*✊ वीर क्रांतिकारी छेदा पासी: साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की अमर गाथा* "छेदा पासी (1944) अवध और लखनऊ क्षेत्र के एक साहसी क्रांतिकारी थे, *✊ वीर क्रांतिकारी छेदा पासी: साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की अमर गाथा* "छेदा पासी (1944) अवध और लखनऊ क्षेत्र के एक साहसी क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ा। ब्रिटिश दस्तावेजों में उन्हें डाकू माना गया, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वे गरीबों के मसीहा थे। उन्होंने गोमती नदी के नीचे से सुरंग खोदकर अंग्रेजों का खजाना लूटा और अंततः 30 मार्च 1944 को लड़ते हुए शहीद हुए।" अंग्रेजों के कुशासन और अत्याचार से जब देश कराह रहा था, उस दौर में एक नाम ऐसा उभरा जिसने सत्ता की नींव तक हिला दी वह नाम था -- *छेदा पासी।* *एक ऐसा नाम, जिसकी गूंज 1940 के दशक में अंग्रेजी हुकूमत के गलियारों में डर बनकर सुनाई देती थी। अंग्रेजों ने उन्हें “लखनऊ का खूंखार डाकू” कहा, लेकिन यह सिर्फ उनकी हताशा और भय का परिणाम था। सच यह है कि छेदा पासी कोई डाकू नहीं, बल्कि गरीबों का मसीहा और अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ एक सच्चे क्रांतिकारी थे।* लखनऊ की धरती पर जन्मा यह वीर, अन्याय के खिलाफ एक ज्वालामुखी बनकर फूटा। जिस दौर में अंग्रेजों का खौफ हर दिल में था, उस समय छेदा पासी ने अंग्रेजी खजाने को लूटने का खुला चैलेंज देकर उनके अभेद्य सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त कर दिया। *कहा जाता है कि गोमती नदी के किनारे स्थित छतर मंजिल के आसपास रखा अंग्रेजों का खजाना, जहां “परिंदा भी पर नहीं मार सकता था”, वहां से खजाना लूट लेना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के अहंकार पर करारा प्रहार था।* छेदा पासी ने जो कुछ भी हासिल किया, वह अपने लिए नहीं, बल्कि गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए किया। लूटा हुआ खजाना उन्होंने जरूरतमंदों में बांट दिया, जिससे वे आम जनता के लिए एक नायक बन गए। *जहां अंग्रेजों की नजर में वह अपराधी थे, वहीं लखनऊ की जनता के लिए वह एक समानांतर न्याय व्यवस्था, एक “अपनी सरकार” थे। उनके नाम से अमीर और अत्याचारी कांपते थे, और गरीबों को उनसे उम्मीद की किरण दिखती थी।* इतिहास और लोककथाओं के अनुसार, छेदा पासी आज़ादी के आंदोलनों में भी सक्रिय रहे। उनका संघर्ष केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता की लड़ाई का हिस्सा था। *सन 1944 में कपूरथला में एक भीषण संघर्ष के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके बलिदान को लेकर अलग-अलग किवदंतियां प्रचलित हैं—* कुछ कहते हैं कि उन्हें तोप के आगे बांधकर उड़ा दिया गया, तो कुछ के अनुसार उन्हें उनके 9 साथियों के साथ फांसी दी गई। *लेकिन सच्चाई चाहे जो भी हो, एक बात निर्विवाद है — उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इतिहास में अमर स्थान प्राप्त किया।* आज भी कपूरथला में स्थित शिलापट्ट उनके बलिदान की गवाही देता है, और हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल किताबों की कहानी नहीं, बल्कि ऐसे अनगिनत वीरों के बलिदान का परिणाम है। *छेदा पासी का जीवन हमें सिखाता है कि--* *👉 अन्याय के सामने झुकना नहीं,* *👉 अपने हक के लिए लड़ना,* *👉समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़ा रहना ही सच्ची बहादुरी है।* आज जब समाज को एकजुटता और जागरूकता की जरूरत है, तब छेदा पासी का जीवन एक प्रेरणा बनकर सामने आता है। *उनका नाम केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि एक चेतना, एक आंदोलन और एक संदेश है—* "कि जब भी अन्याय बढ़ेगा, कोई न कोई छेदा पासी जन्म लेकर उसे चुनौती देगा।" *ऐसे महान क्रांतिवीर शहीद छेदा पासी शहादत दिवस पर कोटि-कोटि नमन* *✊ जय वीर छेदा पासी!* *✊ जय समाज, जय संघर्ष!* #लाखन_आर्मी_सम्पूर्ण_भारत
