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कार्डिफ में तीनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद संवैधानिक बदलाव और अपने भविष्य का फैसला खुद करने के अधिकार की मांग तेज स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के नेताओं ने कार्डिफ में बैठक कर अपने देशों के संवैधानिक भविष्य और Self-Determination के अधिकार पर जोर दिया है। जानिए यूनाइटेड किंगडम कैसे बना, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और आयरलैंड का इतिहास क्या रहा और आज ब्रिटेन की एकता को लेकर बहस क्यों तेज हुई है। [ 📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल पत्रकार दीपक कुमार] | We News 24 लंदन: यूनाइटेड किंगडम यानी यूके की संवैधानिक व्यवस्था को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। 14 सितंबर 2026 को कार्डिफ में स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड से जुड़े प्रमुख राष्ट्रवादी दलों के नेताओं ने बैठक की और संयुक्त समझौते में अपने-अपने देशों के भविष्य को तय करने के अधिकार यानी Self-Determination पर जोर दिया। समझौते में ब्रिटिश सरकार से संभावित संवैधानिक बदलाव की तैयारी और उसे सुगम बनाने का आह्वान किया गया है। हालांकि, इसे तत्काल यूके के विघटन की घोषणा कहना सही नहीं होगा। तीनों देशों की संवैधानिक स्थिति और स्वतंत्रता की राह अलग-अलग है। नेताओं ने भी माना है कि प्रत्येक देश अपने भविष्य का फैसला अपनी परिस्थितियों और अपने समय के अनुसार करेगा। ये खबर भी पढ़े   ₹13.80 लाख खर्च के बाद तोड़ा जा रहा नाला, अब दोबारा होगा निर्माण; सीतामढ़ी नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल आखिर क्या है यूनाइटेड किंगडम? यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड, जिसे सामान्य तौर पर UK या ब्रिटेन कहा जाता है, चार हिस्सों से बना संवैधानिक संघ है—इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड। ग्रेट ब्रिटेन नाम मुख्य रूप से इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के द्वीप वाले हिस्से के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि उत्तरी आयरलैंड के शामिल होने के बाद आधिकारिक नाम यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड हुआ। आज इन क्षेत्रों को अलग-अलग स्तर की स्वायत्त शासन व्यवस्था प्राप्त है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के पास अपने-अपने विकेंद्रीकृत संस्थान हैं, जबकि रक्षा और विदेश नीति जैसे कई महत्वपूर्ण विषय अभी यूके सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं। कैसे बना आज का यूनाइटेड किंगडम? ब्रिटेन का वर्तमान स्वरूप किसी एक समझौते से अचानक नहीं बना। सदियों के युद्ध, राजशाही, राजनीतिक समझौतों और संघीय व्यवस्थाओं के जरिए इसकी संरचना विकसित हुई। वेल्स: मध्यकाल में वेल्स पर अंग्रेजी शासन का विस्तार हुआ और 16वीं शताब्दी में कानूनों के जरिए वेल्स को इंग्लैंड की प्रशासनिक व्यवस्था में अधिक औपचारिक रूप से शामिल किया गया। स्कॉटलैंड: लंबे समय तक स्कॉटलैंड अलग राज्य रहा। 1603 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम की मृत्यु के बाद स्कॉटलैंड के राजा जेम्स षष्ठम इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम बने। हालांकि दोनों देशों की संसदें अलग रहीं। 1707 के Acts of Union के बाद इंग्लैंड और स्कॉटलैंड मिलकर ग्रेट ब्रिटेन बने। आयरलैंड कैसे बना ब्रिटेन का हिस्सा? आयरलैंड और इंग्लैंड के बीच संबंध भी कई सदियों पुराने और संघर्षपूर्ण रहे हैं। 1801 के Acts of Union के बाद ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड मिलकर यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड बने। लेकिन आयरलैंड में ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी आंदोलन मजबूत होता गया। 