सरकारी केंद्र पर एक माह से सरसों की खरीद नही,मंडी में 400 रुपए ज्यादा मिल रहे, खरीद केंद्र पर चने की अच्छी खरीद बांदीकुई।। के सरकारी खरीद केंद्र पर समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद एक महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि खुले बाजार में सरसों का भाव सरकारी खरीद मूल्य से अधिक है, जिसके कारण किसान अपनी फसल बेचने के लिए केंद्र पर नहीं आ रहे हैं।शहर की नई अनाज मंडी में 1 अप्रैल से चना और सरसों की खरीद शुरू हुई थी। सरकारी खरीद केंद्र पर सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है, जबकि मंडी में सरसों 6600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है। इस अंतर के कारण किसान सरकारी केंद्र पर सरसों नहीं बेच रहे हैं।इसके विपरीत, चने की खरीद केंद्र पर अच्छी हो रही है। अब तक 1244 कट्टे (622 क्विंटल) चने की सरकारी खरीद की जा चुकी है। चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल है, जो मंडी के भाव (लगभग 5000 रुपए प्रति क्विंटल) से काफी अधिक है। यही कारण है कि किसान चना बेचने के लिए सरकारी केंद्र पर आ रहे हैं।इसी मंडी में भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा गेहूं की भी सरकारी खरीद की जा रही है। यहां अभी तक 5943 क्विंटल गेहूं खरीद केंद्र पर आ चुका है।
सरकारी केंद्र पर एक माह से सरसों की खरीद नही,मंडी में 400 रुपए ज्यादा मिल रहे, खरीद केंद्र पर चने की अच्छी खरीद बांदीकुई।। के सरकारी खरीद केंद्र पर समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद एक महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि खुले बाजार में सरसों का भाव सरकारी खरीद मूल्य से अधिक है, जिसके कारण किसान अपनी फसल बेचने के लिए केंद्र पर नहीं आ रहे हैं।शहर की नई अनाज मंडी में 1 अप्रैल से चना और सरसों की खरीद शुरू हुई थी। सरकारी खरीद केंद्र पर सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है, जबकि मंडी में सरसों 6600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है। इस अंतर के कारण किसान सरकारी केंद्र पर सरसों नहीं बेच रहे हैं।इसके विपरीत, चने की खरीद केंद्र पर अच्छी हो रही है। अब तक 1244 कट्टे (622 क्विंटल) चने की सरकारी खरीद की जा चुकी है। चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल है, जो मंडी के भाव (लगभग 5000 रुपए प्रति क्विंटल) से काफी अधिक है। यही कारण है कि किसान चना बेचने के लिए सरकारी केंद्र पर आ रहे हैं।इसी मंडी में भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा गेहूं की भी सरकारी खरीद की जा रही है। यहां अभी तक 5943 क्विंटल गेहूं खरीद केंद्र पर आ चुका है।
- मालाखेड़ा क्षेत्र के नंगली झामावत गांव में एक अत्यंत चिंताजनक और दुखद घटना सामने आई है, जहां मेहराराम बाल्मिक (पुत्र भुल्लू राम) के घर को आग लगाकर पूरी तरह जलाकर राख कर दिया गया। इस घटना से बाल्मिक समाज में गहरा आक्रोश और भय का माहौल है। अलवर कलेक्टर आरती का शुक्ला के पास पहुंचकर रूपों पर कार्रवाई करने की मांग की पीड़ित परिवार को भारी नुकसान हुआ है और वे अब बेघर हो गए हैं। समाज के लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से मांग की है कि मामले की तुरंत निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, आवास और सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की गई है। समाज के प्रतिनिधियों ने अपील की है कि सभी लोग शांति बनाए रखें, लेकिन न्याय के लिए एकजुट रहें।1
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- हिणडौन सिटी 25 अप्रैल 2026, ग्रामोत्थान संस्था के महासचिव महेन्द्र सिंह मीना ने बताया कि पाँचना_डैम_की_नहरों_में_पानी_खोलें, दिनांक 23.04.2026 को माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री संजीव प्रकाश शर्मा एवं माननीय न्यायाधीश शुभा मेहता की डीबी में पाँचना डैम की नहरों में पानी खुलवाने के लिए ग्रामोत्थान संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका 14825/2020 एवं इस पर दिनांक 08.07.2022 के निर्णय उपरांत श्री रामकेश मीना की याचिका 12479/2022 एवं गम्भीर नदी जल बचाव संघर्ष समिति की याचिका 13380/2022 तथा ग्रामोत्थान संस्था द्वारा दायर कंटेम्प्ट पिटीशन 26/2023 पर सम्मिलित रूप से सुनवाई हुई। . महेन्द्र सिंह मीना ने बताया कि सुनवाई के दौरान ग्रामोत्थान संस्था की ओर से वकील दीपक शर्मा ने पैरवी की। गम्भीर नदी जल बचाव संघर्ष समिति की ओर से वकील अरविंद कुमार उपस्थित रहे। रामकेश मीना की याचिका की पैरवी करने के लिए कोई भी वकील उपस्थित नहीं हुआ। सभी माननीय उच्च न्यायालय का निर्णय निम्न प्रकार है - 1. अधिक्षण अभियंता न्यायालय में उपस्थित है। 