पुराने जमाने में राजा-महाराजा किला क्यों बनवाते थे? .एक बड़ी वजह यह है कि वे बेहतर तोपे नहीं बना पा रहे थे !! . जिन राजाओं के पास बेहतर हथियार नहीं थे, उनके पास सिर्फ 2 रास्ते थे : ऐसे हथियार बनाओ ताकि दुश्मन आक्रमण न करें, या ऐसे किले बनाओ जिससे दुश्मन आक्रमण न कर सके . हथियारों की इंजीनियरिंग को जज एवं पुलिस सबसे ज्यादा एवं सीधे तौर पर प्रभावित करते है। जज सिस्टम होने के कारण भारत में जटिल इंजीनियरिंग लगातार पिछड़ी रही, अत: भारतीय राजा बेहतर हथियार नहीं बना पाए, और फिर उन्होंने सुरक्षा के लिए किले बनाने शुरू किये। . एकत्रीकरण की प्रक्रिया होने के कारण मुगलों के पास बेहतर तोपखाना था। लेकिन यूरोपीय देशो में जूरी सिस्टम आने के कारण गोरो के तकनिकी विकास की स्पीड मुगलों से 10 गुना ज्यादा तेज थी। जूरी सिस्टम के कारण गोरो ने ( पुर्तगाल, स्पेन, फ़्रांस, जर्मन, ब्रिटेन आदि ) न सिर्फ ज्यादा बेहतर तोपे बनायी बल्कि उन्होंने बंदूक बनाना भी सीख लिया था। बन्दुक एवं बेहतर तोपखाना होने के कारण गोरो ने पूरी दुनिया में अपने उपनिवेश स्थापित किये। . अलेक्जेंडर के पास तब दुनिया के सबसे बेहतर हथियार थे अत: ग्रीस ने कभी भी सुरक्षा की दृष्टी से किले नहीं बनाए। चंगेज खान, तैमूर, नादिर शाह एवं मुगलों ने भी कभी किले नहीं बनाये, यूरोपियन देशो ने भी किले वगेरह नहीं बनाए। . इतिहास में जितने भी विजित आक्रमणकारी रहे है, उन्होंने कभी किले नहीं बनाए। उन्होंने बेहतर हथियार बना लिए थे, और इस वजह से उन्हें किले बनाने की जरूरत नहीं रह गयी थी। जिन साम्राज्यो के पास बेहतर हथियार नहीं थे, उन्होंने किले बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया। किलो के साथ समस्या यह है कि घेरा डालकर आक्रमणकारी रसद रोक देते थे। फिर उन्होंने रसद के लिए किले से सुरंगे निकालना शुरू किया। और जब महत्त्वाकांक्षी या लालची सिपहसालार सुरंग का पता बता देता तो किले के द्वार खोलकर लड़ने के सिवा कोई चारा नहीं रहता था। . चीन इससे भी आगे गया। उसने आक्रमणकारियों से बचने के लिए दीवार बनाना शुरू किया। यदि राजा नागरिको को हथियार रखने की अनुमति एवं हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने पर शक्ति लगाते तो उन्हें दीवार खड़ी करने जैसे बकवास प्रोजेक्ट पर काम नहीं करना पड़ता !! लेकिन उन्होंने नागरिको को हथियार रखने की अनुमति एवं प्रशिक्षण नहीं दिया . क्यों ? . क्योंकि राजा को लगता था कि, यदि नागरिको के पास हथियार आ गये तो वे राजा के खिलाफ विद्रोह* कर सकते है, या उनका प्रतिद्वंदी नागरिको को राजा के खिलाफ भड़का सकता है। . (*) उस समय तक पेड मीडिया नहीं आया था, अत: इस तर्क का आविष्कार नहीं हुआ था कि नागरिको को हथियार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे। इस ज्ञान की उत्पत्ति 20 वीं शताब्दी में हुई थी। भारत में आर्म्स एक्ट आने के बाद। आज आप किसी भी बुद्धिजीवी से पूछेंगे तो वह आपको यही बतायेगा कि नागरिको को हथियार देने से वे एक दुसरे को मार देते है !! ) . यहाँ जिस प्रकार के