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मुजफ्फरनगर के सरवट में मस्जिद के इमाम के साथ बीच सड़क पर दबंगो ने की मारपीट मारपीट की घटना cctv में कैद पुलिस जांच में जुटी बजरंग दल एवं अन्य संगठनों से जुड़े हुए बताये जा रहे है मारपीट करने वाले लोग

6 hrs ago
user_Yusuf Khan
Yusuf Khan
Speech Therapist बालेसर, जोधपुर, राजस्थान•
6 hrs ago
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मुजफ्फरनगर के सरवट में मस्जिद के इमाम के साथ बीच सड़क पर दबंगो ने की मारपीट मारपीट की घटना cctv में कैद पुलिस जांच में जुटी बजरंग दल एवं अन्य संगठनों से जुड़े हुए बताये जा रहे है मारपीट करने वाले लोग

More news from राजस्थान and nearby areas
  • कविता और थीम मेहंदी से नारी-शक्ति का संदेश राजबाग, सूरसागर (जोधपुर) निवासी थीम मेहंदी कलाकार रेणु भदरार हर विशेष दिवस व त्योहार पर जागरूकता का संदेश देने वाली मेहंदी लगाती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने युवा कवयित्री सुरभि खीची के साथ साहित्य और कला को जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की। साहित्य लेखन का कई वर्षों से शौक रखने वाली सुरभि खीची ने अपनी ही लिखी कविता के भावों के अनुसार अपने हाथों में थीम मेहंदी रचवाई। उनकी कविता में एक स्त्री की बचपन से लेकर विवाह के बाद तक की जीवन-यात्रा, उसके सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास का संदेश व्यक्त किया गया है। इस विशेष मेहंदी को रेणु भदरार ने तैयार किया, जिसमें किताब, उड़ती चिड़िया और फूलों के माध्यम से नारी शिक्षा, स्वतंत्रता और सृजनशीलता का संदेश दर्शाया गया है। सुरभि खीची ने बताया कि मेहंदी में अंकित भाव उनकी अपनी कविता से लिए गए हैं और उसी के अनुसार रेणु भदरार ने उनके हाथों में यह थीम मेहंदी प्रदर्शित की। यह प्रयास नारी-शक्ति, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रेरणादायक संदेश देता है।
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    कविता और थीम मेहंदी से नारी-शक्ति का संदेश
राजबाग, सूरसागर (जोधपुर) निवासी थीम मेहंदी कलाकार रेणु भदरार हर विशेष दिवस व त्योहार पर जागरूकता का संदेश देने वाली मेहंदी लगाती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने युवा कवयित्री सुरभि खीची के साथ साहित्य और कला को जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की। साहित्य लेखन का कई वर्षों से शौक रखने वाली सुरभि खीची ने अपनी ही लिखी कविता के भावों के अनुसार अपने हाथों में थीम मेहंदी रचवाई। उनकी कविता में एक स्त्री की बचपन से लेकर विवाह के बाद तक की जीवन-यात्रा, उसके सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास का संदेश व्यक्त किया गया है। इस विशेष मेहंदी को रेणु भदरार ने तैयार किया, जिसमें किताब, उड़ती चिड़िया और फूलों के माध्यम से नारी शिक्षा, स्वतंत्रता और सृजनशीलता का संदेश दर्शाया गया है। सुरभि खीची ने बताया कि मेहंदी में अंकित भाव उनकी अपनी कविता से लिए गए हैं और उसी के अनुसार रेणु भदरार ने उनके हाथों में यह थीम मेहंदी प्रदर्शित की। यह प्रयास नारी-शक्ति, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रेरणादायक संदेश देता है।
    user_Pradeep soni
    Pradeep soni
    Local News Reporter जोधपुर, जोधपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • बालोतरा। बालोतरा के विभिन्न गांव में होली के बाद 7 दिन तक गैर नृत्य का आयोजन किया जाता है।
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    बालोतरा।
बालोतरा के विभिन्न गांव में होली के बाद 7 दिन तक गैर नृत्य का आयोजन किया जाता है।
    user_Pukhraj soni
    Pukhraj soni
    पत्रकार पचपदरा, बाड़मेर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • jodhpur :- जोधपुर से बड़ी खबर, भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद झूम उठे जोधपुर वासी, जोधपुरवासीयों ने पटाखे फोड़ कर मनाई जीत की खुशी ।
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    jodhpur :- जोधपुर से बड़ी खबर, भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद झूम उठे जोधपुर वासी,  जोधपुरवासीयों ने पटाखे फोड़ कर मनाई जीत की खुशी ।
    user_जनता की आवाज
    जनता की आवाज
