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उमरिया में एक साइबर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को साइबर अपराध के खतरों और उनसे बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है। इस पहल के जरिए लोगों को साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने की जानकारी दी जाएगी।
पत्रकार आशीष कुमार दुबे
उमरिया में एक साइबर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को साइबर अपराध के खतरों और उनसे बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है। इस पहल के जरिए लोगों को साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने की जानकारी दी जाएगी।
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- नरसिंहपुर जिले के धर्मपुरी स्थित रेवा मंदिर आश्रम में राजा नामक एक आरोपी ने तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है। इस मामले में आश्रम के संचालक ने पुलिस अधीक्षक (SP) से शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।1
- नरसिंहपुर जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए 'सेफ क्लिक-2.0' अभियान का शुभारंभ किया गया। पुलिस अधीक्षक, डॉ. ऋषिकेश मीना ने इस अवसर पर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभियान का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में साइबर जागरूकता का संदेश पहुँचाना है, जिसके तहत आमजन को साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई फ्रॉड और फर्जी लिंक से बचाव संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इस पहल का मुख्य लक्ष्य आमजन को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने हेतु जागरूक करना है, जिसमें साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।1
- नरसिंहपुर पुलिस ने आम नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रहे साइबर फ्रॉड से सचेत करने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। जिले में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने बुधवार को "सेफ क्लिक 2.0" अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने बताया कि ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं, उन्हें घंटों तक घर में बंधक बनाकर रखते हैं और लाखों रुपये की ठगी करते हैं। उन्होंने साफ किया कि कोई भी सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगता और न ही इस तरह की कोई गिरफ्तारी की जाती है। पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस को सूचना दें। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का भुगतान न करें और सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन या एसपी कार्यालय जाकर शिकायत दर्ज कराएं। "सेफ क्लिक 2.0" अभियान के माध्यम से पुलिस लोगों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दे रही है, ताकि वे साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।3
- नरसिंहपुर जिले में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने और आम जनता को इस संबंध में जागरूक करने के उद्देश्य से, नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक ने एक नई पहल का शानदार शुभारंभ किया है। इस अभियान को 'सेफ क्लिक 2.0' नाम दिया गया है, जिसके तहत एसपी ने नागरिकों को विशेष रूप से आगाह करते हुए स्पष्ट किया कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि साइबर ठग अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं। ये अपराधी पीड़ितों को कई घंटों तक उनके घरों में बंधक बनाकर रखते हैं और लाखों रुपये की ठगी करते हैं। एसपी ने दृढ़ता से कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी न तो वीडियो कॉल पर पैसों की मांग करती है और न ही इस तरह से किसी को गिरफ्तार करती है। एसपी ने जनता से अपील की है कि ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल आने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दें। 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान के तहत लोगों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग प्रक्रियाओं और सोशल मीडिया के सही व सुरक्षित उपयोग के बारे में प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।1
- गोटेगांव में जन एकता गौ सेवा समिति ने स्थानीय प्रशासन का ध्यान आम जनता की समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है। समिति ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को यह ज्ञापन सौंपकर लोगों को आ रही विभिन्न कठिनाइयों को उजागर किया है।1
- नरसिंहपुर पुलिस ने नागरिकों को एक नए तरह के साइबर फ्रॉड, जिसे 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जा रहा है, से सावधान रहने की सलाह दी है। नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार की साइबर धोखाधड़ी है। उन्होंने लोगों से इस तरह के फर्जीवाड़े से सुरक्षित रहने और बचने का आग्रह किया है।1
- नरसिंहपुर के गाडरवारा में शक्कर नदी के रेलवे पुल के पास चल रहे पिचिंग कार्य में ठेकेदार द्वारा गंभीर लापरवाही बरते जाने का मामला सामने आया है। गाडरवारा से आने-जाने वाली अप और डाउन दोनों रेलवे लाइनों के लिए करोड़ों रुपए की लागत से किया जा रहा यह पिचिंग कार्य, जब ग्राउंड जीरो पर देखा गया तो चौंकाने वाली स्थिति दिखी। ठेकेदार ने रेलवे लाइन से सटी मिट्टी का ही पिचिंग कार्य में उपयोग कर लिया, जिसके चलते एक तरफ की रेलवे लाइन के ठीक बगल में 10 फीट की गहरी खुदाई कर दी गई और उसी मिट्टी से दूसरी तरफ की लाइन के पास पिचिंग की गई। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कार्य जारी होने की बात कही, जबकि धरातल पर कोई काम होता नजर नहीं आ रहा है। इस बड़े पैमाने पर हो रहे रेलवे कार्य के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वे इस काम का निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे थे। यह भी एक बड़ा प्रश्न है कि रेलवे विभाग की जमीन से इतनी बड़ी खुदाई की अनुमति किसने दी। जनप्रतिनिधियों, रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से इस ओर तत्काल ध्यान देने की अपील की गई है, क्योंकि यदि समय रहते इस गंभीर विषय पर ध्यान देकर समस्या का निवारण नहीं किया गया तो यह किसी अनहोनी घटना को न्योता देने जैसा होगा। रिपोर्ट में केंद्र सरकार के निर्माण कार्यों में भी हो रही बेईमानी पर सवाल उठाया गया है। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कब इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करते हैं। मौके पर मौजूद ग्रामवासी की जुबानी भी पूरे मामले की कहानी दिखाने की बात कही गई है, ताकि "दूध का दूध और पानी का पानी" हो सके।1
- दमोह महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर पटेरा में एक भव्य वाहन रैली का आयोजन किया गया। इस समारोह के दौरान एक सम्मान समारोह भी संपन्न हुआ, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।1