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2 hrs ago
user_Manish Panndey
Manish Panndey
कोटमा, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago
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More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • pendra se korba new lain rellbe gaorela se bhadi estesan tak trail huaa 30/03/2026
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    pendra se korba new lain rellbe 
gaorela se bhadi estesan tak trail huaa
30/03/2026
    user_Ramesh Kumar Kewat
    Ramesh Kumar Kewat
    कोटमा, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    38 min ago
  • Post by Manish Panndey
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    Post by Manish Panndey
    user_Manish Panndey
    Manish Panndey
    कोटमा, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • संचालक की मनमानी से हितग्राही परेशान,नहीं खुल रही शासकीय राशन की दुकान।
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    संचालक की मनमानी से हितग्राही परेशान,नहीं खुल रही शासकीय राशन की दुकान।
    user_SM NEWS LIVE
    SM NEWS LIVE
    पत्रकार Chirmiri, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    1 hr ago
  • ​विशेष आलेख ​कहते हैं कि सत्ता और प्रशासन की नाक बहुत तेज होती है, उसे दूर से ही घोटाले और गड़बड़ियां सूंघने की आदत होती है। लेकिन बनारसी फेब्रिकेटर के बगल में लालपुर और चैनपुर दुग्गड की चिप्स फैक्ट्री के मामले में शायद यह 'घ्राण शक्ति' (सूंघने की क्षमता) जवाब दे गई है। आज आलम यह है कि फैक्ट्री से निकलने वाली सड़ांध ने पूरे इलाके के जन-जीवन को 'नर्क' बना दिया है, लेकिन विडंबना देखिए—ग्रामीणों के लिए जो 'असहनीय दुर्गंध' है, वह शायद जिले के आला अधिकारियों और कलेक्टर साहब के लिए किसी 'मधुर सुगंध' से कम नहीं है! ​तभी तो महीनों से ग्रामीण अपनी बदहाली का रोना रो रहे हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। ​साहब! यह सिर्फ बदबू नहीं, प्रशासनिक विफलता की सड़न है जब हैंडपंपों और बोरवेल से पानी की जगह 'बदबूदार जहर' निकलने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि सिस्टम सड़ चुका है। चिप्स फैक्ट्री का गंदा पानी जमीन के अंदर रिसकर ग्रामीणों की नसों में जहर घोल रहा है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, बुजुर्गों का दम घुट रहा है, और लोग अपने ही घरों में रुमाल बांधकर बैठने को मजबूर हैं। क्या एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारियों को इस बात का अंदाजा भी है कि एक लोटा साफ पानी न मिल पाने का दर्द क्या होता है? ​फैक्ट्री की मनमानी या 'सुगंधित' सांठगांठ? सवाल यह उठता है कि क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आंखें बंद हैं? या फिर फैक्ट्री के 'रसूख' की खुशबू इतनी तेज है कि उसके आगे गरीब ग्रामीणों की चीखें और सड़ते हुए पानी की दुर्गंध दब गई है? अगर कलेक्टर साहब की नाक तक यह दुर्गंध नहीं पहुंच रही, तो यह मान लेना चाहिए कि विकास की चकाचौंध में 'आम आदमी' की बुनियादी जरूरतें—साफ हवा और शुद्ध पानी—अब गौण हो चुकी हैं। ​निष्कर्ष ग्रामीणों का आक्रोश अब ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार है। अगर प्रशासन ने जल्द ही अपनी 'सुगंधित नींद' से जागकर इस चिप्स फैक्ट्री पर नकेल नहीं कसी, तो जनता को अपनी नाक बचाने के लिए सड़कों पर उतरने से कोई नहीं रोक पाएगा। याद रहे साहब, जनता की बदुआओं की दुर्गंध बहुत लंबी चलती है!
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    ​विशेष आलेख
​कहते हैं कि सत्ता और प्रशासन की नाक बहुत तेज होती है, उसे दूर से ही घोटाले और गड़बड़ियां सूंघने की आदत होती है। लेकिन बनारसी फेब्रिकेटर के बगल में लालपुर और चैनपुर दुग्गड की चिप्स फैक्ट्री के मामले में शायद यह 'घ्राण शक्ति' (सूंघने की क्षमता) जवाब दे गई है। आज आलम यह है कि फैक्ट्री से निकलने वाली सड़ांध ने पूरे इलाके के जन-जीवन को 'नर्क' बना दिया है, लेकिन विडंबना देखिए—ग्रामीणों के लिए जो 'असहनीय दुर्गंध' है, वह शायद जिले के आला अधिकारियों और कलेक्टर साहब के लिए किसी 'मधुर सुगंध' से कम नहीं है!
