थानागाजी गोपेश शर्मा पांडुपोल हनुमान मंदिर राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के बीच स्थित एक पवित्र स्थल है। यह मंदिर लगभग 5000 साल पुराना है और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि यहां भगवान हनुमान ने भीम का घमंड तोड़ा था और उन्हें आशीर्वाद दिया था कि वे महाभारत युद्ध में अर्जुन के रथ पर ध्वजा के रूप में विराजमान रहेंगे । यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां एक झरना है जो पहाड़ी से निकलता है और एक छोटा सा तालाब बनाता है। मंदिर में भगवान हनुमान की लेटी हुई विशाल मूर्ति है, जिसे पांडवों ने स्थापित किया था। पांडुपोल हनुमान मंदिर में मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। यहां लक्खी मेला भी लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर सेंचुरी की घनी पहाड़ियों के बीच स्थित है पांडुपोल हनुमान मंदिर, जो न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि महाभारत काल की एक प्रेरणादायक कथा से भी जुड़ा हुआ है। यह मंदिर आज भी उस ऐतिहासिक घटना का साक्षी है, जब महाबली भीम का अभिमान स्वयं बजरंगबली हनुमानजी ने तोड़ा था। कहते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों को कई स्थानों पर भ्रमण करना पड़ा। इसी क्रम में भीम एक दिन इन जंगलों से होकर गुजर रहे थे। मार्ग में उन्हें एक वृद्ध वानर लेटा मिला जिसकी लंबी पूंछ रास्ते को अवरुद्ध कर रही थी। भीम ने वानर से पूंछ हटाने को कहा, लेकिन वानर ने शांत भाव से उत्तर दिया, “मैं वृद्ध हूँ, तुम चाहो तो स्वयं इसे हटा लो।” भीम ने पूरी ताकत लगाकर पूंछ हटाने की कोशिश की, पर वह हिला भी नहीं सके। भीम को आश्चर्य हुआ कि एक बूढ़े वानर की पूंछ वे क्यों नहीं हटा पा रहे। तब उन्होंने उस वानर से निवेदन किया कि वह अपना असली स्वरूप दिखाएं। उसी क्षण हनुमानजी ने अपना दिव्य रूप प्रकट किया। यह देख भीम उनके चरणों में नतमस्तक हो गए। हनुमानजी ने न केवल भीम के अहंकार को शांत किया, बल्कि उन्हें आशीर्वाद भी दिया कि महाभारत युद्ध में वे ध्वजा के रूप में अर्जुन के रथ पर विराजमान रहेंगे और पांडवों को विजय दिलाएंगे। आज भी जिस स्थान पर यह दिव्य मिलन हुआ, वह स्थान पांडुपोल हनुमान मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। यहां हनुमानजी की लेटी हुई विशाल मूर्ति भक्तों को दिव्यता और शक्ति का एहसास कराती है। मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में एक बड़ा पत्थर का द्वार ‘बड़ा पोल’ नाम से जाना जाता है, जिसे लेकर मान्यता है कि भीम ने अपनी गदा से इसे तोड़कर मार्ग प्रशस्त किया था। यह स्थान ना केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी प्रसिद्ध है। सरिस्का के जंगलों में स्थित यह मंदिर हर मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ आकर्षित करता है इस जगह हनुमान जी ने तोड़ा था भीम का घमंड, जानें क्या है इस मंदिर का इतिहास - अलवर के सरिस्का कोर एरिया में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर अपनी खास पहचान के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि यहीं हनुमान जी ने भीम का घंमड तोड़ा था . चलिए जानते हैं क्यों हनुमान जी का ये मंदिर श्रद्धालुओं के लिए है खास और क्या है मंदिर का इतिहास. अलवर. जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र सरिस्का टाइगर रिजर्व मे स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर देश-दुनिया