मनरेगा योजना में अनियमितता पर कार्रवाई,डीएम ने दिया आदेश सीतामढ़ी:- जिले के बथनाहा प्रखंड में मनरेगा योजना अंतर्गत पशु शेड निर्माण में सामने आई अनियमितताओं को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। विभिन्न माध्यमों से लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों के आलोक में जिलाधिकारी रिची पांडेय के निर्देश पर निदेशक, राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम डीआरडीए, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा एवं कार्यपालक अभियंता मनरेगा की संयुक्त टीम द्वारा विस्तृत जांच कराई गई। जांच दल ने रेंडम रूप से चयनित 144 पशु शेड योजनाओं का स्थलीय एवं अभिलेखीय निरीक्षण किया। संयुक्त जांच प्रतिवेदन में कई त्रुटियां एवं अनियमितताएं उजागर हुईं, जो मनरेगा के प्रावधानों एवं विभागीय दिशानिर्देशों के प्रतिकूल पाई गईं। जांच के दौरान यह पाया गया कि 30 पशु शेड का उपयोग पशुपालन के बजाय आवासीय अथवा कमर्शियल प्रयोजनों में किया जा रहा था। कई योजनाओं में निर्धारित जीआई पाइप के स्थान पर बांस एवं लकड़ी का उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 134 योजनाओं में सूचना पट्ट नहीं लगाए गए थे तथा कई योजनाओं में निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं पाया गया। संयुक्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर इन अनियमितताओं को गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित तत्कालीन पदाधिकारियों, तत्कालीन कर्मियों एवं संबंधित जनप्रतिनिधि को दोषी ठहराते हुए भुगतान की गई राशि की वसूली का आदेश दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कुल 37 लाख 16 हजार 346 रुपये की वसूली संबंधित तत्कालीन पीओ, जेई, लेखापाल, पंचायत तकनीकी सहायक, पीआरएस एवं ग्राम पंचायत राज बखरी के मुखिया से समानुपातिक की जाएगी। वहीं जिन पशु शेड योजनाओं का उपयोग आवासीय अथवा व्यावसायिक रूप से किया जा रहा है, उनमें लाभुकों से भी समानुपातिक राशि की वसूली की जाएगी। इस संबंध में डीडीसी संदीप कुमार ने कहा कि *मनरेगा योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या सरकारी राशि के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को सशक्त करना है, लेकिन यदि योजनाओं का उपयोग निजी अथवा व्यावसायिक हित में किया जाएगा तो संबंधित सभी पक्षों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।कहा कि मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर दोषियों के विरुद्ध वित्तीय दायित्व तय किया गया है तथा भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाएगा।
मनरेगा योजना में अनियमितता पर कार्रवाई,डीएम ने दिया आदेश सीतामढ़ी:- जिले के बथनाहा प्रखंड में मनरेगा योजना अंतर्गत पशु शेड निर्माण में सामने आई अनियमितताओं को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। विभिन्न माध्यमों से लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों के आलोक में जिलाधिकारी रिची पांडेय के निर्देश पर निदेशक, राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम डीआरडीए, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा एवं कार्यपालक अभियंता मनरेगा की संयुक्त टीम द्वारा विस्तृत जांच कराई गई। जांच दल ने रेंडम रूप से चयनित 144 पशु शेड योजनाओं का स्थलीय एवं अभिलेखीय निरीक्षण किया। संयुक्त जांच प्रतिवेदन में कई त्रुटियां एवं अनियमितताएं उजागर हुईं, जो मनरेगा के प्रावधानों एवं विभागीय दिशानिर्देशों के प्रतिकूल पाई गईं। जांच के दौरान यह पाया गया कि 30 पशु शेड का उपयोग पशुपालन के बजाय आवासीय अथवा कमर्शियल प्रयोजनों में किया जा रहा था। कई योजनाओं में निर्धारित जीआई पाइप के स्थान पर बांस एवं लकड़ी का उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 134 योजनाओं में सूचना पट्ट नहीं लगाए गए थे तथा कई योजनाओं में निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं पाया गया। संयुक्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर इन अनियमितताओं को गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित तत्कालीन पदाधिकारियों, तत्कालीन कर्मियों एवं संबंधित जनप्रतिनिधि को दोषी ठहराते हुए भुगतान की गई राशि की वसूली का आदेश दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कुल 37 लाख 16 हजार 346 रुपये की वसूली संबंधित तत्कालीन पीओ, जेई, लेखापाल, पंचायत तकनीकी सहायक, पीआरएस एवं ग्राम पंचायत राज बखरी के मुखिया से समानुपातिक की जाएगी। वहीं जिन पशु शेड योजनाओं का उपयोग आवासीय अथवा व्यावसायिक रूप से किया जा रहा है, उनमें लाभुकों से भी समानुपातिक राशि की वसूली की जाएगी। इस संबंध में डीडीसी संदीप कुमार ने कहा कि *मनरेगा योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या सरकारी राशि के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को सशक्त करना है, लेकिन यदि योजनाओं का उपयोग निजी अथवा व्यावसायिक हित में किया जाएगा तो संबंधित सभी पक्षों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।कहा कि मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर दोषियों के विरुद्ध वित्तीय दायित्व तय किया गया है तथा भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाएगा।
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