20वीं सदी की शुरुआत में स्वतंत्रता की मांग तेज हुई और स्वतंत्रता संघर्ष के बाद आयरलैंड के बड़े हिस्से ने ब्रिटेन से अलग होकर स्वतंत्र आयरिश राज्य का रास्ता अपनाया। इसके बाद उत्तरी आयरलैंड यूके का हिस्सा बना रहा, जबकि आयरलैंड के बाकी हिस्से ने अलग राजनीतिक राह अपनाई।  अब क्यों बढ़ी है अलग भविष्य की मांग? 14 सितंबर की कार्डिफ बैठक में SNP, Plaid Cymru और Sinn Féin से जुड़े नेताओं ने अपने देशों के लोगों को अपने संवैधानिक भविष्य का फैसला करने का अधिकार देने की मांग की। समझौते में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा और यूरोप के साथ संबंधों जैसे मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। यह पहली बार है जब इन तीनों क्षेत्रों में स्वतंत्रता समर्थक राजनीतिक ताकतों की सरकारों का एक साथ ऐसा समन्वय देखने को मिला है। हालांकि, बैठक में नेता अपने-अपने दलों के प्रमुख के रूप में भी शामिल हुए थे, इसलिए इसे तीनों सरकारों की ओर से स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा के रूप में देखना उचित नहीं होगा। तीनों की राह एक जैसी नहीं स्कॉटलैंड में स्वतंत्रता का सवाल पहले भी जनमत संग्रह तक पहुंच चुका है। 2014 में हुए जनमत संग्रह में मतदाताओं ने यूके में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था। उत्तरी आयरलैंड की स्थिति अलग है। वहां आयरलैंड के साथ संभावित एकीकरण का सवाल Good Friday Agreement के तहत अलग संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा है। वहीं वेल्स में स्वतंत्रता की बहस मौजूद होने के बावजूद वहां की संवैधानिक राह स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड से अलग है। इसलिए कार्डिफ में हुआ समझौता ब्रिटेन के तत्काल विभाजन का ऐलान नहीं, बल्कि यूके की संवैधानिक व्यवस्था और भविष्य को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहस का नया अध्याय है। आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्रिटिश सरकार इन मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और क्या भविष्य में स्कॉटलैंड, वेल्स या उत्तरी आयरलैंड में संवैधानिक भविष्य को लेकर जनमत संग्रह की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यूके की एकता, विकेंद्रीकरण और स्वतंत्रता के सवाल पर राजनीतिक बहस फिर केंद्र में आ गई है। आने वाले वर्षों में यह बहस ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था के स्वरूप को प्रभावित कर सकती है।

2 hrs ago
user_We News 24
We News 24
Media company Mehrauli, South Delhi•
2 hrs ago
5027c536-a536-45d5-a381-19120b05a6d7

कार्डिफ में तीनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद संवैधानिक बदलाव और अपने भविष्य का फैसला खुद करने के अधिकार की मांग तेज स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के नेताओं ने कार्डिफ में बैठक कर अपने देशों के संवैधानिक भविष्य और Self-Determination के अधिकार पर जोर दिया है। जानिए यूनाइटेड किंगडम कैसे बना, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और आयरलैंड का इतिहास क्या रहा और आज ब्रिटेन की एकता को लेकर बहस क्यों तेज हुई है। [ 📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल पत्रकार दीपक कुमार] | We News 24 लंदन: यूनाइटेड किंगडम यानी यूके की संवैधानिक व्यवस्था को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। 14 सितंबर 2026 को कार्डिफ में स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड से जुड़े प्रमुख राष्ट्रवादी दलों के नेताओं ने बैठक की और संयुक्त समझौते में अपने-अपने देशों के भविष्य को तय करने के अधिकार यानी Self-Determination पर जोर दिया। समझौते में ब्रिटिश सरकार से संभावित संवैधानिक बदलाव की तैयारी और उसे सुगम बनाने का आह्वान किया गया है। हालांकि, इसे तत्काल यूके के विघटन की घोषणा कहना सही नहीं होगा। तीनों देशों की संवैधानिक स्थिति और स्वतंत्रता की राह अलग-अलग है। नेताओं ने भी माना है कि प्रत्येक देश अपने भविष्य का