बिहार के आरा (जिसे भोजपुर भी कहते हैं) जिले के एक छोटे से गांव में भरत भूषण तिवारी नाम के लगभग 28-30 साल के एक आम नौजवान को पुलिस ने कथित तौर पर सरेंडर करने के बावजूद सरकारी गोली से छलनी कर दिया है। उसके खिलाफ कोई क्राइम रिपोर्ट दर्ज नहीं थी और उसे खुद मुख्यमंत्री ने डीजीपी के हवाले से 'मानसिक बीमार' बताया था, जिसके बावजूद यह घटना गांव वालों की मौजूदगी में सरेआम हुई। रिपोर्ट के अनुसार, भरत भूषण तिवारी गांव की समस्याओं को अफसरों तक पहुंचाने के बाद भी उनका निपटारा न होने से बेचैन था, जिससे उसका 'जवान खून गर्म हो गया' और उसने हाथ में पिस्टल उठा ली। हालांकि, 'सिस्टम में बैठे लोगों' ने उसे मानसिक बीमार करार दिया था, यहाँ तक कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी एक सरकारी कार्यक्रम में उसे डीजीपी के हवाले से मानसिक बीमार बताया था। लेकिन, उसके सरेंडर के तरीके ने इस दावे पर सवाल खड़ा कर दिया। उसने फेसबुक पर लाइव आकर अपनी लोकेशन बताई, पुलिस के सामने पहुंचा, अफसरों से खुली बात की, और जब उसे समस्या समाधान का भरोसा दिया गया तो उसने अपना असलहा अफसरों के सामने फेंक दिया, जिसका मतलब स्पष्ट सरेंडर था। रिपोर्ट तर्क देती है कि कोई मानसिक बीमार व्यक्ति इस तरह से योजनाबद्ध तरीके से सरेंडर नहीं करता, बल्कि उसके असलहे से "बारूद वाला पीतल" निकलता। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कथित एनकाउंटर से ठीक एक दिन पहले पुलिस उसके घर पहुंची थी, लेकिन उसके हाथ में असलहा देखकर वापस लौट गई थी। तब पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर उसे मानसिक बीमार बताकर अस्पताल में भर्ती कराने की पहल की बात कही थी। लेकिन अगले ही दिन, खाकी उसी गांव पहुंची और सरेआम, गांव वालों के सामने, उसके सरेंडर करने के बावजूद, उसे सरकारी गोली से मार डाला। रिपोर्ट का कहना है कि सरेंडर के बाद पुलिस द्वारा एनकाउंटर की ऐसी मिसाल पहले कभी नहीं देखी गई। यह घटना सिस्टम और पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब पुलिस खुद उसे मानसिक बीमार बता रही थी, तो क्या उनके पास एक बीमार व्यक्ति को पकड़ने की इतनी भी कुव्वत नहीं थी? निहत्थे खड़े भरत भूषण को आराम से पकड़ा जा सकता था, उसकी काउंसलिंग करवाई जा सकती थी, या कानून के दायरे में बेहतर कार्रवाई की जा सकती थी। लेकिन, 'फैसला ऑन द स्पॉट करने की सनक', मुख्यमंत्री के "अपराधी बिहार छोड़ देगा" वाले बयान की घुड़की, और पड़ोसी राज्यों की नकल करने की जल्दबाजी ने एक घर का चिराग बुझा दिया। यह सरेंडर दिन के उजाले में हुआ था, जिसके वीडियो चीख रहे हैं और गांव के लोग चश्मदीद हैं, जो अक्सर रात के अंधेरे में किए जाने वाले पुलिस एनकाउंटर की "अपराधी ने गोली चलाई, जवाबी फायरिंग में मौत" वाली थ्योरी को खारिज करता है।
बिहार के आरा (जिसे भोजपुर भी कहते हैं) जिले के एक छोटे से गांव में भरत भूषण तिवारी नाम के लगभग 28-30 साल के एक आम नौजवान को पुलिस ने कथित तौर पर सरेंडर करने के बावजूद सरकारी गोली से छलनी कर दिया है। उसके खिलाफ कोई क्राइम रिपोर्ट दर्ज नहीं थी और उसे खुद मुख्यमंत्री ने डीजीपी के हवाले से 'मानसिक बीमार' बताया था, जिसके बावजूद यह घटना गांव वालों की मौजूदगी में सरेआम हुई। रिपोर्ट के अनुसार, भरत भूषण तिवारी गांव की समस्याओं को अफसरों तक पहुंचाने के बाद भी उनका निपटारा न होने से बेचैन था, जिससे उसका 'जवान खून गर्म हो गया' और उसने हाथ में पिस्टल उठा ली। हालांकि, 'सिस्टम में बैठे लोगों' ने