भर में मशहूर है. इस मंदिर का मुख्य आकर्षण हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा है. इस प्रतिमा के बारे में यह कहा जाता है, कि जिस जगह हनुमान जी ने भीम का घमंड तोड़ा था, उसी जगह हनुमान जी की प्रतिमा विराजित है. पांडुपोल मंदिर सरिस्का के कोर एरिया में बसा हुआ है, इस कारण मंगलवार व शनिवार को यहां आने वाले श्रद्धालुओं को निजी वाहनों से मंदिर तक जाने की अनुमति रहती है. पांडुपोल हनुमान मंदिर में हर साल भादो शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन लख्खी मेला भरता है. जिसमें कई राज्यों के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. पांडुपोल मंदिर के महंत बाबूलाल शर्मा ने बताया कि इस साल पांडूपोल मंदिर में भर मेला 10 सितंबर को है. इससे पहले ही भक्त बड़ी संख्या में मंदिर प्रांगण में पहुंचकर हनुमान जी के दर्शन कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की कामना कर रहे हैं. महंत बाबूलाल ने बताया कि इस मंदिर में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि इस मंदिर में हनुमान जी की शयन प्रतिमा स्थापित है, यह भी कहा जाता है कि इस मूर्ति की स्थापना पांडवों ने की थी. अज्ञातवास के समय भीम ने पहाड़ तोड़कर बनाया रास्ता बनाया था, थानागाजी की खबरों के लिए गोपेश शर्मा 995086 5219 पर संपर्क करें सभी तरह के विज्ञापन लगाए जाते हैं
थानागाजी गोपेश शर्मा पांडुपोल हनुमान मंदिर राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के बीच स्थित एक पवित्र स्थल है। यह मंदिर लगभग 5000 साल पुराना है और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि यहां भगवान हनुमान ने भीम का घमंड तोड़ा था और उन्हें आशीर्वाद दिया था कि वे महाभारत युद्ध में अर्जुन के रथ पर ध्वजा के रूप में विराजमान रहेंगे । यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां एक झरना है जो पहाड़ी से निकलता है और एक छोटा सा तालाब बनाता है। मंदिर में भगवान हनुमान की लेटी हुई विशाल मूर्ति है, जिसे पांडवों ने स्थापित किया था। पांडुपोल हनुमान मंदिर में मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। यहां लक्खी मेला भी लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर सेंचुरी की घनी पहाड़ियों के बीच स्थित है पांडुपोल हनुमान मंदिर, जो न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि महाभारत काल की एक प्रेरणादायक कथा से भी जुड़ा हुआ है। यह मंदिर आज भी उस ऐतिहासिक घटना का साक्षी है, जब महाबली भीम का अभिमान स्वयं बजरंगबली हनुमानजी ने तोड़ा था। कहते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों को कई स्थानों पर भ्रमण करना पड़ा। इसी क्रम में भीम एक दिन इन जंगलों से होकर गुजर रहे थे। मार्ग में उन्हें एक वृद्ध वानर लेटा मिला जिसकी लंबी पूंछ रास्ते को अवरुद्ध कर रही थी। भीम ने वानर से पूंछ हटाने को कहा, लेकिन वानर ने शांत भाव से उत्तर दिया, “मैं वृद्ध हूँ, तुम चाहो तो स्वयं इसे हटा लो।” भीम ने पूरी ताकत लगाकर पूंछ हटाने की कोशिश की, पर वह हिला भी नहीं सके। भीम को आश्चर्य हुआ कि एक बूढ़े वानर की पूंछ वे क्यों नहीं हटा पा रहे। तब उन्होंने उस वानर से निवेदन किया कि वह अपना असली स्वरूप दिखाएं। उसी क्षण हनुमानजी ने अपना दिव्य रूप प्रकट किया। यह देख भीम उनके चरणों में नतमस्तक हो गए। हनुमानजी ने न केवल भीम के अहंकार को शांत किया, बल्कि उन्हें आशीर्वाद भी दिया कि महाभारत युद्ध में वे ध्वजा के रूप में अर्जुन के रथ पर विराजमान रहेंगे और पांडवों को विजय दिलाएंगे। आज भी जिस स्थान पर यह दिव्य मिलन हुआ, वह स्थान पांडुपोल हनुमान मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। यहां हनुमानजी की लेटी हुई विशाल