*✊ वीर क्रांतिकारी छेदा पासी: साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की अमर गाथा* "छेदा पासी (1944) अवध और लखनऊ क्षेत्र के एक साहसी क्रांतिकारी थे, *✊ वीर क्रांतिकारी छेदा पासी: साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की अमर गाथा* "छेदा पासी (1944) अवध और लखनऊ क्षेत्र के एक साहसी क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ा। ब्रिटिश दस्तावेजों में उन्हें डाकू माना गया, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वे गरीबों के मसीहा थे। उन्होंने गोमती नदी के नीचे से सुरंग खोदकर अंग्रेजों का खजाना लूटा और अंततः 30 मार्च 1944 को लड़ते हुए शहीद हुए।" अंग्रेजों के कुशासन और अत्याचार से जब देश कराह रहा था, उस दौर में एक नाम ऐसा उभरा जिसने सत्ता की नींव तक हिला दी वह नाम था -- *छेदा पासी।* *एक ऐसा नाम, जिसकी गूंज 1940 के दशक में अंग्रेजी हुकूमत के गलियारों में डर बनकर सुनाई देती थी। अंग्रेजों ने उन्हें “लखनऊ का खूंखार डाकू” कहा, लेकिन यह सिर्फ उनकी हताशा और भय का परिणाम था। सच यह है कि छेदा पासी कोई डाकू नहीं, बल्कि गरीबों का मसीहा और अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ एक सच्चे क्रांतिकारी थे।* लखनऊ की धरती पर जन्मा यह वीर, अन्याय के खिलाफ एक ज्वालामुखी बनकर फूटा। जिस दौर में अंग्रेजों का खौफ हर दिल में था, उस समय छेदा पासी ने अंग्रेजी खजाने को लूटने का खुला चैलेंज देकर उनके अभेद्य सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त कर दिया। *कहा जाता है कि गोमती नदी के किनारे स्थित छतर मंजिल के आसपास रखा अंग्रेजों का खजाना, जहां “परिंदा भी पर नहीं मार सकता था”, वहां से खजाना लूट लेना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के अहंकार पर करारा प्रहार था।* छेदा पासी ने जो कुछ भी हासिल किया, वह अपने लिए नहीं, बल्कि गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए किया। लूटा हुआ खजाना उन्होंने जरूरतमंदों में बांट दिया, जिससे वे आम जनता के लिए एक नायक बन गए। *जहां अंग्रेजों की नजर में वह अपराधी थे, वहीं लखनऊ की जनता के लिए वह एक समानांतर न्याय व्यवस्था, एक “अपनी सरकार” थे। उनके नाम से अमीर और अत्याचारी कांपते थे, और गरीबों को उनसे उम्मीद की किरण दिखती थी।* इतिहास और लोककथाओं के अनुसार, छेदा पासी आज़ादी के आंदोलनों में भी सक्रिय रहे। उनका संघर्ष केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता की लड़ाई का हिस्सा था। *सन 1944 में कपूरथला में एक भीषण संघर्ष के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके बलिदान को लेकर अलग-अलग किवदंतियां प्रचलित हैं—* कुछ कहते हैं कि उन्हें तोप के आगे बांधकर उड़ा दिया गया, तो कुछ के अनुसार उन्हें उनके 9 साथियों के साथ फांसी दी गई। *लेकिन सच्चाई चाहे जो भी हो, एक बात निर्विवाद है — उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इतिहास में अमर स्थान प्राप्त किया।