फैसला अपनी परिस्थितियों और अपने समय के अनुसार करेगा। ये खबर भी पढ़े   ₹13.80 लाख खर्च के बाद तोड़ा जा रहा नाला, अब दोबारा होगा निर्माण; सीतामढ़ी नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल आखिर क्या है यूनाइटेड किंगडम? यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड, जिसे सामान्य तौर पर UK या ब्रिटेन कहा जाता है, चार हिस्सों से बना संवैधानिक संघ है—इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड। ग्रेट ब्रिटेन नाम मुख्य रूप से इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के द्वीप वाले हिस्से के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि उत्तरी आयरलैंड के शामिल होने के बाद आधिकारिक नाम यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड हुआ। आज इन क्षेत्रों को अलग-अलग स्तर की स्वायत्त शासन व्यवस्था प्राप्त है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के पास अपने-अपने विकेंद्रीकृत संस्थान हैं, जबकि रक्षा और विदेश नीति जैसे कई महत्वपूर्ण विषय अभी यूके सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं। कैसे बना आज का यूनाइटेड किंगडम? ब्रिटेन का वर्तमान स्वरूप किसी एक समझौते से अचानक नहीं बना। सदियों के युद्ध, राजशाही, राजनीतिक समझौतों और संघीय व्यवस्थाओं के जरिए इसकी संरचना विकसित हुई। वेल्स: मध्यकाल में वेल्स पर अंग्रेजी शासन का विस्तार हुआ और 16वीं शताब्दी में कानूनों के जरिए वेल्स को इंग्लैंड की प्रशासनिक व्यवस्था में अधिक औपचारिक रूप से शामिल किया गया। स्कॉटलैंड: लंबे समय तक स्कॉटलैंड अलग राज्य रहा। 1603 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम की मृत्यु के बाद स्कॉटलैंड के राजा जेम्स षष्ठम इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम बने। हालांकि दोनों देशों की संसदें अलग रहीं। 1707 के Acts of Union के बाद इंग्लैंड और स्कॉटलैंड मिलकर ग्रेट ब्रिटेन बने। आयरलैंड कैसे बना ब्रिटेन का हिस्सा? आयरलैंड और इंग्लैंड के बीच संबंध भी कई सदियों पुराने और संघर्षपूर्ण रहे हैं। 1801 के Acts of Union के बाद ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड मिलकर यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड बने। लेकिन आयरलैंड में ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी आंदोलन मजबूत होता गया। 20वीं सदी की शुरुआत में स्वतंत्रता की मांग तेज हुई और स्वतंत्रता संघर्ष के बाद आयरलैंड के बड़े हिस्से ने ब्रिटेन से अलग होकर स्वतंत्र आयरिश राज्य का रास्ता अपनाया। इसके बाद उत्तरी आयरलैंड यूके का हिस्सा बना रहा, जबकि आयरलैंड के बाकी हिस्से ने अलग राजनीतिक राह अपनाई।  अब क्यों बढ़ी है अलग भविष्य की मांग? 14 सितंबर की कार्डिफ बैठक में SNP, Plaid Cymru और Sinn Féin से जुड़े नेताओं ने अपने देशों के लोगों को अपने संवैधानिक भविष्य का फैसला करने का अधिकार देने की मांग की। समझौते में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा और यूरोप के साथ संबंधों जैसे मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। यह पहली बार है जब इन तीनों क्षेत्रों में स्वतंत्रता समर्थक राजनीतिक ताकतों की सरकारों का एक साथ ऐसा समन्वय देखने को मिला है। हालांकि, बैठक में नेता अपने-अपने दलों के प्रमुख के रूप में भी शामिल हुए थे, इसलिए इसे तीनों सरकारों की ओर से स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा के रूप में देखना उचित नहीं होगा। तीनों की राह एक जैसी नहीं स्कॉटलैंड में स्वतंत्रता का सवाल पहले भी जनमत संग्रह तक पहुंच चुका है। 