लोकार्पण के बाद बदहाल ‘लोकमाता बस अड्डा’: करोड़ों खर्च, यात्रियों के लिए बेंच तक नहीं शाहजहांपुर। अहमदपुर नियाजपुर में बने सेटेलाइट बस अड्डे का भव्य लोकार्पण तो हो गया, लेकिन यात्रियों की सुविधाएं अब भी नदारद हैं। महान समाजसेवी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर बने इस बस अड्डे से बड़ी उम्मीदें थीं, पर हकीकत में यहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और परिवहन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के प्रयासों से बस अड्डे का उद्घाटन हुआ और बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया गया, लेकिन यात्रियों के बैठने के लिए एक बेंच तक नहीं लगाई गई। विभागीय अधिकारी कार्यालयों में बैठने लगे, मगर यात्रियों को भीषण गर्मी में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बस अड्डे पर साफ-सफाई और बुनियादी व्यवस्था का अभाव साफ दिख रहा है। परिसर में गंदगी और अव्यवस्था बढ़ती जा रही है, जिससे प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की भी धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्घाटन के बाद से अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की सुध नहीं ली। यहां तक कि लंबी दूरी की बसें भी कई बार बस अड्डे में प्रवेश किए बिना ओवरब्रिज से ही निकल जाती हैं, जिससे बस अड्डा केवल शोपीस बनकर रह गया है। जनता की मांग है कि जल्द से जल्द यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि करोड़ों की लागत से बना यह बस अड्डा वास्तव में लोगों के काम आ सके।
लोकार्पण के बाद बदहाल ‘लोकमाता बस अड्डा’: करोड़ों खर्च, यात्रियों के लिए बेंच तक नहीं शाहजहांपुर। अहमदपुर नियाजपुर में बने सेटेलाइट बस अड्डे का भव्य लोकार्पण तो हो गया, लेकिन यात्रियों की सुविधाएं अब भी नदारद हैं। महान समाजसेवी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर बने इस बस अड्डे से बड़ी उम्मीदें थीं, पर हकीकत में यहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और परिवहन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के प्रयासों से बस अड्डे का उद्घाटन हुआ और बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया गया, लेकिन यात्रियों के बैठने के लिए एक बेंच तक नहीं लगाई गई। विभागीय अधिकारी कार्यालयों में बैठने लगे, मगर यात्रियों को भीषण गर्मी में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बस अड्डे पर साफ-सफाई और बुनियादी व्यवस्था का अभाव साफ दिख रहा है। परिसर में गंदगी और अव्यवस्था बढ़ती जा रही है, जिससे प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की भी धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्घाटन के बाद से अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की सुध नहीं ली। यहां तक कि लंबी दूरी की बसें भी कई बार बस अड्डे में प्रवेश किए बिना ओवरब्रिज से ही निकल जाती हैं, जिससे बस अड्डा केवल शोपीस बनकर रह गया है। जनता की मांग है कि जल्द से जल्द यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि करोड़ों की लागत से बना यह बस अड्डा वास्तव में लोगों के काम आ सके।
- शाहजहांपुर में भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने का महाअभियान शुक्रवार को शुरू हुआ। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बंडा के नवादा ढाह से दलेलापुर जलधारा तक पूजा-अर्चना कर इसकी शुरुआत की। इस अभियान का लक्ष्य 15 दिन में नदी की दूसरी जलधारा की खुदाई करना है।1
- दहेज उत्पीड़न और जलाकर हत्या के प्रयास मामले में ससुर गिरफ्तार दहेज उत्पीड़न और जलाकर हत्या के प्रयास मामले में ससुर गिरफ्तार1