किले की चर्चा की गयी है उसका आशय सुरक्षा की दृष्टी से बनाए गए किले से है, रिहाईश के लिए बनाए गए कलात्मक किले से नहीं। उदाहरण के लिए लाल किला सुरक्षा की दृष्टी से नहीं बनाया गया था। यह एक महलनुमा किला है। किन्तु मेहरानगढ़, कुम्भलगढ़, चित्तोड़गढ़ आदि किले सुरक्षा की दृष्टी से बनाए गए थे। . ———— . ऐसा नहीं है कि भारतीयों के पास तकनिकी आविष्कार करने की क्षमता नहीं थी। लेकिन आविष्कार करना अलग बात है और कम लागत में मॉस प्रोडक्शन करना दूसरी बात है। तो भारत में कारीगर जो भी आविष्कार करते थे जज सिस्टम होने के कारण न तो उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन हो पाता था और न ही उसकी गुणवत्ता में सुधरती थी। उदाहरण के लिए 17 वीं शताब्दी में भारत में बंदूके आनी शुरु हुयी और 18 वीं सदी में भारतीय कारीगर जो बंदूके बना रहे थे, उनका डिजाइन एवं गुणवत्ता ब्रिटिश बन्दूको से ज्यादा बेहतर था। गोरो ने इस भारतीय डिजाइन को एडोप्ट किया और बाद में लाखों बंदूके भारतीय डिजाइन से कॉपी करके ही बनायी गयी। . लेकिन आगे गोरो ने हथियार बनाने के कारखानों पर लाइसेंस नीति डाल दी थी, अत: भारत में बन्दूको का निर्माण सिर्फ वही कारखाने कर रहे थे, जिन पर गोरो का नियंत्रण था। . तोपों एवं बन्दूको का जमाना जा चुका है और आज फाइटर प्लेन, ड्रोन आदि निर्णायक हथियार है। लेकिन हथियारों के निर्माण में भारत आज भी वहीँ पर खड़ा है। मतलब, न तो हमें एक प्रभावी राइफल बनाने आती है और न ही टैंक का इंजन बनाने आता है। ड्रोन और फाइटर प्लेन तो बहुत आगे की बात है। वजह फिर से वही है, जो 1000 साल पहले थी : जज एवं पुलिस का भ्रष्टाचार जमीनों के क़ानून रेग्रेसिव कर प्रणाली ( जीएसटी ) . जब तक हम उपरोक्त 4 कानूनों को नहीं सुधारते तब तक हम स्वदेशी तकनीक आधारित हथियार बनाने की क्षमता नहीं जुटा पायेंगे। इन चार व्यवस्थाओ को सुधारने के लिए हमें गेजेट में 2 क़ानून छपवाने की जरूरत है : . जूरी कोर्ट : इस क़ानून के आने से भारत में पुलिस एवं जजों के भ्रष्टाचार में 70% तक की गिरावट आ जायेगी रिक्त भूमि कर : यह प्रस्तावित क़ानून जीएसटी की जगह लेगा। रिक्त भूमि कर एक प्रोग्रेसिव कर है, और इस टेक्स के आने के बाद जीएसटी रद्द हो जाएगा। . जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर आने से कैसे हम फाइटर प्लेन एवं ड्रोन बनाने की तकनीक जुटा लेंगे, इस बारे में मैंने अपने कई जवाबो में विस्तार से बताया है। इसके कुछ विवरण इन जवाबो में पढ़े : . क्या जापानियों के आने से हमें बुलेट ट्रेन की तकनीक नहीं मिलेगी, जैसे ऑटोमोबाइल में विदेशियों के आने से मिली ? कमेंट में देखे . विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया? कमेंट में देखे . =========
