण घर-घर में परेशानी बढ़ गई है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद भी गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों को ब्लैक में ऊँचे दाम पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। गृहिणियों ने बताया कि "समय पर गैस नहीं मिलने से लकड़ी और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त परेशानी हो रही है।" प्रशासनिक आदेश, लेकिन ज़मीनी असर नहीं सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इन आदेशों का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित दिखाई दे रही है। कालाबाज़ारी की भी आशंका : स्थानीय लोगों का आरोप है कि ईंधन की कमी के नाम पर कालाबाज़ारी भी की जा रही है। कुछ स्थानों पर सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है, जबकि अन्यत्र ऊँचे दामों पर उपलब्ध होने की शिकायतें मिल रही हैं। प्रशासन से कार्रवाई की मांग : नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंधन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई हो: गैस एजेंसियों की निगरानी बढ़ाई जाए पेट्रोल पंपों पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए. स्थिति गंभीर, त्वरित समाधान आवश्यक यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। आम नागरिकों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार ऐसा इसलिए हो रहा है की सरकार और सरकारी नुमाइंदे चाहते है की जनमानस बिजली का चूल्हा जलाये और ईलेक्ट्रिक चार्जर बैटरी प्रदूषण मुक्त वाहन की बिक्री सम्भव हो सके और इस से प्राइवेट सेक्टर को फायदा मिल सके। जनक्रांति न्यूज़ इस मामले पर लगातार नज़र बनाए हुए है। समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
पेट्रोल-डीज़ल व रसोई गैस की किल्लत से नागरिक परेशान सरकार के आदेश-निर्देश कागज़ों तक सीमित, ज़मीनी स्तर पर नहीं दिख रही कार्रवाई पेट्रोल-डीज़ल व रसोई गैस की किल्लत से नागरिक परेशान सरकार के आदेश-निर्देश कागज़ों तक सीमित, ज़मीनी स्तर पर नहीं दिख रही कार्रवाई जनक्रांति कार्यालय संवाददाता की विशेष रिपोर्ट ताजपुर थाना चौक स्थित पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल लेने की आपाधापी का दृश्य घंटो से इंतजार करते वाहन लाइन में लगी हुई है पेट्रोल लेने वास्ते मची होड़ समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 31 मार्च, 2026)। बिहार राज्य के विभिन्न जिला क्षेत्र में इन दिनों पेट्रोल, डीज़ल एवं रसोई गैस की लगातार हो रही किल्लत से आम नागरिकों की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं। स्थिति यह है कि लोगों को आवश्यक ईंधन के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, फिर भी पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल-डीज़ल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं रसोई गैस की आपूर्ति बाधित होने से घरेलू महिलाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें : स्थानीय पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी लोगों
को निराश होकर लौटना पड़ता है। वाहन चालकों का कहना है कि ईंधन की कमी के कारण उनका दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। एक वाहन चालक ने बताया कि "सुबह से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अभी तक पेट्रोल नहीं मिला। कई बार आधे टैंक तक ही ईंधन दिया जा रहा है। इससे लंबी दूरी तय करना मुश्किल हो गया है।" वहीं दूसरी तरफ रसोई गैस की कमी से बनी घरेलू संकट : रसोई गैस की आपूर्ति में देरी के कारण घर-घर में परेशानी बढ़ गई है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद भी गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों को ब्लैक में ऊँचे दाम पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। गृहिणियों ने बताया कि "समय पर गैस नहीं मिलने से लकड़ी और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त परेशानी हो रही है।" प्रशासनिक आदेश, लेकिन ज़मीनी असर नहीं सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इन आदेशों का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई केवल