    Local News Reporter जोधपुर, जोधपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • पीआईबी चंडीगढ़ द्वारा पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने जोधपुर में काजरी और आफरी का किया दौरा किसानों की आय दोगुनी करने में काजरी निभा रहा है महत्वपूर्ण भूमिका : श्री तंवर, निदेशक काजरी मोटे अनाज से बिस्कुट एवं कुरकुरे बनाने का काजरी प्रदान करता है प्रशिक्षण वनों के संरक्षण और विस्तार के लिए आफरी की महत्वपूर्ण भूमिका : श्री त्रिपाठी, निदेशक आफरी (पीआईबी), चंडीगढ़ द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल 8 से 14 मार्च के दौरान राजस्थान के दौरे पर है। इस दौरान आज 9 मार्च को प्रतिनिधिमंडल ने काजरी और आफरी का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) से अपने दौरे की शुरुआत की। इस अवसर पर काजरी के निदेशक डॉ. सुरेशपाल सिंह तंवर ने जानकारी देते हुए बताया कि काजरी थार मरुस्थल एवं लेह जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में कृषि के विकास के लिए कार्य कर रहा है। संस्थान ने टिब्बा स्थिरीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, जल प्रबंधन, फलोद्यानिकी, पशुपालन आदि क्षेत्रों में शोध कार्य कर अनेक तकनीकियाँ विकसित की हैं और इन तकनीकों को गांवों और ढाणियों तक पहुँचाया है, जिससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ा और हरियाली का विस्तार हुआ है। कम पानी, कम लागत और कम खर्च में पनपने वाली खरीफ एवं रबी की विभिन्न फसलों की किस्में विकसित की गई हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने कहा कि समन्वित कृषि प्रणाली का एक मॉडल विकसित किया गया है, जिसमें अनाज, फल, चारा, पेड़, औषधीय पौधे आदि के माध्यम से किसान को वर्ष भर आय प्राप्त होती रहती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में काजरी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मोटे अनाज की ख्याति को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने के लिए काजरी मिलेट्स से विभिन्न उत्पाद जैसे बाजरा बिस्किट, कुरकुरे और चॉकलेट सहित अन्य उत्पाद तैयार कर रहा है। इसके साथ ही संस्थान की प्रयोगशाला में विभिन्न राज्यों से आने वाले उद्यमियों को अपने स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ कौशल विकास के माध्यम से उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है। उन्होंने बताया कि काजरी के कृषि वैज्ञानिक एआई आधारित खेती, स्मार्ट जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर भी कार्य कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य फसल उत्पादन बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करना है। उन्होंने संस्थान की शोध उपलब्धियों और गतिविधियों के बारे में बताते हुए वैकल्पिक चारा मॉडल, उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन, फसल वाटिका, पोषण तथा पशु आहार से संबंधित कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान के एटिक केंद्र के माध्यम से किसानों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण पेड़-पौधे, बीज आदि उपलब्ध कराए जाते हैं। काजरी के प्रधान वैज्ञानिक श्री पी. आर. मेघवाल ने शुष्क क्षेत्र की बागवानी फसलों जैसे बेर, आंवला, अनार और खजूर की खेती के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि काजरी द्वारा विकसित नवीन तकनीकों के माध्यम से विभिन्न फसलों की उन्नत पैदावार हो रही है। इसके माध्यम से किसानों को अपनी कृषि आय बढ़ाने में सहायता मिल रही है और किसान काजरी से प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, जिससे स्वरोजगार के साथ-साथ उद्यमियों का कौशल विकास भी हो रहा है। काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र पुनिया ने सौर ऊर्जा के विभिन्न संयंत्रों तथा एग्रो-वोल्टाइक प्रणाली के बारे में जानकारी दी, जिसके माध्यम से एक ही भूमि से बिजली, पानी और फसल उत्पादन संभव हो रहा है। वैज्ञानिक डॉ. राजशेखर ने बाजरा एवं अन्य मोटे अनाज से बिस्कुट और कुरकुरे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) का भी दौरा किया। इस अवसर पर आफरी के निदेशक डॉ. आशुतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आफरी वनों के संरक्षण और विस्तार के लिए विभिन्न कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में भी वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और लोग इसके लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए भी आफरी कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। उन्होंने बताया कि आफरी विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से नई तकनीकों