* आज भी कपूरथला में स्थित शिलापट्ट उनके बलिदान की गवाही देता है, और हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल किताबों की कहानी नहीं, बल्कि ऐसे अनगिनत वीरों के बलिदान का परिणाम है। *छेदा पासी का जीवन हमें सिखाता है कि--* *👉 अन्याय के सामने झुकना नहीं,* *👉 अपने हक के लिए लड़ना,* *👉समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़ा रहना ही सच्ची बहादुरी है।* आज जब समाज को एकजुटता और जागरूकता की जरूरत है, तब छेदा पासी का जीवन एक प्रेरणा बनकर सामने आता है। *उनका नाम केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि एक चेतना, एक आंदोलन और एक संदेश है—* "कि जब भी अन्याय बढ़ेगा, कोई न कोई छेदा पासी जन्म लेकर उसे चुनौती देगा।" *ऐसे महान क्रांतिवीर शहीद छेदा पासी शहादत दिवस पर कोटि-कोटि नमन* *✊ जय वीर छेदा पासी!* *✊ जय समाज, जय संघर्ष!* #लाखन_आर्मी_सम्पूर्ण_भारत
- संवाददाता पीयूष दीक्षित लखीमपुर खीरी। अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत हैदराबाद पुलिस ने एक के बाद एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हत्या के आरोपियों, जुआरियों और अवैध हथियार रखने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार, 27 मार्च को थाना हैदराबाद क्षेत्र के ग्राम बघमरा में मामूली विवाद के दौरान हुई मारपीट में एक महिला की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। कार्रवाई करते हुए 30 मार्च को चारों वांछित आरोपी—दिनेश कुमार, पंकज कुमार, बसंत कुमार और मिश्री लाल—को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसी दिन पुलिस ने ग्राम अल्लीपुर में छापेमारी कर जुआ खेल रहे पांच लोगों—गुड्डू उर्फ प्रमोद, विकाश मिश्रा, प्रमोद, भूपेंद्र सिंह और शिव कुमार—को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। मौके से हजारों रुपये नकद, ताश के पत्ते, चिटबंदी की रकम और दो मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इस संबंध में जुआ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा पुलिस ने एक अन्य कार्रवाई में ग्राम मढिया सड़क से मुनीश सिंह को अवैध चाकू के साथ गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में थानाध्यक्ष सुनील मलिक के नेतृत्व में उपनिरीक्षक अशोक कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल राजू वर्मा, कांस्टेबल संजीव यादव, नीरज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, कन्हैया तेजयान, बंटी सागर, प्रेमशंकर, विपिन कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। थानाध्यक्ष सुनील मलिक ने बताया कि क्षेत्र में अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं क्षेत्राधिकारी गोला रमेश तिवारी ने कहा कि जनपद में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।1
- लखीमपुर खीरी नगर गोला गोकर्ण नाथ का शिव मंदिर के आसपास लगातार घटनाएं हो रही हैं लोगों से मारपीट की जाती। दुकानदारों को भी धमकी दी जाती है। इतना ही नहीं दुकान पर भी विक्री के लिए रक्खे प्रसाद को भी फेक दिया जाता है। एक बड़ा सवाल उठता है कि मंदिर में लोग दर्शन के लिए आते है वहीं पर दबंग स्थानीय लोगों द्वारा इस प्रकार का काम होना बाहर से दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों पर संदेश अच्छा नहीं जाएगा। अरुण कश्यप जो मंदिर में फूल माला की दुकान लगता है। उसकी दुकान पर दबंगों ने समान फेक दिया।1
