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बाढ़ क्षेत्र में नहीं आ रही बिजली, जनता परेशान, तीन दिन से बाढ़ क्षेत्र अंधेरे में, जीव जंतुओं से बना खतरा, बिजली अधिकारी लापरवाहीं आई सामने, आश्वासन देने के बाद भी नहीं चालू हो पा रही बिजली, मंत्री के दावे फेल नजर आ रहे हैं।

1 day ago
user_Zahira Bano
Zahira Bano
Media company बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
1 day ago

बाढ़ क्षेत्र में नहीं आ रही बिजली, जनता परेशान, तीन दिन से बाढ़ क्षेत्र अंधेरे में, जीव जंतुओं से बना खतरा, बिजली अधिकारी लापरवाहीं आई सामने, आश्वासन देने के बाद भी नहीं चालू हो पा रही बिजली, मंत्री के दावे फेल नजर आ रहे हैं।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • लखनऊ में चलती कार का वीडियो वायरल तहज़ीब के शहर लखनऊ की सड़कों पर चलती कार में अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, जांच की मांग लखनऊ। राजधानी लखनऊ में चलती कार के अंदर कथित अश्लील हरकत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। वायरल वीडियो में कार के अंदर आपत्तिजनक गतिविधि दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब और कहां रिकॉर्ड किया गया तथा इसमें शामिल लोगों की पहचान क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों पर संबंधित अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए। मामले में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और जांच के बाद ही घटना की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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    लखनऊ में चलती कार का वीडियो वायरल
तहज़ीब के शहर लखनऊ की सड़कों पर चलती कार में अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, जांच की मांग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में चलती कार के अंदर कथित अश्लील हरकत
का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
वायरल वीडियो में कार के अंदर आपत्तिजनक गतिविधि दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब और कहां रिकॉर्ड किया गया तथा इसमें शामिल लोगों की पहचान क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों पर संबंधित अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए। मामले में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और जांच के बाद ही घटना की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
    user_Zahira Bano
    Zahira Bano
    Media company बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    12 min ago
  • आज दिनांक 28 सितंबर 2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी का प्रेस कॉन्फ्रेंस 🐘🐘
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    आज दिनांक 28 सितंबर 2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी का प्रेस कॉन्फ्रेंस 🐘🐘
    user_अंकित कुमार
    अंकित कुमार
    Social worker बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    16 min ago
  • वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी........... वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।
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    वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी...........
वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी?
अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था।
ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है?
उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए?
क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है?
और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं?
यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है।
डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल
यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है।
ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है?
हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई।
विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है।
ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि—
1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं?
2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है?
3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है?
4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए।
मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है?
यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं।
अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।?
अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था।
ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है?
उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए?
क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है?
और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं?
यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है।
डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल
यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है।
ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है?
हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई।
विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है।
ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि—
1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं?
2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है?
