⚡साहब! बुकिंग तो हो गई, पर गैस कहाँ गई? सहज गैस एजेंसी के भ्रष्टाचार की खुली पोल। अजीत मिश्रा (खोजी) 🎯बस्ती: रसूख के साये में 'सहज' हुई गैस की कालाबाजारी, बुजुर्ग की तहरीर ने खोली पोल ⚡साहब! बुकिंग तो हो गई, पर गैस कहाँ गई? सहज गैस एजेंसी के भ्रष्टाचार की खुली पोल। ⚡आखिर किसका संरक्षण? सरेआम सिलेंडर ब्लैक कर रही एजेंसी पर कब गिरेगी कार्रवाई की गाज? ⚡अंधेरगर्दी: उपभोक्ता को दुत्कार और ब्लैक में व्यापार; क्या सो रहा है बस्ती का रसद विभाग? ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश बस्ती। शहर के कटरा स्थित सहज गैस एजेंसी पर लग रहे कालाबाजारी के आरोपों ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। कई दिनों से वंदे भारत लाइव टीवी द्वारा की जा रही लगातार ग्राउंड रिपोर्टिंग और पर्ची से लेकर सिलेंडर तक के खेल को उजागर करने के बाद, मामला अब पुलिस की चौखट तक पहुँच गया है। मंगलवार को एक पीड़ित बुजुर्ग ने बड़ेबन पुलिस चौकी में लिखित तहरीर देकर एजेंसी संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 🔥कागजों पर 'डिलीवर', हकीकत में 'गायब' शिकायतकर्ता का आरोप है कि सहज गैस एजेंसी में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो डिजिटल सिस्टम के साथ खिलवाड़ कर रहा है। उपभोक्ताओं की बुकिंग होते ही रिकॉर्ड में सिलेंडर को “डिलीवर” दिखा दिया जाता है, जबकि हकीकत में उपभोक्ता खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के चक्कर काटता रह जाता है। आरोप है कि आम जनता के हक की यह गैस गुपचुप तरीके से ऊंचे दामों पर 'ब्लैक' में बेची जा रही है। 🔥“जो करना है कर लो”... संचालकों की दबंगई चरम पर बुजुर्ग शिकायतकर्ता ने तहरीर में एजेंसी संचालकों के व्यवहार पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जब कोई उपभोक्ता अपने हक का सिलेंडर मांगता है, तो उसे मदद के बजाय अपमानित किया जाता है। संचालकों द्वारा खुलेआम कहा जाता है कि— “जो करना हो कर लीजिए, गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा।” यह अहंकारी बोल बताते हैं कि एजेंसी संचालकों को न तो प्रशासन का डर है और न ही विभागीय नियमों की परवाह। 🔥जनता का आक्रोश: स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह खेल महीनों से जारी है। रसूखदार संचालकों के चलते गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार चूल्हा जलाने के लिए मोहताज हैं, जबकि कालाबाजारी करने वालों की जेबें गरम हो रही हैं। 🗓️अब कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें बड़ेबन पुलिस चौकी में तहरीर मिलने के बाद क्षेत्र में हलचल तेज है। जनता के बीच इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि रसद विभाग और स्थानीय प्रशासन अब तक मूकदर्शक क्यों बना हुआ है? ✍️मुख्य सवाल: ⚡क्या पुलिस और रसद विभाग इस 'सिंडिकेट' को तोड़ने की हिम्मत दिखाएगा? ⚡क्या बुजुर्ग को न्याय मिलेगा या रसूख के आगे फाइलें दबा दी जाएंगी? 💰निष्कर्ष: सहज गैस एजेंसी का यह मामला प्रशासन के लिए एक लिटमस टेस्ट है। यदि समय रहते इन 'सफेदपोश' कालाबाजारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता का सिस्टम से भरोसा उठना तय है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में जांच की खानापूर्ति करते हैं या दोषियों को सलाखों के पीछे भेजते हैं।