उसे मानसिक बीमार करार दिया था, यहाँ तक कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी एक सरकारी कार्यक्रम में उसे डीजीपी के हवाले से मानसिक बीमार बताया था। लेकिन, उसके सरेंडर के तरीके ने इस दावे पर सवाल खड़ा कर दिया। उसने फेसबुक पर लाइव आकर अपनी लोकेशन बताई, पुलिस के सामने पहुंचा, अफसरों से खुली बात की, और जब उसे समस्या समाधान का भरोसा दिया गया तो उसने अपना असलहा अफसरों के सामने फेंक दिया, जिसका मतलब स्पष्ट सरेंडर था। रिपोर्ट तर्क देती है कि कोई मानसिक बीमार व्यक्ति इस तरह से योजनाबद्ध तरीके से सरेंडर नहीं करता, बल्कि उसके असलहे से "बारूद वाला पीतल" निकलता। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कथित एनकाउंटर से ठीक एक दिन पहले पुलिस उसके घर पहुंची थी, लेकिन उसके हाथ में असलहा देखकर वापस लौट गई थी। तब पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर उसे मानसिक बीमार बताकर अस्पताल में भर्ती कराने की पहल की बात कही थी। लेकिन अगले ही दिन, खाकी उसी गांव पहुंची और सरेआम, गांव वालों के सामने, उसके सरेंडर करने के बावजूद, उसे सरकारी गोली से मार डाला। रिपोर्ट का कहना है कि सरेंडर के बाद पुलिस द्वारा एनकाउंटर की ऐसी मिसाल पहले कभी नहीं देखी गई। यह घटना सिस्टम और पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब पुलिस खुद उसे मानसिक बीमार बता रही थी, तो क्या उनके पास एक बीमार व्यक्ति को पकड़ने की इतनी भी कुव्वत नहीं थी? निहत्थे खड़े भरत भूषण को आराम से पकड़ा जा सकता था, उसकी काउंसलिंग करवाई जा सकती थी, या कानून के दायरे में बेहतर कार्रवाई की जा सकती थी। लेकिन, 'फैसला ऑन द स्पॉट करने की सनक', मुख्यमंत्री के "अपराधी बिहार छोड़ देगा" वाले बयान की घुड़की, और पड़ोसी राज्यों की नकल करने की जल्दबाजी ने एक घर का चिराग बुझा दिया। यह सरेंडर दिन के उजाले में हुआ था, जिसके वीडियो चीख रहे हैं और गांव के लोग चश्मदीद हैं, जो अक्सर रात के अंधेरे में किए जाने वाले पुलिस एनकाउंटर की "अपराधी ने गोली चलाई, जवाबी फायरिंग में मौत" वाली थ्योरी को खारिज करता है।
- बिहार में एक सुपरहिट गाना खूब चर्चा में है, जिसके बोल 'एक बिहारी सौ बीमारी' हैं। यह गीत बिहार में हो रही विभिन्न घटनाओं और परिस्थितियों को दर्शाता है।1
- शनिवार दोपहर करीब 1 बजे दरौली विधायक विष्णु देव पासवान ने दरौली प्रखंड के कृष्णपाली गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर ग्रामीणों के साथ सार्थक चर्चा की। ग्रामीणों ने विधायक के समक्ष सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य जनसुविधाओं से संबंधित अपनी समस्याओं को रखा। विधायक ने इन समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया।1
- देवेंद्र दास महाराज की पंच दिवसीय धर्म यात्रा गुप्तार घाट पर सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जहाँ उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और दर्शन किए। महाराज के गुप्तार घाट पहुँचते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसके स्वागत में स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। इस पूरी धर्म यात्रा के दौरान विशेष रूप से भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया था, और इसकी सभी व्यवस्थाएँ आयोजन समिति द्वारा संभाली गईं।1
