बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल मुख्यालय स्थित जयमंगला स्कूल के पीछे का शताब्दी मैदान खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि बारिश का पानी सहेजने वाली एक झील बनकर रह गया है। पिछले 25 वर्षों में पंचायतीराज से लेकर विधायक, सांसद निधि और खेल विकास योजनाओं के तहत यहाँ लाखों-करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च की गई, लेकिन नतीजा बिल्कुल शून्य रहा। स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का आरोप है कि विकास के नाम पर केवल ठेकेदारों, एजेंसियों, काम कराने वाले जनप्रतिनिधियों, प्राक्कलन बनाने वाले और तकनीकी स्वीकृति देने वाले इंजीनियरों की जेबें मोटी हुई हैं। मैदान का नक्शा ऐसा बनाया गया कि यहाँ से जल निकासी का कोई उपाय ही नहीं किया गया, जिससे पूरा मैदान जलमग्न हो गया है। यहाँ वॉलीबॉल और क्रिकेट का मैदान पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है, जिससे सुबह टहलने और दौड़ लगाने आने वाले स्थानीय युवाओं और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, स्टेडियम विकास के नाम पर बार-बार मिट्टी भराई, सीढ़ी और मंच बनवाकर सरकारी राशि लूटी गई। स्थानीय खिलाड़ी शिवम कुमार सहित अन्य युवाओं ने आरोप लगाया कि योजना का पैसा कहाँ आता है और कैसे खर्च होता है, इसका किसी को पता नहीं चलता और ऊपर-ऊपर कागजी खानापूर्ति करके फाइलें बंद कर दी जाती हैं। इतना ही नहीं, जो भी इस गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे मुकदमे की धमकी देकर चुप करा दिया जाता है। मैदान की इस दुर्दशा को लेकर स्थानीय खेलप्रेमियों में भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि बरसात के 3-4 महीने यह मैदान झील और बाकी समय कीचड़ बना रहता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। अब आक्रोशित खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शताब्दी मैदान के निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और जल निकासी का प्रबंध कर मैदान को जल्द से जल्द खेलने योग्य बनाया जाए।
बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल मुख्यालय स्थित जयमंगला स्कूल के पीछे का शताब्दी मैदान खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि बारिश का पानी सहेजने वाली एक झील बनकर रह गया है। पिछले 25 वर्षों में पंचायतीराज से लेकर विधायक, सांसद निधि और खेल विकास योजनाओं के तहत यहाँ लाखों-करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च की गई, लेकिन नतीजा बिल्कुल शून्य रहा। स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का आरोप है कि विकास के नाम पर केवल ठेकेदारों, एजेंसियों, काम कराने वाले जनप्रतिनिधियों, प्राक्कलन बनाने वाले और तकनीकी स्वीकृति देने वाले इंजीनियरों की जेबें मोटी हुई हैं। मैदान का नक्शा ऐसा बनाया गया कि यहाँ से जल निकासी का कोई उपाय ही नहीं किया गया, जिससे पूरा मैदान जलमग्न हो गया है। यहाँ वॉलीबॉल और क्रिकेट का मैदान पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है, जिससे सुबह टहलने और दौड़ लगाने आने वाले स्थानीय युवाओं और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, स्टेडियम विकास के नाम पर बार-बार मिट्टी भराई, सीढ़ी और मंच बनवाकर सरकारी राशि लूटी गई। स्थानीय खिलाड़ी शिवम कुमार सहित अन्य युवाओं ने आरोप लगाया कि योजना का पैसा कहाँ आता है और कैसे खर्च होता है, इसका किसी को पता नहीं चलता और ऊपर-ऊपर कागजी खानापूर्ति करके फाइलें बंद कर दी जाती हैं। इतना ही नहीं, जो भी इस गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे मुकदमे की धमकी देकर चुप करा दिया जाता है। मैदान की इस दुर्दशा को लेकर स्थानीय खेलप्रेमियों में भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि बरसात के 3-4 महीने यह मैदान झील और बाकी समय कीचड़ बना रहता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। अब आक्रोशित खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शताब्दी मैदान के निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और जल निकासी का प्रबंध कर मैदान को जल्द से जल्द खेलने योग्य बनाया जाए।
- बेगूसराय नगर निगम के पूर्व मेयर आलोक कुमार अग्रवाल के आवास पर एक बैठक आयोजित की गई। सिमरिया के गोलंबर पर भामा शाह जी की प्रतिमा को लगाने के लिए जाति-पार्टी से ऊपर उठकर सैकड़ों जनप्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हुए और अपनी चट्टानी एकता का परिचय दिया।2
- बिहार के पटना से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस खुद ही दारू बंदी की पोल खोलती नजर आ रही है। मोबाइल टीवी न्यूज के इस वायरल वीडियो ने पुलिस के दावों की पोल खोल दी है। वैसे तो कहा जाता है कि #बिहार में दारू बंद है, लेकिन जब खुद पुलिस ही दारू बंदी की पोल खोलने में लगी हुई है, तो इस पूरी व्यवस्था की हकीकत सबके सामने आ गई है।1
