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आधुनिक लोकतंत्र में न्यायपालिका को 'न्याय का मंदिर' माना जाता है, लेकिन आज बैतूल जिला सहित देश और दुनिया भर की अदालतों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती कानूनी जजमेंट (Judgment) और वास्तविक जस्टिस (Justice) के बीच का बढ़ता हुआ अंतर है। जहां जजमेंट प्रक्रिया, साक्ष्य और कानून के अनुसार दिया जाने वाला एक लिखित फैसला है, वहीं जस्टिस वह अंतिम परिणाम है जिससे पीड़ित को त्वरित राहत, समाज को विश्वास और नैतिक संतुलन मिलता है। जब ये दोनों अलग हो जाते हैं, तो न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगाने लगता है। इस समस्या की मुख्य जड़ अदालतों में लंबित पड़े करोड़ों मुकदमे हैं। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला अदालतों में वर्षों पुराने मामले लंबित हैं, जिन्हें सुलझाने में 10 से 20 साल तक का समय लग जाता है। इस लंबे समय के दौरान गवाहों की मौत हो जाती है, सबूत नष्ट हो जाते हैं और पीड़ित का जीवन बर्बाद हो जाता है, जिसे देरी द्वारा न्याय का हनन (Denial of Justice by Delay) कहा जाता है। इसके अलावा, अदालतें कई बार प्रक्रियागत नियमों और पुराने फैसलों की व्याख्या में इस कदर उलझ जाती हैं कि आम आदमी की पीड़ा की अनदेखी हो जाती है। न्यायिक सक्रियता और न्यायिक संयम के बीच का संघर्ष भी इस खाई को और चौड़ा करता है। इस अंतर के गंभीर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। न्याय न मिलने से जनता का अदालतों पर से विश्वास उठने लगता है और लोग पंचायत, गुंडों या सत्ता के माध्यम से न्याय की तलाश करने लगते हैं। साथ ही, अमीर लोग महंगे वकीलों के जरिए प्रक्रिया का फायदा उठाकर केस लंबा खींचते हैं, जबकि गरीब पीड़ित सालों इंतजार करता रह जाता है। इसके अलावा, अपराधियों को सजा मिलने में देरी से अपराध को बढ़ावा मिलता है और औद्योगिक विवादों के लंबे खिंचने से विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) जैसे मध्यस्थता और लोक अदालतों को मजबूत करने, ई-कोर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व एआई आधारित केस मैनेजमेंट जैसी तकनीकों का उपयोग करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, बलात्कार और बाल अपराध जैसे मामलों में समय-बद्ध न्याय प्रणाली लागू करने और न्यायिक जवाबदेही तय करने जैसे ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। अंततः, जब तक कानूनी प्रक्रिया को मानवीय संवेदनशीलता से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। इसमें सुधार के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, न्यायिक नेतृत्व और जनता के दबाव की बेहद जरूरत है।

1 hr ago
user_जिला ब्यूरो बैतूल
जिला ब्यूरो बैतूल
Salesperson बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
1 hr ago
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आधुनिक लोकतंत्र में न्यायपालिका को 'न्याय का मंदिर' माना जाता है, लेकिन आज बैतूल जिला सहित देश और दुनिया भर की अदालतों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती कानूनी जजमेंट (Judgment) और वास्तविक जस्टिस (Justice) के बीच का बढ़ता हुआ अंतर है। जहां जजमेंट प्रक्रिया, साक्ष्य और कानून के अनुसार दिया जाने वाला एक लिखित फैसला है, वहीं जस्टिस वह अंतिम परिणाम है जिससे पीड़ित को त्वरित राहत, समाज को विश्वास और नैतिक संतुलन मिलता है। जब ये दोनों अलग हो जाते हैं, तो न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगाने लगता है। इस समस्या की मुख्य जड़ अदालतों में लंबित पड़े करोड़ों मुकदमे हैं। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला अदालतों में वर्षों पुराने मामले लंबित हैं, जिन्हें सुलझाने में 10 से 20 साल तक का समय लग जाता है। इस लंबे समय के दौरान गवाहों की मौत हो जाती है, सबूत नष्ट हो जाते हैं और पीड़ित का जीवन बर्बाद हो जाता है, जिसे देरी द्वारा न्याय का हनन (Denial of Justice by Delay) कहा जाता है। इसके अलावा, अदालतें कई बार प्रक्रियागत नियमों और पुराने फैसलों की व्याख्या में इस कदर उलझ जाती हैं कि आम आदमी की पीड़ा की अनदेखी हो जाती है। न्यायिक सक्रियता और न्यायिक संयम के बीच का संघर्ष भी इस खाई को और चौड़ा करता है। इस अंतर के गंभीर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। न्याय न मिलने से जनता का अदालतों पर से विश्वास उठने लगता है और लोग पंचायत, गुंडों या सत्ता के माध्यम से न्याय की तलाश करने लगते हैं। साथ ही, अमीर लोग महंगे वकीलों के जरिए प्रक्रिया का फायदा उठाकर केस लंबा खींचते हैं, जबकि गरीब पीड़ित सालों इंतजार करता रह जाता है। इसके अलावा, अपराधियों को सजा मिलने में देरी से अपराध को बढ़ावा मिलता है और औद्योगिक विवादों के लंबे खिंचने से विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) जैसे मध्यस्थता और लोक अदालतों को मजबूत करने, ई-कोर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व एआई आधारित केस मैनेजमेंट जैसी तकनीकों का उपयोग करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, बलात्कार और बाल अपराध जैसे मामलों में समय-बद्ध न्याय प्रणाली लागू करने और न्यायिक जवाबदेही तय करने जैसे ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। अंततः, जब तक कानूनी प्रक्रिया को मानवीय संवेदनशीलता से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। इसमें सुधार के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, न्यायिक नेतृत्व और जनता के दबाव की बेहद जरूरत है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • बैतूल के एक छोटे व्यवसायी अनिल यादव ने अपनी छोटी सी दुकान से निकलकर 'लाडो अभियान' के जरिए एक ऐसा सामाजिक आंदोलन खड़ा किया है जो बेटियों को उनके घरों में असली पहचान दिला रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', स्वच्छ भारत मिशन और डिजिटल इंडिया के संकल्पों से प्रेरित होकर वर्ष 2015 में शुरू हुआ यह अभियान अब देश के 28 राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, लंदन और दुबई तक अपनी पहचान बना चुका है। इस अभियान के तहत घरों के मुख्य द्वार पर बेटी के नाम की नेम प्लेट लगाई जाती है, जिससे यह संदेश जाता है कि बेटियां भी घर की बराबर की पहचान हैं। लाडो फाउंडेशन के संस्थापक अनिल यादव ने इस अभियान की शुरुआत 8 नवंबर 2015 को अपनी बेटी आयुषी यादव के जन्मदिन पर की थी। पिछले 10 वर्षों के दौरान उन्होंने लगभग 28 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर 3,960 घरों के दरवाजों पर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगवाई है। इसके अलावा, उन्होंने सैकड़ों बेटियों का सम्मानपूर्वक प्रथम गृह प्रवेश भी कराया है। अनिल यादव का मानना है कि जब घर के दरवाजे पर सम्मान के साथ बेटी का नाम लिखा जाता है, तो यह पूरे समाज को संदेश देता है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। इसी सिलसिले में रविवार को लाडो फाउंडेशन की टीम विनोबा वार्ड पहुंची, जहां उन्होंने अमित दियावार और कविता दियावार की पुत्री प्रलब्धि के नाम की नेम प्लेट का विधिवत पूजन कर उसे घर के मुख्य द्वार पर स्थापित किया। इस भावुक अवसर पर प्रलब्धि के दादा श्रीराम दियावार ने इसे बेटियों के सम्मान और समान अधिकार का प्रतीक बताते हुए बेहद प्रेरणादायक प्रयास कहा। लाडो फाउंडेशन का संकल्प है कि आने वाले समय में हर घर के दरवाजे पर बेटी का नाम सम्मान के साथ अंकित हो और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' केवल एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि हर परिवार की संस्कृति बन जाए।
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    बैतूल के एक छोटे व्यवसायी अनिल यादव ने अपनी छोटी सी दुकान से निकलकर 'लाडो अभियान' के जरिए एक ऐसा सामाजिक आंदोलन खड़ा किया है जो बेटियों को उनके घरों में असली पहचान दिला रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', स्वच्छ भारत मिशन और डिजिटल इंडिया के संकल्पों से प्रेरित होकर वर्ष 2015 में शुरू हुआ यह अभियान अब देश के 28 राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, लंदन और दुबई तक अपनी पहचान बना चुका है। इस अभियान के तहत घरों के मुख्य द्वार पर बेटी के नाम की नेम प्लेट लगाई जाती है, जिससे यह संदेश जाता है कि बेटियां भी घर की बराबर की पहचान हैं।

