मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद , मुस्लिम पक्ष की स्वामित्व वाली अर्जी खारिज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद के मध्य स्वामित्व विवाद से जुड़े मुकदमों की पोषणीयता को लेकर मस्जिद पक्ष की आपत्ति की खारिज, हालांकि शेष अन्य अर्जियों की सुनवाई जारी है, इससे पहले भी कोर्ट ने मस्जिद पक्ष की आदेश 7 नियम 11 की सिविल वादों की पोषणीयता को लेकर दाखिल अर्जी खारिज कर दी थी, मस्जिद पक्ष द्वारा अपने लिखित कथन में संशोधन की मांग करते हुए आस्था के सबूत न होने के आधार पर सिविल वादों को निरस्त करने की मांग की थी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद यह अर्जी खारिज कर दी है, कोर्ट ने यह आदेश लिखित कथन में तकनीकी खामियों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न होने के कारण दिया है, जस्टिस अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच ने दिया आदेश, मस्जिद पक्ष ने अर्जी दाखिल कर अपने लिखित कथन में दो नए पैराग्राफ जोड़ने की अनुमति मांगी थी, इन संशोधनों के जरिए मस्जिद पक्ष यह तर्क देना चाहता था कि वादी पक्ष ने आस्था के अस्तित्व के संबंध में कोई ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं रखी है, बिना आस्था के प्रमाण के इस वाद का कोई वाद-कारण नहीं बनता इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए, कोर्ट ने कहा कि मस्जिद पक्ष द्वारा पूर्व में दाखिल किए गए लिखित कथन कानूनी रूप से पूर्ण नहीं थे, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिखित कथन पर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के हस्ताक्षर नहीं थे, सीपीसी के आदेश छह नियम 14 और 15 के तहत आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी, कोर्ट ने कहा कि मूल लिखित कथन ही कानून के अनुरूप नहीं है इसलिए उसमें संशोधन की मांग करना फिलहाल गलत और विचारहीन है, कोर्ट ने इन तकनीकी दोषों को दूर करने के लिए मस्जिद पक्ष द्वारा बाद में दाखिल एक अन्य अर्जी पर सुनवाई के लिए 15 मई की तिथि नियत की है, कई अन्य महत्वपूर्ण अर्जियां भी लंबित हैं, जिनमें शाही ईदगाह परिसर के सर्वे, आधिकारिक भाषा अधिनियम का पालन और विभिन्न पक्षों द्वारा पूजा की अनुमति से जुड़ी अर्जियां शामिल हैं।
मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद , मुस्लिम पक्ष की स्वामित्व वाली अर्जी खारिज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद के मध्य स्वामित्व विवाद से जुड़े मुकदमों की पोषणीयता को लेकर मस्जिद पक्ष की आपत्ति की खारिज, हालांकि शेष अन्य अर्जियों की सुनवाई जारी है, इससे पहले भी कोर्ट ने मस्जिद पक्ष की आदेश 7 नियम 11 की सिविल वादों की पोषणीयता को लेकर दाखिल अर्जी खारिज कर दी थी, मस्जिद पक्ष द्वारा अपने लिखित कथन में संशोधन की मांग करते हुए आस्था के सबूत न होने के आधार पर सिविल वादों को निरस्त करने की मांग की थी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद यह अर्जी खारिज कर दी है, कोर्ट ने यह आदेश लिखित कथन में तकनीकी खामियों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न होने के कारण दिया है, जस्टिस अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच ने दिया आदेश, मस्जिद पक्ष ने अर्जी दाखिल कर अपने लिखित कथन में दो नए पैराग्राफ जोड़ने की अनुमति मांगी थी, इन संशोधनों के जरिए मस्जिद पक्ष यह तर्क देना चाहता था कि वादी पक्ष ने आस्था के अस्तित्व के संबंध में कोई ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं रखी है, बिना आस्था के प्रमाण के इस वाद का कोई वाद-कारण नहीं बनता इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए, कोर्ट