⚡साहब! बुकिंग तो हो गई, पर गैस कहाँ गई? सहज गैस एजेंसी के भ्रष्टाचार की खुली पोल। अजीत मिश्रा (खोजी) 🎯बस्ती: रसूख के साये में 'सहज' हुई गैस की कालाबाजारी, बुजुर्ग की तहरीर ने खोली पोल ⚡साहब! बुकिंग तो हो गई, पर गैस कहाँ गई? सहज गैस एजेंसी के भ्रष्टाचार की खुली पोल। ⚡आखिर किसका संरक्षण? सरेआम सिलेंडर ब्लैक कर रही एजेंसी पर कब गिरेगी कार्रवाई की गाज? ⚡अंधेरगर्दी: उपभोक्ता को दुत्कार और ब्लैक में व्यापार; क्या सो रहा है बस्ती का रसद विभाग? ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश बस्ती। शहर के कटरा स्थित सहज गैस एजेंसी पर लग रहे कालाबाजारी के आरोपों ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। कई दिनों से वंदे भारत लाइव टीवी द्वारा की जा रही लगातार ग्राउंड रिपोर्टिंग और पर्ची से लेकर सिलेंडर तक के खेल को उजागर करने के बाद, मामला अब पुलिस की चौखट तक पहुँच गया है। मंगलवार को एक पीड़ित बुजुर्ग ने बड़ेबन पुलिस चौकी में लिखित तहरीर देकर एजेंसी संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 🔥कागजों पर 'डिलीवर', हकीकत में 'गायब' शिकायतकर्ता का आरोप है कि सहज गैस एजेंसी में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो डिजिटल सिस्टम के साथ खिलवाड़ कर रहा है। उपभोक्ताओं की बुकिंग होते ही रिकॉर्ड में सिलेंडर को “डिलीवर” दिखा दिया जाता है, जबकि हकीकत में उपभोक्ता खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के चक्कर काटता रह जाता है। आरोप है कि आम जनता के हक की यह गैस गुपचुप तरीके से ऊंचे दामों पर 'ब्लैक' में बेची जा रही है। 🔥“जो करना है कर लो”... संचालकों की दबंगई चरम पर बुजुर्ग शिकायतकर्ता ने तहरीर में एजेंसी संचालकों के व्यवहार पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जब कोई उपभोक्ता अपने हक का सिलेंडर मांगता है, तो उसे मदद के बजाय अपमानित किया जाता है। संचालकों द्वारा खुलेआम कहा जाता है कि— “जो करना हो कर लीजिए, गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा।” यह अहंकारी बोल बताते हैं कि एजेंसी संचालकों को न तो प्रशासन का डर है और न ही विभागीय नियमों की परवाह। 🔥जनता का आक्रोश: स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह खेल महीनों से जारी है। रसूखदार संचालकों के चलते गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार चूल्हा जलाने के लिए मोहताज हैं, जबकि कालाबाजारी करने वालों की जेबें गरम हो रही हैं। 🗓️अब कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें बड़ेबन पुलिस चौकी में तहरीर मिलने के बाद क्षेत्र में हलचल तेज है। जनता के बीच इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि रसद विभाग और स्थानीय प्रशासन अब तक मूकदर्शक क्यों बना हुआ है? ✍️मुख्य सवाल: ⚡क्या पुलिस और रसद विभाग इस 'सिंडिकेट' को तोड़ने की हिम्मत दिखाएगा? ⚡क्या बुजुर्ग को न्याय मिलेगा या रसूख के आगे फाइलें दबा दी जाएंगी? 💰निष्कर्ष: सहज गैस एजेंसी का यह मामला प्रशासन के लिए एक लिटमस टेस्ट है। यदि समय रहते इन 'सफेदपोश' कालाबाजारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता का सिस्टम से भरोसा उठना तय है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में जांच की खानापूर्ति करते हैं या दोषियों को सलाखों के पीछे भेजते हैं।
- जब एक दूसरे को भेजोगे तो आपका ही बढ़ेगा1