2014 में हुए जनमत संग्रह में मतदाताओं ने यूके में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था। उत्तरी आयरलैंड की स्थिति अलग है। वहां आयरलैंड के साथ संभावित एकीकरण का सवाल Good Friday Agreement के तहत अलग संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा है। वहीं वेल्स में स्वतंत्रता की बहस मौजूद होने के बावजूद वहां की संवैधानिक राह स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड से अलग है। इसलिए कार्डिफ में हुआ समझौता ब्रिटेन के तत्काल विभाजन का ऐलान नहीं, बल्कि यूके की संवैधानिक व्यवस्था और भविष्य को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहस का नया अध्याय है। आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्रिटिश सरकार इन मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और क्या भविष्य में स्कॉटलैंड, वेल्स या उत्तरी आयरलैंड में संवैधानिक भविष्य को लेकर जनमत संग्रह की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यूके की एकता, विकेंद्रीकरण और स्वतंत्रता के सवाल पर राजनीतिक बहस फिर केंद्र में आ गई है। आने वाले वर्षों में यह बहस ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था के स्वरूप को प्रभावित कर सकती है।

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  • दिल्ली की रफ्तार कहीं जाने वाली डीटीसी बस के पहियों को लगी लगाम दिल्ली के रफ्तार कहीं जाने वाली डीटीसी की बसों के पहिए थम गए और ड्राइवर कंडक्टर अपनी मांगों को लेकर रोड पर उतर आए और दूर-दूर तक सिर्फ डीटीसी बस सहित नजर आ रही थी और लंबा जाम जनता परेशान जनता का क्या कसूर है जवाब दें
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    दिल्ली की रफ्तार कहीं जाने वाली डीटीसी बस के पहियों को लगी लगाम 
दिल्ली के रफ्तार कहीं जाने वाली डीटीसी की बसों के पहिए थम गए और ड्राइवर कंडक्टर अपनी मांगों को लेकर रोड पर उतर आए और दूर-दूर तक सिर्फ डीटीसी बस सहित नजर आ रही थी और लंबा जाम जनता परेशान जनता का क्या कसूर है जवाब दें
    user_Vinod Rastogi
    Vinod Rastogi
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    17 hrs ago
  • दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "दिल्ली सरकार ने 10,000 छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने का फ़ैसला किया है दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "दिल्ली सरकार ने 10,000 छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने का फ़ैसला किया है, ताकि उनकी सुरक्षा और किफ़ायती आवास की सुविधा सुनिश्चित की जा सके। ये हॉस्टल लड़के और लड़कियों, दोनों तरह के छात्रों के लिए होंगे। दिल्ली की किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। हमने हॉस्टल बनाने में सक्षम संबंधित विभागों के साथ बैठकें की हैं, सही जगहें चुनी हैं और एक पॉलिसी का ड्राफ़्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। हमने छात्रों की ज़रूरतों और इन हॉस्टलों में ज़रूरी सुविधाओं पर अच्छी तरह से विचार किया है। मैं आपको भरोसा दिलाती हूं कि हम ऐसे हॉस्टल बनाएंगे जहां देश भर के माता-पिता पूरी निश्चिंतता के साथ अपने बच्चों को भेज सकें, और जहां छात्र, खाने या रहने की चिंता से मुक्त होकर पूरी तरह से अपने सपनों को पूरा करने पर ध्यान दे सकें।"
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    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "दिल्ली सरकार ने 10,000 छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने का फ़ैसला किया है
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "दिल्ली सरकार ने 10,000 छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने का फ़ैसला किया है, ताकि उनकी सुरक्षा और किफ़ायती आवास की सुविधा सुनिश्चित की जा सके। ये हॉस्टल लड़के और लड़कियों, दोनों तरह के छात्रों के लिए होंगे। दिल्ली की किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। हमने हॉस्टल बनाने में सक्षम संबंधित विभागों के साथ बैठकें की हैं, सही जगहें चुनी हैं और एक पॉलिसी का ड्राफ़्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। हमने छात्रों की ज़रूरतों और इन हॉस्टलों में ज़रूरी सुविधाओं पर अच्छी तरह से विचार किया है। मैं आपको भरोसा दिलाती हूं कि हम ऐसे हॉस्टल बनाएंगे जहां देश भर के माता-पिता पूरी निश्चिंतता के साथ अपने बच्चों को भेज सकें, और जहां छात्र, खाने या रहने की चिंता से मुक्त होकर पूरी तरह से अपने सपनों को पूरा करने पर ध्यान दे सकें।"
