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राजस्थान में हाईवे बना आग का दरिया, तेल टैंकर पलटा — 1 जिंदा जला राजस्थान के जालोर जिले में नेशनल हाईवे-48 पर बुधवार दोपह

2 hrs ago
user_Update news 24
Update news 24
Photographer बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
2 hrs ago

राजस्थान में हाईवे बना आग का दरिया, तेल टैंकर पलटा — 1 जिंदा जला राजस्थान के जालोर जिले में नेशनल हाईवे-48 पर बुधवार दोपह

More news from झारखंड and nearby areas
  • Post by Update news 24
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    Post by Update news 24
    user_Update news 24
    Update news 24
    Photographer बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    17 min ago
  • Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
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    Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    12 hrs ago
  • कोडरमा: जयनगर थान के हाजत में आत्महत्या के मामले में मृतक के परिजन का पुलिस पर बड़ा आरोप! मृतक की पत्नी का बयान बदला जाने का शक हुआ मृतक के परिजन को,और पुलिस मृतक की पत्नी को सुरक्षित करने के लिए पुलिस ले गई थी थाने के अंदर तो ग्रामीण और परिजन किए विरोध!
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    कोडरमा: जयनगर थान के हाजत में आत्महत्या के मामले में मृतक के परिजन का पुलिस पर बड़ा आरोप!
मृतक की पत्नी का बयान बदला जाने का शक हुआ मृतक के परिजन को,और पुलिस मृतक की पत्नी को सुरक्षित करने के लिए पुलिस ले गई थी थाने के अंदर तो ग्रामीण और परिजन किए विरोध!
    user_Sach Tak Jharkhand News
    Sach Tak Jharkhand News
    Local News Reporter बिशुनगढ़, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
  • Post by Tuleshwar mahto
    1
    Post by Tuleshwar mahto
    user_Tuleshwar mahto
    Tuleshwar mahto
    Video Creator Bishungarh, Hazaribagh•
    16 hrs ago
  • साथियों यह घटना पांच माधव बरही क्षेत्र का है, स्थानीय ड्राइवर से अनुरोध करूंगा कि आप इनका हेल्प करें, मेरा हर संभव प्रयास यही रहेगा कि इनका सहयोग हो धन्यवाद
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    साथियों यह घटना पांच माधव बरही क्षेत्र का है, स्थानीय ड्राइवर से अनुरोध करूंगा कि आप इनका हेल्प करें, मेरा हर संभव प्रयास यही रहेगा कि इनका सहयोग हो धन्यवाद
    user_🇮🇳 सामाजिक कार्यकर्ता भारतीय ड्राइवर सोनू कुमार Bhartiya Driver Sonu Kumar samaj sevak
    🇮🇳 सामाजिक कार्यकर्ता भारतीय ड्राइवर सोनू कुमार Bhartiya Driver Sonu Kumar samaj sevak
    Samaj Sevak डोमचांच, कोडरमा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • *नवरात्र के दूसरे दिन सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग, जानें शुभ रंग, माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग, पूजा विधि और कथा* *धनबाद :* नवरात्रि के दूसरे दिन यानी कि चैत्र शुक्‍ल द्वितीया तिथि को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है. साथ ही साल 2026 की चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ फल देगा. साथ ही इस साल 20 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. इस शुभ योग में किए गए काम सफल होते हैं. पूजा का ज्‍यादा फल मिलता है. 20 मार्च 2026, शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए 3 शुभ मुहूर्त हैं. ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:57 बजे से सुबह 05:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक अमृत काल - दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक *नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग* इस साल चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को सर्वार्थसिद्धि योग का अतिशुभ संयोग बन रहा है. धर्म और ज्‍योतिष में सर्वार्थसिद्धि योग को बेहत शुभ माना गया है. सर्वार्थसिद्धि योग 20 मार्च 2026 की सुबह 04:04 बजे से प्रारंभ होकर 21 मार्च 2026 के तड़के 02:27 तब रहेगा. *ब्रह्मचारिणी देवी पूजा भोग* ब्रह्मचारिणी देवी की विधि-विधान से पूजा करें. देवी का पंचामृत स्नान कराएं, फिर पीले और सफेद फूल अर्पित करें. माला पहनाएं. अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, अर्पित करें. साथ ही माता ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग लगाएं. ब्रह्मचारिणी देवी को शक्‍कर बेहद प्रिय है इसलिए उनकी पूजा सात्विक चीजों फल और चीनी का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद चीनी ब्राह्मण को दान में दे दें. *ब्रह्मचारिणी देवी की कथा* मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं ब्रह्मचारिणी देवी. यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है. मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है. वहीं ब्रह्मचारिणी शब्‍द से अर्थ है कि तप की चारिणी यानी कठोर तप करने वाली. देवी दुर्गा का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है. इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार पूर्वजन्म में देवी मां के इस रूप ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया. एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया. पीरियड्स के किस दिन कर सकते हैं नवरात्र की पूजा, 9 दिन के दौरान आ जाए मासिकधर्म तो व्रत करें या नहीं? दूर कर लें हर कंफ्यूजन कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया. कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया. देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की. यह तुम्हीं से ही संभव थी. तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं. तब देवी ने तपस्‍या खत्‍म की. मान्‍यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं.(डिस्क्लेमर - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. न्यूज़ फास्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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    *नवरात्र के दूसरे दिन सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग, जानें शुभ रंग, माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग, पूजा विधि और कथा*
*धनबाद :* नवरात्रि के दूसरे दिन यानी कि चैत्र शुक्‍ल द्वितीया तिथि को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है. साथ ही साल 2026 की चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ फल देगा.
साथ ही इस साल 20 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. इस शुभ योग में किए गए काम सफल होते हैं. पूजा का ज्‍यादा फल मिलता है.
20 मार्च 2026, शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए 3 शुभ मुहूर्त हैं.
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:57 बजे से सुबह 05:45 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
अमृत काल - दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक
*नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग*
इस साल चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को सर्वार्थसिद्धि योग का अतिशुभ संयोग बन रहा है. धर्म और ज्‍योतिष में सर्वार्थसिद्धि योग को बेहत शुभ माना गया है. सर्वार्थसिद्धि योग 20 मार्च 2026 की सुबह 04:04 बजे से प्रारंभ होकर 21 मार्च 2026 के तड़के 02:27 तब रहेगा.
*ब्रह्मचारिणी देवी पूजा भोग*
ब्रह्मचारिणी देवी की विधि-विधान से पूजा करें. देवी का पंचामृत स्नान कराएं, फिर पीले और सफेद फूल अर्पित करें. माला पहनाएं. अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, अर्पित करें.
साथ ही माता ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग लगाएं. ब्रह्मचारिणी देवी को शक्‍कर बेहद प्रिय है इसलिए उनकी पूजा सात्विक चीजों फल और चीनी का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद चीनी ब्राह्मण को दान में दे दें.
*ब्रह्मचारिणी देवी की कथा*
मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं ब्रह्मचारिणी देवी. यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है. मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है. वहीं ब्रह्मचारिणी शब्‍द से अर्थ है कि तप की चारिणी यानी कठोर तप करने वाली. देवी दुर्गा का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है. इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं.
पौराणिक कथाओं के अनुसार पूर्वजन्म में देवी मां के इस रूप ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया. एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया.
पीरियड्स के किस दिन कर सकते हैं नवरात्र की पूजा, 9 दिन के दौरान आ जाए मासिकधर्म तो व्रत करें या नहीं? दूर कर लें हर कंफ्यूजन
कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया.
कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया. देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की. यह तुम्हीं से ही संभव थी. तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं. तब देवी ने तपस्‍या खत्‍म की. मान्‍यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं.(डिस्क्लेमर - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. न्यूज़ फास्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
    user_Public News JH
    Public News JH
    Local News Reporter Chisti Nagar, Hazaribagh•
    9 hrs ago
  • बैद्यनाथ धाम में भक्तों को धकेलने का वीडियो, निशिकांत दुबे ने CM सोरेन को लपेटा !
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    बैद्यनाथ धाम में भक्तों को धकेलने का वीडियो, निशिकांत दुबे ने CM सोरेन को लपेटा !
    user_News Xpose ( Jishan Raj)
    News Xpose ( Jishan Raj)
    Press Azad Mahalla, Hazaribagh•
    9 hrs ago
  • Post by Update news 24
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    Post by Update news 24
    user_Update news 24
    Update news 24
    Photographer बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    18 min ago
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