लाडो फाउंडेशन के संस्थापक अनिल यादव ने इस अभियान की शुरुआत 8 नवंबर 2015 को अपनी बेटी आयुषी यादव के जन्मदिन पर की थी। पिछले 10 वर्षों के दौरान उन्होंने लगभग 28 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर 3,960 घरों के दरवाजों पर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगवाई है। इसके अलावा, उन्होंने सैकड़ों बेटियों का सम्मानपूर्वक प्रथम गृह प्रवेश भी कराया है। अनिल यादव का मानना है कि जब घर के दरवाजे पर सम्मान के साथ बेटी का नाम लिखा जाता है, तो यह पूरे समाज को संदेश देता है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।

इसी सिलसिले में रविवार को लाडो फाउंडेशन की टीम विनोबा वार्ड पहुंची, जहां उन्होंने अमित दियावार और कविता दियावार की पुत्री प्रलब्धि के नाम की नेम प्लेट का विधिवत पूजन कर उसे घर के मुख्य द्वार पर स्थापित किया। इस भावुक अवसर पर प्रलब्धि के दादा श्रीराम दियावार ने इसे बेटियों के सम्मान और समान अधिकार का प्रतीक बताते हुए बेहद प्रेरणादायक प्रयास कहा। लाडो फाउंडेशन का संकल्प है कि आने वाले समय में हर घर के दरवाजे पर बेटी का नाम सम्मान के साथ अंकित हो और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' केवल एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि हर परिवार की संस्कृति बन जाए।
    user_जिला ब्यूरो बैतूल
    जिला ब्यूरो बैतूल
    Salesperson बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    58 min ago
  • मनोहर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार, बैतूल के खेड़ीसावलीगढ़ में दादाजी धूनीवाले की रथयात्रा पहुंची है। इस रथयात्रा के यहाँ पहुँचने पर उपस्थित भक्तों ने यात्रियों का आदरपूर्वक स्वागत किया।
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    मनोहर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार, बैतूल के खेड़ीसावलीगढ़ में दादाजी धूनीवाले की रथयात्रा पहुंची है। इस रथयात्रा के यहाँ पहुँचने पर उपस्थित भक्तों ने यात्रियों का आदरपूर्वक स्वागत किया।
    user_Manohar agrval Agrawal
    Manohar agrval Agrawal
    Photographer बैतूल, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश के दतिया उप चुनाव में नरोत्तम मिश्रा ने अपनी बात रखी है। उन्होंने इस उप चुनाव को लेकर अपना बयान दिया है।
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    मध्य प्रदेश के दतिया उप चुनाव में नरोत्तम मिश्रा ने अपनी बात रखी है। उन्होंने इस उप चुनाव को लेकर अपना बयान दिया है।
    user_दैनिक अग्निवर्षा अखबार मीडिया
    दैनिक अग्निवर्षा अखबार मीडिया
    बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के दतिया में दंगल के दौरान कांग्रेस प्रतिपक्ष के नेता उमंग सिंगार का बयान सामने आया है।
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    मध्य प्रदेश के दतिया में दंगल के दौरान कांग्रेस प्रतिपक्ष के नेता उमंग सिंगार का बयान सामने आया है।
    user_Namdev gujre Khabar bhart news
    Namdev gujre Khabar bhart news
    घोड़ा डोंगरी, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • बैतूल के आमला नगर स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रदेश सरकार के दावों की पोल खुल रही है। विद्यालय में पिछले कई महीनों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है, जिसके कारण अपनी प्यास बुझाने के लिए सैकड़ों छात्राओं को स्कूल परिसर से बाहर जाकर सार्वजनिक नलों और हैंडपंपों से पानी भरने को मजबूर होना पड़ रहा है। विद्यालय में पहले नगर पालिका द्वारा 24 घंटे जलापूर्ति वाला नल कनेक्शन दिया गया था, लेकिन नगर पालिका ने उसे काट दिया। स्कूल की प्राचार्य प्रमिला सावले के अनुसार, जल कनेक्शन बहाल करने के लिए 28 जनवरी 2026 को नगर पालिका को लिखित आवेदन दिया गया था, लेकिन करीब छह महीने बीतने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही और शुक्रवार को भी कई छात्राएं स्कूल के सामने लगे सार्वजनिक नल से बोतलों व बाल्टियों में पानी भरकर ले जाती देखी गईं। समस्या के समाधान के लिए अंततः