- आज उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के अंतर्गत तहसील गोला गोकरननाथ में मैलानी रेंज के अंतर्गत पड़ने वाले एक ऐतिहासिक धर्मस्थल जिसे मडहा बाबा के नाम से जाना जाता है जहां पर श्रद्धालुओं की श्रद्धा देखते ही बनती है उस स्थान पर आज बांकेगंज के प्रमुख व्यवसायी सोनू अग्रवाल ज्ञानचंद अग्रवाल के द्वारा आज भंडारा का आयोजन सुनहरा भूड़ के निकट स्थान पर किया गया जहां पर बांकेगंज क्षेत्र के बहुत सारे व्यवसायी और दुकानदार भाई जनता के लोग और बहुत सारे श्रद्धालु जन जो मड़हा बाबा में श्रद्धा रखते हैं और उनके आशीर्वाद के स्वरूप सभी लोग मढ़हा बाबा के स्थान पर पहुंचे और वहां भंडारा का प्रसाद सभी ने ग्रहण किया जिसमें प्रमुख रूप से हरिकिशन अग्रवाल मनोज कुमार महेश्वरी रमेश चंद्र अग्रवाल राहुल महेश्वरी नौबत सिंह चंदेल लक्ष्मी नारायण जिंदल उर्फ बिट्टू ईश्वर प्रसाद अग्रवाल राहुल महेश्वरी और उनके साथ में वीरेंद्र चंदेल रामनिवास गुप्ता आदि लोग जिसमें गोला कारीगर रामू गुप्ता जिनके द्वारा प्रसाद बनाया गया और प्रमुख व्यवसायी के द्वारा मड़हा बाबा को भोग लगाते हुए सभी ने प्रसाद ग्रहण किया और बहुत सुंदर रमणीय स्थान लगता है वहां पर हमेशा भंडारे होते ही रहते हैं श्रद्धा की कमी यहां देखने को नहीं मिलती है अधिक से अधिक श्रद्धा यहां दिखाई पड़ती है मडहा बाबा के स्थान से रामनिवास गुप्ता की रिपोर्ट4
- मेरठ (उत्तर प्रदेश) - सीसीएस यूनिवर्सिटी के आरके हॉस्टल में छात्रों को घटिया और अस्वच्छ भोजन दिए जाने का आरोप, सड़ी सब्जियों और खराब आटे के इस्तेमाल की शिकायत सामने आई मामले को लेकर छात्रों ने जमकर हंगामा किया और विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की1
- Post by Jagtar singh1
- "दुनिया केवल चढ़ते सूरज को सलाम करती है! 🌅 हल्क की ये प्रेरणादायक कहानी हमें सिखाती है कि चाहे दुनिया कितना भी मजाक उड़ाए, अपनी मेहनत पर भरोसा रखो। आज गरीब है, कल का बादशाह होगा! 👑 आपको हल्क का ये कमबैक कैसा लगा? नीचे कमेंट्स में बताएं! 👇 🚀 अगर वीडियो पसंद आया तो: ✅ Like करें (हमारा हौसला बढ़ाने के लिए) 💬 Comment करें (अपनी राय दें) 📢 Share करें (अपने दोस्तों को प्रेरित करने के लिए) 🔔 Follow & Subscribe करें ताकि ऐसी ही और धमाकेदार वीडियो मिस न हों! ❤️1
- लखीमपुर खीरी गोला गोकर्ण नाथ का अटेंशन नगर गोला गोकर्ण नाथ का शिव मंदिर के आसपास लगातार घटनाएं हो रही हैं लोगों से मारपीट की जाती। दुकानदारों को भी धमकी दी जाती है। इतना ही नहीं दुकान पर भी विक्री के लिए रक्खे प्रसाद को भी फेक दिया जाता है। एक बड़ा सवाल उठता है कि मंदिर में लोग दर्शन के लिए आते है वहीं पर दबंग स्थानीय लोगों द्वारा इस प्रकार का काम होना बाहर से दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों पर संदेश अच्छा नहीं जाएगा। अरुण कश्यप जो मंदिर में फूल माला की दुकान लगता है। उसकी दुकान पर दबंगों ने समान फेक दिया। हैं लोगों से मारपीट की जाती। दुकानदारों को भी धमकी दी जाती है। इतना ही नहीं दुकान पर भी विक्री के लिए रक्खे प्रसाद को भी फेक दिया जाता है। एक बड़ा सवाल उठता है कि मंदिर में लोग दर्शन के लिए आते है वहीं पर दबंग स्थानीय लोगों द्वारा इस प्रकार का काम होना बाहर से दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों पर संदेश अच्छा नहीं जाएगा। अरुण कश्यप जो मंदिर में फूल माला की दुकान लगता है। उसकी दुकान पर दबंगों ने समान फेक दिया।1
- वीडियो देख के लगता है दुनिया विनाश के रास्ते पर निकल पड़ी है। अगर ये युद्ध जल्द नहीं रोका गया तो आने वाला समय और भी दुखदाई साबित होगा।1