आज अधिकमास की पूर्णिमा के अवसर पर जयपुर के गलता तीर्थ पर स्नान की व्यवस्थाओं पर प्रशासन ने बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते श्रद्धालुओं को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। इस महत्वपूर्ण दिन पर स्नान के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे, जिससे भारी भीड़ जमा हो गई और स्नान के लिए जगह की कमी के कारण लोगों में धक्का-मुक्की हुई। तीर्थ पर आने वाले यात्रियों को स्नान का अवसर बड़ी मुश्किल से मिल पाया, जबकि अधिकांश महिला-पुरुषों को नीचे के कुंड में बस हाथ-पैर पर पानी का छिड़काव करके ही वापस लौटना पड़ा। हिंदू धर्म में अधिकमास के महीने को बहुत मान्यता दी जाती है, और इसमें अमावस्या व पूर्णिमा का स्नान अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर अव्यवस्था के कारण लगभग 2-3 किलोमीटर लंबा वाहनों का जाम लगा रहा, जिससे आने-जाने में कई घंटे बर्बाद हुए। विशेष रूप से बच्चे और बुजुर्गों को बहुत दूर तक पैदल चलना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी और भी बढ़ गई। स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि यदि पुलिस द्वारा समय से पहले स्थिति को नियंत्रण में किया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती और श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के स्नान कर घर लौट जाते। इसके साथ ही, गलता तीर्थ प्रबंधन से भी नीचे के कुंड में पानी की व्यवस्था पर ध्यान देने की अपील की गई, क्योंकि प्रशासन इस पूरी अव्यवस्था पर मौन बना रहा।
आज अधिकमास की पूर्णिमा के अवसर पर जयपुर के गलता तीर्थ पर स्नान की व्यवस्थाओं पर प्रशासन ने बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते श्रद्धालुओं को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। इस महत्वपूर्ण दिन पर स्नान के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे, जिससे भारी भीड़ जमा हो गई और स्नान के लिए जगह की कमी के कारण लोगों में धक्का-मुक्की हुई। तीर्थ पर आने वाले यात्रियों को स्नान का अवसर बड़ी मुश्किल से मिल पाया, जबकि अधिकांश महिला-पुरुषों को नीचे के कुंड में बस हाथ-पैर पर पानी का छिड़काव करके ही वापस लौटना पड़ा। हिंदू धर्म में अधिकमास के महीने को बहुत मान्यता दी जाती है, और इसमें अमावस्या व पूर्णिमा का स्नान
अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर अव्यवस्था के कारण लगभग 2-3 किलोमीटर लंबा वाहनों का जाम लगा रहा, जिससे आने-जाने में कई घंटे बर्बाद हुए। विशेष रूप से बच्चे और बुजुर्गों को बहुत दूर तक पैदल चलना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी और भी बढ़ गई। स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि यदि पुलिस द्वारा समय से पहले स्थिति को नियंत्रण में किया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती और श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के स्नान कर घर लौट जाते। इसके साथ ही, गलता तीर्थ प्रबंधन से भी नीचे के कुंड में पानी की व्यवस्था पर ध्यान देने की अपील की गई, क्योंकि प्रशासन इस पूरी अव्यवस्था पर मौन बना रहा।
- नेपाल की अस्मिता तमांग नाम की कक्षा 9 की एक छात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई जारी रख रही है। अपनी माँ के निधन के बाद, अस्मिता को अपने डेढ़ साल के छोटे भाई और अन्य छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। चूंकि उनके पिता काम पर चले जाते हैं और घर पर बच्चों की देखभाल के लिए कोई अन्य व्यक्ति नहीं होता, अस्मिता को अपने छोटे भाई को गोद में लेकर ही स्कूल जाना पड़ता है। इसी वजह से, वह कक्षा में भी अपने छोटे भाई को गोद में बैठाकर पढ़ती है। जब शिक्षक ने उससे इस स्थिति के बारे में पूछा, तो अस्मिता अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कक्षा में ही रो पड़ी। यह वीडियो अस्मिता के इस अनकहे संघर्ष और जुदाई की कहानी को दर्शाता है।1
- शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने श्रमिकों के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन के संबंध में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने इस आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।1
