उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में वरिष्ठ अधिवक्ता और आरएसएस कार्यकर्ता रवींद्र परमार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर एक गंभीर आरोप लगाया है। परमार का कहना है कि सरकारी जमीनों, तालाबी संपत्तियों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की करीब 100 पन्नों की एक महत्वपूर्ण पत्रावली कलेक्ट्रेट से गायब हो गई है। उन्होंने इसे प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, आशंका जताई है कि यदि इन दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होती तो सरकारी भूमि, तालाबी संपत्तियों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते थे। रवींद्र परमार, जो वर्ष 2000 से 2015 तक फतेहपुर में शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) के रूप में कार्यरत रहे, उन्होंने सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को भू-माफियाओं के कब्जे से बचाने का काम किया है। सेवा छोड़ने के बाद भी उन्होंने वर्ष 2016 से निजी वकालत करते हुए तालाबों, चारागाहों और अन्य सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों को जिलाधिकारियों के सामने उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग विभागों, राजस्व अभिलेखों, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर लगभग 100 पन्नों की यह विस्तृत पत्रावली तैयार की थी। यह पत्रावली 9 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र सिंह को सौंपी गई थी ताकि सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण और अनियमितताओं की जांच कराई जा सके, लेकिन जिलाधिकारी के स्थानांतरण के बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद अधिवक्ता परमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को इस मामले से अवगत कराया था। हाईकोर्ट ने 5 फरवरी 2017 और 25 अप्रैल 2018 को जिलाधिकारियों को उनकी शिकायतों और अभिलेखों के निस्तारण के निर्देश दिए थे, लेकिन आरोप है कि प्रशासन ने इन आदेशों को भी दबा दिया और कोई कार्रवाई नहीं की गई। रवींद्र परमार ने वर्तमान जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स से भी कई बार मुलाकात की और 14 मई तथा 22 मई 2026 को लिखित शिकायतें सौंपीं। इस दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि तत्कालीन एडीएम अविनाश त्रिपाठी उक्त 100 पेज की पत्रावली अपने साथ ले गए हैं। युगान्तर प्रवाह ने जब इस संबंध में डीएम निधि गुप्ता वत्स का पक्ष जानने के लिए दूरभाष से संपर्क किया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। परमार का कहना है कि गायब हुई इस पत्रावली में सैकड़ों बीघे सरकारी भूमि, तालाबों और कथित भूमि घोटालों से जुड़ी जानकारियां शामिल थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी जांच होने पर भू-माफियाओं और उनसे जुड़े संभावित नेटवर्क का खुलासा हो सकता था, साथ ही कुछ मामलों को 'लैंड जिहाद' से भी जोड़ते हुए जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि इस प्रकरण में प्रशासन के साथ कई सफेदपोश लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। उन्होंने 20 फरवरी, 16 मार्च और 29 मई 2026 को जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायतें पहुंचाई हैं। उनकी मांगों में सदर तहसील में पारित आदेशों की समीक्षा, रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच और एक स्वतंत्र समिति के गठन भी शामिल है। रवींद्र परमार ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो वह अनशन शुरू करेंगे।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में वरिष्ठ अधिवक्ता और आरएसएस कार्यकर्ता रवींद्र परमार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर एक गंभीर आरोप लगाया है। परमार का कहना है कि सरकारी जमीनों, तालाबी संपत्तियों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की करीब 100 पन्नों की एक महत्वपूर्ण पत्रावली कलेक्ट्रेट से गायब हो गई है। उन्होंने इसे प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, आशंका जताई है कि यदि इन दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होती तो सरकारी भूमि, तालाबी संपत्तियों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते थे। रवींद्र परमार, जो वर्ष 2000 से 2015 तक फतेहपुर में शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) के रूप में कार्यरत रहे, उन्होंने सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को भू-माफियाओं के कब्जे से बचाने का काम किया है। सेवा छोड़ने के बाद भी उन्होंने वर्ष 2016 से निजी वकालत करते हुए तालाबों, चारागाहों और अन्य सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों को जिलाधिकारियों के सामने उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग विभागों, राजस्व अभिलेखों, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर लगभग 100 पन्नों की यह विस्तृत पत्रावली तैयार की थी। यह पत्रावली 9 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र सिंह को सौंपी गई थी ताकि सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण और अनियमितताओं की जांच कराई जा सके, लेकिन जिलाधिकारी के स्थानांतरण के बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद अधिवक्ता परमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को इस मामले से अवगत कराया था। हाईकोर्ट ने 5 फरवरी 2017 और 25 अप्रैल 2018 को जिलाधिकारियों को उनकी शिकायतों और अभिलेखों के निस्तारण के निर्देश दिए थे, लेकिन आरोप है कि प्रशासन ने इन आदेशों को भी दबा दिया और कोई कार्रवाई नहीं की गई। रवींद्र परमार ने वर्तमान जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स से भी कई बार मुलाकात की और 14 मई तथा 22 मई 2026 को लिखित शिकायतें सौंपीं। इस दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि तत्कालीन एडीएम अविनाश त्रिपाठी उक्त 100 पेज की पत्रावली अपने साथ ले गए हैं। युगान्तर प्रवाह ने जब इस संबंध में डीएम निधि गुप्ता वत्स का पक्ष जानने के लिए दूरभाष से संपर्क किया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। परमार का कहना है कि गायब हुई इस पत्रावली में सैकड़ों बीघे सरकारी भूमि, तालाबों और कथित भूमि घोटालों से जुड़ी जानकारियां शामिल थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी जांच होने पर भू-माफियाओं और उनसे जुड़े संभावित नेटवर्क का खुलासा हो सकता था, साथ ही कुछ मामलों को 'लैंड जिहाद' से भी जोड़ते हुए जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि इस प्रकरण में प्रशासन के साथ कई सफेदपोश लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। उन्होंने 20 फरवरी, 16 मार्च और 29 मई 2026 को जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायतें पहुंचाई हैं। उनकी मांगों में सदर तहसील में पारित आदेशों की समीक्षा, रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच और एक स्वतंत्र समिति के गठन भी शामिल है। रवींद्र परमार ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो वह अनशन शुरू करेंगे।