- जिलाधिकारी व समाजसेवियों के संग शुरू हुआ भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान, 👉जनसहयोग से बहेगी फिर जलधारा शाहजहांपुर, 08 मई। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद कुमार सिंह के साथ विकासखंड बंडा की ग्राम पंचायत नवादा ढाह से दलेलापुर जलधारा में भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान का पूजा-अर्चना कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं और ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी रही। जिलाधिकारी ने कहा कि नदियों के संरक्षण में तालाब, पोखर और अन्य जलस्रोतों की अहम भूमिका होती है। वर्षा के दौरान यही जलस्रोत अतिरिक्त पानी को रोककर बाढ़ नियंत्रण में सहायक बनते हैं और भूजल स्तर को बढ़ाते हैं। “दस वर्ष, एक जनपद–एक नदी” कार्यक्रम के तहत जिले में भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने का अभियान तेज गति से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जनसहयोग से लगभग 55-56 किलोमीटर नदी की खुदाई का कार्य 15 से 20 दिनों में पूरा किया गया था, जबकि प्रारंभिक लक्ष्य 35-36 किलोमीटर का था। अब नदी की दूसरी धारा, जिसकी लंबाई करीब 25-26 किलोमीटर है, की खुदाई शुरू की गई है और इसे 10–15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर दूसरे-तीसरे दिन स्थल का निरीक्षण कर कार्य की निगरानी करें और समयबद्ध तरीके से अभियान पूरा कराएं। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयास से आने वाले 4–5 वर्षों में नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह फिर विकसित होगा। अभियान के साथ व्यापक वृक्षारोपण पर भी विशेष जोर दिया गया है। इस वर्ष नदी किनारे 40–50 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा पौधों की सुरक्षा के लिए तारबाड़ की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों और समाजसेवियों ने नदी पुनर्जीवन अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया और प्रशासन के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई।1
- लोकार्पण के बाद बदहाल ‘लोकमाता बस अड्डा’: करोड़ों खर्च, यात्रियों के लिए बेंच तक नहीं शाहजहांपुर। अहमदपुर नियाजपुर में बने सेटेलाइट बस अड्डे का भव्य लोकार्पण तो हो गया, लेकिन यात्रियों की सुविधाएं अब भी नदारद हैं। महान समाजसेवी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर बने इस बस अड्डे से बड़ी उम्मीदें थीं, पर हकीकत में यहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और परिवहन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के प्रयासों से बस अड्डे का उद्घाटन हुआ और बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया गया, लेकिन यात्रियों के बैठने के लिए एक बेंच तक नहीं लगाई गई। विभागीय अधिकारी कार्यालयों में बैठने लगे, मगर यात्रियों को भीषण गर्मी में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बस अड्डे पर साफ-सफाई और बुनियादी व्यवस्था का अभाव साफ दिख रहा है। परिसर में गंदगी और अव्यवस्था बढ़ती जा रही है, जिससे प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की भी धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्घाटन के बाद से अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की सुध नहीं ली। यहां तक कि लंबी दूरी की बसें भी कई बार बस अड्डे में प्रवेश किए बिना ओवरब्रिज से ही निकल जाती हैं, जिससे बस अड्डा केवल शोपीस बनकर रह गया है। जनता की मांग है कि जल्द से जल्द यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि करोड़ों की लागत से बना यह बस अड्डा वास्तव में लोगों के काम आ सके।2
- ❗सा व र क र ने पांच बार अंग्रेजों से दया की भीख मांगी थी। सा व र क र के पड़पोते का अदालत में कुबूलनामा.. 🔸 हां सावरकर ने द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश फ़ौज में भर्ती के लिए अपील की थी। 🔸 हां सावरकर ने गाय को कभी भगवान नहीं कहा, वे उसे केवल एक उपयोगी जानवर मानते थे। 🔸 रा हु ल गां धी के खिलाफ़ मानहानि केस में बहस के दौरान सात्यकी मान चुके हैं कि सा व र क र को एक लेखक ने स्वातंत्र्य वीर लिखा था सरकार ने नहींं।1
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- शाहजहाँपुर के मदनापुर थाना क्षेत्र के चंदपुर गांव में डीजे संचालक हरिओम का शव खेत में मिला है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई कर रही है।1
- शाहजहांपुर में प्रशासन ने भैंसी नदी को पुनर्जीवित करने का महाअभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी ने बंडा ब्लॉक से जलधारा तक पूजा-अर्चना के साथ अभियान की शुरुआत की है और 15 दिनों में नदी की दूसरी धारा की खुदाई पूरी करने का लक्ष्य रखा है। इस पहल से नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह लौटने और भूजल स्तर सुधारने की उम्मीद है।1