जनसुनवाई में भी आवेदन देकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है। दूसरी ओर, नगर पालिका के जल प्रभारी अरुण पवार का तर्क है कि विद्यालय को जलावर्धन योजना से कनेक्शन दिया गया है, जिसमें तीन-चार दिन में केवल एक बार पानी की आपूर्ति होती है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन को इसी व्यवस्था से काम चलाने या फिर अपना वैकल्पिक इंतजाम स्वयं करने की बात कही है। इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए जब नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नितिन बिंजवे से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इस पेयजल संकट को लेकर अब प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए हैं। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) धीरेंद्र साहू ने बताया कि वे नगर पालिका से बात कर रहे हैं और सोमवार तक विद्यालय में पानी की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया ने नगर पालिका के सीएमओ को कड़े निर्देश दिए हैं कि विद्यालय में पुनः 24 घंटे वाला जल कनेक्शन लगाया जाए, ताकि छात्राओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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    बैतूल के आमला नगर स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रदेश सरकार के दावों की पोल खुल रही है। विद्यालय में पिछले कई महीनों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है, जिसके कारण अपनी प्यास बुझाने के लिए सैकड़ों छात्राओं को स्कूल परिसर से बाहर जाकर सार्वजनिक नलों और हैंडपंपों से पानी भरने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

विद्यालय में पहले नगर पालिका द्वारा 24 घंटे जलापूर्ति वाला नल कनेक्शन दिया गया था, लेकिन नगर पालिका ने उसे काट दिया। स्कूल की प्राचार्य प्रमिला सावले के अनुसार, जल कनेक्शन बहाल करने के लिए 28 जनवरी 2026 को नगर पालिका को लिखित आवेदन दिया गया था, लेकिन करीब छह महीने बीतने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही और शुक्रवार को भी कई छात्राएं स्कूल के सामने लगे सार्वजनिक नल से बोतलों व बाल्टियों में पानी भरकर ले जाती देखी गईं। समस्या के समाधान के लिए अंततः जनसुनवाई में भी आवेदन देकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

दूसरी ओर, नगर पालिका के जल प्रभारी अरुण पवार का तर्क है कि विद्यालय को जलावर्धन योजना से कनेक्शन दिया गया है, जिसमें तीन-चार दिन में केवल एक बार पानी की आपूर्ति होती है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन को इसी व्यवस्था से काम चलाने या फिर अपना वैकल्पिक इंतजाम स्वयं करने की बात कही है। इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए जब नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नितिन बिंजवे से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

इस पेयजल संकट को लेकर अब प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए हैं। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) धीरेंद्र साहू ने बताया कि वे नगर पालिका से बात कर रहे हैं और सोमवार तक विद्यालय में पानी की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया ने नगर पालिका के सीएमओ को कड़े निर्देश दिए हैं कि विद्यालय में पुनः 24 घंटे वाला जल कनेक्शन लगाया जाए, ताकि छात्राओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
    user_Dabang kesari amla mohd. asif
    Dabang kesari amla mohd. asif
    Local News Reporter आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के आमला रेलवे स्टेशन पर 'ऑपरेशन हमदर्द' के तहत जीआरपी ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। आमला जीआरपी ने तत्परता दिखाते हुए 8 साल से लापता एक बुजुर्ग व्यक्ति को उनके परिजनों से मिलवाया है। रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिले यह 50 वर्षीय व्यक्ति बिहार के निवासी हैं। जीआरपी की तत्परता के कारण ही सालों से बिछड़े इस व्यक्ति का अपने परिवार से दोबारा मिलन संभव हो पाया है।