3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है?
4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए।
मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है?
यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं।
अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।
    user_NATIONAL INDIA TV
    NATIONAL INDIA TV
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    59 min ago
  • लखनऊ। वजीरगंज के एसए अपार्टमेंट में मची अफरा-तफरी, 400-500 लोगों को बाहर निकाला जा रहा लखनऊ के वजीरगंज क्षेत्र स्थित एसए अपार्टमेंट में उस समय हड़कंप मच गया, जब अपार्टमेंट में करीब 400 से 500 लोगों के मौजूद होने की सूचना सामने आई। अपार्टमेंट के गिरने की आशंका के चलते एहतियातन लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई है। मौके पर राहत एवं बचाव की तैयारियां की जा रही हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। अपार्टमेंट को खाली कराने की कार्रवाई जारी है।
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    लखनऊ। वजीरगंज के एसए अपार्टमेंट में मची अफरा-तफरी, 400-500 लोगों को बाहर निकाला जा रहा
लखनऊ के वजीरगंज क्षेत्र स्थित एसए अपार्टमेंट में उस समय हड़कंप मच गया, जब अपार्टमेंट में करीब 400 से 500 लोगों के मौजूद होने की सूचना सामने आई।
अपार्टमेंट के गिरने की आशंका के चलते एहतियातन लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई है।
मौके पर राहत एवं बचाव की तैयारियां की जा रही हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। अपार्टमेंट को खाली कराने की कार्रवाई जारी है।
    user_आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    Voice of people Bakshi Ka Talab, Lucknow•
    18 hrs ago
  • मड़ियांव क्षेत्र के फैजुल्लागंज वार्ड चतुर्थ में 60 फीता रोड दाउदनगर चौराहे पर जल भराव के कारण भारी विरोध प्रदर्शन जारी लोगों ने रोड जमकर क्षेत्रीय पूर्व पार्षद जलाल यादव ब्रेकिंग न्यूज़ ✍️ लखनऊ खबर की अगुवाई में धरना प्रदर्शन दे रहे हैं मौके पर थाना मड़ियावा इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा अपनी पुलिस टीम के साथ मौजूद है
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    मड़ियांव क्षेत्र के फैजुल्लागंज वार्ड चतुर्थ में 60 फीता रोड दाउदनगर चौराहे पर जल भराव के कारण भारी विरोध प्रदर्शन जारी लोगों ने रोड जमकर क्षेत्रीय पूर्व पार्षद जलाल यादव
ब्रेकिंग न्यूज़ ✍️
लखनऊ खबर 
की अगुवाई में धरना प्रदर्शन दे रहे हैं मौके पर थाना मड़ियावा इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा अपनी पुलिस टीम के साथ मौजूद है
    user_मो इस्लाम
    मो इस्लाम
    Media Consultant बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • कृष्णानगर में पुलिस मुठभेड़, 25 हजार का इनामी बदमाश घायल कृष्णानगर में पुलिस मुठभेड़, 25 हजार का इनामी बदमाश घायल महिला की हत्या में वांछित था आरोपी भोला राजपूत पुलिस की जवाबी फायरिंग में दाहिने पैर में लगी गोली आरोपी को इलाज के लिए लोकबंधु अस्पताल में कराया गया भर्ती आरोपी के कब्जे से 315 बोर का तमंचा बरामद एक खोखा और एक जिंदा कारतूस भी मिला हत्या में प्रयुक्त स्कूटी भी पुलिस ने की बरामद 150-170 CCTV फुटेज खंगालने के बाद आरोपी तक पहुंची पुलिस कृष्णानगर के डूडा कॉलोनी, आशाराम बापू मार्ग पर हुई मुठभेड़
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    कृष्णानगर में पुलिस मुठभेड़, 25 हजार का इनामी बदमाश घायल
कृष्णानगर में पुलिस मुठभेड़, 25 हजार का इनामी बदमाश घायल
महिला की हत्या में वांछित था आरोपी भोला राजपूत
पुलिस की जवाबी फायरिंग में दाहिने पैर में लगी गोली
आरोपी को इलाज के लिए लोकबंधु अस्पताल में कराया गया भर्ती
आरोपी के कब्जे से 315 बोर का तमंचा बरामद
एक खोखा और एक जिंदा कारतूस भी मिला
हत्या में प्रयुक्त स्कूटी भी पुलिस ने की बरामद
150-170 CCTV फुटेज खंगालने के बाद आरोपी तक पहुंची पुलिस
कृष्णानगर के डूडा कॉलोनी, आशाराम बापू मार्ग पर हुई मुठभेड़
    user_उमेश लोधी पत्रकार
    उमेश लोधी पत्रकार
    Local News Reporter Sadar, Lucknow•
    1 hr ago
  • कोयंबटूर से एक जांबाज पुलिस कर्मी की बहादुरी का वीडियो सामने आया है !! तस्करों को पकड़ने के लिए कार की छत पर 40 किमी तक लटका रहा पुलिसकर्मी !! Coimbatore, Tamilnadu... कोयंबटूर से एक जांबाज पुलिस कर्मी की बहादुरी का वीडियो सामने आया है !! तस्करों को पकड़ने के लिए कार की छत पर 40 किमी तक लटका रहा पुलिसकर्मी !! तमिलनाडु के कोयंबटूर के कोविलपालयम पुलिस को खबर मिली थी कि सिलांकुरिची इलाके से कुछ संदिग्ध तस्कर कार में गुजर रहे हैं. पुलिस ने जब कार को रोकने की कोशिश की, तो संदिग्ध भागने लगे. पीछा करने के दौरान हेड कांस्टेबल वेलमुरुगन ने अपनी जान जोखिम में डालकर चलती कार की छत पर छलांग लगाई और तस्करों को भागने से रोकने के लिए 40 किलोमीटर तक छत पर लटके रहे. लगभग 40 किलोमीटर लंबे ड्रामे के बाद पुलिस ने आखिरकार अविनाशी रोड़ पर कार को घेरकर रोक लिया और सभी संदिग्धों को हिरासत में ले लिया. कोविलपालयम पुलिस स्टेशन के सब- इंस्पेक्टर विग्नेश इस टीम को लीड कर रहे थे. पकड़े गए तीनों आरोपी मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं ये आरोपी बेंगलुरु से लगभग 300 किलोग्राम प्रतिबंधित गुटका और तंबाकू उत्पाद अवैध रूप से कोयंबटूर पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे...
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    कोयंबटूर से एक जांबाज पुलिस कर्मी की बहादुरी का वीडियो सामने आया है !! 