2. हमने यह देखा है कि दिनांक 07.03.2026 को उनके द्वारा एक शपथपत्र प्रस्तुत किया गया है, जिसमें बताया गया है कि करौली स्थित पाँचना बांध सिंचाई परियोजना में पानी उपलब्ध है, जिसे नहरों में छोड़ा जा सकता है। यह पानी करौली एवं सवाई माधोपुर जिले के गुरुत्वाकर्षण कमांड क्षेत्र में 35 गांवों को उपलब्ध कराया जा सकता है तथा लगभग 9985 हेक्टेयर भूमि की वर्ष में दो बार सिंचाई की जा सकती है। इसी प्रकार पाँचना गुडला लिफ्ट नहर के माध्यम से करौली जिले के लगभग 13 गांवों (लगभग 1973 हेक्टेयर भूमि) को भी दोनों फसल सीज़न के लिए सिंचाई जल उपलब्ध कराया जा सकता है। हालांकि, जयपुर जल संसाधन परिपत्र के अधीक्षण अभियंता द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि पानी कब छोड़ा जाएगा। 3. श्री बी.एस. छाबा, अतिरिक्त महाधिवक्ता ने प्रस्तुत किया कि 15.09.2003 के आदेश द्वारा गठित एक समिति को बैठक कर जल छोड़ने के संबंध में निर्णय लेना आवश्यक है। 4. हमने पाया कि इस न्यायालय ने डी.बी. सिविल रिट याचिका (PIL) संख्या 14825/2020 में दिनांक 08.07.2022 को आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया था कि पाँचना बांध से नहरों में पानी छोड़ा जाए। इसके बाद कुछ आंदोलन हुए, जिनमें शेष गांवों को पानी देने की मांग उठाई गई। इस विषय पर 22.04.2023 को संबंधित पक्षों की बैठक भी हुई तथा अवमानना कार्यवाही में भी यह मामला न्यायालय के समक्ष आया। 6. दिनांक 05.03.2026 को न्यायालय ने निम्न आदेश पारित किया: राज्य सरकार गांवों के बीच विवाद के कारण पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही है। 2022 से अब तक चार वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी परियोजना से पानी उपलब्ध नहीं कराया गया है। सिंचाई सुविधाएं सभी के लिए आवश्यक हैं। सरकार राजनीतिक कारणों से इसे रोक नहीं सकती। लिफ्ट सिंचाई योजना और नहर 2005 से निर्मित हैं और इस पर भारी सार्वजनिक धन खर्च हो चुका है। राज्य अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि योजना को चालू किया जाए। अधीक्षण अभियंता को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। 7. न्यायालय के निर्देशानुसार स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। 8. यह भी ध्यान में लिया गया कि राज्य सरकार ने राजस्थान लिफ्ट नहर परियोजना की दूसरी लाइन के लिए ₹50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जिससे डिपालपुरा, टिकैतपुरा, उचेका पुरा और टोका (खरेटा) गांवों को पानी दिया जाएगा तथा पाँचना गुडला लिफ्ट नहर का उन्नयन किया जाएगा। 9. राज्य द्वारा दी गई वित्तीय स्वीकृति और दिनांक 07.03.2026 की रिपोर्ट को देखते हुए न्यायालय निर्देश देता है कि: मौजूदा नहरों में तुरंत पानी छोड़ा जाए। जिन गांवों तक पानी नहीं पहुंचा है, उनके लिए लिंक नहर का निर्माण किया जाए। जहां आवश्यक हो, नहरों की मरम्मत की जाए। मरम्मत कार्य के कारण पानी छोड़ने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। 10. परियोजना को गंभीरता से लिया जाए और शीघ्र पूर्ण किया जाए। 11. इस आदेश का तत्काल पालन किया जाए, अन्यथा संबंधित सचिव एवं मुख्य अभियंता को अगली तारीख पर न्यायालय में उपस्थित होना होगा। 12. अनुपालन हेतु अगली सुनवाई दिनांक 01.05.2026 को निर्धारित की जाती है।4
- *सतना जिला के नागौद सिविल अस्पताल का एसी वार्ड बना दलालों के सोने का अड्डा, इन दलालों से पूरा अस्पताल परेशान, दिन भर मरीज के परिजनों को भटका कर भेजते है प्राइवेट क्लीनिक, करते है वसूली, शाम होते ही अस्पताल परिसर में करते है शराब खोरी, रोकने पर करते है दादागिरी, डॉक्टर समेत पूरा स्टाफ कई बार कर चुका है लिखित शिकायत।*3
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- सतना में एंबुलेंस मरीजों के लिए खतरे से खाली नहीं, एंबुलेंस मेंटिनेंस के नाम पर प्रशासन को ठेंगा सतना। एंबुलेंस संविदाकार का आतंक जारी है। इन्हें सिर्फ अपनी कमाई से मतलब है। मरीजों की जान से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। शुक्रवार की शाम एक एंबुलेंस में कुपोषण से गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चे को रीवा रेफर किया गया। और जिस एंबुलेंस से मासूम को रेफर किया गया उसमें गेट नहीं बंद होता सकता था। एंबुलेंस में तारबाड़ी करके गेट को बंद किया गया। इसके साथ ही एंबुलेंस के अंदर लाइट भी बंद थी। यानी अंधेरे में मासूम को रीवा ले जाया गया। मेंटीनेंस के नाम पर एंबुलेंस संविदाकार केवल अपना कोरम पूरा कर रहे हैं। वही दूसरी ओर मरीजों के जान से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके पूर्व में रामनगर से रेफर मरीज को जिला अस्पताल जिस एंबुलेंस से लाया गया था। उसका भी गेट खोलने के लिए चालक को खिड़की से अंदर जाना पड़ा था। स्वास्थ्य विभाग की ये बड़ी लापरवाही किसी दिन बड़ा हादसा बनकर सामने आएगी।1
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