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सुफियान द्वारा मुस्लिम लोगों और उनके मदरसों के बारे में दिए गए बयान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि इस मामले की असल सच्चाई क्या है और सुफियान ने इस तरह की बात क्यों कही।
फरमान इदरीसी
सुफियान द्वारा मुस्लिम लोगों और उनके मदरसों के बारे में दिए गए बयान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि इस मामले की असल सच्चाई क्या है और सुफियान ने इस तरह की बात क्यों कही।
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- दिल्ली के शाहदरा जिले में स्थित सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र के जीटीबी एन्क्लेव के डी-पॉकेट इलाके के निवासियों ने शुक्रवार को दिल्ली जल बोर्ड कार्यालय पर पानी की किल्लत को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कई वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहे इन लोगों ने जल्द समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सीमापुरी विधानसभा के विधायक वीर सिंह धिंगान भी मौके पर पहुंचे और स्थानीय निवासियों के साथ विरोध में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान दिल्ली सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और क्षेत्र में पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से पानी की समस्या से परेशान हैं, क्योंकि उनके घरों में नियमित रूप से पीने का पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग और अधिकारियों को कई बार शिकायतें देने के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके इलाके में पानी की समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।1
- राजधानी दिल्ली के शाहदरा स्थित चेस्ट क्लिनिक एवं पॉलीक्लिनिक में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत लोगों को राष्ट्रीय टीबी मुक्त भारत अभियान, रेबीज से बचाव के तरीके और भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हुमाना की टीम द्वारा प्रस्तुत किया गया नुक्कड़ नाटक रहा, जिसमें कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से दर्शकों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण संदेश दिए। नाटक के जरिए टीबी की समय पर जांच, रेबीज से बचाव के उपाय और हीट वेव से सुरक्षा की जानकारी अत्यंत सरल तथा रोचक तरीके से साझा की गई। यह आयोजन शाहदरा पॉलीक्लिनिक की सीएमओ डॉ. बिंदु बहल के सौजन्य से संभव हुआ, जिसमें डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और प्रशासनिक टीम ने सक्रिय रूप से भागीदारी की। वीडियो रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जागरूकता संदेश को परिवार और मित्रों तक पहुंचाने का आग्रह भी किया गया है।1
- Post by Satyaveer singh1
- दिल्ली में एनएसयूआई (NSUI) के छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे और इस दौरान उन्होंने जमकर हंगामा भी किया।1
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट लाने पर विचार कर रहा है। इस कदम के साथ ही, यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या देश में एक बार फिर नोटबंदी होगी और लोगों को बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा। RBI इस दिशा में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है।1
- मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी ने यह स्पष्ट किया है कि जब भी कुछ गलत होगा, वे अपनी आवाज़ को बुलंद करेंगे और उसका विरोध करेंगे।1
- गाजियाबाद के लोनी में, वार्ड नंबर 1 के सभासद ने लोनी चेयरमैन रंजीता धामा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सभासद के अनुसार, चेयरमैन रंजीता धामा द्वारा उनकी शिकायतों या मामलों पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।1
- जापान ने 20 साल के अंतराल के बाद भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे जापान के लोग अब मुंह में घुल जाने वाले भारतीय आमों का स्वाद नहीं चख पाएंगे। इस प्रतिबंध का मुख्य कारण यह है कि इस साल की शुरुआत में किए गए निरीक्षण के दौरान जापान के क्वारंटाइन अधिकारियों ने भारतीय उपचार सुविधाओं में कीट नियंत्रण प्रक्रियाओं में कुछ खामियाँ पाई थीं। इस निर्णय से अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी भारतीय आमों की प्रीमियम किस्में प्रभावित हुई हैं। जापान द्वारा भारतीय आमों पर यह प्रतिबंध पिछले दो दशकों में पहली बार लगाया गया है। इससे पहले, जापान ने फल मक्खी के खतरे के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे भारत द्वारा अपने उपचार प्रोटोकॉल को मजबूत करने के बाद 2006 में हटा दिया गया था। अब, जापानी अधिकारियों ने एक बार फिर इस बात पर चिंता जताई है कि क्या भारतीय आमों की खेप देश के सख्त पौध स्वास्थ्य मानकों को पूरा कर रही है, क्योंकि जापान फल मक्खियों जैसे आक्रामक कीटों के लिए शून्य सहिष्णुता की नीति का पालन करता है, जिन्हें घरेलू कृषि के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। निर्यात के हर सीजन से पहले, जापान आमों की जांच के लिए अपने क्वारंटाइन अधिकारियों को भारत के वाष्प ताप उपचार (वीएचटी) केंद्रों पर भेजता है। इन केंद्रों पर आमों को निर्यात से पहले कीटाणुरहित किया जाता है। वीएचटी एक गैर-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें कीटों और फलों के कीड़ों के लार्वा को मारने के लिए आमों को नियंत्रित गर्म और आर्द्र हवा के संपर्क में रखा जाता है। यह भारत-जापान निर्यात समझौते के तहत एक बहुत ही ज़रूरी काम है।1