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केला देवी मेला में भंडारे की तैयारी करते आगरा से आया टेंट करौली कैलादेवी लख्खी मेले में हर वर्ष लगता है फुलवाड़ा गांव पर भंडारा लाखों की संख्या में पदयात्री करते भोजन
मनोज तिवाड़ी
केला देवी मेला में भंडारे की तैयारी करते आगरा से आया टेंट करौली कैलादेवी लख्खी मेले में हर वर्ष लगता है फुलवाड़ा गांव पर भंडारा लाखों की संख्या में पदयात्री करते भोजन
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- हिंडौन सिटी। शीतलाष्टमी पर बुधवार को महिला श्रद्धालुओं ने शीतला माता का पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने शीतला माता की प्रतिमा को बासे पकवानों का भोग लगाकर सुख समृद्धि की मनौती मांगी। शहर के शीतला चौराहा स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए महिलाओं की अधिक भीड़ रही। इस मौके पर मंदिर परिसर के बाहर अस्थाई दुकानें लगाई गई। इससे मैले जैसा माहौल नजर आया। अस्थाई दुकानों से महिला एवं बच्चों ने जरूरत के समान एवं खिलौने, गुब्बारे आदि की खरीददारी की।1
- करौली शहर सहित जिले में शीतलाष्टमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। शीतला माता मंदिरों में महिला श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने माता को बासी पकवानों का भोग अर्पित किया।जिले में सुबह से ही शीतला माता मंदिरों में महिला श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। परंपरा के अनुसार, शीतलाष्टमी से एक दिन पहले घरों में विभिन्न पकवान बनाए जाते हैं, जिनका अगले दिन माता को भोग लगाया जाता है। नगाड़ खाना दरवाजा स्थित शीतला माता मंदिर में अलसुबह से ही महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने माता को ठंडे और बासी पकवानों का भोग लगाकर पूजा-अर्चना की। शीतला माता के पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने लांगरा और हनुमानजी की भी पूजा-अर्चना की।कई घरों में बुधवार दोपहर 12:00 बजे कन्याओं और लांगुरिया को भोजन कराया गया।1
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- चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी (बसोड़ा) का पर्व इस बार सोमवार और बुधवार को बड़े उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। ग्रहण और तिथियों के विशेष संयोग के कारण महिलाओं ने दो दिनों तक शीतला माता की विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। *बासी भोजन का लगाया भोग* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को ठंडी चीजें अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए महिलाओं ने माता को दही-चावल, लापसी और विभिन्न मीठे व्यंजनों का भोग लगाया। परंपरा के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया गया और एक दिन पहले तैयार किया गया बासी भोजन ही सुबह और शाम प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया। *निरोगी काया की प्रार्थना* पूजा के दौरान महिलाओं ने शीतला माता से अपने परिवार की सुख-शांति और विशेष रूप से निरोगी काया (अच्छे स्वास्थ्य) का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समितियों और प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं भी की गईं। *बसोड़ा का धार्मिक महत्व* हिंदू पंचांग के अनुसार ऋतु परिवर्तन के समय मनाया जाने वाला यह पर्व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है। शीतला माता को स्वच्छता और शीतलता की देवी माना जाता है, इसलिए उन्हें बासी और ठंडे भोजन का भोग लगाने की यह प्राचीन परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।2
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