पुराने जमाने में राजा-महाराजा किला क्यों बनवाते थे? .एक बड़ी वजह यह है कि वे बेहतर तोपे नहीं बना पा रहे थे !! . जिन राजाओं के पास बेहतर हथियार नहीं थे, उनके पास सिर्फ 2 रास्ते थे : ऐसे हथियार बनाओ ताकि दुश्मन आक्रमण न करें, या ऐसे किले बनाओ जिससे दुश्मन आक्रमण न कर सके . हथियारों की इंजीनियरिंग को जज एवं पुलिस सबसे ज्यादा एवं सीधे तौर पर प्रभावित करते है। जज सिस्टम होने के कारण भारत में जटिल इंजीनियरिंग लगातार पिछड़ी रही, अत: भारतीय राजा बेहतर हथियार नहीं बना पाए, और फिर उन्होंने सुरक्षा के लिए किले बनाने शुरू किये। . एकत्रीकरण की प्रक्रिया होने के कारण मुगलों के पास बेहतर तोपखाना था। लेकिन यूरोपीय देशो में जूरी सिस्टम आने के कारण गोरो के तकनिकी विकास की स्पीड मुगलों से 10 गुना ज्यादा तेज थी। जूरी सिस्टम के कारण गोरो ने ( पुर्तगाल, स्पेन, फ़्रांस, जर्मन, ब्रिटेन आदि ) न सिर्फ ज्यादा बेहतर तोपे बनायी बल्कि उन्होंने बंदूक बनाना भी सीख लिया था। बन्दुक एवं बेहतर तोपखाना होने के कारण गोरो ने पूरी दुनिया में अपने उपनिवेश स्थापित किये। . अलेक्जेंडर के पास तब दुनिया के सबसे बेहतर हथियार थे अत: ग्रीस ने कभी भी सुरक्षा की दृष्टी से किले नहीं बनाए। चंगेज खान, तैमूर, नादिर शाह एवं मुगलों ने भी कभी किले नहीं बनाये, यूरोपियन देशो ने भी किले वगेरह नहीं बनाए। . इतिहास में जितने भी विजित आक्रमणकारी रहे है, उन्होंने कभी किले नहीं बनाए। उन्होंने बेहतर हथियार बना लिए थे, और इस वजह से उन्हें किले बनाने की जरूरत नहीं रह गयी थी। जिन साम्राज्यो के पास बेहतर हथियार नहीं थे, उन्होंने किले बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया। किलो के साथ समस्या यह है कि घेरा डालकर आक्रमणकारी रसद रोक देते थे। फिर उन्होंने रसद के लिए किले से सुरंगे निकालना शुरू किया। और जब महत्त्वाकांक्षी या लालची सिपहसालार सुरंग का पता बता देता तो किले के द्वार खोलकर लड़ने के सिवा कोई चारा नहीं रहता था। . चीन इससे भी आगे गया। उसने आक्रमणकारियों से बचने के लिए दीवार बनाना शुरू किया। यदि राजा नागरिको को हथियार रखने की अनुमति एवं हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने पर शक्ति लगाते तो उन्हें दीवार खड़ी करने जैसे बकवास प्रोजेक्ट पर काम नहीं करना पड़ता !! लेकिन उन्होंने नागरिको को हथियार रखने की अनुमति एवं प्रशिक्षण नहीं दिया . क्यों ? . क्योंकि राजा को लगता था कि, यदि नागरिको के पास हथियार आ गये तो वे राजा के खिलाफ विद्रोह* कर सकते है, या उनका प्रतिद्वंदी नागरिको को राजा के खिलाफ भड़का सकता है। . (*) उस समय तक पेड मीडिया नहीं आया था, अत: इस तर्क का आविष्कार नहीं हुआ था कि नागरिको को हथियार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे। इस ज्ञान की उत्पत्ति 20 वीं शताब्दी में हुई थी। भारत में आर्म्स एक्ट आने के बाद। आज आप किसी भी बुद्धिजीवी से पूछेंगे तो वह आपको यही बतायेगा कि नागरिको को हथियार देने से वे एक दुसरे को मार देते है !! ) . यहाँ जिस प्रकार के किले की चर्चा की गयी है उसका आशय सुरक्षा की दृष्टी से बनाए गए किले से है, रिहाईश के लिए बनाए गए कलात्मक किले से नहीं। उदाहरण के लिए लाल किला सुरक्षा की दृष्टी से नहीं बनाया गया था। यह एक महलनुमा किला है। किन्तु मेहरानगढ़, कुम्भलगढ़, चित्तोड़गढ़ आदि किले