    user_INDIA VOICE
    INDIA VOICE
    Chanakya Puri, New Delhi•
    19 hrs ago
  • 17 सितंबर को देशभर में हम सेवा दिवस मनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी जी के 25 वर्षों के बेदाग, समर्पित और निस्वार्थ लोक-सेवा के कार्यकाल को नमन करने के लिए समर्पित है। narendramodi के जन्मदिन 17 सितंबर को देशभर में हम सेवा दिवस मनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी जी के 25 वर्षों के बेदाग, समर्पित और निस्वार्थ लोक-सेवा के कार्यकाल को नमन करने के लिए समर्पित है। #SevaSankalpAbhiyan के अंतर्गत देशभर में स्वच्छता अभियान, रक्तदान शिविर और मेडिकल कैंप सहित विभिन्न सेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी जी के मंगलमय व आरोग्यपूर्ण जीवन और दीर्घायु होने तथा लंबे समय तक देश की सेवा करने की कामना एवं आशीर्वाद के साथ भाजपा के कोटिश: कार्यकर्ता और उनके करोड़ों प्रशंसक 17 सितंबर को शाम 7 बजे 'आशीर्वाद का दिया' जलाएंगे।
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    17 सितंबर को देशभर में हम सेवा दिवस मनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी जी के 25 वर्षों के बेदाग, समर्पित और निस्वार्थ लोक-सेवा के कार्यकाल को नमन करने के लिए समर्पित है।
narendramodi  के जन्मदिन 17 सितंबर को देशभर में हम सेवा दिवस मनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी जी के 25 वर्षों के बेदाग, समर्पित और निस्वार्थ लोक-सेवा के कार्यकाल को नमन करने के लिए समर्पित है।
#SevaSankalpAbhiyan के अंतर्गत देशभर में स्वच्छता अभियान, रक्तदान शिविर और मेडिकल कैंप सहित विभिन्न सेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी जी के मंगलमय व आरोग्यपूर्ण जीवन और दीर्घायु होने तथा लंबे समय तक देश की सेवा करने की कामना एवं आशीर्वाद के साथ भाजपा के कोटिश: कार्यकर्ता और उनके करोड़ों प्रशंसक 17 सितंबर को शाम 7 बजे 'आशीर्वाद का दिया' जलाएंगे।
    user_अपना इंडिया न्यूज
    अपना इंडिया न्यूज
    दिल्ली छावनी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    19 hrs ago
  • लखनऊ, उत्तर प्रदेश: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'गुंडा' कहने पर कहा, "मुझे लगता है ऐसे पागल लोगों को नोटिस नहीं करना चाहिए। लखनऊ, उत्तर प्रदेश: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'गुंडा' कहने पर कहा, "मुझे लगता है ऐसे पागल लोगों को नोटिस नहीं करना चाहिए। क्योंकि कौन है, क्या है, क्या पता, ऐसे कोई भी किसी को कुछ भी बोल दे, तो मुझे लगता है उसको इतनी तवज्जो नहीं देनी चाहिए। पागल होगी कोई।"
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    लखनऊ, उत्तर प्रदेश: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा के  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'गुंडा' कहने पर कहा, "मुझे लगता है ऐसे पागल लोगों को नोटिस नहीं करना चाहिए।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा के  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'गुंडा' कहने पर कहा, "मुझे लगता है ऐसे पागल लोगों को नोटिस नहीं करना चाहिए। क्योंकि कौन है, क्या है, क्या पता, ऐसे कोई भी किसी को कुछ भी बोल दे, तो मुझे लगता है उसको इतनी तवज्जो नहीं देनी चाहिए। पागल होगी कोई।"
    user_दिल्ली जंक्शन
    दिल्ली जंक्शन
    वसंत विहार, नई दिल्ली, दिल्ली•
    23 hrs ago