का उपयोग कर वन संरक्षण और विकास के कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। मृदा संरक्षण के तहत आफरी द्वारा राजस्थान, गुजरात एवं दादरा और नगर हवेली क्षेत्र के लिए जारी किए गए वन मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में भी जानकारी दी गई। आफरी द्वारा विस्तार कार्यक्रमों के तहत किसानों, आमजन और विद्यालयों में पर्यावरण जागरूकता के लिए प्रकृति, विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा वृक्ष उत्पादक मेले जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विभिन्न राज्यों में वृक्षारोपण कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आफरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. तरुण कांत ने पीआईबी के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल को संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आफरी द्वारा वृक्ष सुधार कार्यक्रम के तहत उत्तम गुणवत्ता के शीशम क्लोन विकसित किए गए हैं। उन्होंने खेजड़ी वृक्ष की मृत्यता पर आफरी द्वारा किए गए अनुसंधान एवं उसके समाधान के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही अवक्रमित पहाड़ियों के पुनर्वास, लवणीय भूमि के पुनर्वास और टिब्बा स्थिरीकरण के क्षेत्र में आफरी द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में भी अवगत कराया। भारतीय वन सेवा के अधिकारी श्री रमेश विश्नोई ने मंच संचालन करते हुए विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। पत्रकार दल ने काजरी और आफरी के विभिन्न शोध क्षेत्रों का भ्रमण किया तथा वैज्ञानिकों से कृषि तकनीकों और नवाचारों के बारे में जानकारी प्राप्त की। अंत में मीडिया एवं संचार अधिकारी श्री आशीष वर्मा और श्री अहमद खान ने संस्थानों के निदेशक एवं समस्त स्टाफ का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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    पीआईबी चंडीगढ़ द्वारा पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने जोधपुर में काजरी और आफरी का किया दौरा
किसानों की आय दोगुनी करने में काजरी निभा रहा है महत्वपूर्ण भूमिका : श्री तंवर, निदेशक काजरी
मोटे अनाज से बिस्कुट एवं कुरकुरे बनाने का काजरी प्रदान करता है प्रशिक्षण
वनों के संरक्षण और विस्तार के लिए आफरी की महत्वपूर्ण भूमिका : श्री त्रिपाठी, निदेशक आफरी
(पीआईबी), चंडीगढ़ द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल 8 से 14 मार्च के दौरान राजस्थान के दौरे पर है। इस दौरान आज 9 मार्च को प्रतिनिधिमंडल ने काजरी और आफरी का दौरा किया।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) से अपने दौरे की शुरुआत की। इस अवसर पर काजरी के निदेशक डॉ. सुरेशपाल सिंह तंवर ने जानकारी देते हुए बताया कि काजरी थार मरुस्थल एवं लेह जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में कृषि के विकास के लिए कार्य कर रहा है। संस्थान ने टिब्बा स्थिरीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, जल प्रबंधन, फलोद्यानिकी, पशुपालन आदि क्षेत्रों में शोध कार्य कर अनेक तकनीकियाँ विकसित की हैं और इन तकनीकों को गांवों और ढाणियों तक पहुँचाया है, जिससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ा और हरियाली का विस्तार हुआ है।
कम पानी, कम लागत और कम खर्च में पनपने वाली खरीफ एवं रबी की विभिन्न फसलों की किस्में विकसित की गई हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने कहा कि समन्वित कृषि प्रणाली का एक मॉडल विकसित किया गया है, जिसमें अनाज, फल, चारा, पेड़, औषधीय पौधे आदि के माध्यम से किसान को वर्ष भर आय प्राप्त होती रहती है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में काजरी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मोटे अनाज की ख्याति को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने के लिए काजरी मिलेट्स से विभिन्न उत्पाद जैसे बाजरा बिस्किट, कुरकुरे और चॉकलेट सहित अन्य उत्पाद तैयार कर रहा है। इसके साथ ही संस्थान की प्रयोगशाला में विभिन्न राज्यों से आने वाले उद्यमियों को अपने स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ कौशल विकास के माध्यम से उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
उन्होंने बताया कि काजरी के कृषि वैज्ञानिक एआई आधारित खेती, स्मार्ट जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर भी कार्य कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य फसल उत्पादन बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करना है।