​तभी तो महीनों से ग्रामीण अपनी बदहाली का रोना रो रहे हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
​साहब! यह सिर्फ बदबू नहीं, प्रशासनिक विफलता की सड़न है
जब हैंडपंपों और बोरवेल से पानी की जगह 'बदबूदार जहर' निकलने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि सिस्टम सड़ चुका है। चिप्स फैक्ट्री का गंदा पानी जमीन के अंदर रिसकर ग्रामीणों की नसों में जहर घोल रहा है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, बुजुर्गों का दम घुट रहा है, और लोग अपने ही घरों में रुमाल बांधकर बैठने को मजबूर हैं। क्या एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारियों को इस बात का अंदाजा भी है कि एक लोटा साफ पानी न मिल पाने का दर्द क्या होता है?
​फैक्ट्री की मनमानी या 'सुगंधित' सांठगांठ?
सवाल यह उठता है कि क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आंखें बंद हैं? या फिर फैक्ट्री के 'रसूख' की खुशबू इतनी तेज है कि उसके आगे गरीब ग्रामीणों की चीखें और सड़ते हुए पानी की दुर्गंध दब गई है? अगर कलेक्टर साहब की नाक तक यह दुर्गंध नहीं पहुंच रही, तो यह मान लेना चाहिए कि विकास की चकाचौंध में 'आम आदमी' की बुनियादी जरूरतें—साफ हवा और शुद्ध पानी—अब गौण हो चुकी हैं।
​निष्कर्ष
ग्रामीणों का आक्रोश अब ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार है। अगर प्रशासन ने जल्द ही अपनी 'सुगंधित नींद' से जागकर इस चिप्स फैक्ट्री पर नकेल नहीं कसी, तो जनता को अपनी नाक बचाने के लिए सड़कों पर उतरने से कोई नहीं रोक पाएगा। याद रहे साहब, जनता की बदुआओं की दुर्गंध बहुत लंबी चलती है!
    user_Mahendra Shukla
    Mahendra Shukla
    Newspaper publisher Manendragarh, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    23 hrs ago
  • Post by Manoj Gupta Driver
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    Post by Manoj Gupta Driver
    user_Manoj Gupta Driver
    Manoj Gupta Driver
    Drafting equipment supplier अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by Suraj shriwastava
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    Post by Suraj shriwastava
    user_Suraj shriwastava
    Suraj shriwastava
    Building society बुदार, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • शहडोल जिले के हरदी गांव में एक दर्दनाक हादसे में दूसरी कक्षा के 7 वर्षीय छात्र की तालाब में डूबने से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सीता राम उर्फ कपिल बैगा सोमवार दोपहर अपने घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह अपने दो दोस्तों के साथ पास स्थित बेलहा तालाब में नहाने चला गया। नहाते समय अचानक वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। साथियों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने गांव जाकर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे तथा SDRF टीम को बुलाया गया। सोमवार शाम तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन तालाब की अधिक गहराई और अंधेरा होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। मंगलवार सुबह दोबारा अभियान शुरू किया गया, जिसमें SDRF की सात सदस्यीय टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बालक के शव को तालाब से बाहर निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी अरुण पांडे के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू दल के सहयोग से कार्रवाई की। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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    शहडोल जिले के हरदी गांव में एक दर्दनाक हादसे में दूसरी कक्षा के 7 वर्षीय छात्र की तालाब में डूबने से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सीता राम उर्फ कपिल बैगा सोमवार दोपहर अपने घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह अपने दो दोस्तों के साथ पास स्थित बेलहा तालाब में नहाने चला गया।
नहाते समय अचानक वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। साथियों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने गांव जाकर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे तथा SDRF टीम को बुलाया गया।
सोमवार शाम तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन तालाब की अधिक गहराई और अंधेरा होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। मंगलवार सुबह दोबारा अभियान शुरू किया गया, जिसमें SDRF की सात सदस्यीय टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बालक के शव को तालाब से बाहर निकाला।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी अरुण पांडे के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू दल के सहयोग से कार्रवाई की।
घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
    user_Policewala news
    Policewala news
    सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    39 min ago
  • Post by Suraj shriwastava
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    Post by Suraj shriwastava
    user_Suraj shriwastava
    Suraj shriwastava
    Building society बुदार, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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