सुरक्षा की दृष्टी से बनाए गए थे। . ———— . ऐसा नहीं है कि भारतीयों के पास तकनिकी आविष्कार करने की क्षमता नहीं थी। लेकिन आविष्कार करना अलग बात है और कम लागत में मॉस प्रोडक्शन करना दूसरी बात है। तो भारत में कारीगर जो भी आविष्कार करते थे जज सिस्टम होने के कारण न तो उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन हो पाता था और न ही उसकी गुणवत्ता में सुधरती थी। उदाहरण के लिए 17 वीं शताब्दी में भारत में बंदूके आनी शुरु हुयी और 18 वीं सदी में भारतीय कारीगर जो बंदूके बना रहे थे, उनका डिजाइन एवं गुणवत्ता ब्रिटिश बन्दूको से ज्यादा बेहतर था। गोरो ने इस भारतीय डिजाइन को एडोप्ट किया और बाद में लाखों बंदूके भारतीय डिजाइन से कॉपी करके ही बनायी गयी। . लेकिन आगे गोरो ने हथियार बनाने के कारखानों पर लाइसेंस नीति डाल दी थी, अत: भारत में बन्दूको का निर्माण सिर्फ वही कारखाने कर रहे थे, जिन पर गोरो का नियंत्रण था। . तोपों एवं बन्दूको का जमाना जा चुका है और आज फाइटर प्लेन, ड्रोन आदि निर्णायक हथियार है। लेकिन हथियारों के निर्माण में भारत आज भी वहीँ पर खड़ा है। मतलब, न तो हमें एक प्रभावी राइफल बनाने आती है और न ही टैंक का इंजन बनाने आता है। ड्रोन और फाइटर प्लेन तो बहुत आगे की बात है। वजह फिर से वही है, जो 1000 साल पहले थी : जज एवं पुलिस का भ्रष्टाचार जमीनों के क़ानून रेग्रेसिव कर प्रणाली ( जीएसटी ) . जब तक हम उपरोक्त 4 कानूनों को नहीं सुधारते तब तक हम स्वदेशी तकनीक आधारित हथियार बनाने की क्षमता नहीं जुटा पायेंगे। इन चार व्यवस्थाओ को सुधारने के लिए हमें गेजेट में 2 क़ानून छपवाने की जरूरत है : . जूरी कोर्ट : इस क़ानून के आने से भारत में पुलिस एवं जजों के भ्रष्टाचार में 70% तक की गिरावट आ जायेगी रिक्त भूमि कर : यह प्रस्तावित क़ानून जीएसटी की जगह लेगा। रिक्त भूमि कर एक प्रोग्रेसिव कर है, और इस टेक्स के आने के बाद जीएसटी रद्द हो जाएगा। . जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर आने से कैसे हम फाइटर प्लेन एवं ड्रोन बनाने की तकनीक जुटा लेंगे, इस बारे में मैंने अपने कई जवाबो में विस्तार से बताया है। इसके कुछ विवरण इन जवाबो में पढ़े : . क्या जापानियों के आने से हमें बुलेट ट्रेन की तकनीक नहीं मिलेगी, जैसे ऑटोमोबाइल में विदेशियों के आने से मिली ? कमेंट में देखे . विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया? कमेंट में देखे . =========
- Vote Vapsi Pasbookगायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहारक्या जापानियों के आने से हमें बुलेट ट्रेन की तकनीक नहीं मिलेगी, जैसे ऑटोमोबाइल में विदेशियों के आने से मिली ? https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/947179485655129/ . विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया? https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/916131638759914/ . =========2 hrs ago