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- पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने केकड़ी को दोबारा जिला बनाए जाने को लेकर एक भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिस क्षेत्र को जिला बनाया था, उसे बाद में भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया था। अब वे उसे फिर से जिला का दर्जा दिलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। रघु शर्मा ने बेहद दृढ़ और भावुक लहजे में कहा, "यही मेरी कसम है कि जिसको मैंने जिला बनाया और इन बेईमानों ने हटाया, बीजेपी की सरकार ने हटाया, उसको वापस जिले का दर्जा रघु शर्मा दिला के रहेगा और मेरी सांस रहेगी, तो यह जिला बनेगा।" इस बयान के दौरान रघु शर्मा भावुक नजर आए और उन्होंने केकड़ी की जिला पुनर्स्थापना को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उनके इस संकल्प को केकड़ी के जिला दर्जे की बहाली के लिए चल रहे कांग्रेस के राजनीतिक अभियान और स्थानीय लोगों की लगातार मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।1
- रविवार को बड़ी संख्या में युवा साइकिल चलाकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आवास पर पहुंचे। इन युवाओं का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत के संदेश को और अधिक मजबूती प्रदान करना था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इन युवाओं से संवाद करेंगे, जिसमें रोजगार, स्वरोजगार सहित राज्य सरकार की योजनाओं और युवा कल्याण के निर्णयों पर चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम को भी सुनेंगे।1
- बीकानेर जिले के नौरंगदेसर और रायसर के बीच शनिवार को एक भयावह दृश्य देखने को मिला, जब दिन के समय घनी धूलभरी आंधी के कारण चारों ओर अंधेरा छा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि सड़क पर चल रहे वाहनों को दिन के उजाले में भी अपनी हेडलाइट्स जलानी पड़ीं। स्थानीय निवासियों ने इसे अपने जीवन की सबसे खतरनाक और घनी आंधी बताया, उनका कहना था कि बीकानेर में जन्म लेने और यहीं पले-बढ़े होने के बावजूद उन्होंने ऐसी आंधी पहले कभी नहीं देखी। तेज हवाओं के साथ उठी धूल ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कुछ समय के लिए दृश्यता लगभग शून्य जैसी हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में भी दिन के उजाले में अंधेरे जैसे हालात साफ दिखाई दिए, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई जब मौसम विभाग ने पहले ही राजस्थान के कई जिलों में तेज धूलभरी आंधी और मौसम में अचानक बदलाव की चेतावनी जारी की थी। विभाग ने बीकानेर संभाग सहित कई क्षेत्रों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और आंधी-बारिश की संभावना जताई थी। यह आंधी अब केवल एक मौसमी घटना नहीं रह गई है, बल्कि मरुस्थलीय राजस्थान के लोगों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव बन गई है।1
- जयपुर ट्रैफिक से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें रेड लाइट पर एक ड्राइवर और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी बहस होती दिख रही है। यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर इस जोरदार बहस के पीछे की असल वजह क्या थी। वीडियो देखने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ड्राइवर की बात सही थी या फिर पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह जायज़ थी। एक खास रिपोर्ट के माध्यम से इस पूरे मामले की सच्चाई जानने का प्रयास किया जा रहा है, और जनता से अपनी राय कमेंट में बताने का आग्रह किया गया है।1
- राजस्थान के अनूपगढ़ में किसान पानी की समस्या को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। अपनी मांगों को लेकर किसानों ने बीकानेर-श्रीगंगानगर हाईवे को जाम कर दिया है, जिसके चलते वे पाँच अलग-अलग जगहों पर धरने पर बैठ गए हैं। किसानों की प्रमुख मांग रबी की फसल के लिए 1000 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराना और नहर की मरम्मत करवाना है।1