अंता ग्लोबल किड्स एवरशाइन स्कूल मे मनाया बसंत पंचमी पर्व अंता। बमोरी रोड स्थित ग्लोबल किड्स एवर शाइन स्कूल मे आज बसंत पंचमी पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया गया जिसमे नन्हे बच्चों ने बड़े उत्साह से भाग लिया। सर्वप्रथम विद्यालय के प्रिंसिपल भुवनेश गौतम और डायरेक्टर रमा गौतम ने भगवान गणेश और माँ सरस्वती की प्रतिमा को माल्यार्पण कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। तत्पश्चयात कई बच्चों ने बसंत पंचमी व माँ सरस्वती से संबंधित स्वरचित कविताएं ओर काव्यांश सुनाये ।प्रिंसिपल भुवनेश गौतम ने बसंत पंचमी पर्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को बताया कि इसी दिन माँ सरस्वती का जन्म हुआ था तथा प्राणियों मे वाणी का संचार हुआ जिससे वो अपनी भावनाये व्यक्त कर पाये ।इस पर्व को फसलों से जोड़कर भी मनाया जाता हे ।अपने मुख से हमेशा अच्छी बाते ही बोलना चाहिए ताकि जीवन मे हमे भी अच्छी बाते ही सुनने को मिले। आज के दिन सुभाष चंद्र बोस को भी उनके जन्मदिन के अवसर पर याद किया गया। स्कूल मैनेजमेंट से गिरिराज चौरसिया और सुनील गौड़ ने बताया कि आज बसंत पंचमी के अवसर पर सभी बच्चे पीले वस्त्रों मे ही स्कूल आये तथा पीला ही भोजन और फल लेकर आये। कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया
अंता ग्लोबल किड्स एवरशाइन स्कूल मे मनाया बसंत पंचमी पर्व अंता। बमोरी रोड स्थित ग्लोबल किड्स एवर शाइन स्कूल मे आज बसंत पंचमी पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया गया जिसमे नन्हे बच्चों ने बड़े उत्साह से भाग लिया। सर्वप्रथम विद्यालय के प्रिंसिपल भुवनेश गौतम और डायरेक्टर रमा गौतम ने भगवान गणेश और माँ सरस्वती की प्रतिमा को माल्यार्पण कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। तत्पश्चयात कई बच्चों ने बसंत पंचमी व माँ सरस्वती से संबंधित स्वरचित कविताएं ओर काव्यांश सुनाये ।प्रिंसिपल भुवनेश गौतम ने बसंत पंचमी पर्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को बताया कि इसी दिन माँ सरस्वती का जन्म हुआ था तथा प्राणियों मे वाणी का संचार हुआ जिससे वो अपनी भावनाये व्यक्त कर पाये ।इस पर्व को फसलों से जोड़कर भी मनाया जाता हे ।अपने मुख से हमेशा अच्छी बाते ही बोलना चाहिए ताकि जीवन मे हमे भी अच्छी बाते ही सुनने को मिले। आज के दिन सुभाष चंद्र बोस को भी उनके जन्मदिन के अवसर पर याद किया गया। स्कूल मैनेजमेंट से गिरिराज चौरसिया और सुनील गौड़ ने बताया कि आज बसंत पंचमी के अवसर पर सभी बच्चे पीले वस्त्रों मे ही स्कूल आये तथा पीला ही भोजन और फल लेकर आये। कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया
- कोटा में बालाजी का अद्भुत चमत्कार देखने को मिल रहा, जड़ के बालाजी ने धरती से लिया अवतरण आस्था का बड़ा केंद्र बना राम द्वारा किशोरपुरा कोटा में स्थित जड़ का बालाजी धाम1
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- Post by Pawan Mehar1
- हरनावदाशाहजी. हाड़ौती के खेतों में इन दिनों कुदरत का एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। 'काले सोने' के नाम से मशहूर अफीम की फसल अब अपने पूरे यौवन पर आने लगी है। सर्दी की ओस और हल्की सुनहरी धूप के बीच अफीम के खेतों में खिल रहे सफेद मनमोहक फूल हर किसी का मन मोह रहे हैं। लेकिन इन फूलों की खूबसूरती के पीछे किसान की कड़ी मेहनत और रात-भर का पहरा भी छुपा है। श्वेत फूलों की चादर और खुशहाली की उम्मीद- अफीम की फसल पर आए फूल इस बात का संकेत हैं कि अब फसल परिपक्वता की ओर बढ़ रही है। कुछ ही दिनों में इन फूलों की पंखुड़ियां गिर जाएंगी और हरे डोडे (फल) निकल आएंगे, जिनसे 'काला सोना' यानी अफीम का दूध निकाला जाएगा। काश्तकारों के लिए यह केवल एक फसल नहीं, बल्कि साल भर की वह उम्मीद है जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति तय होती है। परिंदा भी पर न मार सके, इसलिए 'चौकसी' सख्त- फसल के यौवन पर आते ही किसानों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। इसकी सुरक्षा के लिए काश्तकारों ने खेतों पर डेरा डालकर दिन-रात का पहरा शुरू कर दिया है। क्योंकि नीलगाय, आवारा पशु और खास तौर पर 'तोतों' (जो डोडों को काटकर ले जाते हैं) से फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों पर ही झोपड़ियां बनाकर पडाव डाल दिए हैं। नेट का सुरक्षा कवच: कई प्रगतिशील किसानों ने पूरी फसल को ऊपर से जाली (नेट) से ढंक दिया है ताकि पक्षी फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। कुछ इलाकों में तो किसान टॉर्च और लाठी लेकर रात-रात भर गश्त कर रहे हैं ताकि कीमती फसल सुरक्षित रहे। मौसम की मेहरबानी पर टिकी निगाहें- अफीम की खेती बेहद संवेदनशील होती है। किसानों का कहना है कि इस समय मौसम का साफ रहना बहुत जरूरी है। यदि अचानक बादल छाते हैं या बेमौसम बारिश होती है, तो डोडे में दूध की मात्रा कम हो सकती है और घटिया (अफीम की क्वालिटी) पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, खिली हुई धूप को देखकर किसानों के चेहरे पर संतोष की लकीरें दिखाई दे रही हैं। विभाग की भी रहती है पैनी नजर नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियमों के बीच हो रही इस खेती की एक-एक इंच जमीन और एक-एक ग्राम अफीम का हिसाब सरकार के पास होता है। यही कारण है कि किसान इसे अपनी संतान की तरह पालते हैं ताकि तौल के समय विभाग के मानकों पर उनकी फसल खरी उतरे और उनका लाइसेंस बरकरार रहे। "अफीम की खेती हमारे लिए किसी तपस्या से कम नहीं है। फूल आने के बाद से जब तक अफीम घर न आ जाए, हमें चैन की नींद नहीं आती।"1
- पिछले कई वर्षों से हमारे गांव शंकर कॉलोनी में सड़क के कार्य नहीं किया जा रहा है हमारे ग्रामीण वासियों को उसे सड़क से वाहन चलाने में बहुत ही ज्यादा परेशानियां और दिक्कतें होती है यह सड़क नेशनल हाईवे 51 से हमारे गांव की ओर आती है जिसकी मिनिमम सीमा 1 किलोमीटर है कई सालों से हमारी सरकार लोगों ने इस मामले पर शिकायत दर्ज किया लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस पर कोई भी एक्शन नहीं लिया है ना इस सड़क को सुधारने का कार्य किया है हमारे गांव के लोग कई सालों से इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा करना हैं इस सड़क के द्वारा हमारे गांव की कई वाहन नष्ट होते जा रहे हैं और कई वाहन खराब होते जा रहे हैं यहां तक की कोई गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को या पीड़ित व्यक्ति को अथवा गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत है पैदा हो रही है इसलिए मेरी सड़क विभाग विभाग से निवेदन है कि इस कार्य को जल्दी से जल्दी प्रारंभ करने की कृपा करें हमारा संपूर्ण ग्राम शंकर कॉलोनी आप लोगों का सदा आभारी रहेगा मैं दीपक गुजरावत शंकर कॉलोनी निवासी l1
- हमारी गांव की सड़क हादसाग्रस्त होता रहता है कृपया करके हमारी सड़क का निर्माण करवाया जाए1
- sabanam nisha 😥💔🥀1
- कोटा में तीन दिवसीय श्रीराम कथा आयोजन के दौरान रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं एवं यात्रियों की भारी आवाजाही को देखते हुए व्यापक भीड़ प्रबंधन, यात्री सुविधा एवं सुरक्षा व्यवस्था की गई है। स्टेशन पर सहायता केंद्र, मेडिकल सुविधा, विशेष टिकट काउंटर, दिशा-सूचक बोर्ड, होल्डिंग एरिया, बैरिकेडिंग एवं सार्वजनिक उद्घोषणा के माध्यम से सुव्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित किया जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक यात्रा हेतु रेलवे पूर्णतः प्रतिबद्ध है।1
- गौ सेवक ने उंगली काट दे दी दान, कैसे जागे सरकार और सोया इंसान कब रुकेगा गौवंश का भारत में अपमान #कोटा1