गोरखपुर में 12 तारीख को आयोजित पार्टी के संवाद एवं रात्रि प्रवास कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने कार्यकर्ताओं को आरटीओ (RTO) कार्यालय के पास रोक दिया। बिना किसी वैध कारण के इस संवाद कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया, जिसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने वहीं पर शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। इसके बाद, जब कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने और उनसे संवाद करने के लिए धरना स्थल की ओर बढ़ा जा रहा था, तब प्रशासन ने रास्ते में ही रोक दिया। इस कार्रवाई पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए सीधे उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर सरकार किस बात से डर रही है। यदि एक राजनीतिक दल को अपने कार्यकर्ताओं से संवाद करने और शांतिपूर्ण ढंग से लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था के सम्मान पर सवाल खड़े करते हुए कहा गया है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण संवाद और विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को इन अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, न कि उन्हें बलपूर्वक रोकने का प्रयास करना चाहिए।
गोरखपुर में 12 तारीख को आयोजित पार्टी के संवाद एवं रात्रि प्रवास कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने कार्यकर्ताओं को आरटीओ (RTO) कार्यालय के पास रोक दिया। बिना किसी वैध कारण के इस संवाद कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया, जिसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने
वहीं पर शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। इसके बाद, जब कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने और उनसे संवाद करने के लिए धरना स्थल की ओर बढ़ा जा रहा था, तब प्रशासन ने रास्ते में ही रोक दिया। इस कार्रवाई पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए सीधे उत्तर प्रदेश सरकार की
मंशा पर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर सरकार किस बात से डर रही है। यदि एक राजनीतिक दल को अपने कार्यकर्ताओं से संवाद करने और शांतिपूर्ण ढंग से लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था के सम्मान पर सवाल खड़े करते हुए कहा गया है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण संवाद और विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को इन अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, न कि उन्हें बलपूर्वक रोकने का प्रयास करना चाहिए।
- समस्तीपुर के मोरवा में निषाद समाज को उसका संवैधानिक आरक्षण दिलाने के संकल्प को रेखांकित किया गया है। यहाँ स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल सत्ता हासिल करना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि निषाद समाज को उसका संवैधानिक अधिकार और आरक्षण दिलाना सबसे मुख्य उद्देश्य है। सत्ता केवल एक साधन हो सकती है, लेकिन असली संकल्प समाज के लिए आरक्षण, सम्मान और अधिकारों की प्राप्ति सुनिश्चित करना है।1
- वैशाली के बिदुपुर में एक गोलीकांड की घटना हुई है, जिसमें पिता और पुत्र की हत्या कर दी गई है। इस वारदात के पीछे जमीनी विवाद मुख्य कारण बना है। बिदुपुर में हुए इस गोलीकांड ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।1
- समस्तीपुर के विवेक विहार मुहल्ले की सीमा से सटे आदर्शनगर वार्ड-40 की सड़क पर लगातार हो रहे जलजमाव के कारण पैदल यात्रियों और वाहन चालकों का आवागमन दूभर हो गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने नगर निगम प्रशासन के रवैये पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने सीधा आरोप लगाया कि नगर निगम के आयुक्त, महापौर, उपमहापौर तथा संबंधित वार्ड पार्षद इस गंभीर समस्या के प्रति पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इस बदहाली को देखते हुए माले टीम ने नगर निगम प्रशासन से युद्धस्तर पर सड़क एवं नाला निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र ही इस संबंध में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आंदोलन चलाया जाएगा।1
- समस्तीपुर के पूसा में मोरसंड बिरौली चौक से बिरौली घाट तक सड़क की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहाँ रोजाना एक ई-रिक्शा पलट जाता है। इस बदहाल मार्ग के कारण बाइक सवारों के भी कब पलटने और दुर्घटनाग्रस्त होने का शिकार बनने की कोई निश्चितता नहीं बनी रहती, जिससे लोगों को लगातार खतरे के बीच सफर करना पड़ रहा है।1
- बिहार के समस्तीपुर जिले के मथुरापुर घाट से एक वीडियो सामने आया है, जिसे 'हमारा समाचार' और 'अजय व्लॉग' (Ajay Vlog) द्वारा 11 जुलाई 2026 को बनाया गया है। इस वीडियो में मथुरापुर घाट पर हो रही बारिश और राजबाला के काम करने के दृश्यों को दर्शाया गया है।1
- समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में भारतीय वन्यजीव संस्थान के गंगा प्रहरियों ने एक बड़े अभियान के तहत गंगा नदी में रहने वाले 10 दुर्लभ नरम कवच वाले कछुओं का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। इन सभी कछुओं को सुरक्षित रूप से वापस गंगा नदी में छोड़ दिया गया है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा कछुआ रेस्क्यू अभियान माना जा रहा है। रेस्क्यू किए गए सभी कछुए 'लिसेमिस पंक्टाटा' प्रजाति के हैं, जो स्वच्छ और मीठे पानी में रहते हैं और इनका वजन करीब 500 ग्राम से लेकर 3 किलोग्राम तक था। भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहायक समन्वयक कुणाल कुमार सिंह ने जानकारी दी कि मछुआरा समुदाय के कुछ लोगों द्वारा इन कछुओं का लगातार अवैध शिकार किया जा रहा था। इस बात की सूचना मिलते ही गंगा प्रहरियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया। यह अभियान संस्थान के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से चलाया जा रहा है। वन्यजीवों का अवैध शिकार करना एक कानूनन दंडनीय अपराध है। कछुओं के महत्व के बारे में गंगा प्रहरी बिट्टू कुमार सिंह ने बताया कि इन्हें गंगा नदी का "गिद्ध" भी कहा जाता है, क्योंकि ये मृत जलीय जीवों और जैविक अवशेषों को खाकर नदी की स्वच्छता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस रेस्क्यू अभियान को सफल बनाने में गंगा प्रहरी जयंत सिंह, राजकुमार सिंह और सोहन सिंह सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1
- समस्तीपुर जिले के हथौड़ी थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों पर एक युवक को सड़क पर घसीट-घसीटकर बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। पुलिस की इस कार्यशैली ने कानून-व्यवस्था और उनकी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरी घटना के दौरान जब वहां मौजूद स्थानीय लोग अपने मोबाइल में वीडियो रिकॉर्ड करने लगे, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी कथित रूप से धमकाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वीडियो बना रही एक महिला को खुलेआम 5 साल के लिए जेल भेज देने की धमकी दी गई और उसका मोबाइल छीनने की भी कथित कोशिश की गई ताकि घटना का वीडियो रिकॉर्ड न हो सके। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।1