- खगड़िया के एक गांव में कुमार लड़कों को उनकी जमीन से जबरन भगाए जाने और उन्हें उनके परिवारों से अलग किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना से परेशान होकर पीड़ित ने देशवासियों से मदद की गुहार लगाते हुए कहा है कि उनके गांव में बहुत गलत काम हो रहा है, जिससे लोग बेहद लाचार हैं। पीड़ित का आरोप है कि बिहार में एक गलत कानून चल रहा है, जिसे सही तरीके से लागू या काम में नहीं लाया जा रहा है। इसी अव्यवस्था के खिलाफ पीड़ित ने लोगों से आगे आकर मदद करने की अपील की है।1
- बिहार के खगड़िया से संचालित जगदूत न्यूज एजेंसी और पेपर का मोबाइल नंबर 8340470030 जारी किया गया है।1
- पटना जिले के मोकामा के गंगा तटीय इलाकों में लगातार हो रहे कटाव की गंभीर स्थिति का जायजा लेने जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर सह बाढ़ नियंत्रण समिति के अध्यक्ष, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर समेत सीआरपीएफ के कमांडेंट और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण करने के बाद इस कटाव की स्थिति को काफी गंभीर बताया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, नेशनल वाटरवे-1 के गांव की ओर शिफ्ट होने, ड्रेजिंग कार्य और जलमार्ग से बड़े जहाजों के आवागमन के कारण तेज धारा और बैक वाटर फ्लो से कटाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, इन कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच और मूल्यांकन विभाग द्वारा किया जाएगा। इस बीच, कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग ने आज से मोकामाघाट में रेत से भरी बोरियों को ढलान (स्लोप) बनाकर गंगा किनारे डालने का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे स्थानीय लोगों को अस्थायी रूप से कटाव की गति पर नियंत्रण पाने की उम्मीद है।1
- बिहार के बांकीपुर उपचुनाव को लेकर एक केंद्रीय मंत्री ने जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि प्रशांत किशोर को चुनाव के लिए कोई उम्मीदवार नहीं मिला है और अब वे खुद ही चुनाव लड़ रहे हैं। मंत्री के अनुसार, अब प्रशांत किशोर के पास कुछ भी नहीं बचा है। अपने बयान में केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि बांकीपुर की जनता अच्छी तरह समझ रही है कि पार्टी ने उनके विधायक को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। केंद्रीय मंत्री ने पीके पर निशाना साधते हुए यह बड़ा बयान दिया है।1
- बिहार में बनाए गए एक भूमि संबंधी कानून को लेकर जनता में भारी आक्रोश है और इसे बेहद गलत कानून बताया जा रहा है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकार को सबसे पहले उन लोगों की समस्या का समाधान निकालना चाहिए जिनकी जमीनों पर कब्जा किया गया है ताकि पीड़ित को उसकी जमीन वापस मिल सके। लेकिन इसके विपरीत, जो लोग सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, उनके घर के पास ही किसी अन्य अनजान व्यक्ति को रहने की इजाजत दी जा रही है। जब पीड़ित के पिता ने इस पर सवाल उठाया कि उनके बच्चे कहाँ रहेंगे, तो इस बात को नजरअंदाज कर अनजान व्यक्ति को उनके घर के पास रहने की जगह दे दी गई। इस अन्यायपूर्ण स्थिति से परेशान होकर पीड़ित ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर लोगों से इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील की है ताकि गलत कानून की वजह से कोई भी लड़का गलत कदम उठाने पर मजबूर न हो। पीड़ित ने बेहद तीखे शब्दों में कहा है कि बिहार की यह गलत सरकार और गलत कानून अक्सर लोगों को बदमाश बनने, आतंकवाद की राह पर जाने या गलत रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर देते हैं। पीड़ित ने इस पूरे मामले में न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की है।1
- बेगूसराय के नौला गांव में एक महिला के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट और अभद्र व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल दावे के अनुसार, नीला पुलिस पिकेट प्रभारी अखिलेश कुमार ने बिना किसी महिला कांस्टेबल की मौजूदगी के महिला के साथ कथित तौर पर दबंगई, मारपीट और अभद्र व्यवहार किया। इसके साथ ही महिला के पति के साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई और उन्हें जबरन पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया। आरोप है कि इस घटना के दौरान अपनी कथित नाकामी और खामियों को छिपाने के लिए पुलिस द्वारा मौके पर मौजूद महिलाओं से दो मोबाइल फोन छीन लिए गए तथा कई मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए वीडियो जबरन डिलीट करा दिए गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। वायरल संदेश के जरिए संबंधित पिकेट प्रभारी को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई जा रही है।1