उन्होंने संस्थान की शोध उपलब्धियों और गतिविधियों के बारे में बताते हुए वैकल्पिक चारा मॉडल, उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन, फसल वाटिका, पोषण तथा पशु आहार से संबंधित कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान के एटिक केंद्र के माध्यम से किसानों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण पेड़-पौधे, बीज आदि उपलब्ध कराए जाते हैं।
काजरी के प्रधान वैज्ञानिक श्री पी. आर. मेघवाल ने शुष्क क्षेत्र की बागवानी फसलों जैसे बेर, आंवला, अनार और खजूर की खेती के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि काजरी द्वारा विकसित नवीन तकनीकों के माध्यम से विभिन्न फसलों की उन्नत पैदावार हो रही है। इसके माध्यम से किसानों को अपनी कृषि आय बढ़ाने में सहायता मिल रही है और किसान काजरी से प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, जिससे स्वरोजगार के साथ-साथ उद्यमियों का कौशल विकास भी हो रहा है।
काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र पुनिया ने सौर ऊर्जा के विभिन्न संयंत्रों तथा एग्रो-वोल्टाइक प्रणाली के बारे में जानकारी दी, जिसके माध्यम से एक ही भूमि से बिजली, पानी और फसल उत्पादन संभव हो रहा है। वैज्ञानिक डॉ. राजशेखर ने बाजरा एवं अन्य मोटे अनाज से बिस्कुट और कुरकुरे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल ने शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) का भी दौरा किया। इस अवसर पर आफरी के निदेशक डॉ. आशुतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आफरी वनों के संरक्षण और विस्तार के लिए विभिन्न कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में भी वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और लोग इसके लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए भी आफरी कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है।
उन्होंने बताया कि आफरी विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से नई तकनीकों का उपयोग कर वन संरक्षण और विकास के कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। मृदा संरक्षण के तहत आफरी द्वारा राजस्थान, गुजरात एवं दादरा और नगर हवेली क्षेत्र के लिए जारी किए गए वन मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में भी जानकारी दी गई।
आफरी द्वारा विस्तार कार्यक्रमों के तहत किसानों, आमजन और विद्यालयों में पर्यावरण जागरूकता के लिए प्रकृति, विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा वृक्ष उत्पादक मेले जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विभिन्न राज्यों में वृक्षारोपण कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
आफरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. तरुण कांत ने पीआईबी के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल को संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आफरी द्वारा वृक्ष सुधार कार्यक्रम के तहत उत्तम गुणवत्ता के शीशम क्लोन विकसित किए गए हैं। उन्होंने खेजड़ी वृक्ष की मृत्यता पर आफरी द्वारा किए गए अनुसंधान एवं उसके समाधान के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही अवक्रमित पहाड़ियों के पुनर्वास, लवणीय भूमि के पुनर्वास और टिब्बा स्थिरीकरण के क्षेत्र में आफरी द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में भी अवगत कराया।
भारतीय वन सेवा के अधिकारी श्री रमेश विश्नोई ने मंच संचालन करते हुए विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
पत्रकार दल ने काजरी और आफरी के विभिन्न शोध क्षेत्रों का भ्रमण किया तथा वैज्ञानिकों से कृषि तकनीकों और नवाचारों के बारे में जानकारी प्राप्त की। अंत में मीडिया एवं संचार अधिकारी श्री आशीष वर्मा और श्री अहमद खान ने संस्थानों के निदेशक एवं समस्त स्टाफ का धन्यवाद ज्ञापित किया।
    user_Jitendra dave
    Jitendra dave
    Journalist Jodhpur, Rajasthan•
    14 hrs ago
  • Post by Govind Singj
    1
    Post by Govind Singj
    user_Govind Singj
    Govind Singj
    समाजसेवी Jodhpur, Rajasthan•
    16 hrs ago
  • Post by Sachin vyas
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    Post by Sachin vyas
    user_Sachin vyas
    Sachin vyas
    Journalist फलोदी, जोधपुर, राजस्थान•
    53 min ago