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    मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के आमला रेलवे स्टेशन पर 'ऑपरेशन हमदर्द' के तहत जीआरपी ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। आमला जीआरपी ने तत्परता दिखाते हुए 8 साल से लापता एक बुजुर्ग व्यक्ति को उनके परिजनों से मिलवाया है। रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिले यह 50 वर्षीय व्यक्ति बिहार के निवासी हैं। जीआरपी की तत्परता के कारण ही सालों से बिछड़े इस व्यक्ति का अपने परिवार से दोबारा मिलन संभव हो पाया है।
    user_AMLA NEWS
    AMLA NEWS
    आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • बैतूल जिले के आठनेर विकासखण्ड क्षेत्र की ग्राम अम्बाड़ा पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोरम ढाना में ग्रामीण लंबे समय से पानी, सड़क और बिजली की समस्या से परेशान हैं। करीब 50 मकानों वाले इस गांव में आज भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों ने अपनी इन समस्याओं को लेकर बैतूल जिले के सांसद को भी ज्ञापन दिया था, लेकिन इसके बावजूद अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। गांव की सड़क खराब होने की वजह से यहां आवागमन में भारी परेशानी होती है और कच्चे रास्ते के कारण आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती है। इसी बदहाल कच्चे रास्ते से होकर माध्यमिक शाला के बच्चे पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाने को मजबूर हैं। इसके साथ ही, गांव में नल-जल योजना न होने से ग्रामीणों को रोजाना पानी और बिजली की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी समस्याओं के निराकरण की बात कही है। मोरम ढाना के निवासियों ने शासन और प्रशासन से गांव में पक्की सड़क बनवाने और पेयजल की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
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    बैतूल जिले के आठनेर विकासखण्ड क्षेत्र की ग्राम अम्बाड़ा पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम मोरम ढाना में ग्रामीण लंबे समय से पानी, सड़क और बिजली की समस्या से परेशान हैं। करीब 50 मकानों वाले इस गांव में आज भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

ग्रामीणों ने अपनी इन समस्याओं को लेकर बैतूल जिले के सांसद को भी ज्ञापन दिया था, लेकिन इसके बावजूद अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। गांव की सड़क खराब होने की वजह से यहां आवागमन में भारी परेशानी होती है और कच्चे रास्ते के कारण आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती है। इसी बदहाल कच्चे रास्ते से होकर माध्यमिक शाला के बच्चे पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाने को मजबूर हैं। इसके साथ ही, गांव में नल-जल योजना न होने से ग्रामीणों को रोजाना पानी और बिजली की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

परेशान ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी समस्याओं के निराकरण की बात कही है। मोरम ढाना के निवासियों ने शासन और प्रशासन से गांव में पक्की सड़क बनवाने और पेयजल की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
    user_आठनेर रिपोर्टर
    आठनेर रिपोर्टर
    पत्रकारिता आठनेर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • बैतूल जिले के आमला में रेल पुलिस भोपाल द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन हमदर्द" के तहत जीआरपी थाना आमला ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घर से नाराज होकर निकली एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाकर मानवता की मिसाल पेश की है। यह अभियान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंदों, भटके हुए और असहाय लोगों की मदद कर उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना है। मामले के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को आमला रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज की सीढ़ियों पर एक किशोरी घबराई और परेशान अवस्था में बैठी पाई गई। थाना प्रभारी उपनिरीक्षक प्रमोद पाटिल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जब उससे आत्मीयता से बातचीत की, तो उसने अपना नाम भूमिका वट्टी (16 वर्ष), निवासी ग्राम हरन्या टांडी, बोरदेही, जिला बैतूल बताया। किशोरी ने बताया कि वह करीब एक महीने पहले ग्राम चुटकी में अपनी बड़ी मां के घर गई थी, जहां 8 जुलाई को घरेलू काम को लेकर डांट पड़ने से नाराज होकर वह बिना बताए घर से निकल गई और कई घंटों से रेलवे स्टेशन पर भूखी-प्यासी अकेली बैठी थी। नाबालिग की स्थिति को देखते हुए जीआरपी की महिला आरक्षक पूजा यादव और महविस खान ने उसे सुरक्षित थाने पहुंचाया, जहां उसे भोजन और पानी देकर शांत कराया गया। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसके पिता परसराम वट्टी और मामा रितेश ध्रुवे से संपर्क किया। थाने पहुंचे परिजनों को कानूनी औपचारिकताओं और सत्यापन के बाद बालिका को सकुशल सौंप दिया गया, जिस पर उन्होंने पुलिस की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता की सराहना की। इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी प्रमोद पाटिल के साथ प्रधान आरक्षक मनोज नागले, आरक्षक दीपक खलोटे, अनिल कुमरे, सनोज धुर्वे, प्रदीप उबनारे, महिला आरक्षक पूजा यादव और महविस खान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल भोपाल राजाबाबू सिंह, पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल अंकित जायसवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतू डाबर और उप पुलिस अधीक्षक रेल इटारसी महेन्द्र सिंह कुल्हारा के मार्गदर्शन में पूरी की गई।
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    बैतूल जिले के आमला में रेल पुलिस भोपाल द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन हमदर्द" के तहत जीआरपी थाना आमला ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घर से नाराज होकर निकली एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाकर मानवता की मिसाल पेश की है। यह अभियान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंदों, भटके हुए और असहाय लोगों की मदद कर उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना है।

मामले के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को आमला रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज की सीढ़ियों पर एक किशोरी घबराई और परेशान अवस्था में बैठी पाई गई। थाना प्रभारी उपनिरीक्षक प्रमोद पाटिल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जब उससे आत्मीयता से बातचीत की, तो उसने अपना नाम भूमिका वट्टी (16 वर्ष), निवासी ग्राम हरन्या टांडी, बोरदेही, जिला बैतूल बताया। किशोरी ने बताया कि वह करीब एक महीने पहले ग्राम चुटकी में अपनी बड़ी मां के घर गई थी, जहां 8 जुलाई को घरेलू काम को लेकर डांट पड़ने से नाराज होकर वह बिना बताए घर से निकल गई और कई घंटों से रेलवे स्टेशन पर भूखी-प्यासी अकेली बैठी थी।

नाबालिग की स्थिति को देखते हुए जीआरपी की महिला आरक्षक पूजा यादव और महविस खान ने उसे सुरक्षित थाने पहुंचाया, जहां उसे भोजन और पानी देकर शांत कराया गया। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसके पिता परसराम वट्टी और मामा रितेश ध्रुवे से संपर्क किया। थाने पहुंचे परिजनों को कानूनी औपचारिकताओं और सत्यापन के बाद बालिका को सकुशल सौंप दिया गया, जिस पर उन्होंने पुलिस की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता की सराहना की। इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी प्रमोद पाटिल के साथ प्रधान आरक्षक मनोज नागले, आरक्षक दीपक खलोटे, अनिल कुमरे, सनोज धुर्वे, प्रदीप उबनारे, महिला आरक्षक पूजा यादव और महविस खान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल भोपाल राजाबाबू सिंह, पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल अंकित जायसवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतू डाबर और उप पुलिस अधीक्षक रेल इटारसी महेन्द्र सिंह कुल्हारा के मार्गदर्शन में पूरी की गई।
    user_Dabang kesari amla mohd. asif
    Dabang kesari amla mohd. asif
    Local News Reporter आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
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