ने कहा कि मस्जिद पक्ष द्वारा पूर्व में दाखिल किए गए लिखित कथन कानूनी रूप से पूर्ण नहीं थे, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिखित कथन पर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के हस्ताक्षर नहीं थे, सीपीसी के आदेश छह नियम 14 और 15 के तहत आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी, कोर्ट ने कहा कि मूल लिखित कथन ही कानून के अनुरूप नहीं है इसलिए उसमें संशोधन की मांग करना फिलहाल गलत और विचारहीन है, कोर्ट ने इन तकनीकी दोषों को दूर करने के लिए मस्जिद पक्ष द्वारा बाद में दाखिल एक अन्य अर्जी पर सुनवाई के लिए 15 मई की तिथि नियत की है, कई अन्य महत्वपूर्ण अर्जियां भी लंबित हैं, जिनमें शाही ईदगाह परिसर के सर्वे, आधिकारिक भाषा अधिनियम का पालन और विभिन्न पक्षों द्वारा पूजा की अनुमति से जुड़ी अर्जियां शामिल हैं।
- वृंदावन में हाल ही में हुई नाव हादसे में 16 की मौत के बाद जिला प्रशासन की नींद खुल गई है जिन्होंने सोमवार को मथुरा कैसी घाट और वृंदावन पर नाव चलाने वाले नाभिकों का रजिस्ट्रेशन करना प्रारंभ कर दिया है अब बिना रजिस्ट्रेशन के यमुना में कोई भी नाम नहीं चल पाएगा साथ ही साथ नव की क्षमता और लोगों को बिठाने की संख्या भी निर्धारित की गई है1
- Post by RPR NEWS TV3
- Post by Vinay_creator1121
- मथुरा में थार का कहर अभी तो इससे भी बड़े हद से होना बाकी है1
- Post by ATV INDIA HD (Ajeet chauhan)1
- महावन तहसील में बिन मां बाप के रह रहे चार अनाथ बच्चों की देखने के लिए प्रशासन ने हर संभव मदद का भरोसा पूर्ति निरीक्षक भी समय-समय पर कर रहे अनाथ बच्चों की मदद1
- Post by Mukesh Agrawal पत्रकार1
- शहर में स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर शहर में उपभोक्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। बिल जमा होने के बावजूद बिजली कटने के आरोपों से नाराज़ लोगों ने प्रदर्शन करते हुए रोड जाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मसानी उपखंड कार्यालय पर बड़ी संख्या में पहुंचे उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिल जमा करने के बावजूद उनकी बिजली काट दी गई। लोगों का कहना है कि बिना किसी मैसेज या पूर्व सूचना के ही सप्लाई बंद कर दी गई, जिससे उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ी। प्रदर्शन कर रहे उपभोक्ताओं के अनुसार, पिछले दो दिनों से बिजली आपूर्ति ठप रही और वे लगातार बिजली घर के चक्कर काटते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इस दौरान गुस्साए स्थानीय लोगों और महिलाओं ने सोमवार के सुबह करीब 11:30 बजे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और कुछ समय के लिए जाम लगा दिया। मौके पर पहुंची गोविंद नगर थाना पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया और हालात को नियंत्रण में किया। उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय खुला होने के बावजूद कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। केवल बिल जमा करने के काउंटर खुले थे, जबकि शिकायत सुनने के लिए कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं था। आरोप यह भी है कि जब लोग शिकायत करने पहुंचे तो कार्यालय में ताला लगाकर कर्मचारी चले गए, जिसे बाद में पुलिस ने खुलवाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था उनकी परेशानी बढ़ा रही है और उन्होंने पुराने मीटर दोबारा लगाने की मांग की है। हालांकि इन सभी आरोपों पर अभी तक बिजली विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला गरमाया हुआ है और उपभोक्ता जल्द से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।4