तस्करों को पकड़ने के लिए कार की छत पर 40 किमी तक लटका रहा पुलिसकर्मी !! 
Coimbatore, Tamilnadu... 
कोयंबटूर से एक जांबाज पुलिस कर्मी की बहादुरी का वीडियो सामने आया है !! 
तस्करों को पकड़ने के लिए कार की छत पर 40 किमी तक लटका रहा पुलिसकर्मी !! 
तमिलनाडु के कोयंबटूर के कोविलपालयम पुलिस को खबर मिली थी कि सिलांकुरिची इलाके से कुछ संदिग्ध तस्कर कार में गुजर रहे हैं. पुलिस ने जब कार को रोकने की कोशिश की, तो संदिग्ध भागने लगे. 
पीछा करने के दौरान हेड कांस्टेबल वेलमुरुगन ने अपनी जान जोखिम में डालकर चलती कार की छत पर छलांग लगाई और तस्करों को भागने से रोकने के लिए 40 किलोमीटर तक छत पर लटके रहे. लगभग 40 किलोमीटर लंबे ड्रामे के बाद पुलिस ने आखिरकार अविनाशी रोड़ पर कार को घेरकर रोक लिया और सभी संदिग्धों को हिरासत में ले लिया. 
कोविलपालयम पुलिस स्टेशन के सब- इंस्पेक्टर विग्नेश इस टीम को लीड कर रहे थे. पकड़े गए तीनों आरोपी मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं  ये आरोपी बेंगलुरु से लगभग 300 किलोग्राम प्रतिबंधित गुटका और तंबाकू उत्पाद अवैध रूप से कोयंबटूर पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे...
    user_Uma prakash
    Uma prakash
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • आप सुन रहे हैं इंडिया लाइव न्यूज़। अंकित कुमार के साथ। कमोडिटी बाजार से बड़ी खबर है। सोने और चांदी की कीमतों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी करीब ₹8,500 से ज्यादा टूटकर ₹2,28,600 प्रति किलो पहुंच गई। वहीं 24 कैरेट सोना करीब ₹4,000 गिरकर ₹1,48,115 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना करीब ₹1,41,000 प्रति 10 ग्राम बताया जा रहा है। वैश्विक बाजारों के दबाव और मुनाफावसूली को गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है। त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारों की नजर अब सोने-चांदी के भाव पर बनी हुई है। सोना-चांदी के ताजा भाव के लिए जुड़े रहिए इंडिया लाइव न्यूज़ के साथ। मैं हूँ अंकित कुमार। नमस्कार
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    आप सुन रहे हैं इंडिया लाइव न्यूज़। अंकित कुमार के साथ।

कमोडिटी बाजार से बड़ी खबर है। सोने और चांदी की कीमतों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी करीब ₹8,500 से ज्यादा टूटकर ₹2,28,600 प्रति किलो पहुंच गई। वहीं 24 कैरेट सोना करीब ₹4,000 गिरकर ₹1,48,115 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना करीब ₹1,41,000 प्रति 10 ग्राम बताया जा रहा है।

वैश्विक बाजारों के दबाव और मुनाफावसूली को गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है। त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारों की नजर अब सोने-चांदी के भाव पर बनी हुई है।

सोना-चांदी के ताजा भाव के लिए जुड़े रहिए इंडिया लाइव न्यूज़ के साथ। मैं हूँ अंकित कुमार। नमस्कार
    user_अंकित कुमार
    अंकित कुमार
    Social worker बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    48 min ago
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