- Darbhanga में क्रिकेट का महामुकाबला: 241 रन ठोक मुड़िया 11 बनी चैंपियन, 110 रन से फाइनल जीत ग्राउंड में उमड़ा जनसैलाब! #darbhangadiaries #darbhanga_mithila #darbhanga #DarbhangaNews #cricket #cricketlovers #cricketfans #tennis #tennistournament #tennisplayer #tennislife #cricketnews #cricketfever1
- Post by LIVE CITY DARBHANGA1
- बिहार महिला समाज के बैनर तले अपहरण, बलात्कार एवं महिलाओं की लगातार हो रही हत्या की घटनाओं के विरोध में दरभंगा जिला मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर महिलाओं ने रोषपूर्ण धरना दिया और प्रतिवाद मार्च निकाली । धरना के दौरान वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। हाल के दिनों में दरभंगा में 6 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना को लेकर महिलाओं में भारी आक्रोश देखा गया। धरना में शामिल महिलाओं ने एक सुर में घटना के आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की। साथ ही पीड़ित बच्ची के परिजनों को उचित मुआवजा देने और मामले की त्वरित सुनवाई कर न्याय दिलाने की मांग की गई। महिलाओं ने चेतावनी दी कि अगर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।1
- दरभंगा के कमतौल थाना अंतर्गत कर्जापट्टी में शाम में हुई घटना1
- दरभंगा मिथिलांचल के अगर युवा बेरोजगार बैठे हैं तो घर पर ना बैठे पासपोर्ट अगर तैयार है तो सीधे 19 फरवरी को पहुंचे #एस.के. भारत ग्लोबल ट्रेनिंग सेंटर #दुबई और #ओमान की मशहूर कंपनियों के क्लाइंट का डायरेक्ट इंटरव्यू पता: एन-27 - मौलागंज चौक, महिंद्रा शोरूम के पास, बजार समेती शिवधारा, दरभंगा – 846004 +91 9999264773 +917218394104 +91 9102284524 #saudiarabia #vacances #dubaijobs #jobalert #jobs #labour #vacancy #new #vacancyannouncement #gulfvacancy #jobopening #jobopportunities #dubai #BREAKING #darbhanga #BiharNews #darbhangadiaries #darbhanganews #breakingnews #bigupdate #bihardarbhanga #breakingnewstoday #mithila #mithilanchal #SamastipurNews #madhubani #awaazhindustanlive #darbhangamithila #jobopportunity #jobsearch #dubaijobs2025 #news #BiharNews SK BHARAT GLOBAL TRAINING CENTRE +9195259010151
- महाशिबरात्रि की झलकियां दरभंगा हयाघाट 13 to 21 फरबरी तक श्री राम कथा राष्ट्रीय शंत छोटे बापू जी महराज1
- 🙏 जय श्री राम 🙏 माँ विणा वादिनी विवाह मंडली (उद्यम पंजीकरण संख्या : UDYAM-BR-23-0106397) श्रद्धा • संस्कार • भव्य आयोजन हमारे द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम— हनुमान आराधना अष्टयाम कार्यक्रम नवह पाठ राम विवाह महोत्सव शिव विवाह महोत्सव सतवार पाठ जागरण एवं भजन-कीर्तन मंचीय प्रस्तुति (रामायण / शिव लीला / कृष्ण लीला) धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्तर काण्ड कथा ग्राम एवं नगर — प्रत्येक स्थान पर उपलब्ध अनुभवी कलाकारों द्वारा मर्यादित प्रस्तुति आज ही बुकिंग कराएँ मो. 95186 04235 आपकी आस्था — हमारी जिम्मेदारी माँ विणा वादिनी विवाह मंडली1
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