  • सिवाना में श्रद्धा के साथ महिलाओं ने की शीतला माता की कथा, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना सिवाना कस्बे में शीतला माता के प्रति आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कस्बे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्रित होकर श्रद्धा भाव से शीतला माता की कथा का आयोजन किया। कथा के दौरान महिलाओं ने माता के भजन गाए और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।कथा आयोजन में महिलाओं ने शीतला माता के जीवन प्रसंगों और उनके महत्व को सुनते हुए भक्ति भाव से भाग लिया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और महिलाओं ने भजन-कीर्तन कथा के पश्चात महिलाओं ने माता को प्रसाद अर्पित कर उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित की। महिलाओं का कहना है कि शीतला माता की पूजा से क्षेत्र में रोग-व्याधियों से मुक्ति और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार महिलाएं शीतला माता की कथा व पूजा करती हैं।इस अवसर पर कस्बे की अनेक महिलाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से माता की आराधना कर क्षेत्र में खुशहाली और शांति की कामना की।
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    सिवाना में श्रद्धा के साथ महिलाओं ने की शीतला माता की कथा, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना
सिवाना कस्बे में शीतला माता के प्रति आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कस्बे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्रित होकर श्रद्धा भाव से शीतला माता की कथा का आयोजन किया। कथा के दौरान महिलाओं ने माता के भजन गाए और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।कथा आयोजन में महिलाओं ने शीतला माता के जीवन प्रसंगों और उनके महत्व को सुनते हुए भक्ति भाव से भाग लिया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और महिलाओं ने भजन-कीर्तन कथा के पश्चात महिलाओं ने माता को प्रसाद अर्पित कर उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित की। महिलाओं का कहना है कि शीतला माता की पूजा से क्षेत्र में रोग-व्याधियों से मुक्ति और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार महिलाएं शीतला माता की कथा व पूजा करती हैं।इस अवसर पर कस्बे की अनेक महिलाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से माता की आराधना कर क्षेत्र में खुशहाली और शांति की कामना की।
    user_सुरेश कुमार
    सुरेश कुमार
    सिवाना, बाड़मेर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ‘आयुर्घोष–2026’ का भव्य आगाज़, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा सुश्रुत सभागार आयुर्वेद विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव की शुरुआत, विद्यार्थियों ने गायन, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों से बांधा समां जोधपुर, 9 मार्च। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम “आयुर्घोष–2026” का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के सुश्रुत सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे सभागार को उत्साह और उमंग से भर दिया। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन माननीय कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे अतिथियों के स्वागत, मंगलाचरण और धन्वंतरि पूजन के साथ की गई। इस अवसर पर सांस्कृतिक समिति की अध्यक्षा डॉ. रश्मि शर्मा ने “आयुर्घोष–2026” की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी दी। कुलगुरु प्रोफेसर शुक्ल ने अपने आशीर्वचन में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र का समापन छात्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) गोविंद प्रसाद गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। दिनभर चले इस सांस्कृतिक महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा देखने को मिली। गायन प्रतियोगिता में समूह और एकल प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समूह गायन में प्रियंका एवं ग्रुप (BAMS 2025) तथा दर्शना एवं ग्रुप (BHMS 2025) ने शानदार प्रस्तुति दी। वहीं एकल गायन में रितिका, आदित्य, बिलाल और नीतू सहित कई विद्यार्थियों ने अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। इसके बाद आयोजित नाट्य प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अभिनय कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कसक तेजी (BNYS 2025) द्वारा प्रस्तुत मोनो एक्ट और योग के माध्यम से प्रस्तुत हनुमान चालीसा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। दोपहर के सत्र में नृत्य प्रतियोगिताओं की धूम रही। एकल नृत्य में वैशाली परिहार (BAMS 2021), आरती मीणा और मुस्कान ने अपनी प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा भर दी। वहीं समूह नृत्य में पिंकी एवं ग्रुप (BSC 2025), चिराग एवं ग्रुप (BNYS 2022) और कोमल एवं ग्रुप (BAMS 2021) ने शानदार तालमेल और आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में विश्वविद्यालय के फैकल्टी मेंबर्स ने भी अपनी प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को और अधिक यादगार बना दिया। पूरे दिन चले इस सांस्कृतिक उत्सव का समापन राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के गौरवपूर्ण स्वरों के साथ हुआ। “आयुर्घोष–2026” के इस पहले दिन ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, उत्साह और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन भी विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
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    आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ‘आयुर्घोष–2026’ का भव्य आगाज़, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा सुश्रुत सभागार 
आयुर्वेद विश्वविद्यालय के स्थापना  दिवस पर दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव की शुरुआत, 
विद्यार्थियों ने गायन, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों से बांधा समां
जोधपुर, 9 मार्च।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम “आयुर्घोष–2026” का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के सुश्रुत सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे सभागार को उत्साह और उमंग से भर दिया।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन माननीय  कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे अतिथियों के स्वागत, मंगलाचरण और धन्वंतरि पूजन के साथ की गई। इस अवसर पर सांस्कृतिक समिति की अध्यक्षा डॉ. रश्मि शर्मा ने “आयुर्घोष–2026” की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी दी। कुलगुरु प्रोफेसर शुक्ल ने अपने आशीर्वचन में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र का समापन छात्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) गोविंद प्रसाद गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
दिनभर चले इस सांस्कृतिक महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा देखने को मिली। गायन प्रतियोगिता में समूह और एकल प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समूह गायन में प्रियंका एवं ग्रुप (BAMS 2025) तथा दर्शना एवं ग्रुप (BHMS 2025) ने शानदार प्रस्तुति दी। वहीं एकल गायन में रितिका, आदित्य, बिलाल और नीतू सहित कई विद्यार्थियों ने अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
इसके बाद आयोजित नाट्य प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अभिनय कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कसक तेजी (BNYS 2025) द्वारा प्रस्तुत मोनो एक्ट और योग के माध्यम से प्रस्तुत हनुमान चालीसा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
दोपहर के सत्र में नृत्य प्रतियोगिताओं की धूम रही। एकल नृत्य में वैशाली परिहार (BAMS 2021), आरती मीणा और मुस्कान ने अपनी प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा भर दी। वहीं समूह नृत्य में पिंकी एवं ग्रुप (BSC 2025), चिराग एवं ग्रुप (BNYS 2022) और कोमल एवं ग्रुप (BAMS 2021) ने शानदार तालमेल और आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विश्वविद्यालय के फैकल्टी मेंबर्स ने भी अपनी प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को और अधिक यादगार बना दिया। पूरे दिन चले इस सांस्कृतिक उत्सव का समापन राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के गौरवपूर्ण स्वरों के साथ हुआ।
“आयुर्घोष–2026” के इस पहले दिन ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, उत्साह और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन भी विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
    user_Jitendra dave
    Jitendra dave
    Journalist Jodhpur, Rajasthan•
    14 hrs ago
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