उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक पीड़ित ने भूमाफियाओं और फर्जी नोटरी के माध्यम से अपनी 7.5 बिस्वा ज़मीन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। वायरल हो रहे फोटो और वीडियो में पीड़ित मीडिया के समक्ष इंसाफ की गुहार लगाते हुए दिखाई दे रहा है। पीड़ित का दावा है कि लेखपाल की जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा साबित होने के बावजूद, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उसका कहना है कि वह पिछले 13 महीनों से न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर कोतवाली तक, उसने 37 से अधिक प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन उसे हर बार केवल जांच और कोरे आश्वासन ही मिले हैं। यह मामला सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जहाँ लोग व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। यूज़र्स पूछ रहे हैं कि जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई और क्या भूमाफियाओं के सामने आम आदमी की ज़मीन सुरक्षित नहीं है। इस घटना को लोग “भूमाफिया बनाम आम आदमी” की लड़ाई बता रहे हैं और यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या सिस्टम सिर्फ शिकायतें लेने तक ही सीमित रह गया है। सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी ने अब पुरवा कोतवाली को इस मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि उसे जल्द न्याय नहीं मिला तो वह बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा। इस घटना ने एक बार फिर यूपी में ज़मीन कब्ज़ाने और फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए संपत्ति हड़पने के मामलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक पीड़ित ने भूमाफियाओं और फर्जी नोटरी के माध्यम से अपनी 7.5 बिस्वा ज़मीन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। वायरल हो रहे फोटो और वीडियो में पीड़ित मीडिया के समक्ष इंसाफ की गुहार लगाते हुए दिखाई दे रहा है। पीड़ित का दावा है कि लेखपाल की जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा साबित होने के बावजूद, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उसका कहना है कि वह पिछले 13 महीनों से न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर कोतवाली तक, उसने 37 से अधिक प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन उसे हर बार केवल जांच और कोरे आश्वासन ही मिले हैं। यह मामला सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जहाँ लोग व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। यूज़र्स पूछ रहे हैं कि जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई और क्या भूमाफियाओं के सामने आम आदमी की ज़मीन सुरक्षित नहीं है। इस घटना को लोग “भूमाफिया बनाम आम आदमी” की लड़ाई बता रहे हैं और यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या सिस्टम सिर्फ शिकायतें लेने तक ही सीमित रह गया है। सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी ने अब पुरवा कोतवाली को इस मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि उसे जल्द न्याय नहीं मिला तो वह बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा। इस घटना ने एक बार फिर यूपी में ज़मीन कब्ज़ाने और फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए संपत्ति हड़पने के मामलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- छत्तीसगढ़ के बस्तर में अवैध अंग्रेजी शराब के कारोबार को लेकर एक बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। दरभा थाना क्षेत्र के मंगलपुर गांव में खुलेआम शराब बेचे जाने के आरोप सामने आए हैं, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। इस मामले में जानकारी जुटाने पहुंचे पत्रकारों के साथ अभद्रता और धमकी दिए जाने की घटना भी सामने आई है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह इस अवैध कारोबार पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, बल्कि शराब कारोबारियों को संरक्षण दे रहा है। इन घटनाओं के बाद, अब पूरे इलाके में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।1
- उन्नाव जिले के पांदरी कलां स्थित पांडेय खेड़ा में तीन रास्तों के संगम पर लगा एक हैंडपंप पिछले पांच महीनों से बंद पड़ा है। यह हैंडपंप ठीक उसी जगह पर है जहाँ भोलेनाथ का मंदिर भी स्थित है। गांव वालों ने संबंधित अधिकारियों से निवेदन किया है कि इस हैंडपंप की जल्द से जल्द देखरेख की जाए और इसे फिर से चालू किया जाए।1
- ग्राम पंचायत बड़ौरा से पंकज बाजपेई ने वहां की नालियों की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, इन नालियों की कभी सफाई नहीं की जाती, जिसके परिणामस्वरूप गंदा पानी सड़कों और खडंजों के ऊपर से होकर बह रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी भयानक हो जाएगी। इस समस्या को लेकर साफ-सफाई और स्वच्छता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।2
- बुलंदशहर जिले में एक तेज रफ्तार कैंटर ने कहर बरपाया, जिसके कारण बाइक पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।1
- गाजियाबाद के लोनी में इस बार ईद का त्योहार एक अनोखे और इको-फ्रेंडली अंदाज़ में मनाया गया। लोनी से बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने लोगों से बकरे की कुर्बानी के बजाय प्रतीकात्मक चित्र या बकरे के आकार का केक काटकर त्योहार मनाने की अपील की थी। विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने यह अपील पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए 'इको-फ्रेंडली ईद' मनाने के लिए की थी। उनकी इस पहल के बाद, कई परिवारों और बच्चों ने बकरे की तस्वीर, पोस्टर और बकरे की शेप वाले केक काटकर ईद मनाई, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग हाईवे को 'रील शूटिंग स्पॉट' मानते हुए दिख रहे हैं। तेज़ रफ़्तार वाहनों के बीच कई गाड़ियां सड़क पर रोकी गई हैं और युवक खुलेआम हंगामा करते नज़र आ रहे हैं, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि हाईवे सफ़र और सुरक्षा के लिए होते हैं, न कि स्टंट और वायरल वीडियो बनाने के लिए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई यूज़र्स ने टिप्पणी की है कि 'आज रील के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं, कल हादसे पर सिस्टम को दोष देंगे!' इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, लोग पूछ रहे हैं कि एक्सप्रेसवे जैसी संवेदनशील जगहों पर ऐसी भीड़ और स्टंटबाजी कैसे संभव हो रही है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वायरल होने की चाह अब लोगों को कानून और अपनी जान दोनों से खिलवाड़ करने पर मजबूर कर रही है? फिलहाल, यह वीडियो इंटरनेट पर तेज़ी से शेयर किया जा रहा है और जनता ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।1
- मध्य प्रदेश के रीवा में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर मनीष पटेल का एक वीडियो अब बड़े विवाद का कारण बन गया है। 'ब्राह्मण लड़की पटाने के बाद…' शीर्षक से वायरल हुए इस वीडियो ने पूरे इलाके में भारी हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद ब्राह्मण समाज में तीव्र आक्रोश फैल गया और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों का आरोप है कि वीडियो में समाज और लड़कियों के प्रति आपत्तिजनक बातें कही गई हैं, जिससे धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस विवाद के बढ़ते ही पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी, जिसके बाद मनीष पटेल कई दिनों तक फरार रहने के बाद गिरफ्तार हुए। उनकी हथकड़ी वाली तस्वीरें और पुलिस वाहन में बैठे वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, और वायरल पोस्ट में लिखा गया है कि 'कॉमेडी से सबको हंसाने वाले यूट्यूबर मनीष पटेल को ब्राह्मण बेटियों पर टिप्पणी महंगी पड़ी।' इस मामले पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बँट गया है, जहाँ एक पक्ष कार्रवाई को उचित ठहरा रहा है, वहीं दूसरा इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा बता रहा है। कई उपयोगकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि वायरल कंटेंट की क्या सीमा होनी चाहिए और क्या फेम तथा व्यूज के लिए समाज की भावनाओं से खेलना सही है। फिलहाल, पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है और रीवा का यह प्रकरण पूरे प्रदेश में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।2