मूर्ति भक्तों को दिव्यता और शक्ति का एहसास कराती है। मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में एक बड़ा पत्थर का द्वार ‘बड़ा पोल’ नाम से जाना जाता है, जिसे लेकर मान्यता है कि भीम ने अपनी गदा से इसे तोड़कर मार्ग प्रशस्त किया था। यह स्थान ना केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी प्रसिद्ध है। सरिस्का के जंगलों में स्थित यह मंदिर हर मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ आकर्षित करता है इस जगह हनुमान जी ने तोड़ा था भीम का घमंड, जानें क्या है इस मंदिर का इतिहास - अलवर के सरिस्का कोर एरिया में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर अपनी खास पहचान के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि यहीं हनुमान जी ने भीम का घंमड तोड़ा था . चलिए जानते हैं क्यों हनुमान जी का ये मंदिर श्रद्धालुओं के लिए है खास और क्या है मंदिर का इतिहास. अलवर. जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र सरिस्का टाइगर रिजर्व मे स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर देश-दुनिया भर में मशहूर है. इस मंदिर का मुख्य आकर्षण हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा है. इस प्रतिमा के बारे में यह कहा जाता है, कि जिस जगह हनुमान जी ने भीम का घमंड तोड़ा था, उसी जगह हनुमान जी की प्रतिमा विराजित है. पांडुपोल मंदिर सरिस्का के कोर एरिया में बसा हुआ है, इस कारण मंगलवार व शनिवार को यहां आने वाले श्रद्धालुओं को निजी वाहनों से मंदिर तक जाने की अनुमति रहती है. पांडुपोल हनुमान मंदिर में हर साल भादो शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन लख्खी मेला भरता है. जिसमें कई राज्यों के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. पांडुपोल मंदिर के महंत बाबूलाल शर्मा ने बताया कि इस साल पांडूपोल मंदिर में भर मेला 10 सितंबर को है. इससे पहले ही भक्त बड़ी संख्या में मंदिर प्रांगण में पहुंचकर हनुमान जी के दर्शन कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की कामना कर रहे हैं. महंत बाबूलाल ने बताया कि इस मंदिर में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि इस मंदिर में हनुमान जी की शयन प्रतिमा स्थापित है, यह भी कहा जाता है कि इस मूर्ति की स्थापना पांडवों ने की थी. अज्ञातवास के समय भीम ने पहाड़ तोड़कर बनाया रास्ता बनाया था, थानागाजी की खबरों के लिए गोपेश शर्मा 995086 5219 पर संपर्क करें सभी तरह के विज्ञापन लगाए जाते हैं
- पुलिस ने तुरंत वायरलेस किया और लक्ष्मी टॉकीज चौराहे के पास कार को रुकवा लिया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। पुलिस के सामने जिस तरीके से चालक कार तेजी से लेकर भागा, उससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामला उस समय का है जब एडिशनल पुलिस कमिश्नर के निर्देशन पर सुभाष चौराहे पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था पुलिस ने कार को रुकवाने की कोशिश की लेकिन कार सवार रुक नही और ना ही कार का गेट खोला मौका लगते ही वह कार तेजी से लेकर भाग निकला इस घटना को लेकर पुलिस आश्चर्यचकित रह गयी, इससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया । एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने बताया की चेकिंग के दौरान कार और कार चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है ।बरहाल वह पुलिस के कब्जे में है आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।4