- गाजीपुर थाना क्षेत्र के शाह कस्बा में शनिवार को एक बड़ी और दुखद घटना सामने आई। शराब के नशे में धुत एक ट्रैक्टर चालक तेज़ रफ्तार और अनियंत्रित होकर अपना ट्रैक्टर सीधे एक घर में घुसा दिया, जहाँ शादी का माहौल था। यह हादसा उस समय हुआ जब बारात से लौटे कुछ लोग अपनी मोटरसाइकिलों से उतर ही रहे थे, तभी पीछे से आ रहे बेकाबू ट्रैक्टर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मोटरसाइकिल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस दुर्घटना में एक वर्षीय मासूम बच्चा अयांश घायल हो गया, वहीं एक महिला राजकली का पैर फ्रैक्चर हो गया। दोनों घायलों को तत्काल इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रैक्टर के साथ-साथ उसके चालक को भी अपनी हिरासत में ले लिया है। संबंधित चौकी प्रभारी द्वारा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया है, और पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गहनता से जांच में जुटी है।1
- फ़तेहपुर में ज़िला प्रशासन ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रहा है। यह आरोप लगाया गया है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को रोकने में पूरी तरीके से नाकाम साबित हुआ है।1
- फतेहपुर के सुजानपुर में 'सुशासन की चौपाल' का आयोजन किया गया, जहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आयोजित एक खुली बैठक में 229 पात्र लाभार्थियों की सूची का सार्वजनिक रूप से वाचन किया गया। यह पूरी प्रक्रिया ग्राम प्रधान हेमलता पटेल और सचिव जितेंद्र कुमार की उपस्थिति में अत्यधिक पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई, जिस पर ग्रामीणों ने खुशी व्यक्त की और सर्वसम्मति से सूची को स्वीकृति प्रदान की। प्रधान हेमलता पटेल ने इस अवसर पर अपनी प्राथमिकता दोहराते हुए कहा कि हर पात्र व्यक्ति को उसका हक दिलाना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है। चौपाल के दौरान योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी भी प्रदान की गई और उपस्थित महिला व पुरुष ग्रामीणों की सभी शंकाओं का समाधान किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।1
- फतेहपुर जिले के बाहुआ ब्लॉक परिसर में किसान यूनियन अराजनैतिक के बैनर तले किसानों ने आज से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसान बिजली, नहर में पानी और खाद की किल्लत से परेशान होकर ब्लॉक परिसर में बड़ी संख्या में जुटे हैं। उनकी मुख्य समस्याओं में बाहुआ क्षेत्र में समय पर बिजली न मिलना, नहरों की सफाई न होने से सिंचाई के लिए पानी का अभाव और खाद के लिए भटकना शामिल है। मौके पर पहुंचे सक्षम अधिकारी ने किसानों से बातचीत की, लेकिन इससे कोई समाधान नहीं निकल सका। किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष राजकुमार गौतम ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो यह धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा और किसानों को मजबूरन चक्का जाम करना पड़ेगा।3
- रायबरेली की डलमऊ तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर फरियादियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में तहसील पहुंचे थे, लेकिन जनसुनवाई का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी कई फरियादी अपनी बात जिलाधिकारी तक नहीं पहुंचा पाए। निर्धारित समय के बाद जब जिलाधिकारी बाहर निकले, तो अपनी शिकायतें पहुंचाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।1
- फतेहपुर जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित आबुनगर में सीओ सिटी कार्यालय के पास एक घरेलू गैस सिलेंडर में आग लगने के बाद बड़ा धमाका हो गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, खाना बनाने के बाद सिलेंडर में आग लगी थी, जिसे देखकर परिवार के सदस्य तुरंत घर से बाहर निकल गए। कुछ ही देर बाद सिलेंडर फटने से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस हादसे में हजारों रुपये के नुकसान की बात सामने आ रही है, हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते परिवार के लोगों के बाहर निकल जाने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई।1
- बाँदा जनपद की बबेरू कोतवाली पुलिस ने एक ढोंगी तांत्रिक को गिरफ्तार किया है। इस तांत्रिक पर एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी तांत्रिक को पकड़कर जेल भेज दिया है।1
- फतेहपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र की रानी कॉलोनी में शुक्रवार को घरेलू गैस सिलेंडर लीक होने के कारण एक घर में भीषण आग लग गई। लीकेज के साथ ही आग ने देखते ही देखते पल भर में पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे घर में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। अनुमान है कि इस हादसे में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। गनीमत यह रही कि आग लगने के समय घर में मौजूद सभी लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गए, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके पर पहुँची और दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर सफलतापूर्वक काबू पाया। आग को आसपास के घरों तक फैलने से रोकने के लिए तत्काल एहतियाती कदम भी उठाए गए। सदर कोतवाली पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और सिलेंडर लीक होने के कारणों की गहराई से जाँच की जा रही है। रानी कॉलोनी में हुए इस गैस हादसे की खबर से स्थानीय लोग सहमे हुए हैं। इस घटना को देखते हुए, यह सलाह दी गई है कि सभी लोग गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते समय उसके रेगुलेटर और पाइप की नियमित रूप से जाँच करें, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।1