भिंड/मुरैना,चंबल के इस मंदिर को जाना जाता है तांत्रिक यूनिवर्सिटी के नाम से मुरैना जिले के मितावली गाँव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर (जिसे 'इकत्तरसो महादेव मंदिर' भी कहा जाता है) भारत के उन दुर्लभ प्राचीन मंदिरों में से एक है जो अपनी गोलाकार आकृति के लिए प्रसिद्ध हैं। इतिहासकरो का मत हैँ कि 11वीं-14वीं शताब्दी के दौरान कच्छपघात राजा देवपाल द्वारा निर्मित यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है. और माना जाता है कि इसी की अनूठी वास्तुकला से प्रेरित होकर पुराने भारतीय संसद भवन का डिजाइन तैयार किया गया था। हालाँकि इसके ज्यादा प्रमाण नहीं मिलते हैँ। मंदिर में 64 छोटे कक्ष हैं, जिनमें से प्रत्येक में एक शिवलिंग स्थापित है, और केंद्र में भगवान शिव को समर्पित एक मुख्य खुला मंडप है। प्राचीन समय में यह ज्योतिष, गणित और तंत्र-मंत्र की शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था, जिसके कारण इसे 'तांत्रिक यूनिवर्सिटी' भी कहा जाता था। यह ग्वालियर से लगभग 40 किमी और मुरैना से 25-30 किमी और भिंड से करीब 60 किमी की दूरी पर स्थित है। पहाड़ी पर चढ़ने के लिए लगभग 100 सीढ़ियां बनी हुई हैं। और जानते हैँ....... 1. भारतीय संसद का प्रेरणा स्रोत इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका गोलाकार (Circular) ढांचा है। माना जाता है कि ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस और हरबर्ट बेकर ने दिल्ली के पुराने संसद भवन का डिजाइन इसी मंदिर से प्रेरित होकर बनाया था। हालाँकि, आधिकारिक तौर पर इसके दस्तावेजी प्रमाण कम हैं, लेकिन दोनों की बनावट में समानता स्पष्ट दिखाई देती है। 2. अद्वितीय बनावट 64 कक्ष: मंदिर के मुख्य प्रांगण के चारों ओर 64 छोटे-छोटे कक्ष बने हुए हैं। प्राचीन समय में हर कक्ष में एक शिवलिंग और एक योगिनी की प्रतिमा स्थापित थी (अब कुछ मूर्तियाँ खंडित या चोरी हो चुकी हैं)। मुख्य मंदिर: प्रांगण के बिल्कुल बीचों-बीच एक विशाल मुख्य मंदिर है, जिसमें भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है। 3. खगोल विज्ञान का केंद्र इतिहासकारों का मानना है कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि प्राचीन भारत में ज्योतिष और गणित की शिक्षा का एक बड़ा केंद्र था। मंदिर के 64 कक्षों की गोलाकार स्थिति सूर्य के गोचर और नक्षत्रों की गणना करने में मदद करती थी। इसे 'एकत्तरसो महादेव मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। 4. तांत्रिक साधना स्थल प्राचीन समय में इसे तांत्रिक क्रियाओं और योगिनियों की साधना के लिए जाना जाता था। चौसठ योगिनी मंदिर भारत में बहुत कम बचे हैं (जैसे खजुराहो और ओडिशा में), जिनमें से मितावली का यह मंदिर सबसे सुरक्षित अवस्था में है। 5. भूकंपरोधी तकनीक यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है और सदियों पुराना होने के बावजूद आज भी मजबूती से खड़ा है। इसकी बनावट कुछ इस तरह की है कि यह बड़े भूकंपों को भी झेलने में सक्षम रहा है, जो प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है
भिंड/मुरैना,चंबल के इस मंदिर को जाना जाता है तांत्रिक यूनिवर्सिटी के नाम से मुरैना जिले के मितावली गाँव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर (जिसे 'इकत्तरसो महादेव मंदिर' भी कहा जाता है) भारत के उन दुर्लभ प्राचीन मंदिरों में से एक है जो अपनी गोलाकार आकृति के लिए प्रसिद्ध हैं। इतिहासकरो का मत हैँ कि 11वीं-14वीं शताब्दी के दौरान कच्छपघात राजा देवपाल द्वारा निर्मित यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है. और माना जाता है कि इसी की अनूठी वास्तुकला से प्रेरित होकर पुराने भारतीय संसद भवन का डिजाइन तैयार किया गया था। हालाँकि इसके ज्यादा प्रमाण नहीं मिलते हैँ। मंदिर में 64 छोटे कक्ष हैं, जिनमें से प्रत्येक में एक शिवलिंग स्थापित है, और केंद्र में भगवान शिव को समर्पित एक मुख्य खुला मंडप है। प्राचीन समय में यह ज्योतिष, गणित और तंत्र-मंत्र की शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था, जिसके कारण इसे 'तांत्रिक यूनिवर्सिटी' भी कहा जाता था। यह ग्वालियर से लगभग 40 किमी और मुरैना से 25-30 किमी और भिंड से करीब 60 किमी की दूरी पर स्थित है। पहाड़ी पर चढ़ने के लिए लगभग 100 सीढ़ियां बनी हुई हैं। और जानते हैँ....... 