- बस्ती से हैरान करने वाली खबर: पत्नी से छुटकारा मिला तो पति ने 9 किमी तक दंडवत यात्रा की, बोला– अब शांति महसूस कर रहा हूं बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने वैवाहिक कलह से परेशान होकर भगवान के दरबार में ऐसी मन्नत मान ली थी, जिसे पूरा करने में उसे अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। क्या है पूरा मामला? भानपुर गांव के एक युवक की शादी करीब दो वर्ष पहले हुई थी। शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन समय बीतने के साथ पति-पत्नी के बीच तकरार बढ़ती गई। युवक का कहना है कि वह लगातार मानसिक तनाव में था और रोज़मर्रा के झगड़ों से तंग आ चुका था। आख़िरकार उसने भानपुर से 9 किलोमीटर दूर स्थित मां बैड़वा समय माता के पौराणिक मंदिर में जाकर अरदास की— “हे माता, अगर मुझे इस रिश्ते के तनाव से छुटकारा मिल गया, तो मैं गांव से आपके दरबार तक दंडवत यात्रा करूंगा।” अदालत का फैसला और दंडवत यात्रा शुरू मन्नत के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच तलाक का फैसला हो गया। फैसला आते ही युवक ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का संकल्प ले लिया। रविवार सुबह, बिना अन्न-जल ग्रहण किए, वह घर से निकला और दंडवत लेट-लेटकर 9 किलोमीटर लंबी यात्रा शुरू कर दी। यात्रा के दौरान उसके माता-पिता और गांव के कुछ लोग साथ चलते रहे। माहौल में धार्मिक रंग घुल गया— “जय श्री राम!”, “जय बजरंगबली!” के जयकारों से रास्ता गूंजता रहा। क्या बोले युवक? युवक का कहना है “दो सालों से मानसिक रूप से बहुत परेशान था। अब फैसला मेरे पक्ष में आया है। मन को शांति मिली है। माता ने मेरी सुन ली।” गांव में चर्चा का विषय पूरा मामला गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे समाज में बढ़ती वैवाहिक कड़वाहट का उदाहरण बता रहे हैं।1
- सिद्धार्थ गैस एजेंसी की मनमानी: महिला उपभोक्ताओं से बदसलूकी और नियम ताक पर सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर जीरो टॉलरेंस और सुशासन का दावा करती है, वहीं जनपद के डुमरियागंज क्षेत्र स्थित चौधरी HP गैस ग्रामीण वितरक, चेतिया में उपभोक्ताओं का उत्पीड़न चरम पर है। ताज़ा मामला एक महिला उपभोक्ता के साथ हुई अभद्रता का है, जिसने गैस एजेंसी के संचालन और वहां मौजूद रसूखदार लोगों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय छोड़ एजेंसी पर 'ड्यूटी' दे रहे शिक्षक एजेंसी की कार्यप्रणाली में सबसे चौंकाने वाला पहलू मालिक के पुत्र हरिश्चंद्र की भूमिका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरिश्चंद्र शिक्षा विभाग में सरकारी अध्यापक के पद पर होरिलापुरा, खुनियांव में तैनात हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस वक्त उन्हें विद्यालय में बच्चों का भविष्य संवारना चाहिए, उस वक्त वे गैस एजेंसी पर मौजूद रहकर उपभोक्ताओं को धमकाते नजर आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 'गुरुजी' आए दिन विद्यालय से नदारद रहकर एजेंसी का कामकाज संभालते हैं और विरोध करने वाले सीधे-सादे उपभोक्ताओं, खासकर महिलाओं के साथ अमर्यादित व्यवहार और दबंगई करने से बाज नहीं आते। क्या रसूख के आगे बौना है प्रशासन? गैस एजेंसी पर होने वाली इस मनमानी और सरकारी कर्मचारी की अवैध मौजूदगी ने विभाग की मिलीभगत की ओर भी इशारा किया है। एक सरकारी सेवक का अपने कार्यस्थल से गायब रहकर व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर बैठकर जनता को प्रताड़ित करना न केवल सेवा नियमावली का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक शिथिलता का प्रमाण भी है। मुख्य बिंदु जो जांच का विषय हैं: ड्यूटी से गायब: क्या शिक्षा विभाग को अपने शिक्षक के विद्यालय से गायब रहने की जानकारी है? उपभोक्ता उत्पीड़न: महिला उपभोक्ता के साथ हुई बदसलूकी पर पुलिस और रसद विभाग मौन क्यों है? अवैध हस्तक्षेप: एक सरकारी शिक्षक किस हैसियत से गैस एजेंसी के विवादों में हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं को धमका रहा है? क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि ऐसे 'लापरवाह' शिक्षक और 'बेलगाम' गैस एजेंसी पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को इस मानसिक और आर्थिक शोषण से निजात मिल सके। रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)2