- Post by Voice of Labour1
- अलवर जिला कार्यालय जिसमें अलवर जिलाधीश महोदय अधिकारियों की समय-समय पर बैठक लेते हैं उस कार्यालय के बाहर साइन बोर्ड की क्या हालत हो रही है माधुरी हॉस्पिटल के पास से 13 फुट नाला गुजर रहा है उस नाले में बहुत अधिक मात्रा में प्लास्टिक पॉलिथीन और थर्माकोल से बने काम में लिए हुए पड़े हुए हैं जिसके कारण कई जगह से नाले अवरुद हो जाते हैं जेल सर्किल से ट्रांसपोर्ट नगर तक डिवाइडर पर लगाए गए पौधे बिना देखने के पानी के कारण पेड़ पौधे सूख रहे हैं अलवर जिलाधीश महोदय नगर विकास न्यास के सचिव महोदय नगर निगम के आयुक्त महोदय से विनम्र निवेदन है तीनों समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए संबंधित अधिकारियों को एवं ठेकेदारों को आदेश जारी करते हुऐ समस्याओं का समाधान करने में सहयोग प्रदान करें कृष्ण कुमार खंडेलवाल जिला अध्यक्ष पर्यावरण संरक्षण जिला कांग्रेस अलवर राजस्थान जय हिंद जय भारत2
- Post by Ganesh Yogi1
- सोडावास. सोडावास कस्बे के सबसे अधिक बुजुर्ग 106 वर्षीय रामसिंह बोहरा समाजसेवी का सोमवार प्रातः 6:15 बजे निधन हो गया । उनके निधन पर पूरा कस्बा उनके घर से श्मशान घाट तक एकत्रित होकर पहुंचा। अंतिम संस्कार में सोडावास सरपंच सरजीत चौधरी, जांगिड़ समाज के राष्ट्रीय प्रधान रामपाल जांगिड़, पूर्व सरपंच सूरजभान बोहरा, किसान महापंचायत के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी एवं कार्यकारणी के सदस्य, मुंडावर पूर्व प्रधान रोहिताश चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल शर्मा, पंजाब नेशनल बैंक के सुरेंद्र जाट, वीरेंद्र जाट अध्यापक, बाबा मनिराम गौशाला के अध्यक्ष रोहिताश जाट व समस्त कार्यकर्ता सहित ग्रामीण मौजूद रहे।1
- दिल्ली जयपुर हाईवे पर कापड़ीवास ओल्ड राव के सामने स्थित सिगनेचर ग्लोबल सोसाइटी में मिट्टी खुदाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया जिनमें से 7 की मौत हुई मौत परिजनों ने लगाए बड़े आरोप सुनिए....1
- Post by Raj.JANTA SEVA-84 NEWS1
- अवैध रूप से ओवरलोड सरसों तुड़ी के ट्रैक रैणी से टहटडा (रैणी- राजगढ़) की ओर रोड पर जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है और दुघर्टना होने का भी खतरा बना रहता है2
- सोडावास के 106 वर्षीय समाजसेवी रामसिंह बोहरा का निधन.... सोडावास कस्बे के सबसे अधिक उम्रदराज बुजुर्ग.... सोडावास. सोडावास कस्बे के सबसे अधिक बुजुर्ग 106 वर्षीय रामसिंह बोहरा समाजसेवी का सोमवार प्रातः 6:15 बजे निधन हो गया । उनके निधन पर पूरा कस्बा उनके घर से श्मशान घाट तक एकत्रित होकर पहुंचा। अंतिम संस्कार में सोडावास सरपंच सरजीत चौधरी, जांगिड़ समाज के राष्ट्रीय प्रधान रामपाल जांगिड़, पूर्व सरपंच सूरजभान बोहरा, किसान महापंचायत के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी एवं कार्यकारणी के सदस्य, मुंडावर पूर्व प्रधान रोहिताश चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल शर्मा, पंजाब नेशनल बैंक के सुरेंद्र जाट, वीरेंद्र जाट अध्यापक, बाबा मनिराम गौशाला के अध्यक्ष रोहिताश जाट व समस्त कार्यकर्ता सहित ग्रामीण मौजूद रहे।1