1. भारतीय संसद का प्रेरणा स्रोत इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका गोलाकार (Circular) ढांचा है। माना जाता है कि ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस और हरबर्ट बेकर ने दिल्ली के पुराने संसद भवन का डिजाइन इसी मंदिर से प्रेरित होकर बनाया था। हालाँकि, आधिकारिक तौर पर इसके दस्तावेजी प्रमाण कम हैं, लेकिन दोनों की बनावट में समानता स्पष्ट दिखाई देती है। 2. अद्वितीय बनावट 64 कक्ष: मंदिर के मुख्य प्रांगण के चारों ओर 64 छोटे-छोटे कक्ष बने हुए हैं। प्राचीन समय में हर कक्ष में एक शिवलिंग और एक योगिनी की प्रतिमा स्थापित थी (अब कुछ मूर्तियाँ खंडित या चोरी हो चुकी हैं)। मुख्य मंदिर: प्रांगण के बिल्कुल बीचों-बीच एक विशाल मुख्य मंदिर है, जिसमें भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है। 3. खगोल विज्ञान का केंद्र इतिहासकारों का मानना है कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि प्राचीन भारत में ज्योतिष और गणित की शिक्षा का एक बड़ा केंद्र था। मंदिर के 64 कक्षों की गोलाकार स्थिति सूर्य के गोचर और नक्षत्रों की गणना करने में मदद करती थी। इसे 'एकत्तरसो महादेव मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। 4. तांत्रिक साधना स्थल प्राचीन समय में इसे तांत्रिक क्रियाओं और योगिनियों की साधना के लिए जाना जाता था। चौसठ योगिनी मंदिर भारत में बहुत कम बचे हैं (जैसे खजुराहो और ओडिशा में), जिनमें से मितावली का यह मंदिर सबसे सुरक्षित अवस्था में है। 5. भूकंपरोधी तकनीक यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है और सदियों पुराना होने के बावजूद आज भी मजबूती से खड़ा है। इसकी बनावट कुछ इस तरह की है कि यह बड़े भूकंपों को भी झेलने में सक्षम रहा है, जो प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है
- कहीं बारिश तो कहीं ऑल बरसे हुआ दिन में भी अंधकार रौन थाना क्षेत्र के अंतर्गत बरसे भीषण ओले हुई भयंकर तबाही4
- भिंड में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों की चिंता बड़ा दी हैं.भिंड के मिहोना क्षेत्र में तेज हवाओं और बारिश के साथ ओले गिरे हैं.इस बारिश से किसानो को बड़ा नुकसान होने की आशंका हैं,क्योंकि अभी अधिकांश किसानों की गेहूं की फ़सल की कटाइ का कार्य चल रहा.1
- Post by Urvashi singh1
- इटावा में पुलिस वाहन पर रील बनाने वाला युवक गिरफ्तार इटावा के थाना बकेवर क्षेत्र में पुलिस के सरकारी वाहन पर अनधिकृत रूप से रील बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। वायरल वीडियो में युवक वाहन पर बैठकर आपत्तिजनक और भ्रामक ऑडियो के साथ रील बनाता दिखाई दे रहा था, जिससे पुलिस की छवि धूमिल हो रही थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में सोशल मीडिया सेल ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच के बाद आरोपी की पहचान रूद्र प्रताप, निवासी कल्याणपुर, कानपुर नगर के रूप में हुई, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना बकेवर में धारा 356 बीएनएस व 66E आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इटावा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करें और कानून का पालन करें।1
- Post by Rohit Kumar1
- पिनाहट पैर फिसलने से चंबल नहर में गिर 15 वर्षीय किशोर डूबने से हुई मौत शौच को नहर किनारे गया था किशोर, फिसलने से हुआ हादसा नहर से निकाल परिजनों ने इलाज के लिए अस्पताल में कराया भर्ती चिकित्सकों ने किया मृत घोषित अचानक किशोर की मौत से परिजनों में मचा कोहराम पिनाहट क्षेत्र के गांव पड़ुआपुरा के पास नहर बंबा का मामला1
- Post by रविन्द्र सेजवार1
- बे खौफ बदमाशों का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया. फुटेज में देखा जा सकता हैं कि कुछ बदमाश हाथों में लाठी और डंडे लेकर आते हैं. दुकान पर टूट पड़ते हैं.घटना की वज़ह पुरानी रंजिश बताई जा रही हैं. यह पूरी घटना ग्वालियर की बताई जा रही हैं.तोड़फोड़ और मारपीट की घटना वहा लगे सीसीटीवी केमरो में कैद हो गई.1