उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए गए अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ स्थानीय जनता के सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया है। पुलिस की कथित गुंडागर्दी से भड़के भारी आक्रोश के बीच स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने आरोपी पुलिसकर्मियों को घेरकर उन्हें मौके से दौड़ा-दौड़ाकर खदेड़ दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पुलिसकर्मी आक्रोशित भीड़ के आगे अपनी जान बचाकर दुम दबाकर भागते नजर आ रहे हैं। इस घटना में पीड़िता और स्थानीय महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर खाकी की कार्यशैली को चुनौती दी है और कहा है कि आए दिन बेगुनाहों पर होने वाली कार्रवाई और दुर्व्यवहार के कारण लोगों के मन में खाकी के प्रति भारी अविश्वास पैदा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर 'Tiger News' के माध्यम से जनसेवक और सोशल एक्टिविस्ट रणजीत यादव ने बेबाक सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है या अपनी वर्दी का डर दिखाकर गुंडागर्दी करना है? रणजीत यादव ने शासन-प्रशासन से ऐसे निरंकुश रवैये पर सख्त कार्रवाई करने की माँग की है और जनता से भी अपील की है कि क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत गाज गिरनी चाहिए, इस पर अपनी राय दें और न्याय के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं।
उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए गए अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ स्थानीय जनता के सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया है। पुलिस की कथित गुंडागर्दी से भड़के भारी आक्रोश के बीच स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने आरोपी पुलिसकर्मियों को घेरकर उन्हें मौके से दौड़ा-दौड़ाकर खदेड़ दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पुलिसकर्मी आक्रोशित भीड़ के आगे अपनी जान बचाकर दुम दबाकर भागते नजर आ रहे हैं। इस घटना में पीड़िता और स्थानीय महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर खाकी की कार्यशैली को चुनौती दी है और कहा है कि आए दिन बेगुनाहों पर होने वाली कार्रवाई और दुर्व्यवहार के कारण लोगों के मन में खाकी के प्रति भारी अविश्वास पैदा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर 'Tiger News' के माध्यम से जनसेवक और सोशल एक्टिविस्ट रणजीत यादव ने बेबाक सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है या अपनी वर्दी का डर दिखाकर गुंडागर्दी करना है? रणजीत यादव ने शासन-प्रशासन से ऐसे निरंकुश रवैये पर सख्त कार्रवाई करने की माँग की है और जनता से भी अपील की है कि क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत गाज गिरनी चाहिए, इस पर अपनी राय दें और न्याय के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं।
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- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बेला रामपुर का मुख्य चक मार्ग नंबर 524 वर्तमान में पूरी तरह से जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो चुका है। यह महत्वपूर्ण मार्ग उत्तर दिशा में मुजही नारायणपुर मुख्य मार्ग और दक्षिण दिशा में नारंगपुर महदहा मुख्य मार्ग को जोड़ता है। करीब 40 साल पहले बने इस चक मार्ग की चौड़ाई नक्शे में नाली सहित दो लाठा दर्ज है, जिससे प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। जनहित से जुड़े इस मुख्य मार्ग की सुध लेने में जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे हैं और इसे लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण इस बदहाल मार्ग पर आए दिन स्कूली बच्चों, दोपहिया वाहनों, साइकिलों और अन्य गाड़ियों के साथ अनहोनी व हादसों की आशंका बनी रहती है।2
- भदोही जिले के ज्ञानपुर क्षेत्र के गांवों में सड़कों की खस्ताहाल स्थिति से परेशान लोगों ने उच्च अधिकारियों से मरम्मत करवाने की पुरजोर गुहार लगाई है। बैरी वीसा, गंगापुर, तालिया और गोसाईं बस्ती के ग्रामीणों ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए निवेदन किया है कि इन रास्तों की बदहाली के कारण उन्हें आवागमन में बेहद भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या की ओर प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान खींचते हुए मांग की है कि उनके गांवों की सड़कों की जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए।2
- प्रतापगढ़ के कोतवाली देहात अंतर्गत नरिया गांव की सरोज बस्ती में एक पड़ोसी द्वारा सार्वजनिक रास्ते पर जबरन दीवार खड़ी कर सात परिवारों का रास्ता बंद कर दिया गया है। भौगोलिक जटिलताओं के बीच तलहटी के ठीक कगार पर बसे इन परिवारों के सामने इस निर्माण के कारण भारी मुसीबत खड़ी हो गई है। पीड़ितों के अनुसार, यह उनका पुश्तैनी और एकमात्र रास्ता था, जिसे पड़ोसी द्वारा बीच में जबरन निर्माण कर बंद कर दिया गया है। रास्ता पूरी तरह बाधित होने के बाद अब पीड़ित परिवार सक्षम अधिकारियों से मामले में न्याय की गुहार लगा रहे हैं और रास्ता खुलवाने की मांग कर रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के मंझनपुर में ट्रैफिक पुलिस पर चालान के नाम पर अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगा है। एक चालक ने ट्रैफिक पुलिस पर यह आरोप लगाया है। इस संबंध में जब पत्रकारों ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से सवाल पूछे, तो वे कैमरे के सामने ही पूरी तरह अटकने लगे।1
- भदोही के जौनपुर रोड स्थित इंद्रमिल चौराहा पर जीवन दीप हॉस्पिटल के सामने एक बेहद खतरनाक गड्ढा खुला पड़ा है, जिससे कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। सड़क पर खुले इस खतरनाक गड्ढे की तरफ किसी भी शासन, प्रशासन या फिर किसी नेता का ध्यान नहीं जा रहा है। अस्पताल के ठीक सामने खुले पड़े इस गड्ढे के कारण लगातार हादसे की आशंका बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार लोग इस खतरे को लेकर पूरी तरह से बेपरवाह बने हुए हैं।1
- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी क्षेत्र के अंतर्गत डेढुआ गांव निवासी शुभम पांडे ने सोमवार को उप जिला अधिकारी पट्टी को एक प्रार्थना पत्र देकर नवीन परती भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत की है। पीड़ित का आरोप है कि न्यायालय द्वारा बेदखली का आदेश दिए जाने और जुर्माना लगाए जाने के बावजूद अब तक इस जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया है। शुभम पांडे के अनुसार, नवीन परती गाटा संख्या 219 और 220 पर अवैध कब्जे को लेकर लेखपाल ने 122 बी के अंतर्गत शिकायत की थी। तहसीलदार न्यायालय में वाद चलने के बाद 23 अप्रैल 2011 को न्यायालय से आदेश हुआ था कि नवीन परती से अवैध कब्जा पाया गया है, इसलिए बेदखल किया जाता है और न्यायालय द्वारा जुर्माना भी लगाया गया था। पीड़ित का आरोप है कि न्यायालय से 16 साल पहले बेदखली का आदेश होने के बावजूद और उनके द्वारा कई बार प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद भी, लेखपाल और कानूनगो की मिलीभगत के चलते आदेश का पालन नहीं कराया गया। अवैध कब्जेदार आज भी इस सरकारी जमीन पर मकान बनाकर कब्जा जमाए हुए हैं, जिसके खिलाफ पीड़ित ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में उप जिला अधिकारी पूर्णैन्दु मिश्र ने बताया कि उन्हें पीड़ित का प्रार्थना पत्र प्राप्त हो गया है और पूरे मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।1
- जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भड़क उठा है। इस कार्रवाई के बाद पूरा जंतर-मंतर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया और चारों तरफ हड़कंप मच गया। पुलिस की इस कार्रवाई से आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।1