ईद-ए-मिलाद का वास्तविक संदेश केवल बाहरी उत्सव तक सीमित नहीं है। यह दिन हर व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, अपने आचरण में विनम्रता लाने और समाज में शांति व सौहार्द फैलाने का संदेश देता है। ईद-ए-मिलाद (मिलाद-उन-नबी): पैगंबर साहब के संदेश, जीवन और प्रासंगिकता ईद-ए-मिलाद, जिसे मिलाद-उन-नबी भी कहा जाता है, इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने 'रबी-उल-अव्वल' की 12 तारीख को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र और विशेष है, क्योंकि इसी दिन पैगंबर हज़रत मोहम्मद (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम) का जन्म हुआ था। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पैगंबर साहब के जीवन मूल्यों, उनकी शिक्षाओं और मानवता के प्रति उनके योगदान को याद करने का अवसर है। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म 570 ईस्वी में मक्का शहर में हुआ था। उन्हें 'रहमतुल-लिल-आलमीन' यानी पूरी दुनिया के लिए दया और करुणा का स्रोत माना गया है। पैगंबर साहब के आने से पहले का समय अरब समाज में अज्ञानता, सामाजिक असमानता और कबीलाई हिंसा के लिए जाना जाता था। उन्होंने अपने व्यवहार, सच्चाई और ईश्वर (अल्लाह) के संदेश के माध्यम से समाज में सुधार की नींव रखी। मिलाद-उन-नबी का दिन उनके जन्म की खुशी के साथ-साथ उनके द्वारा दिखाए गए सीधे और सच्चाई के रास्ते (सीरात-उन-नबी) पर चलने का संकल्प लेने का प्रतीक है। मनाने के तरीके और परंपराएं ईद-ए-मिलाद को सादगी, इबादत और भाईचारे के साथ मनाया जाता है: जुलूस और सभाएं: शहरों और कस्बों में जुलूस (मिलाद जुलूस) निकाले जाते हैं, जिनमें हरे झंडे और पैगंबर साहब की शान में नात (प्रशंसा गीत) गाई जाती हैं। सीरत महफिल: मस्जिदों और घरों में धार्मिक सभाएं आयोजित की जाती हैं, जहाँ उलेमा (धर्मगुरु) पैगंबर साहब की जीवन यात्रा, उनके नैतिक मूल्यों और फैसलों के बारे में विस्तार से बताते हैं। सजावट और रोशनी: घरों, मस्जिदों और प्रमुख स्थलों को आकर्षक रोशनी और झंडियों से सजाया जाता है। दान और सेवा (सदका): इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को खाना खिलाना, कपड़े बांटना और आर्थिक मदद करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। समकालीन समाज में पैगंबर साहब की शिक्षाओं की प्रासंगिकता आज के दौर में जब दुनिया हिंसा, असमानता और तनाव से जूझ रही है, पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाएं और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं: दया और क्षमा: उन्होंने हमेशा अपने विरोधियों और शत्रुओं को भी क्षमा करने का संदेश दिया। सामाजिक समानता: उन्होंने नस्ल, रंग या जाति के आधार पर भेदभाव का विरोध किया और घोषणा की कि ईश्वर की नजर में सभी इंसान बराबर हैं। महिलाओं के अधिकार: उन्होंने उस दौर में महिलाओं को संपत्ति, शिक्षा और सम्मान के अधिकार दिए, जब समाज में उन्हें अधिकारहीन समझा जाता था। ईद-ए-मिलाद का वास्तविक संदेश केवल बाहरी उत्सव तक सीमित नहीं है। यह दिन हर व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, अपने आचरण में विनम्रता लाने और समाज में शांति व सौहार्द फैलाने का संदेश देता है।
ईद-ए-मिलाद का वास्तविक संदेश केवल बाहरी उत्सव तक सीमित नहीं है। यह दिन हर व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, अपने आचरण में विनम्रता लाने और समाज में शांति व सौहार्द फैलाने का संदेश देता है। ईद-ए-मिलाद (मिलाद-उन-नबी): पैगंबर साहब के संदेश, जीवन और प्रासंगिकता ईद-ए-मिलाद, जिसे मिलाद-उन-नबी भी कहा जाता है, इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने 'रबी-उल-अव्वल' की 12 तारीख को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र और विशेष है, क्योंकि इसी दिन पैगंबर हज़रत मोहम्मद (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम) का जन्म हुआ था। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पैगंबर साहब के जीवन मूल्यों, उनकी शिक्षाओं और मानवता के प्रति उनके योगदान को याद करने का अवसर है। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म 570 ईस्वी में मक्का शहर में हुआ था। उन्हें 'रहमतुल-लिल-आलमीन' यानी पूरी दुनिया के लिए दया और करुणा का स्रोत माना गया है। पैगंबर साहब के आने से पहले का समय अरब समाज में अज्ञानता, सामाजिक असमानता और कबीलाई हिंसा के लिए जाना जाता था। उन्होंने अपने व्यवहार, सच्चाई और ईश्वर (अल्लाह) के संदेश के माध्यम से समाज में सुधार की नींव रखी। मिलाद-उन-नबी का दिन उनके जन्म की खुशी के साथ-साथ उनके द्वारा दिखाए गए सीधे और सच्चाई के रास्ते (सीरात-उन-नबी) पर चलने का संकल्प लेने का प्रतीक है। मनाने के तरीके और परंपराएं ईद-ए-मिलाद को सादगी, इबादत और भाईचारे के साथ मनाया जाता है: जुलूस और सभाएं: शहरों और कस्बों में जुलूस (मिलाद जुलूस) निकाले जाते हैं, जिनमें हरे झंडे और पैगंबर साहब की शान में नात (प्रशंसा गीत) गाई जाती हैं। सीरत महफिल: मस्जिदों और घरों में धार्मिक सभाएं आयोजित की जाती हैं, जहाँ उलेमा (धर्मगुरु) पैगंबर साहब की जीवन यात्रा, उनके नैतिक मूल्यों और फैसलों के बारे में विस्तार से बताते हैं। सजावट और रोशनी: घरों, मस्जिदों और प्रमुख स्थलों को आकर्षक रोशनी और झंडियों से सजाया जाता है। दान और सेवा (सदका): इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को खाना खिलाना, कपड़े बांटना और आर्थिक मदद करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। समकालीन समाज में पैगंबर साहब की शिक्षाओं की प्रासंगिकता आज के दौर में जब दुनिया हिंसा, असमानता और तनाव से जूझ रही है, पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाएं और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं: दया और क्षमा: उन्होंने हमेशा अपने विरोधियों और शत्रुओं को भी क्षमा करने का संदेश दिया। सामाजिक समानता: उन्होंने नस्ल, रंग या जाति के आधार पर भेदभाव का विरोध किया और घोषणा की कि ईश्वर की नजर में सभी इंसान बराबर हैं। महिलाओं के अधिकार: उन्होंने उस दौर में महिलाओं को संपत्ति, शिक्षा और सम्मान के अधिकार दिए, जब समाज में उन्हें अधिकारहीन समझा जाता था। ईद-ए-मिलाद का वास्तविक संदेश केवल बाहरी उत्सव तक सीमित नहीं है। यह दिन हर व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, अपने आचरण में विनम्रता लाने और समाज में शांति व सौहार्द फैलाने का संदेश देता है।
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- बिजनौर में बंद मकान से महिला का शव बरामद, बेटे ने पिता पर लगाया हत्या का आरोप बिजनौर: मंडावली थाना क्षेत्र के मिर्जापुर सैद उर्फ नायगांव में एक बंद मकान से महिला का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। मामले का विवरण: मृतका की पहचान: मृतका की पहचान ग्राम मोहनपुर निवासी शहनाज परवीन (पत्नी अहमद हसन) के रूप में हुई है। पारिवारिक पृष्ठभूमि: शहनाज और उनके पति अहमद हसन अपने बच्चों के साथ उत्तराखंड के श्रीनगर में रहते थे। उनके छह बच्चे हैं (तीन लड़के और तीन लड़कियां)। तीनों लड़के श्रीनगर में काम करते हैं। घटना का कारण: दोनों पिछले मंगलवार को जमीन से जुड़े एक मामले पर बात करने के लिए मिर्जापुर सैद आए थे। बेटे के गंभीर आरोप: मृतका के बड़े बेटे आसिफ ने अपने पिता अहमद हसन पर मां की हत्या का आरोप लगाया है। आसिफ के अनुसार: माता-पिता के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और आए दिन झगड़े होते रहते थे। इससे पहले जब वे लाल डांग में रहते थे, तब भी पिता ने कई बार मां को मारने का प्रयास किया था। आसिफ की अपनी मां से आखिरी बार बुधवार शाम को बात हुई थी। घटना का खुलासा: आसिफ जब श्रीनगर से अपने घर पहुंचा, तो मकान पर ताला लगा हुआ था। ताला खोलकर अंदर जाने पर उसने देखा कि उसकी मां शहनाज परवीन का शव चारपाई पर पड़ा था और उससे तेज बदबू आ रही थी। आसिफ ने तुरंत 112 नंबर पर डायल कर पुलिस को सूचना दी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस छेत्रधिकारी की उपरोक्त मामले को लेकर बाईट ।1
- जिला बिजनौर में ek bahu ne ki apne hi pati ki hatiya susral wale sare hairan जिला बिजनोर में अपने ही पति गला घोट कर की हत्या1
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- उत्तर प्रदेश के देवरिया में BJP के दो गुटों में बीच सड़क जमकर मारपीट देवरिया, उत्तर प्रदेश लाठी-डंडों से हुई मारपीट और हाथापाई का मामला सामने आया एयरपोर्ट पर दो भाजपा नेताओं के बीच कहासुनी के बाद बढ़ा विवाद दोनों नेता राष्ट्रीय सह संयोजक सोशल मीडिया शिवानंद द्विवेदी को रिसीव करने गए थे ➡️ लौटते समय खरोच चौराहे पर दोनों पक्षों में जमकर हुई मारपीट सड़क पर हुए हंगामे से मौके पर मची अफरा-तफरी मामले को लेकर भाजपा नेताओं ने कुछ भी बोलने से किया इनकार घटना को लेकर इलाके में चर्चा तेज1