- गोपालगंज में वाहन चोरी के मामलों के बीच पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। महम्मदपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कुल 11 चोरी की मोटरसाइकिलें और 2 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह चोरी की बाइकों के फर्जी दस्तावेज और स्मार्ट कार्ड तैयार करता था, जिसके बाद उन्हें असली बताकर बाजार में बेच दिया जाता था।1
- चिराग पासवान ने 'भारत' नामक व्यक्ति के एनकाउंटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'भारत भगत सिंह था', जिसके साथ ही उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की। पासवान ने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए और यह भी स्पष्ट किया कि समाज की लड़ाई लड़ने का अधिकार सभी को है।1
- गोपालगंज के भोरे स्थित पशु अस्पताल ग्राउंड में 21 जून 2026 को एक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया है।1
- गोपालगंज पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो चोरों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से चोरी की कुल 11 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। यह कार्रवाई शुक्रवार को महम्मदपुर थाना क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई। थानाध्यक्ष महम्मदपुर को जानकारी मिली थी कि ग्राम कुशहर स्थित एक घर में चोरी की मोटरसाइकिलें छिपाई गई हैं। सूचना के सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-2 और थानाध्यक्ष महम्मदपुर के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया, जिसने तुरंत उक्त स्थान पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान एक व्यक्ति ने भागने का प्रयास किया, जिसे सशस्त्र बल की मदद से पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम चंदेश्वर साह बताया, जो मशरख, सारण (छपरा) के ग्राम गंदामन का निवासी है और वर्तमान में कुशहर, महम्मदपुर, गोपालगंज में रहता है। उसकी ससुराल स्थित घर और परिसर से तीन चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इन मोटरसाइकिलों के रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन और चेसिस नंबर की जांच वाहन जांच मशीन से करने पर उनके वास्तविक मालिकों का पता चला, जिन्होंने पूर्व में अपनी मोटरसाइकिलें चोरी होने की पुष्टि की। पुलिस ने तीनों मोटरसाइकिलों के साथ अभियुक्त के पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया। अभियुक्त चंदेश्वर साह की निशानदेही पर पुलिस ने बुलेट उर्फ साहेब, जो बैकुंठपुर, गोपालगंज के खजुलाहपुर का निवासी है, को गिरफ्तार किया और उसके पास से एक चोरी की मोटरसाइकिल और एक मोबाइल फोन बरामद किया। इसके अतिरिक्त, रामबाबू सहनी (डूमरिया, महम्मदपुर, गोपालगंज) के पास से दो चोरी की मोटरसाइकिलें, रमेश कुमार दास (पकड़ी, महम्मदपुर, गोपालगंज) के पास से एक चोरी की मोटरसाइकिल, फरमान अंसारी (झझवा बाजार, महम्मदपुर, गोपालगंज) के पास से एक चोरी की मोटरसाइकिल, चंदन साह (कुशहर, महम्मदपुर, गोपालगंज) के पास से एक चोरी की मोटरसाइकिल, शमशुद्दीन मियां (रेवतीत, बैकुंठपुर, गोपालगंज) के पास से एक चोरी की मोटरसाइकिल और उदयभान सिंह (श्यामपुर, महम्मदपुर, गोपालगंज) के पास से एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गई।1
- यह पोस्ट उत्तर प्रदेश और बिहार के संदर्भ में यह जानने की उत्सुकता व्यक्त करती है कि कौन सा जिला 'रंगदार' है। इस सवाल को एक सुपरहिट भोजपुरी गाने, 'एक बिहारी सौ पे भारी' के साथ जोड़ा गया है, जो इस क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान और प्रभाव को रेखांकित करता है।1