देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) 1 जुलाई से समाप्त होकर इतिहास बनने जा रहा है। इसकी जगह केंद्र सरकार का नया कानून वीबीजीरामजी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) पूरी तरह लागू हो जाएगा। राजस्थान सहित पूरे देश में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों को इस नए सिस्टम में ट्रांसफर करने की बड़ी कवायद शुरू हो चुकी है। प्रदेश में फिलहाल 2 लाख जगहों पर मनरेगा के कार्य चल रहे हैं, जिसमें से माना जा रहा है कि एक लाख से ज्यादा काम वीबीजीरामजी में ट्रांसफर होंगे, जबकि शेष करीब एक लाख पेंडिंग काम पूरे किए जा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि लगभग एक करोड़ श्रमिक 1 जुलाई से मनरेगा की जगह वीबीजीरामजी का हिस्सा बनने जा रहे हैं। नए कानून के तहत खेती के पीक सीजन (बुवाई और कटाई) के दौरान मजदूरों के संकट से निपटने के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत साल में दो महीने का अवकाश रखने का प्रस्ताव है। यह अवकाश अक्टूबर और नवंबर महीने में लागू किया जा सकता है, ताकि ग्रामीण मजदूर खेती के कामों में हाथ बंटा सकें। हालांकि, यह अभी एक प्रस्ताव है और इसे दो टुकड़ों में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि भले ही दो महीने का ब्रेक हो, लेकिन बाकी 10 महीनों में काम के अवसर बढ़ाए जाएंगे। हाल ही में 10 करोड़ से अधिक लेबर डेज का अलॉटमेंट किया गया है, जबकि अप्रैल-मई की भीषण गर्मी में भी 4 करोड़ लेबर डेज का आंकड़ा रहा है। इस नए कानून में बेरोजगारी भत्ते का पूरा बोझ राज्य सरकार पर रहेगा। यदि किसी मजदूर को आवेदन के 15 दिनों के भीतर काम नहीं दिया जाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार होगा। इस भत्ते का 100% खर्च राज्य सरकार को अपने 40% वाले कोटे से ही चुकाना होगा, जिसमें केंद्र सरकार एक रुपया भी नहीं देगी। भत्ते की दर को दो चरणों में बांटा गया है: काम मांगने के 15वें दिन के बाद शुरुआती 30 दिन तक मजदूर को राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर का कम से कम 25% प्रतिदिन मिलेगा। यदि पंचायत अगले एक महीने तक भी काम नहीं दे पाती है, तो 31वें दिन से मजदूर को न्यूनतम मजदूरी का कम से कम 50% बेरोजगारी भत्ते के रूप में तब तक मिलेगा, जब तक उसे काम नहीं मिल जाता (अधिकतम 125 दिनों की सीमा तक)। वीबीजीरामजी योजना का वित्तीय ढांचा पूरी तरह बदल गया है, जिसमें अब 40 प्रतिशत बोझ राज्यों पर पड़ेगा, जबकि 60 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र की रहेगी।
देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) 1 जुलाई से समाप्त होकर इतिहास बनने जा रहा है। इसकी जगह केंद्र सरकार का नया कानून वीबीजीरामजी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) पूरी तरह लागू हो जाएगा। राजस्थान सहित पूरे देश में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों को इस नए सिस्टम में ट्रांसफर करने की बड़ी कवायद शुरू हो चुकी है। प्रदेश में फिलहाल 2 लाख जगहों पर मनरेगा के कार्य चल रहे हैं, जिसमें से माना जा रहा है कि एक लाख से ज्यादा काम वीबीजीरामजी में ट्रांसफर होंगे, जबकि शेष करीब एक लाख पेंडिंग काम पूरे किए जा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि लगभग एक करोड़ श्रमिक 1 जुलाई से मनरेगा की जगह वीबीजीरामजी का हिस्सा बनने जा रहे हैं। नए कानून के तहत खेती के पीक सीजन (बुवाई और कटाई) के दौरान मजदूरों के संकट से निपटने के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत साल में दो महीने का अवकाश रखने का प्रस्ताव है। यह अवकाश अक्टूबर और नवंबर महीने में लागू किया जा सकता है, ताकि ग्रामीण मजदूर खेती के कामों में हाथ बंटा सकें। हालांकि, यह अभी एक प्रस्ताव है और इसे दो टुकड़ों में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि भले ही दो महीने का ब्रेक हो, लेकिन बाकी 10 महीनों में काम के अवसर बढ़ाए जाएंगे। हाल ही में 10 करोड़ से अधिक लेबर डेज का अलॉटमेंट किया गया है, जबकि अप्रैल-मई की भीषण गर्मी में भी 4 करोड़ लेबर डेज का आंकड़ा रहा है। इस नए कानून में बेरोजगारी भत्ते का पूरा बोझ राज्य सरकार पर रहेगा। यदि किसी मजदूर को आवेदन के 15 दिनों के भीतर काम नहीं दिया जाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार होगा। इस भत्ते का 100% खर्च राज्य सरकार को अपने 40% वाले कोटे से ही चुकाना होगा, जिसमें केंद्र सरकार एक रुपया भी नहीं देगी। भत्ते की दर को दो चरणों में बांटा गया है: काम मांगने के 15वें दिन के बाद शुरुआती 30 दिन तक मजदूर को राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर का कम से कम 25% प्रतिदिन मिलेगा। यदि पंचायत अगले एक महीने तक भी काम नहीं दे पाती है, तो 31वें दिन से मजदूर को न्यूनतम मजदूरी का कम से कम 50% बेरोजगारी भत्ते के रूप में तब तक मिलेगा, जब तक उसे काम नहीं मिल जाता (अधिकतम 125 दिनों की सीमा तक)। वीबीजीरामजी योजना का वित्तीय ढांचा पूरी तरह बदल गया है, जिसमें अब 40 प्रतिशत बोझ राज्यों पर पड़ेगा, जबकि 60 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र की रहेगी।