- ग्राम शिवराजपुर हर्रैया बस्ती कुसमोर घाट के निकट हो रही गौ रक्षा महायज्ञ में आप सभी लोगों के सहयोग की आशा करते हैं - मनोरमा धर्मार्थ गौ सेवा ट्रस्ट (परिवार) आपके सहयोग से संपूर्ण भारत की गौ माताओं को सुरक्षित करने का वचन देता है ।1
- मित्रों, सोकर उठ गए हैं तो आइए आज के दिन का प्रारंभ करते हैं! प्रभु आप की जय हो✍️1
- मेरे बड़े भांजे आदर्श निषाद को जन्मदिन की हार्दिक शुभकमनाएं 🎂🎂🎁🎉1
- ककरहा गांव में दिनदहाड़े आटा चक्की पर हमला, नकदी-जेवर लूटे; पीड़ित ने आईजी गोरखपुर से मांगी इंसाफ की गुहार धनघटा थाना क्षेत्र के ककरहा गांव में दबंगई का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुरानी रंजिश में हमलावरों ने आटा चक्की पर धावा बोलकर जमकर तांडव मचाया। बीच-बचाव करने पहुंचे युवक को बेरहमी से पीटकर उसका हाथ तोड़ दिया गया और उंगली तक काट दी गई। गंभीर आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पर ही सुलह का दबाव बनाकर तहरीर बदलवा दी। न्याय न मिलने पर पीड़ित ने अब आईजी गोरखपुर का दरवाजा खटखटाया है। घर में घुसकर दी जान से मारने की धमकी ककरहा निवासी राजेश कुमार पुत्र कृष्णानंद ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोगों से उनकी पुरानी रंजिश चल रही है। बीते 23 फरवरी की रात करीब 8 बजे दबंग उनके घर में घुस आए और पत्नी को भद्दी गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी। 24 व 25 फरवरी को भी रास्ते में रोककर लगातार गाली-गलौज की गई, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस अधीक्षक से ऑनलाइन की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। चक्की पर हमला, पिता को बचाने आए बेटे को बनाया निशाना पीड़ित के मुताबिक 26 फरवरी की दोपहर करीब 2 बजे आधा दर्जन से अधिक नामजद व अज्ञात लोग गोलबंद होकर उनकी आटा चक्की पर पहुंचे और हमला बोल दिया। विरोध करने पर लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला किया गया। पिता को बचाने आए पुत्र शिवेष पाण्डेय को दबंगों ने इतना पीटा कि उसका दाहिना हाथ टूट गया और उंगली कट गई। हमलावर चक्की के गल्ले से 20 हजार रुपये नकद और गले से सोने की माला भी लूट ले गए। पुलिस पर गंभीर आरोप, ‘तहरीर बदलवाकर मामला दबाने की कोशिश’ घटना के बाद मौके पर पहुंची यूपी-112 पुलिस पीड़ितों को थाने ले गई, लेकिन वहां स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पुलिस ने वास्तविक घटना दर्ज करने के बजाय मनमाफिक तहरीर लिखवाई और समझौते का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, घायलों का समुचित मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया और प्रार्थी व एक अन्य व्यक्ति की मोटरसाइकिल तक जबरन उठा ली गई। दहशत में परिवार, उच्चाधिकारियों से लगाई गुहार लगातार धमकियों और पुलिस की कथित लापरवाही से पीड़ित परिवार दहशत में है। पीड़ित ने आईजी गोरखपुर को पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।1
- आप लोग जरुर देखना और शेयर करना सब्सक्राइब करना और जरूर लोगों के पास भेजना1