कासगंज के सोरों जी स्थित भगवान वराह की नगरी शूकरक्षेत्र में 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी में पवित्र स्नान किया, भगवान वराह नारायण का पूजन-अर्चन किया और पंचकोशीय परिक्रमा में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया, जिससे संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा। ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष और शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक श्री शरद कुमार पाण्डेय के संयोजन में प्रातः 6:30 बजे भगवान वराह मंदिर, हरि की पौड़ी से पंचकोशीय परिक्रमा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस दौरान श्रद्धालु "ॐ जय गंगे", "ॐ जय वराह", "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जैसे धार्मिक जयघोषों के साथ हरिनाम संकीर्तन और भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़े, जिससे संकीर्तन की गूंज से परिक्रमा क्षेत्र गूंज उठा। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिसे भीमसेनी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस एक दिन के व्रत से वर्षभर की समस्त एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा पापों का नाश होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने वराह गौशाला, चक्रतीर्थ, सूर्यकुण्ड, चन्द्रकुण्ड, जया देवी भद्रकाली मंदिर, बटुक भैरव मंदिर, प्राचीन गृद्धवट, ग्राम देवी मंदिर, सीताराम मंदिर, तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर, चौरासी घंटे वाली मैया तथा बाछरू महाराज सहित अनेक पवित्र स्थलों के दर्शन किए। पंचकोशीय परिक्रमा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत, फल, प्रसाद एवं विश्राम की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। सीता रसोई, ममता देवी भवन (प्रेम जी की बगीची), सिग्नल वाले महाराज सहित अनेक स्थानों पर समाजसेवियों ने निःस्वार्थ भाव से श्रद्धालुओं की सेवा कर धर्मलाभ अर्जित किया। यह परिक्रमा सेडूनगला होते हुए बाछरू महाराज स्थल पहुँची, जहाँ श्रद्धालुओं ने विश्राम किया और देव दर्शन किए। इसके पश्चात श्रद्धालु सीता जी की रसोई पहुँचे, जहाँ महादेव मंदिर के दर्शन कर प्रसादी ग्रहण की। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय, प्रसाद एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था थी। इसके बाद श्रद्धालु करुआ देव महाराज, भगीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, वनखंडेश्वर महादेव मंदिर तथा चैतन्य महाप्रभु की बैठक के दर्शन करते हुए पुनः भगवान वराह मंदिर पहुँचे और अपनी परिक्रमा पूर्ण की। इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि शूकरक्षेत्र धाम की पंचकोशीय परिक्रमा एवं हरि की पौड़ी में स्नान कर भगवान वराह नारायण का पूजन-अर्चन करने से श्रद्धालुओं को विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत एवं शूकरक्षेत्र धाम की पंचकोशीय परिक्रमा करने से दस हजार वर्षों की तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश होकर विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। यह विशाल धार्मिक आयोजन शूकरक्षेत्र धाम सोरों की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत एवं जनआस्था का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा, जिसमें श्रद्धालुओं के उत्साह, भक्ति और सेवा भाव ने सम्पूर्ण क्षेत्र को धर्ममय वातावरण से भर दिया। इस पावन अवसर पर शरद कुमार पाण्डेय, शिवानंद उपाध्याय, अशोक कुमार पाण्डेय, शशांक दीक्षित, हाकिम सिंह, विनोद दीक्षित, राजकुमार गौड़, प्रवीण कुमार द्विवेदी, योगेश उपाध्याय, श्याम किशोर वर्मा, सचिन गुप्ता, लाखन सिंह, ईश्वरी प्रसाद, खूब सिंह, अभय भारद्वाज, प्रदीप उपाध्याय, रामदयाल, जितेंद्र कुमार हल्दिया, राधाकृष्ण विजय, संजय मौनी, वीरेंद्र सिंह, राजपाल सिंह और गिरिजाशंकर पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान वराह का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कासगंज के सोरों जी स्थित भगवान वराह की नगरी शूकरक्षेत्र में 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी में पवित्र स्नान किया, भगवान वराह नारायण का पूजन-अर्चन किया और पंचकोशीय परिक्रमा में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया, जिससे संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा। ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष और शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक श्री शरद कुमार पाण्डेय के संयोजन में प्रातः 6:30 बजे भगवान वराह मंदिर, हरि की पौड़ी से पंचकोशीय परिक्रमा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस दौरान श्रद्धालु "ॐ जय गंगे", "ॐ जय वराह", "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जैसे धार्मिक जयघोषों के साथ हरिनाम संकीर्तन और भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़े, जिससे संकीर्तन की गूंज से परिक्रमा क्षेत्र गूंज उठा। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिसे भीमसेनी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस एक दिन के
व्रत से वर्षभर की समस्त एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा पापों का नाश होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने वराह गौशाला, चक्रतीर्थ, सूर्यकुण्ड, चन्द्रकुण्ड, जया देवी भद्रकाली मंदिर, बटुक भैरव मंदिर, प्राचीन गृद्धवट, ग्राम देवी मंदिर, सीताराम मंदिर, तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर, चौरासी घंटे वाली मैया तथा बाछरू महाराज सहित अनेक पवित्र स्थलों के दर्शन किए। पंचकोशीय परिक्रमा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत, फल, प्रसाद एवं विश्राम की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। सीता रसोई, ममता देवी भवन (प्रेम जी की बगीची), सिग्नल वाले महाराज सहित अनेक स्थानों पर समाजसेवियों ने निःस्वार्थ भाव से श्रद्धालुओं की सेवा कर धर्मलाभ अर्जित किया। यह परिक्रमा सेडूनगला होते हुए बाछरू महाराज स्थल पहुँची, जहाँ श्रद्धालुओं ने विश्राम किया और देव दर्शन किए। इसके पश्चात श्रद्धालु सीता जी की रसोई पहुँचे, जहाँ महादेव मंदिर के दर्शन कर प्रसादी ग्रहण की। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय, प्रसाद एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था थी। इसके बाद श्रद्धालु करुआ देव महाराज, भगीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, वनखंडेश्वर महादेव मंदिर तथा चैतन्य महाप्रभु की बैठक के दर्शन करते हुए पुनः
भगवान वराह मंदिर पहुँचे और अपनी परिक्रमा पूर्ण की। इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि शूकरक्षेत्र धाम की पंचकोशीय परिक्रमा एवं हरि की पौड़ी में स्नान कर भगवान वराह नारायण का पूजन-अर्चन करने से श्रद्धालुओं को विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत एवं शूकरक्षेत्र धाम की पंचकोशीय परिक्रमा करने से दस हजार वर्षों की तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश होकर विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। यह विशाल धार्मिक आयोजन शूकरक्षेत्र धाम सोरों की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत एवं जनआस्था का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा, जिसमें श्रद्धालुओं के उत्साह, भक्ति और सेवा भाव ने सम्पूर्ण क्षेत्र को धर्ममय वातावरण से भर दिया। इस पावन अवसर पर शरद कुमार पाण्डेय, शिवानंद उपाध्याय, अशोक कुमार पाण्डेय, शशांक दीक्षित, हाकिम सिंह, विनोद दीक्षित, राजकुमार गौड़, प्रवीण कुमार द्विवेदी, योगेश उपाध्याय, श्याम किशोर वर्मा, सचिन गुप्ता, लाखन सिंह, ईश्वरी प्रसाद, खूब सिंह, अभय भारद्वाज, प्रदीप उपाध्याय, रामदयाल, जितेंद्र कुमार हल्दिया, राधाकृष्ण विजय, संजय मौनी, वीरेंद्र सिंह, राजपाल सिंह और गिरिजाशंकर पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान वराह का आशीर्वाद प्राप्त किया।
- एक वीडियो में भाभी जी ने यह साबित कर दिया है कि गोबर का इस्तेमाल सिर्फ खाद, गैस और उपले बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे डांस भी किया जा सकता है। पोस्ट के अनुसार, भाभी जी पहले डांस करके दिखाएंगी और फिर उपले बनाएंगी। इसके बाद वह इस 'उपले डांस' को वायरल भी करेंगी।1
- ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की सुरक्षा के लिए संपर्क करने हेतु दो हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरत पड़ने पर महिलाएं 9027999866 या 9454229115 पर संपर्क कर सकती हैं।3
- बदायूं के सहसवान कोतवाली क्षेत्र के बाजपुर गांव में मामूली बात को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस दौरान दोनों तरफ से लाठी-डंडे चले, जिसमें कई लोग घायल हो गए। मारपीट की इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायल व्यक्तियों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस अब पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी हुई है।1
- हाथरस-लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद, हाथरस का प्रशासन अलर्ट मोड पर है और सक्रियता से काम कर रहा है। इसी कड़ी में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए स्वस्तिक ज्योतिष संस्थान को बंद करा दिया है। यह संस्थान अलीगढ़ रोड पर ग्रामीण बैंक के ऊपर संचालित हो रहा था। यह कार्रवाई जिलाधिकारी अतुल वत्स के निर्देश पर चलाए जा रहे एक विशेष अभियान के तहत की गई। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर राजबहादुर सिंह ने मौके पर पहुंचकर संस्थान की जांच की, जिसके बाद यह कार्यवाही अमल में लाई गई। जांच के दौरान, संस्थान निर्धारित मानकों पर खरा नहीं पाया गया। मानकों का पालन न होने के कारण संस्थान को बंद कर दिया गया है और उसे नोटिस भी जारी किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उसका यह अभियान जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।2
- अलीगढ़ में ताज़ियादारों ने अपने-अपने दरवाजों पर ताज़िया रखे। इस अवसर पर शिया समुदाय ने अपनी धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए ताज़िया निकाले।1
- आम आदमी पार्टी (आप) सांसद संजय सिंह ने एक बड़ा आरोप लगाया है, जिसमें दावा किया गया है कि उन्होंने जमीन घोटाले से जुड़े दस्तावेज़ विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दिए हैं। सिंह ने कहा कि इन दस्तावेज़ों के आधार पर चंपत राय सहित कई अन्य लोग इस मामले में फंस सकते हैं। सिंह ने आगे आरोप लगाया कि सैकड़ों करोड़ रुपये के इस घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है और FIR का नाटक केवल ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट पर भी निशाना साधते हुए सवाल किया कि 'राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपियों पर कार्रवाई कब होगी?'1
- चित्रकूट जनपद के राजापुर तहसील क्षेत्र में चांदी बालू खदानों से खनिज संपदा लूटने के लिए खनन माफियाओं को कथित तौर पर खुली छूट मिली हुई है। स्थानीय शासन-प्रशासन की कथित मौन स्वीकृति से इन खदानों से ओवरलोड वाहनों का परिवहन लगातार जारी है। आरोप है कि खनिज माफिया जिलाधिकारी चित्रकूट के निर्देशों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। यह भी कहा गया है कि स्थानीय शासन-प्रशासन के संरक्षण के कारण ही खनन माफिया चित्रकूट जनपद को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 28 जून को हाथरस का दौरा करेंगे, जिसके लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं। इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री 468 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। साथ ही, वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम सलेमपुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि यह दौरा पहले 23 जून को निर्धारित किया गया था, लेकिन लखनऊ अग्निकांड के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब 28 जून के निर्धारित दौरे को लेकर अधिकारी लगातार कार्यक्रम स्थल और आवश्यक व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं।3
- लखनऊ में हुए अग्निकांड से अलीगढ़ शहर दहल उठा है, जहां इस घटना में हुई मासूमों की मौत पर गहरा दर्द छलका। इसी के तहत, विवेक बंसल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलीगढ़ में कैंडल मार्च निकाला और पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दीपक जलाए।1