जनपद बिजनौर पुलिस ने 'ऑपरेशन Cy-Vajra' के तहत एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। थाना स्योहारा प्रभारी संजय कुमार तोमर और धामपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इन सभी को पकड़ा गया और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी सोशल मीडिया के जरिए इन्वेस्टमेंट का झांसा देकर ठगी करते थे। साथ ही, परिवहन विभाग की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) की फर्जी वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर भी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। इसके अलावा, गिरोह के कुछ सदस्य फर्जी जन सेवा केंद्र (CSC) की आड़ में आधार कार्ड, पैन कार्ड और एटीएम कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी जुटाकर साइबर अपराध करते थे। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
जनपद बिजनौर पुलिस ने 'ऑपरेशन Cy-Vajra' के तहत एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। थाना स्योहारा प्रभारी संजय कुमार तोमर और धामपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इन सभी को पकड़ा गया और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी सोशल मीडिया के जरिए इन्वेस्टमेंट का झांसा देकर ठगी करते थे। साथ ही, परिवहन विभाग की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) की फर्जी वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर भी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। इसके अलावा, गिरोह के कुछ सदस्य फर्जी जन सेवा केंद्र (CSC) की आड़ में आधार कार्ड, पैन कार्ड और एटीएम कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी जुटाकर साइबर अपराध करते थे। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
- लखनऊ की पूर्वी विधानसभा में आज रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह का जन्मदिन भव्य रूप से मनाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन पूर्वी विधानसभा के विधायक ओ. पी. श्रीवास्तव द्वारा इंदिरा नगर स्थित कन्वेंशन सेंटर में किया गया है। इस विशेष अवसर पर क्षेत्र के 75 विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया जाएगा। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी के साथ ही भाजपा के कई पार्षद, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित हैं। सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए थाना गाजीपुर की पुलिस टीम भी मौके पर तैनात है। कार्यक्रम के समापन के पश्चात सभी आगंतुकों और कार्यकर्ताओं के लिए भोजन की विशेष व्यवस्था भी की गई है।4
- लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित नगर निगम जोन 7 के अंतर्गत आने वाली अंधे की चौकी-कसमंडी रोड की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। सड़क की खस्ताहाली के कारण अब तक कई लोग गंभीर रूप से चोटिल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पिछले एक साल से इसी तरह पूरी तरह टूटी हुई है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बुनियादी ढांचे की इस उपेक्षा के चलते आम जनता को लगातार भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में गैस सिलेंडर चोरी का मामला सामने आया है। घटना उस समय हुई जब एक गैस डिलीवरी कर्मी सिलेंडर लगाने के लिए एक घर के अंदर गया हुआ था। इसी दौरान, वाहन पर रखा दूसरा सिलेंडर कथित तौर पर एक व्यक्ति द्वारा उठाकर ले जाया गया। पूरी वारदात पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पीड़ित ने पुलिस से मामले की शिकायत करते हुए आरोपी की पहचान करने और सिलेंडर बरामद कराने की मांग की है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की जांच कर रही है।1
- उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की जिला अदालत ने डेढ़ साल के मासूम आरव की नृशंस हत्या के मामले में दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना 30 मई 2026 की है, जब आरोपी ने बच्चे को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ बुलाया था। जांच में सामने आया कि आरोपी बच्चे की मां से शादी करने की जिद कर रहा था और शादी से इंकार किए जाने के कारण उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। आरोपी ने मासूम को जमीन पर आठ बार पटक-पटक कर मार डाला था, जिसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए मृत्युदंड का निर्णय सुनाया है।1
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई जब स्वयं अपना पक्ष रख रहे एक याचिकाकर्ता ने अदालत के भीतर आपत्तिजनक व्यवहार किया। सुनवाई के बीच में याचिकाकर्ता द्वारा कथित तौर पर फाइल फेंके जाने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने से अदालत की कार्यवाही कुछ देर के लिए प्रभावित हुई। मौके पर मौजूद अदालत के कर्मचारियों और अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। घटना के बाद अब न्यायालय द्वारा इस मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस वाकये ने अदालत की गरिमा और कोर्ट रूम के भीतर अनुशासन को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।1