- आज श्री सांवरिया सेठ के भक्तों के लिए लाइव मंगला आरती और श्रृंगार दर्शन एक साथ उपलब्ध कराए गए हैं। यह विशेष अवसर भक्तों को एक ही समय पर दोनों पवित्र दर्शनों का अनुभव करने का मौका दे रहा है।2
- यह प्रश्न उठाया गया है कि अगर कानून हर जगह 'भावनाओं का सम्मान' करने की बात करता है, तो फिर समाज की सबसे गहरी आस्था—गो माता—के प्रति वैसी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई जाती। पाठ में एक विरोधाभास की ओर इशारा किया गया है, जहाँ करोड़ों लोगों की श्रद्धा से जुड़ी गोवंश रक्षा के मुद्दे पर कानून-व्यवस्था अक्सर कागज़ों में तो सख्त दिखती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही होती है। दूसरी ओर, लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को कानूनी मान्यता देकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विस्तार किया जाता है, पर समाज के एक बड़े वर्ग को यह सवाल खटकता है कि क्या इससे भारतीय पारिवारिक व्यवस्था और संस्कारों की परंपरा पर नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा है। यह विरोधाभास लोगों के मन में यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आस्था और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर उतनी ही गंभीरता दिखाई जाती है जितनी आधुनिक सामाजिक ढांचों को मान्यता देने में दिखाई जाती है। व्यंग्यात्मक स्वर में कहा गया है कि एक तरफ सदियों पुरानी परंपराओं को 'भावनात्मक विषय' कहकर टाल दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर नए सामाजिक प्रयोगों को 'कानूनी अधिकार' कहकर तुरंत स्वीकार्यता मिल जाती है, जिसके बीच संस्कृति केवल एक सवाल बनकर रह जाती है।1
- आज के मनमोहक दर्शन प्राप्त हुए, जिनके साथ जीवन के एक गहरे सत्य को साझा किया गया है। इस अनुभव के माध्यम से यह बताया गया है कि जिंदगी को बहुत करीब से देखने पर यह समझ आता है कि सांँवरिया लोग पल भर में पराया कर देते हैं।1
- नीमच में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर सद्भावना मंच द्वारा पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. निवारिया ने एक संदेश भी दिया।1
- भीलवाड़ा में व्याप्त जल संकट को लेकर विधायक कोठारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।1
- चित्तौड़गढ़ जिले में कई महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए हैं, जिनमें कानून-व्यवस्था और जनजीवन से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस ने 204 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद एसपी धर्मेंद्र सिंह ने सख्त संदेश जारी किया है। इसी क्रम में, पेट्रोल पंपों की प्रस्तावित हड़ताल को 15 दिनों के लिए टाल दिया गया है। जिले की अन्य खबरों में, श्री सांवलिया सेठ के मंगला दर्शन संपन्न हुए, और रुपपुरा गांव में चारे में आग लगने की घटना भी दर्ज की गई।1
- चित्तौड़गढ़ की गंगरार थाना पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक गिरोह के विरुद्ध अनुसंधान में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। इस कार्रवाई के तहत, पुलिस ने दो और अवैध पिस्टल और दो मैगजीन बरामद की हैं, जिसके साथ ही इस प्रकरण में अब तक कुल तीन अवैध पिस्टल और पाँच मैगजीन जब्त की जा चुकी हैं। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि थानाधिकारी श्यामा राम के नेतृत्व में एएसआई शैतान सिंह और उनके जाप्ते ने 26 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की थी। उन्होंने द राईट चॉईस होटल के सामने भीलवाड़ा से चित्तौड़गढ़ हाईवे रोड पर पहुँचकर अवैध पिस्टल मय मैगजीन के खरीददार बबलु सिकलीगर तथा अवैध पिस्टल व मैगजीन का बेचान करने वाले दीपक उर्फ दीपू नायक, निखिल भोई एवं जितेन्द्र माली को गिरफ्तार किया था। इस दौरान, आरोपी बबलु सिकलीगर के कब्जे से एक पिस्टल मय मैगजीन और आरोपी दीपक व निखिल के कब्जे से एक-एक मैगजीन जब्त की गई थी, जबकि साथी आरोपी जितेन्द्र को भी मौके से गिरफ्तार किया गया। प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया, जिसके दौरान अभियुक्तों को पीसी रिमाण्ड पर लेकर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ में अभियुक्त निखिल भोई ने बताया कि उसने पहले भी बबलु सिकलीगर को दो अवैध पिस्टल दी थीं। इसके बाद, पूर्व में न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जा चुके अभियुक्त बबलु सिकलीगर को जेल से पुनः प्राप्त किया गया और उसकी निशादेही से उसके मकान से दो और अवैध पिस्टल बरामद की गईं। इस प्रकरण में अब तक कुल तीन पिस्टल और पाँच मैगजीन बरामद की जा चुकी हैं, और अभियुक्तों को अवैध पिस्टल सप्लाई करने वाले अन्य अभियुक्त की तलाश जारी है।1