  • नई दिल्ली ज़िला पुलिस द्वारा प्रमुख स्थानों पर नियमित पैदल गश्त कर पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़ाई गई। इस दौरान असामाजिक गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए नई दिल्ली ज़िला पुलिस द्वारा प्रमुख स्थानों पर नियमित पैदल गश्त कर पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़ाई गई। इस दौरान असामाजिक गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए नागरिकों में सुरक्षा की भावना एवं पुलिस के प्रति विश्वास को मजबूत किया गया।
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    नई दिल्ली ज़िला पुलिस द्वारा प्रमुख स्थानों पर नियमित पैदल गश्त कर पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़ाई गई। इस दौरान असामाजिक गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए
नई दिल्ली ज़िला पुलिस द्वारा प्रमुख स्थानों पर नियमित पैदल गश्त कर पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़ाई गई। इस दौरान असामाजिक गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए नागरिकों में सुरक्षा की भावना एवं पुलिस के प्रति विश्वास को मजबूत किया गया।
    user_Dehli Voice
    Dehli Voice
    दिल्ली छावनी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    1 day ago
  • बीजेपी कार्यकर्ताओं ने किया मोदी पोस्टर का अभिषेक, यूपीआई बदलाव किसके दबाव में, सिद्दी विनायक पहुंचे नबीन बोले जय भवानी जय शिवाजी, काकरोचों का स्कूल आडिट और सलमान पहुंचे गणपति विसर्जन में... देखिए छ: बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर.... बीजेपी कार्यकर्ताओं ने किया मोदी पोस्टर का अभिषेक, यूपीआई बदलाव किसके दबाव में, सिद्दी विनायक पहुंचे नबीन बोले जय भवानी जय शिवाजी, काकरोचों का स्कूल आडिट और सलमान पहुंचे गणपति विसर्जन में... देखिए छ: बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....
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    बीजेपी कार्यकर्ताओं ने किया मोदी पोस्टर का अभिषेक, यूपीआई बदलाव किसके दबाव में, सिद्दी विनायक पहुंचे नबीन बोले जय भवानी जय शिवाजी, काकरोचों का स्कूल आडिट और सलमान पहुंचे गणपति विसर्जन में... देखिए छ: बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने किया मोदी पोस्टर का अभिषेक, यूपीआई बदलाव किसके दबाव में, सिद्दी विनायक पहुंचे नबीन बोले जय भवानी जय शिवाजी, काकरोचों का स्कूल आडिट और सलमान पहुंचे गणपति विसर्जन में... देखिए छ: बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....
    user_Rajpath News
    Rajpath News
    South West Delhi, Delhi•
    51 min ago
  • श्यामपुण्ड भारत कल्याण परिषद & दैनिक भविष्य खबर डिजिटल मिडिया श्यामपुण्ड भारत कल्याण परिषद & दैनिक भविष्य खबर डिजिटल मिडिया हर खबर पर नजर हर पल दैनिक भविष्य खबर
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    श्यामपुण्ड भारत कल्याण परिषद & दैनिक भविष्य खबर डिजिटल मिडिया 
श्यामपुण्ड भारत कल्याण परिषद & दैनिक भविष्य खबर डिजिटल मिडिया हर खबर पर नजर हर पल दैनिक भविष्य खबर
    user_SHYAMPUND INDIA WELFARE COUNCI
    SHYAMPUND INDIA WELFARE COUNCI
    Social Welfare Centre द्वारका, दक्षिण पश्चिम दिल्ली, दिल्ली•
    58 min ago
  • भारतीय जन क्रान्ति सेना नेतृत्व का महाअभियान संपूर्ण भारत भ्रष्ट तंत्र सिस्टम से मुक्ति चाहिए तो आज ही जुड़े भारतीय जन क्रान्ति सेना नेतृत्व में आगामी सरकार बनाओ देश और प्रदेश में बदलाव लाएं भारतीय जन क्रान्ति सेना नेतृत्व भारत
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    भारतीय जन क्रान्ति सेना नेतृत्व का महाअभियान संपूर्ण भारत भ्रष्ट तंत्र सिस्टम से मुक्ति चाहिए तो आज ही जुड़े भारतीय जन क्रान्ति सेना नेतृत्व में आगामी सरकार बनाओ देश और प्रदेश में बदलाव लाएं भारतीय जन क्रान्ति सेना नेतृत्व भारत
    user_Bharatiya Jan KRANTI SENA
    Bharatiya Jan KRANTI SENA
    Political party office करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
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