कागज़ों तक सीमित दिखाई दे रही है। कालाबाज़ारी की भी आशंका : स्थानीय लोगों का आरोप है कि ईंधन की कमी के नाम पर कालाबाज़ारी भी की जा रही है। कुछ स्थानों पर सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है, जबकि अन्यत्र ऊँचे दामों पर उपलब्ध होने की शिकायतें मिल रही हैं। प्रशासन से कार्रवाई की मांग : नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंधन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई हो: गैस एजेंसियों की निगरानी बढ़ाई जाए पेट्रोल पंपों पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए. स्थिति गंभीर, त्वरित समाधान आवश्यक यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। आम नागरिकों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार ऐसा इसलिए हो रहा है की सरकार और सरकारी नुमाइंदे चाहते है की जनमानस बिजली का चूल्हा जलाये और ईलेक्ट्रिक चार्जर बैटरी प्रदूषण मुक्त वाहन की बिक्री सम्भव हो सके और इस से प्राइवेट सेक्टर को फायदा मिल सके। जनक्रांति न्यूज़ इस मामले पर लगातार नज़र बनाए हुए है। समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
- User4840Khudiram B Pusa😤2 hrs ago
- कैमूर वन अधिकार संघर्ष मोर्चा कैमुरांचल सांगठनिक कमेटी दिनांक -31 मार्च 2026 ----------------------- प्रेस विज्ञप्ति कैमूर के पठारीय वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासियों एवं अन्य वन निवासियों के परंपरागत एवं नैसर्गिक जीवन में आरएसएस बीजेपी सरकार तथा उसके वन विभाग के बढ़ते हस्तक्षेप एवं कुल 58 आदिवासी बहुल गांव के उजाड़ कर बाघ अभ्यारण बनाने के विरुद्ध कैमूर वन अधिकार संघर्ष मोर्चा एवं ऑल इंडिया ट्राइबल फोरम ने संयुक्त रूप से 14 सूत्रीय मांगों को लेकर आज दिनांक 31 मार्च 2026 को जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी के सासाराम कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन एवं आंदोलन किया। कैमूर वन क्षेत्र से भारी संख्या में आदिवासियों एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों ने हाथों में बैनर झंडा तख्ती कुल्हाड़ी एवं तीर धनुष लिए हुए दिन के 12:00 बजे रेलवे मैदान सासाराम से एक विशाल प्रदर्शन निकाला जो पुरानी जीटी रोड होते हुए जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी के कार्यालय के सामने जाकर सभा में तब्दील हो गया जिसकी अध्यक्षता एवं संचालन मोर्चा के अध्यक्ष धनंजय उरांव ने किया। इस मौके पर आदिवासी समुदाय के सांस्कृतिक कर्मियों ने अपने पारंपरिक वाद्य यंत्र की थाप पर लोक नृत्य किया और लोकगीत गाए। जल जंगल जमीन पर अधिकार हमारा है, कैमूर वन अधिकार संघर्ष मोर्चा ने ललकारा है के नारों से वातावरण गूंज उठा। सभा को संबोधित करते हुए मोर्चा के अध्यक्ष धनंजय उरांव ने कहा कि ब्रिटिश शासन काल में वन संपदा के लूट के लिए अंग्रेजों द्वारा बनाया गया वन विभाग आज भी हम आदिवासियों के साथ गुलामों जैसा बर्ताव करता है आज हम अपने ही जंगल में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं कैमूर वन क्षेत्र में कभी कोई बाघों का नामोनिशान नहीं था फिर भी 58 गांव को उजाड़ कर सरकार बाघ अभ्यारण बना रही है। इसके विरोध में आज हम डीएफओ साहब के कार्यालय पर आए हैं। इस मौके पर सभा को संबंधित करने वाले मुख्य वक्ताओं में मोर्चा के पूर्व संयोजक सुरेंद्र सिंह, सूरज उरांव, सुनील चेरो, पलटन चेरो, अनीता चेरो, कौशल्या चेरो, संजीव खरवार, बीरेंद्र उरांव, कमलेश उरांव डोमा खरवार, आर्लेस चेरो, कामेश्वर उरांव, शिवराज उरांव, मोती उरांव, चंपा चेरो आदि मुख्य थे। इस मौके पर निम्न मैंगो का ज्ञापन सोपा गया :----- 1 कैमूर बाग अभ्यारण परियोजना रद्द करो 2 कैमूर पठारिय वन क्षेत्र को संविधान की पांचवी अनुसूची में शामिल करो। 3 वन अधिकार कानून 2006 को मूल रूप से लागू करो। 4 ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना कैमूर वन क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण एवं विशेष योजनाओं के अमल पर रोक लगाओ। 5 कैमूर वन क्षेत्र में मौजूद बिहार सरकार भूमि को वन विभाग के अतिक्रमण से मुक्त कराओ। कैमूर वन अधिकार संघर्ष मोर्चा एवं ऑल इंडिया ट्राइबल फ़ोरम के नेताओं ने वन प्रमंडल पदाधिकारी डीएफओ रोहतास को चेताया कि यदि हमारी मांगों को अनसुना किया गया तो हम अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे तथा वन विभाग के कामकाज को ठप कर देंगे। भवदीय धनंजय उरांव अध्यक्ष कैमूर वन अधिकार संघर्ष मोर्चा4
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